--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
किन्नरों को अब पुलिस की नौकरी में आरक्षण मिलेगा। पटना हाईकोर्ट ने किन्नरों को न्याय दिलाने वाली इस याचिका को निष्पादित कर दिया है। बुधवार को राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने एक हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया कि राज्य की कुल आबादी में किन्नरों की 0.039 जनसंख्या है। उसी जनसंख्या के आधार पर राज्य सरकार ने कोटा निर्धारित कर दिया है। यानी हर जिले में जब पुलिस बलों की नियुक्ति होगी तो उसमें एक ऑफिसर पद और 4 कांस्टेबल पद पर किन्नरों की नियुक्ति होगी। इनकी आबादी अगर अधिक हुई तो स्क्वायड एवं प्लाटून के रूप में भी गठित किया जाएगा।
चीफ जस्टिस संजय करोल तथा जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने किन्नरों को लेकर वीरा यादव की ओर से दायर जनहित याचिका को निष्पादित कर दिया। याचिकाकर्ता का कहना था कि किन्नरों को सामाजिक न्याय नहीं मिल रहा है। जो पढ़े-लिखे एवं सभी कार्य में कुशल हैं, उन्हें पुलिस में आरक्षण नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार के वकील अजय ने कोर्ट से कहा कि किन्नरों के लिए पुलिस विभाग में स्पेशल यूनिट बना है, ताकि सामाजिक विसंगतियों को दूर किया जा सके। निकट भविष्य में भी उन्हें अन्य प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी।
गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों की बिहार पुलिस में नियुक्ति का संकल्प पत्र 18 दिन पहले ही जारी कर दिया है। सिपाही और पुलिस अवर निरीक्षक के पदों पर सीधी नियुक्ति के आवेदन में अंग्रेजी के शब्द ट्रांसजेंडर और हिंदी में किन्नर/कोथी/हिजड़ा का उपयोग किया जा सकेगा। संकल्प पत्र में इनकी नियुक्ति से संबंधित हर तरह का प्रावधान स्पष्ट किया गया है। इसके अनुसार पुलिस में सीधी नियुक्ति के लिए सामान्य की तरह इनके लिए भी दो ही अथॉरिटी होंगे। सिपाही सवंर्ग में नियुक्ति के प्राधिकारी पुलिस अधीक्षक, जबकि पुलिस अवर निरीक्षक के लिए पुलिस उप-महानिरीक्षक होंगे। जब भी नियुक्ति निकलेगी, प्रत्येक 500 पदों पर 1 पद इनके लिए आरक्षित होगा और इसका जिक्र विज्ञापन में स्पष्ट रूप से होगा। इनकी ओर से आवेदन नहीं मिलने पर यह 1 पद सामान्य अभ्यर्थियों से भरा जाएगा। नियुक्ति पर पदस्थापन जिला पुलिस बल में होगा।
2015 के बाद से ट्रांसजेंडर लगातार हर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि के साथ खड़े हो रहे हैं। तमिलनाडु में के. प्रीथिका यासिनी ने देश की पहली पुलिस अधिकारी के रूप में नियुक्ति हासिल की थी और अब वह अपने काम की बदौलत प्रमोट होकर सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बन चुकी हैं। 2017 में 29 साल की जोयिता मोंडल देश की पहली ट्रांसजेंडर जज बनीं। 2018 में तमिलनाडु की सथ्याश्री शर्मिला देश की पहली वकील बनीं। कल्कि सुब्रह्मणियम ने बिजनेस में झंडा बुलंद किया। शाबी तो 2010 में ही नेवी ज्वाइन कर इतिहास रच चुकी हैं। गंगाजी राजस्थान पुलिस में हैं। बिहार में मोनिका बैंक की सेवा कर रही हैं। इतने बड़े उदाहरण तो सामने हैं। इसलिए, काबिलियत पर शक करने से पहले इनके बारे में पढ़ना चाहिए।
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