प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए चली श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों का भुगतान राज्य सरकार करेगी



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

भारतीय रेलवे लॉकडाउन के दौरान श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों से प्रवासी मजदूरों को लाने के लिये राज्य सरकारों से किराया लेगा।

इस संबंध में शुक्रवार को जारी एक आदेश में कहा गया कि किराये में शयनयान श्रेणी के टिकट की कीमत, 30 रुपये का सुपरफास्ट शुल्क और प्रति यात्री भोजन तथा पानी के लिये 20 रुपये शामिल होंगे। रेलवे ने एक महीने से अधिक समय तक यात्री रेल सेवाओं के बंद करने के बाद अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के दिन शुक्रवार को प्रवासी मजदूरों, छात्रों और अन्य लोगों के लिए छह श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों की घोषणा की। ये लोग लॉकडाउन के चलते अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं।

ऐसी पहली सेवा शुक्रवार को सुबह चार बजकर 50 मिनट पर 1,200 यात्रियों के साथ हैदराबाद से झारखंड और जयपुर से पटना के लिए चलायी गयी। इसके अलावा चार अन्य सेवाएं नासिक से लखनऊ (रात 9:30 बजे), अलुवा से भुवनेश्वर (शाम छह बजे), नासिक से भोपाल (रात आठ बजे), कोटा से हटिया (रात नौ बजे) तक चलायी जायेंगी। प्रत्येक ट्रेन में 1,000 से 1,200 यात्रियों के जाने की उम्मीद है।

रेलवे ने कहा, ‘‘यात्रियों को रेलवे से कुछ भी खरीदने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकारें अपनी ओर से समन्वय और भुगतान करेंगी।'' देश में 25 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद से हजारों प्रवासी देश के विभिन्न स्थानों में फंसे हुए थे। कई लोगों ने पैदल चलकर सैकड़ों किलोमीटर दूर घर जाने का प्रयास भी किया। गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को प्रवासियों और देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे लोगों के लिये विशेष रेलगाड़ियां चलाने की अनुमति दी थी।

राजस्थान, झारखंड, बिहार, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना जैसे राज्यों ने प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों में वापस लाने के लिए विशेष रेलगाड़ियां चलाने का अनुरोध किया था। रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि इन रेलगाड़ियों में कौन यात्रा करेगा, यह तय करने का अंतिम अधिकार सिर्फ राज्य सरकारों के पास है।

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