--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
बिहार के 12 जिलों में दो सौ निराश्रित एवं बेसहारा बच्चों के लिए वृहद आश्रय गृहों का निर्माण नए वर्ष में शुरू होगा। समाज कल्याण विभाग ने राज्य में निराश्रित बालक व बालिकाओं के साथ ही 0 से 6 साल के बच्चों की देखभाल को लेकर वृहद आश्रय गृह बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार की सहमति मिल चुकी है।
नए वर्ष में वृहद आश्रय गृह का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा। समाज कल्याण विभाग ने इसके निर्माण को लेकर भवन निर्माण विभाग के तहत संचालित भवन निर्माण निगम को लेकर राशि भी उपलब्ध करा दी है।
वृहद आश्रय गृह के निर्माण की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग के तहत संचालित निगम को ही सौंपी गयी है। ये वृहद आश्रय गृह पटना, नवादा, भागलपुर, कैमूर, सीवान, पश्चिम चंपारण, औरंगाबाद, जमुई, कटिहार, दरभंगा, मुजफ्फरपुर व सुपौल में बनाए जाएंगे।
राज्य सरकार ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के बाद वृहद आश्रय गृह बनाने का निर्णय लिया था। ये वृहद आश्रय गृह पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में संचालित किए जाएंगे। राज्य सरकार ने इसके साथ ही निजी संस्थाओं के माध्यम से आश्रय गृहों के संचालन की व्यवस्था को समाप्त करने का भी निर्णय लिया है। ताकि आवासीय गृहों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके और किसी प्रकार की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इस गृह में इसलिए तीन प्रकार के गृहों को एक स्थान पर ही संचालित करने की योजना है। इनमें बालक गृह, बालिका गृह एवं दत्तक ग्रहण केंद्र शामिल हैं।
विभाग के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रति वृहद आश्रय गृह 29 करोड़ रुपये भवन निर्माण को लेकर खर्च किए जाएंगे। पांच एकड़ में बनने वाले इस आश्रय गृह में बच्चों के लिए भोजनालय, पुस्तकालय, मनोरंजन कक्ष, कौशल विकास कक्ष, खेल के मैदान, कर्मचारी आवास की भी सुविधा उपलब्ध रहेगी। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक वृहद आवासीय गृह में दो सौ बच्चों के आवासन की क्षमता होगी।
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