ग्यार बीन्स में उपस्थित 3-इपीकेटोंनिक अम्ल कोरोना के बाहरी कवच को नष्ट करने में प्रभावी



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

आज सम्पूर्ण विश्व कोरोना जैसी भयंकर महामारी से लड़ रहा है। पूरी दुनिया मे इससे निजात पाने के लिए तमाम तरीके के प्रयोग हो रहे हैं और दुनिया के अनेक वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन एवं इसकी औषधि बनाने के लिए प्रयासरत भी हैं। ऐसे में हम सभी के लिए डॉ• अरविंद शर्मा उम्मीद की किरण बन कर उभरे हैं। डॉ• अरविंद शर्मा मूलरूप से हरिद्वार से हैं और पिछले 20 वर्षों से अनुसंधान कार्य से जुड़े हैं।

चौधरी चरण सिंह विश्व विद्यालय, मेरठ के शोध छात्र रहे डॉ• अरविंद शर्मा के रिसिन टोक्सिन पर रिसर्च के लिए अमेरिका ने भी सराहा है।

डॉ• अरविंद ने बताया कि उन्होंने ग्यार बीन्स से एक तरह का केमिकल अलग करने में सफलता प्राप्त की है जिसका नाम 3 इपीकेटोंनिक अम्ल है, जो कोविड-19 के वायरस की संरचना को तोड़ देता है। डॉ• शर्मा ने बताया कि कोविड-19 वायरस एक तरह का आर एन ए वायरस है जिसके ऊपर एक लिपिड की लेयर होती है। यह लिपिड की लेयर वायरस के न्यूक्लिक एसिड की रक्षा करती है। इसी न्यूक्लिक एसिड की मदद से वायरस मनुष्य के आर एन ए के कार्य में बाधा उत्पन्न कर मनुष्य की कोशिकाओं में उपस्थित पोषक तत्वों का इस्तेमाल कर अपनी संख्या को तेजी से बढ़ाता है। ग्यार बीन्स से प्राप्त 3 इपीकेटोंनिक अम्ल वायरस के इस लिपिड की लेयर को तोड़ देता है। 3 इपीकेटोनिक अम्ल के पोलर तथा नन-पोलर दो भाग होने के कारण यह कोविड 19 के आर एन ए को असंतुलित कर देता है जिसके कारण वह मनुष्य की कोशिका में और अधिक मात्रा में संश्लेषित नहीं हो पाता जिससे वायरस नष्ट हो जाता है।

डॉ• शर्मा ने बताया कि बहुत सारी दालों में भी इसी तरह के कंपाउंड होते हैं जो एंटीवायरल गुण दर्शाते हैं। इस केमिकल कंपाउंड का कप्यूटर बेस मॉडल एवं कार्यकारी प्रणाली को नेचर रिसर्च पेपर को भेजा जा चुका है। इस शोध के विषय में इंडियन कॉउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भी एक पत्र के माध्यम से सूचित किया गया है। साथ ही एक पत्र उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी भेजा है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद इसको जानवरों पर भी प्रयोग किया जाएगा।

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