--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
महापर्व छठ धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का लोकपर्व है। कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है, इसलिए सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है ताकि स्वास्थ्य की समस्याएं परेशान न करे। इस माह में सूर्य उपासना से वैज्ञानिक रूप से हम अपनी ऊर्जा और स्वास्थ्य का बेहतर स्तर बनाए रख सकते हैं।
आस्था का महापर्व छठ न सिर्फ स्वच्छता का संदेश देता है बल्कि यह हमें बीमारियों से बचने और स्वस्थ रहने की भी सीख देता है। छठ में अर्घ्य देने में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों में ज्यादातर मौसम अनुकूल होने वाली और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रहती हैं।
आयुर्वेद में भी इन सामग्रियों का खासा महत्व बताया गया है। इसमें प्रयुक्त होने वाली खाद्य सामग्रियां रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को ठंड से बचाने व लड़ने की शक्ति भी देता है। आयुर्वेद के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने छठ में प्रयुक्त होने वाला आंवला, हल्दी, ईंख, डाभ नींबू, केला, कच्ची हल्दी, अनानास, पानी फल सिंघाड़ा, नारियल, सुथनी, ठेकुआ, आदि को स्वस्थ रहने का माध्यम बताया है। वहीं, सूर्योपासना से शरीर में विटामिन डी की आपूर्ति होती है और कुष्ठ रोग से भी बचाव होता है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. मधुरेंदु पांडेय ने छठ की सामग्रियों को गुणों की खान बताया और जाड़े में मौसमी बीमारियों से बचाव का साधन भी कहा।
महापर्व छठ मे प्रयुक्त होने वाले फल व उनसे प्राप्त तत्व व फायदे है ।
▪︎ आंवला: विटामिन सी, कैल्शियम, ठंड से बचाव, वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव, प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है।
▪︎ अदरक: शरीर को गर्म रखता है। आयुर्वेदिक औषधियों में इस्तेमाल। सर्दी-खांसी से बचाव करता है।
▪︎ अनानास: पोटैशियम, रिच फाइबर, विटामिन ए, सी, एंटी ऑक्सीडेंट, पाचन शक्ति में मददगार है।
▪︎ सेव : विटामिन ए, बी, सी, ई, वजन व कॉलेस्ट्रॉल को कम करने में मददगार। शुगर, अस्थमा वाले मरीज के लिए फायदेमंद है।
▪︎ डाभ नींबू: विटामिन सी का स्रोत, हृदय के लिए फायदेमंद, पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है। गैस की समस्या नहीं होती है।
▪︎ कच्ची हल्दी : एंटी ऑक्सीडेंट, कैंसर के खतरे को कम करता है, घाव भरने और दर्द निवारक गुण, डायबिटीज से बचाव में कारगर है।
▪︎ नारियल : पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्निशियम, भरपूर मात्रा में। नारियल में वसा व कॉलेस्ट्रॉल नहीं होता। मोटापा और त्वचा संबंधी बीमारियों से बचाव करता है।
▪︎ केला : केले में विटामिन, प्रोटीन के साथ यह हेमोग्लागिन बढ़ाने में कारगर। प्रचूर मात्रा में स्टार्च होने से ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा बेहद कम होती है। इससे लंबे समय तक भूख का एहसास नहीं होता। केले में ट्राइप्टोफान एमिनो एसिड होता है जो सेरेटोनिन हार्मोन पैदा होता है जो तनाव से बचाता है। केले में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होता है जो भोजन से कैल्शियम को सोखता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है।
▪︎ सुथनी: विटामिन बी 1 मौजूद। भूख को नियंत्रित करता है। पेट के अल्सर के इलाज में कारगर है।
▪︎ गुड़: पाचन शक्ति बढ़ाने में मददगार। शरीर के विकारों को निकालता है और शरीर को गर्म रखता है।
▪︎ पानी फल सिंघाड़ा: लो फैट, विटामिन बी 4, पोटैशियम से भरपूर है।
▪︎ ईंख: इसका रस शक्तिवर्धक, पाचनशक्ति ताकत व स्फूर्ति बढ़ाने में मददगार होता है।
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