हसदेव जंगल पर चलने लगी आरी, 06 घंटे में काट डाले दो हजार पेड़



--विजया पाठक (एडिटर- जगत विज़न),
रायपुर-छत्तीसगढ़, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

■ आखिर भूपेश बघेल ने राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के सामने झूठा साबित कर दिया

■ विरोध कर रहे हजारों ग्रामीण आदिवासी गिरफ्तार, अडानी की कठपुतली बने सीएम बघेल

■ 2711 हैक्टेयर क्षेत्र के दो लाख पेड़ों की चढ़ेगी बलि

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित हसदेव जंगल में कोल माइंस के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया के तमाम शहरों में हुए विरोध प्रदर्शन के बावजूद हसदेव के जंगलों में आरी चलना शुरू हो गई है। जिला प्रशासन के साथ ही वन विभाग और पुलिस की टीम ने 27 सितम्बर 2022 की सुबह 05 बजे से ही पेड़ों की कटाई शुरू करा दी। रफ्तार इतनी तेज है कि महज 06 घंटे में ही दो हजार पेड़ धराशायी कर दिए गए। इसके साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का तानाशाही रवैया लोगों के सामने आ गया है। इससे पहले तमाम मौकों पर बघेल मंचों से कहते रहे थे कि हसदेव के जंगलों से पेड़ों की कटाई नहीं होगी और क्षेत्र के आदिवासियों की आजीविका पर आंच नहीं आने दी जाएगी। इतना ही नहीं कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी 2015 में छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान वादा किया था कि वह जल-जंगल-जमीन बचाने के संघर्ष में आदिवासियों के साथ हैं। लेकिन भूपेश बघेल ने राहुल गांधी की बात को भी नहीं माना है। एक उद्योगपति के फायदे के लिए हजारों आदिवासियों और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति दे दी।

गौरतलब है कि पहले फेज में 45 हैक्टेयर में जंगल काटा जाना प्रस्तावित है। इसमें करीब 8000 पेड़ हैं। इसके लिए खदान का विरोध कर रहे ग्रामीणों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पेड़ों की कटाई वन विभाग द्वारा कराई जा रही है। अभी 45 हैक्टेयर के जंगल काटे जाएंगे। उसके बाद 1100 हैक्टेयर का एक और जंगल काटा जाएगा। घाटबर्रा में खनन 03 साल बाद होना है। यहां जंगल के इलाके में लोगों को जाने की मनाही है। इस कारण विरोध करने वाले नहीं पहुंच पा रहे हैं। मीडिया को भी जंगल में जाने नहीं दिया जा रहा है।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित परसा खदान के लिए 841.538 हेक्टेयर और परसा ईस्ट केते बासन फेज-2 के लिए 1,136.328 हैक्टेयर वनभूमि में खनन की अनुमति दी है। पीकेईबी खदान के विरोध का समर्थन करते हुए मंत्री टीएस सिंहदेव ने ग्रामीणों के समक्ष कहा था कि गोली चली तो पहली गोली मुझे लगेगी। मंत्री के इस बयान के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि बाबा साहब (टीएस सिंहदेव) का ब्यान आया है कि पहली गोली मुझे लगेगी। गोली चलने की नौबत ही नहीं आएगी, जो गोली चलाएगा पहले उन पर ही गोली चल जाएगी। सीएम बघेल ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि बाबा नहीं चाहेंगे तो पेड़ तो क्या एक डंगाल भी नहीं कटेगी। अब वो वादा, क्या सिर्फ आदिवासी को बेवकूफ बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने दिया था। ऐसा क्या हो गया जो तत्काल कटाई शुरू करानी पड़ गई। सही में तो यह नही है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही नान घोटाले की सुनवाई से इसका संबंध तो नहीं है। छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाह रही है।

दरअसल इसकी एक क्रोनोलॉजी है, जिसका खुलासा वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेडे ने भी किया है। उनके अनुसार वर्ष 2019 एवं 2020 में ईडी ने नान घोटाले की जांच को लेकर आरोपी आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा की जमानत खारिज करने हेतु सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया। इसके साथ ही सीबीआई द्वारा स्टेट चेंज हेतु अश्लील सीडी काण्ड जिसमें मुख्यमंत्री और उनके रिश्तेदार और सलाहकार विनोद वर्मा मुख्य आरोपी हैं। जैसा कि मैंने पहले भी पोस्ट में लिखा था। इन खदानों में लाइजिंनिंग सूर्यकांत तिवारी जो प्रदेश में अवैध कोल टैक्स का पैसा इकठ्ठा कर मुख्यमंत्री तक पहुंचाता था उसने मुख्यमंत्री को इन मामलों में रिलीफ देने के लिए अदानी की यह दो कोयला खदान और आयरन खदान के राह के सभी रोड़े हटाने को कहा। जब इन खदानों का फिर विरोध चालू हुआ तो वर्ष 2020 के अंत में ईडी ने नान में प्रदित बेल के खिलाफ स्पेशल एसएलपी फाइल की पर उसकी लिस्टिंग नहीं की। इसके बाद जमीन अधिग्रहण कोल बियरिंग एक्ट हेतु राज्य सरकार ने विरोध किया। जिसके बाद वर्ष 2021 में गौतम अदानी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुख्यमंत्री निवास में जाकर रात्रि भोजन के साथ मीटिंग की। इसके बाद प्रदेश में इन खदानों का जबरदस्त विरोध चालू हो गया। इसके खिलाफ राहुल गांधी ने लंदन में माइनिंग के खिलाफ बोला। पर सितंबर 2021 में ईडी द्वारा नान घोटाले के लिस्टिंग होने के बाद प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2021 में प्रस्तावित खदानों वन अनुमति प्रदान कर दी।

● आलाकमान मुख्‍यमंत्री भूपेश बघेल के सारे कारनामों पर पर्दा क्‍यों डाले हुए है?

इन खदान क्षेत्र के आदिवासियों ने राहुल गांधी से दिल्ली में भेंट की। इसके उलट सरकार ने ग्रामसभा में तमान आपत्ति के बावजूद क्षेत्र में माइनिंग के लिए पेड़ काटने चालू कर दिए। इस पूरे घटनाक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने नेता राहुल गांधी को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इसके उलट भूपेश बघेल ने उद्योगपति, अपना, अपने रिश्तेदार सलाहकार, कमाकर देने वाले भ्रष्ट आरोपी अधिकारी का साथ दिया और अपने आलाकमान के वादे को झूठा साबित कर दिया।

अब सवाल यह उठता है की कांग्रेस आलाकमान अपने इस भ्रष्ट, झूठे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सारे कारनामों पर पर्दा क्यों डाले हुए हैं। आलाकमान यह गलतफहमी में ना रहे कि कांग्रेस 2023 में भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कोई कमाल कर पाएगी।

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