विधानसभा उपचुनाव: ये नतीजे विपक्ष को भरोसेमंद होने की सीख देते हैं



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

छह राज्यों की सात विधानसभा सीटों के चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। प्रतिष्ठा की लड़ाई बिहार, महाराष्ट्र और तेलंगाना में लड़ी जा रही थी। और हरियाणा में पारिवारिक विरासत दांव पर था।

बीजेपी ने उत्तर प्रदेश के गोला गोकर्णनाथ, हरियाणा के आदमपुर और बिहार के गोपालगंज में जीत हासिल की है और ओडिशा के धामनगर की सीट भी जीतने में सफल हुई है। बिहार के मोकामा में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने जीत दर्ज की है।

मुनुगोड़े में के. चंद्रशेखर की राव की तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) ने जीत हांसिल की है। जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना धड़े ने मुंबई की अंधेरी पूर्व सीट पर जीत हासिल की है।

सात सीटों में से, भाजपा के पास तीन, कांग्रेस के दो, जबकि शिवसेना और राजद के पास उपचुनाव होने से पहले एक-एक था। इनमें से दो सीटें बिहार में और एक-एक यूपी, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा में हैं।

बिहार में भाजपा का साथ छोड़ने के बाद राज्य में दो सीटों पर पहला चुनाव था। अवैध रूप से बंदूकें रखने के आरोप में अयोग्य घोषित अनंत सिंह की पत्नी राजद उम्मीदवार नीलम देवी मोकामा से चुनाव जीत गई हैं। जबकि गोपालगंज में, राजद को हरा कर भाजपा ने विधान सभी सीट जीत ली है। जिसने अब लगभग दो दशकों से इसे अपने कब्जे में कर लिया है।

हरियाणा में, पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल की पारिवारिक सीट आदमपुर उनके ही परिवार के हिस्से में गई है। यहां से भजन लाल के पोते भव्य बिश्नोई चुनाव जीत गए हैं। वह कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद 68 साल की विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं। भव्य के पिता कुलदीप बिश्नोई, जो भाजपा में शामिल हो गए थे उन्होंने यह सीट अपने बेटे को हवाले कर दिया था।

महाराष्ट्र के अंधेरी ईस्ट में दो घड़ों के बीच चुनावी संधर्ष देखने लायक था। शिवसेना के दो हिस्सों में बंटने के बाद यह पहली चुनावी लड़ाई थी। एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को अल्प मत कर भाजपा की मदद से मुख्यमंत्री बने है। दशकों में यह पहली बार है कि ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना एक नए नाम - शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और एक नए प्रतीक, 'मशाल' या ज्वलंत मशाल के साथ लड़ी है।

शिवसेना (उद्धव) की उम्मीदवार रुतुजा लटके अंधेरी (पूर्व) से शिवसेना के पूर्व विधायक की विधवा हैं, जिनकी मई 2022 में दुबई में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी। चुनाव जीतने से पहले रुतुजा माहानगर पालिका में एक कलर्क थी। भाजपा ने एक नेता की मृत्यु के कारण "राजनीतिक परंपरा" के तहत अपने उम्मीदवार को वापस ले लिया था।

तेलंगाना में, मुनुगोड़े ने सत्तारूढ़ टीआरएस और उसके प्रतिद्वंद्वी भाजपा को जमीन पर लड़ते देखा और "करोड़ों रुपये" से जुड़े आरोप लगाए। यहां से कांग्रेस विधायक ने इस्तीफा दे दिया था और अब वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस सीट पर टीआरएस ने भाजपा उम्मीदवार को पराजित किया।

ओडिशा के धामनगर में भी सत्तारूढ़ क्षेत्रीय दल बीजद प्रत्याशी को हरा कर भाजपा उम्मीदलार विजयी हुआ है। पिछली बार भाजपा ने इसे जीता था लेकिन विधायक विष्णु चरण सेठी की मृत्यु के कारण यह मुकाबला हुआ। अपने गढ़ यूपी में, बीजेपी गोला गोकर्णनाथ सीट को बरकरार रखने में सफल हुई है। यह सीट अपने विधायक अरविंद गिरी की मृत्यु के बाद खाली हो गई थी।

ताजा चुनाव परिणामों से वर्तमान राज्य सरकारों के गणित को विचलित करने की संभावना नहीं है। लेकिन, क्षेत्रीय दल 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए एकजुट मोर्चा बनाना चाहते हैं। लोक सभा चुनाव सिर्फ डेढ़ साल दूर है। इन चुनाव परिणामों के आधार पर बूस्टर शॉट्स के रूप में काम कर सकते हैं।

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