'टिश्यू कल्चर' से तैयार अनन्नास की बिहार में उगाई जाएगी फसल



--अभिजीत पाण्डेय (ब्यूरो),
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

बिहार में अनन्नास उत्पादन में अलग पहचान बना चुके किशनगंज में अब टिश्यू कल्चर लैब से तैयार अनन्नास के पौधे उगाए जाएंगे। भागलपुर के बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दो साल के प्रयास के बाद पौधे तैयार कर लिए हैं।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ• आर• के• सोहाने ने बताया कि बिहार में किशनंगज के कई क्षेत्रों में अनन्नास की खेती बड़ी मात्रा में हो रही है, जिसमें उत्पादन बढ़ाने के लिए टिश्यू कल्चर से पौधे तैयार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि टिश्यू कल्चर लैब में अनन्नास के कंद में पाए जाने वाले ऊतक से इन पौधों को तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा गुणवत्ता वाले पौधों को तैयार करना है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल अनन्नास की फसल तैयार होने में 16 से 18 महीने का समय लगता है। इन पौधों में 12 महीने में ही फल तैयार हो जाएंगे। अभी सीमांचल के किशनगंज के अलावा अररिया में ही थोड़ी बहुत अनन्नास की खेती होती है। कोसी क्षेत्र के सहरसा, सुपौल व मधेपुरा में अनानास का उत्पादन नहीं होता है। टिश्यू कल्चर पौधे से कोसी और सीमांचल के किसानों को काफी फायदा होगा।

आसानी से पौधों की उपलब्धता, समय और लागत में बचत से क्षेत्र में अनन्नास की खेती के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी होगी। अनन्नास की खेती किशनगंज से निकलकर पूरे कोसी और सीमांचल सहित अन्य इलाके में लाभकारी हो सकेगी।

डाक्टर सोहाने ने बताया कि अनन्नास के औषधीय गुण भी बहुत होते हैं। ये शरीर के भीतरी विषों को बाहर निकलता है। इसमें क्लोरीन की भरपूर मात्रा होती है। साथ ही पित्त विकारों में विशेष रूप से और पीलिया यानि पांडु रोगों में लाभकारी है। ये गले एवं मूत्र के रोगों में लाभदायक है। इसके अलावा ये हड्डियों को मजबूत बनाता है। अनन्नास में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। यह शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है। एक प्याला अनन्नास के रस-सेवन से दिन भर के लिए आवश्यक मैग्नीशियम के 75% की पूर्ति होती है। साथ ही ये कई रोगों में उपयोगी होता है।

उन्होंने बताया कि इस फल में पाया जाने वाला ब्रोमिलेन सर्दी और खांसी, सूजन, गले में खराश और गठिया में लाभदायक होता है। यह पाचन में भी उपयोगी होता है। अनन्नास अपने गुणों के कारण नेत्र-ज्योति के लिए भी उपयोगी होता है। दिन में तीन बार इस फल को खाने से बढ़ती उम्र के साथ आंखों की रोशनी कम हो जाने का खतरा कम हो जाता है। आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों के शोधों के अनुसार यह कैंसर के खतरे को भी कम करता है। ये उच्च एंटीआक्सीडेंट का स्रोत है व इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और साधारण ठंड से भी सुरक्षा मिलती है। इससे सर्दी समेत कई अन्य संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

https://www.indiainside.org/post.php?id=7334