--विजया पाठक (एडिटर- जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ श्रवण की भूमिका में दिखे संवेदनशील शिवराज
■ कमलनाथ सरकार ने भी शिवराज सरकार की तीर्थ दर्शन योजना को आगे बढ़ाया था
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लोकप्रिय और सरल व्यक्तित्व वाले मुख्यमंत्री की संज्ञा क्यों दी जाती है, यह कुछ दिन पहले राजधानी भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर पूरे देश ने देखा। दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश सरकार द्वारा पुनः प्रारंभ की गई तीर्थदर्शन योजना के शुभारंभ अवसर पर तीर्थ यात्रियों को विदा करने पहुंचे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री इतने सरल और सहज भाव से तीर्थ यात्रियों से मिले कि देखने वाले हर व्यक्ति के मन में भावुकता उत्पन्न हो उठी। इतने सुरक्षाकर्मी और पुलिस अधिकारी होने के बाद भी वे तीर्थ यात्रियों से ऐसे मिले जैसे वो उनके परिवार के सदस्य हों। कोई प्रोटोकॉल नहीं, कोई बंधन नहीं, हाथ फैलाये बुजुर्ग उन्हें अपने गले लगाने के लिए उत्सुक थे। उन दृश्यों को देख ऐसा प्रतीत होता था जैसे कोई मुख्यमंत्री नहीं बल्कि माताओं-बहनों का बेटा या भाई मुलाकात कर रहा हो। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चेहरे पर जो आत्मीयता के भाव दिखाई दे रहे थे, वहीं उन्हें आज 15 साल बाद भी जन लोकप्रिय नेता बनाए हुए हैं।
जहां तक तीर्थदर्शन योजना की बात की जाये तो यह एक ऐसी योजना है जिसने शिवराज को श्रवण की उपाधि दे दी है। इस योजना से प्रदेश के हजारों बुजुर्ग देश भर के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों पर जाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर चुके हैं। योजना का लाभ लेने वाले कई ऐसे भी बुजुर्ग हैं जो शायद ही कभी इन धार्मिक स्थानों पर पहुंच पाते। निश्चित तौर पर यह योजना सरकार की बहुत ही महत्वपूर्ण ही योजना है।
● कमलनाथ सरकार ने भी शिवराज सरकार की तीर्थ दर्शन योजना को आगे बढ़ाया था
कमलनाथ के मुख्यमंत्री रहते समय प्रदेश में तीर्थ दर्शन योजना को और व्यापक बनाया गया था जिसमें पहले जाने वाले तीर्थ स्थलों के अतिरिक्त तिरूपति बालाजी, वैष्णों देवी, काशी, बौद्धगया, रामेश्वरम, पटना साहिब, अमृतसर साहिब, आनंदपुर साहिब और अजमेर शरीफ तक तीर्थ दर्शन योजना के लिये ट्रेन चलाई गई। करोना आने के बाद चूंकि सारे परिवहन बंद हो गये थे कुछ दिनों के लिये इस योजना को बंद करना पड़ा।
● सहज और सरलता के धनी है
देखा जाए तो शिवराज सिंह चौहान ने जबसे प्रदेश की जिम्मेदारी का बीड़ा उठाया है। वे हमेशा से ही लोगों के चहेते रहे। उन्होंने जिस तरह से जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया और उन योजनाओं का लाभ प्रदेशवासियों को दिलाने के लिए जो कदम उठाया है, निश्चित तौर पर वो काबिले-तारीफ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जनता के मन में जो उनके प्रति स्नेह है वो उन्हें दूसरे मुख्यमंत्रियों से अलग बनाता है। शिवराज सिंह चौहान एक सहज और सरलता के धनी व्यक्तित्व हैं।
● योजनाएं भी ऐसी जिससे खुद सीधे जुड़े
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रदेश की सत्ता संभाले हुए 15 वर्ष से अधिक का समय हो गया है। इन 15 वर्षों में उन्होंने जनता के लिए इस तरह की जनकल्याण की योजनाओं शुरू की, जिससे आम आदमी सीधे लाभान्वित हो रहा है। उदाहरण के तौर पर चाहे लाडली लक्ष्मी योजना हो या फिर तीर्थदर्शन योजना। हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि उसकी बेटी अच्छे से पढ़ लिख जाये, उसकी शादी हो जाये, माता-पिता को बुढ़ापे में तीर्थ दर्शन करा दिया जाये। आम आदमी की इन महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का बीड़ा शिवराज सिंह चौहान ने उठाया है और उन्हें निश्चित ही इसका लाभ भी मिल रहा है।
● अन्य राजनेताओं को लेना चाहिए सीख
राजनीति तो हर व्यक्ति करना चाहता है। कई नेता राजनीति करने में सफल भी होते हैं। लेकिन सही मायनों में सफल राजनीतिज्ञ वहीं माना जाता है जो जनता के दिलों में राज करें। सत्ता का सुख तो आज नहीं तो कल उठाने का अवसर मिल जायेगा। लेकिन जनता के दिलों में राज करने का सुख बहुत कम लोगों ही मिलता है। नेता किसी भी दल का हो लेकिन उसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेनी चाहिए कि जनता और प्रदेश के मुखिया के बीच में दूरिया नहीं होनी चाहिए।
● भूपेश बघेल तो करा देते हैं जेल
कभी मध्य प्रदेश का अभिन्न अंग रहे छत्तीसगढ़ में मध्य प्रदेश की तुलना में बिल्कुल उलट परिस्थितियां देखने को मिलती है। मप्र के मुख्यमंत्री जहां प्रदेश की जनता को गले लगाने को आतुर रहते हैं। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जनता से दूरी बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। यही नहीं जनता द्वारा अगर उनके किसी फैसला पर नाराजगी व्यक्त की जाती है तो वो उनसे बात करना तो दूर उन्हें सीधे जेल भेजने का इंतजाम कर देते हैं। भूपेश बघेल को शिवराज सिंह चौहान से प्रेरणा लेना चाहिए। सही मायनों में राजनेता की जगह जनता के दिल में होती है।
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