--डॉ• इन्द्र बली मिश्र,
काशी हिंदू विश्वविद्यालय,
वाराणसी-उत्तर प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
सनातन धर्म में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को आंवला नवमी या अक्षय नवमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष अक्षय नवमी 13 नवंबर शनिवार को है। पदम पुराण के अनुसार आंवला नवमी के दिन दान करने से पुण्य का फल इस जन्म के साथ अगले जन्म में भी मिलता है।
मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन आंवला के वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है एवं आरोग्यता व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस दिन इस वृक्ष के नीचे बैठने और भोजन करने से सभी आदि-व्याधियों का नाश होता है। शास्त्रों में वर्णित है कि अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिवजी का निवास होता है और इस दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। आंवले का दर्शन, स्पर्श तथा उसके नाम का उच्चारण करने से वरदायक भगवान श्री विष्णु अनुकूल हो जाते हैं।
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