खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना तय, 'जी-23' की जमात का मिला समर्थन



--राजीव रंजन नाग,
नई दिल्ली, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

17 अक्टूबर को होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के तुरंत बाद, मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पुरानी पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने इस्तीफा पत्र में कहा कि वह पार्टी की उदयपुर चिंतन शिविर में घोषित कांग्रेस के "एक व्यक्ति, एक पद" नियम के अनुरूप उच्च सदन में विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं।

उन्होंने यह कदम मई में उदयपुर में आयोजित 'चिंतन शिविर' में तय 'एक व्यक्ति एक पद' के सिद्धांत के अनुरूप उठाया है। खड़गे ने शुक्रवार को कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। खड़गे वर्तमान में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्म्दारी संभाल रहे थे, लेकिन कांग्रेस के 'एक व्यक्ति एक पद' वाले नियम के तहत उनकी उम्मीदवारी एक साथ दोनों पदों के लिए वैध नहीं मानी जाती। खड़गे ने राजसभा के नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। खड़गे ने करीब डेढ़ साल पहले फरवरी 2021 में राज्यसभा में नेता विपक्ष का पद संभाला था।

खडगे दक्षिण भारत से कांग्रेस के छठे और कर्नाटक से एस निजलिंगप्पा (1988-69) के बाद दूसरे राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। दक्षिण भारत से पूर्व में नीलम संजीव रेड्डी, के कामराज और पी वी नरसिंह राव अध्यक्ष रहे हैं।

खड़गे कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में अब तक सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। उनका सीधा मुकाबला बागी सांसदों के “ग्रुप 23” के शशि थरूर से होगा। वहीं, राज्यसभा में नेता विपक्ष के पद से खड़गे के इस्तीफे के बाद पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह का नाम लिया जा रहा है।

पार्टी के एक सीनियर नेता की माने, तो कांग्रेस की चुनौती ये है कि, कांग्रेस अध्यक्ष पद और राज्यसभा में विपक्ष का नेता दोनों दक्षिण से होने पर कांग्रेस के लिए उत्तर और दक्षिण में संतुलन स्थापित करना मुश्किल हो सकता है। संभव है विपक्ष के नेता का पद दिग्विजय सिंह को दिया जा सकता है।

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी अब एक नए नेता की नियुक्ति करेंगी और निर्णय से राज्यसभा के सभापति को अवगत कराएंगी। कांग्रेस दो दशक बाद अपना पहला गैर-गांधी अध्यक्ष चुन रही है। 80 वर्षीय खड़गे, गांधी द्वारा समर्थित उम्मीदवार हैं और उनका निर्वाचित होना लगभग तय है।

उनका सीधा मुकाबला जी-23 असंतुष्ट समूह के प्रमुख सदस्य शशि थरूर से है। विशेष रूप से, कई जी-23 नेताओं ने श्री खड़गे का आधिकारिक रूप से समर्थन किया है। झारखंड के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी, जो मुकाबले में तीसरे उम्मीदवार हैं, ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है। दिग्विजय सिंह, जिन्होंने गुरुवार को अपना नामांकन पत्र जमा किया, सुबह श्री खड़गे से मुलाकात के बाद प्रतियोगिता से बाहर हो गए। माना जाता है कि गांधी परिवार अपनी तटस्थता बनाए रखने के लिए आंतरिक चुनाव में मतदान न करे।

शशि थरूर ने स्पष्ट किया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उनका कोई मतभेद नहीं है। उन्हें "कांग्रेस के भीष्म पितामह" कहते हुए, उन्होंने कहा, "हम प्रतिद्वंदी नहीं हैं। हम सहयोगी हैं"। हालाँकि, उन्होंने श्री खड़गे को निरंतरता का उम्मीदवार बताया और निर्वाचित होने पर पार्टी आलाकमान की संस्कृति को बदलने की कसम खाई।

कांग्रेस केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे को 14, शशि थरूर को 5 और झारखंड के कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी ने एक नामांकन प्राप्त किया।

इस बीच, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं। उन्होंने भी खड़गे को अपना समर्थन देते हुए कहा कि वह खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता के खिलाफ "चुनाव लड़ने के बारे में नहीं सोच सकते"। राज्य सभा में कांग्रेस की एक सांसद कहती हैं- ऐसा बयान जारी कर दिग्विजय सिंह ने राज्य सभा में खड़गे के इस्तीफे से खाली हुई विपक्ष के नेता पद सीट पर उम्मीदवारी सुनिश्चत करने की कोशिश की है।

अपने राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद सिंह दौड़ से हटने वाले दूसरे कांग्रेस नेता थे। गहलोत ने कहा कि वह खड़गे के प्रस्तावक होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए परिणाम की घोषणा 19 अक्टूबर को की जायेगी।

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