--विजया पाठक (एडिटर: जगत विजन),
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
■ कोरोना के इंडियन वेरिएंट पर मध्यप्रदेश में मचा हंगामा
■ क्या डब्ल्यूएचओ, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भारत सरकार के सोलीसीटर जनरल पर एफआईआर दर्ज करेगी मप्र सरकार?
■ मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की ओछी राजनीति
मध्य प्रदेश में फिलहाल कोरोना महामारी की जगह कोरोना वेरिएंट (इंडियन वेरिएंट) पर ज्यादा हंगामा मचा हुआ है। दरअसल जिस देश में करोना का वेरिएंट फैला, वहां की सरकारें और आम लोग उसे उसी देश का वेरिएंट कहकर संबोधित करते हैं। भारत में भी इसे इंडियन वेरिएंट के नाम से जाना जा रहा है। मध्यप्रदेश में भी पूर्व सीएम कमलनाथ ने इसे इंडियन वेरिएंट कहकर पुकारा। उनके बयान के बाद प्रदेश की सरकार ने हंगामा मचा दिया और कमलनाथ पर एफआईआर तक दर्ज कर दी। इन पूरे वेरिएंट की जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा https://www.who.int/csr/don/31-december-2020-sars-cov2-variants/en/ में दी गई है। सार्स-कोव-2 वायरस के कारण कोविड-19 फैला। इसका वेरिएंट D614G म्यूटेशन ने जनवरी-फरवरी 2020 में चाइना में कोहराम मचाया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसे चाइना वेरिएंट कहते थे। इसके बाद सार्स-कोव-2 ने क्लस्टर-5 नाम से म्यूटेशन किया, जिसे डैनमार्क ने क्लस्टर-5 वेरिएंट कहा, उसके बाद यूनाइटेड किंगडम में दिसंबर- 2020 में म्यूटेशन करके खतरनाक नया वेरिएंट सार्स-कोव-2-वीओसी-202012/01 जो कि तब तक का सबसे खतरनाक वेरिएंट आया। जिसमें संक्रमण बहुत तेज़ी से फैलता है। उस समय की मीडिया ने इसे यू.के. वेरिएंट कहा था। इसके बाद साउथ अफ़्रीका में 501Y.V2 नाम का नया वेरिएंट आया। इन सबके बाद भारत में करोना का नया वेरिएंट बी.1.617.2 ने देश में अप्रैल से अभी तक हाहाकार मचा दिया। दिनांक 10-05-2021 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत के बी.1.617.2 वेरिएंट को विश्व के लिये बेहद खतरनाक माना। इस इंडियन वेरिएंट बी.1.617.2 का प्रयोग सबसे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ने किया, जिसके एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन भारत के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन हैं। डब्ल्यू.एच.ओ. ने कहा है कि 17 देशों में कोरोना वायरस का भारतीय वेरिएंट मिला है, जिनका सीधा संबंध भारत से है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर भी शामिल हैं। डब्ल्यू.एच.ओ. ने कोरोना वायरस पर साप्तिहिक ब्रिफिंग में 17 देशों में कोरोना वायरस का भारतीय वेरिएंट मिलने की बात कही है। डब्ल्यू.एच.ओ. ने कुछ दिन पहले कोरोना वायरस के बी.1.617 वेरिएंट का पता लगाया है, लेकिन ये वायरस कितना खतरनाक है, इसको लेकर पूरी जानकारी पर रिसर्च जारी है। डब्ल्यूएचओ ने बी.1.617 वेरिएंट को चिंता का विषय माना है।
इसके बाद विश्व के बड़े मीडिया समूह, साइंटिफिक जर्नल ने इसे इंडियन वेरिएंट करके छापा। विश्व के प्रसिद्ध साइंटिफिक जर्नल "न्यू साइंटिस्ट" में "भारतीय वेरिएंट बी.1.617.2" करके छापा, जिसमें इसे विश्व के लिये बहुत ही खतरनाक है। (संदर्भ- https://www.newscientist.com/definition/indian-covid-19-variant-b-1-617/)। इसके साथ ही एक और प्रसिद्ध साइंटिफिक जर्नल "नेचर" में करोना का भारतीय संस्करण करके छापा। कोरोना का भारतीय वेरिएंट को लेकर विश्व मीडिया ने काफी तीखे लेख लिखे। इसमें बी.बी.सी. ने 11 मई को " WHO says India Covid variant of 'global concern' शीर्षक से लेख छापा। (संदर्भ- https://www.bbc.com/news/world-asia-india-57067190)। इसके बाद बी.बी.सी. ने 25 मई को" Covid Indian variant: Where is it, how does it spread and is it more infectious?" शीर्षक से लेख छापा। सर्वोच्च न्यायालय में भी Suo Moto याचिका क्रमांक 03/2021 में केंद्र सरकार द्वारा दिनांक 09 मई 2021 को एक हलफ़नामा दाखिल किया गया था, इस हलफ़नामे में पृष्ठ क्रमांक 57 के बिंदु क्रमांक 33 के छटे भाग में Indian double mutant strain शब्दों का उपयोग किया गया है।
खैर, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वेरिएंट किसी देश के नाम पर होने से ऐतराज़ जताया। पर भारत के संदर्भ में उसने यह प्रोटोकाल का पालन नहीं किया। 25 मई को वेब एमडी में "फाइज़र और एस्टरजैनिका की टीका "भारतीय वेरिएंट" पर असरदार होना बताया है। (संदर्भ- https://www.webmd.com/vaccines/covid-19-vaccine/news/20210525/pfizer-astrazeneca-vaccines-indian-variant-study)। इसके अलावा विश्व के करीब-करीब सभी मीडिया ग्रुप जैसे- द गार्जियन, टाइम, बीबीसी आदि ने "भारतीय वेरिएंट" को लेकर काफी लेख छापे। अभी ताज़ा लेख में भारत सरकार कैसे सोशल मीडिया कंपनी को इंडियन वेरिएंट से संबंधित सभी संदर्भ हटाने को कहा है।
इसी को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पत्रकार वार्ता में 'भारतीय वेरिएंट' को लेकर अहम मुद्दे उठाए कि कैसे विदेश में भारतीयों को इससे परेशानी हो रही है। इसके पलटवार में प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कमलनाथ पर जुबानी हमला बोला और शायद बाद उन्हीं के कहने पर कमलनाथ पर एफआईआर दर्ज हुई। मामला यह बनता है कि जब विश्व स्वास्थ संगठन से यह बात निकली हो तो उसके कार्य परिषद के चेयरमैन भारत के स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन हैं तो क्या उन पर भी नरोत्तम मिश्रा एफआईआर दर्ज कराएंगे। भारत के सुप्रीम कोर्ट, भारत के सॉलिसिटर जनरल ने भी इसे इंडियन वेरिएंट माना है तो क्या मध्य प्रदेश सरकार इन पर भी एफआईआर दर्ज करेगी? अमेरिका का प्रसिद्ध अखबार न्यूयार्क टाईँम्स ने अपनी रिपोर्ट में तो देश के कोरोना के आँकड़ों को लेकर सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी। (संदर्भ- https://www.nytimes.com/2021/04/24/world/asia/india-coronavirus-deaths.html)। किसी पर एफआईआर दर्ज कराना या कोई कार्यवाही करना सरकार का विशेषाधिकार पर किसी के सच को दबाना गलत है। सवाल यह बनता है क्या इस देश में कोई राजनेता अपनी सच्ची बात भी नहीं रख सकता। ऐसे समय जब सरकार को विपक्ष को लेकर साथ चलना चाहिये था। कमलनाथ मुख्य विपक्षी दल के नेता हैं, जो प्रदेश भर में कोरोना की इस लड़ाई में जनता का साथ दे रहे हैं। ऐसे समय उनके सच पर कार्यवाही करना सरकार और खासतौर पर प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की नाकामी की कुंठा नज़र आती है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी प्रधानमंत्री से सवाल कर रहे हैं कि हम देश की विपक्षी पार्टी के नेता हैं, कोई दुश्मन नहीं हैं। हम भी इस समय देश में आयी विपदा में सरकार के साथ हैं। आज विश्व में भारत की साख दांव पर लगी है। यह समय विपक्ष और कमलनाथ जैसे तज़्ज़ुर्बेकार नेता को साथ लेकर चलने का है। मध्य प्रदेश सरकार को इस तरह दुराभाव की राजनीति नहीं करनी चाहिए। खासकर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह समय सबको साथ लेकर चलने का है। सबके साथ चलने और सबके साथ मिलकर काम करने से ही कोरोना महामारी से जंग जीती जा सकती है।
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