मध्य प्रदेश : जनसंपर्क और माध्यम के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपए का बंदरबांट करने वाला मास्टरमाइंड है संजय प्रकट



--विजया पाठक, (एडिटर - जगत विजन)
भोपाल-मध्य प्रदेश, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

देश का हृदय प्रदेश कहा जाने वाला मध्य प्रदेश आए दिन भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सुर्खियों में बना रहता है। फिर चाहे यह भ्रष्टाचार शासकीय अधिकारी, कर्मचारियों ने किया हो या फिर राजनेताओं के संरक्षण में पलने बढ़ने वाले व्यापारियों ने। जी हां हम बात कर रहे है भोपाल शहर के एक ऐसे शख्स की जिसका नाम है संजय प्रकट। संजय विजन फोर्स नाम की एक एडवरटाइजमेंट कंपनी को संचालित करते है। इस शख्स ने बीते कुछ सालों से लगातार मप्र माध्यम हो या फिर जनसंपर्क विभाग दोनों ही जगहों पर जमकर अधिकारियों की शह पाकर करोड़ों रुपए का बंदरबांट किया है। संजय इन दिनों सुर्खियों में बने हुए है। हाल ही में इनके भोपाल स्थित दफ्तर में आयकर विभाग की टीम ने छापा डाला और करोड़ों रुपए की उलट फेर से जुड़े दस्तावेज प्राप्त किए। देखा जाए तो संजय प्रकट को भाजपा शासन हो या फिर 15 महीनों का कांग्रेस का शासनकाल दोनों ही राजनैतिक पार्टियों से हजारों करोड़ों रुपए के भुगतान हुए है। इनकी दोनों पार्टियों के उच्च कोटि के नेताओं के साथ गाढ़े संबंध रहे है। जांच करने वाला विषय यह है कि संजय की कंपनी को हुए भुगतान की राशि में कौन कौन ऐसे शासकीय अधिकारी हिस्सेदार है जिनके बीच में जनता के टैक्स से प्राप्त गाढ़ी कमाई का बंदरबांट यह लोग करते है। यदि सरकार नियमानुसार पारदर्शी ढंग से इस पूरे मामले की जांच करवा दे तो न जाने ऐसे कितने सफेद पोशाक धारी अधिकारी और राजनेताओं के नामों का खुलासा होगा जिन्हें संजय प्रकट समय समय पर आर्थिक लाभ पहुंचाते है। एक यह दृश्य है जहां करोड़ों रुपए का खेल इस तरह से किया जाता है जैसे चव्वनी अठ्ठनी हो।

औऱ दूसरा वो दृश्य याद आता है पिछले दिनों जनसंपर्क विभाग के एक आला अधिकारी के केविन के बाहर खड़े एक पत्रकार की हृदयाघात से दर्दनाक मौत हो जाती है और शासन के कान में जूं भी नहीं रेंगती। प्रदेश के स्वतंत्र पत्रकार जो अपनी अजीविका चलाने के लिए मासिक पत्रिका या समाचार पत्रों का संचालन करते है और जनसंपर्क विभाग से विज्ञापन पाने के लिए दफ्तर दफ्तर, केविन केविन दर दर की ठोंकरे खाते है। अंत में उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा यह कहकर शांत रहने पर मजबूर कर दिया जाता है कि अभी विभाग के पास बजट नहीं है। जबकि बजट न होने का यह सरासर बहाना होता है और बड़े रसूखदारों के साथ मिलकर यही अधिकारी पैसों का बंटवारा कर लेते है। यह बात मैं इसलिए पूरे विश्वास के साथ बता रही हूं कि वर्तमान समय में जनसंपर्क विभाग के एक उच्चाधिकारी जो पूर्व में मप्र माध्यम में कार्यपालक निदेशक भी रह चुके हैं उन्होंने खुद अपने बेटे के नाम पर एक इवेंट एजेंसी शुरु की और देखते ही देखते आज वो एजेंसी प्रदेश की प्रमुख एजेंसियों में से एक बन गई है। सुनने में आया है कि पिछले दिनों आयकर विभाग द्वारा की गई सेंधमार कार्यवाही साहब के बेटे की कंपनी पर की गई। लेकिन पिता के रुआब को देखते हुए यह बात बाहर नहीं निकली और पूरी कार्यवाही जमीदोंज हो गई। इतना ही नहीं पिछले कुछ वर्षों में लगातार इस इवेंट एजेंसी के नाम पर करोड़ों रुपए के भुगतान करवाए गए है जो जांच का विषय है। खैर यह मप्र माध्यम हो या फिर जनसंपर्क विभाग इनकी परिपाटी ही ऐसी है जो भी अधिकारी शीर्षस्थ पदो पर बैठता है वो पत्रकारों का हक मार के या अपने रिश्तेदार के नाम पर पैसों का गबन करता है। पूर्व में भी इसके कई प्रमाण सामने आ चुके है।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक यह अधिकारी जनता के गाढ़ी कमाई के पैसे के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे? इन पर अंकुश कब लगेगा? मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाक के नीचे सालों से चले आ रहे इस खेल का अंत कब होगा?

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