बिहार में कोरोना पॉजिटिव की 9 हुई संख्या, पटना के एक निजी अस्पताल को किया गया सील



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या अब बढ़कर 9 हो गई है। पटना के राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की जांच में इस बात की पुष्टि की गई है। ये दोनों ही मरीज फिलहाल एनएमसीएच में भर्ती हैं। दोनों ही पुरुष हैं और इनमें एक पटना के जगनपुरा स्थित उसी सरनाम अस्पताल का कर्मी है जहां मुंगेर के कोरोना पॉजिटिव युवक का डायलिसिस किया गया था। मुंगेर के इस युवक की मौत पटना एम्स में हो गई थी जिसके बाद उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई थी। गुरुवार को भी सरनाम अस्पताल के एक 20 साल के वार्ड ब्वॉय में कोरोना पॉजिटिव पाया गया था।

बिहार में पाए गए अब तक 9 मरीजों में से इस युवक के अलावा एक महिला और बच्चा भी कोरोना पॉजिटिव है और अब सरनाम अस्पताल का वॉर्ड बॉय और अन्य एक कर्मी भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया। जाहिर है बिहार के कुल कोरोना मरीजों में से चार लोग इसी मृत युवक के संपर्क में आया है।

इस बात की जानकारी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सरनाम अस्पताल के कई और कर्मियों की जांच करने का फैसला किया है। गुरुवार को सरनाम अस्पताल के वार्ड बॉय के की पॉजिटिव रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और अस्पताल के स्टाफ के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद पूरे अस्पताल को सील कर दिया गया है। वहीं, अस्पताल के 27 स्टाफ को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। पूरे अस्पताल को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया गया है।

■ विधायक फंड से कोरोना प्रभावित की सहायता मे नियम बना रोड़ा

कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे से निपटने और प्रभावित लोगों को मदद पहुंचाने के लिए बिहार के नेता बढ़-चढ़कर आगे आ रहे हैं। चाहे सांसद या विधायक कोई एक माह का वेतन दे रहा है तो कोई दो माह का। कई सांसद या विधायक ने अपने अपने फ़ंड में से बड़ी राशि अपने-अपने क्षेत्र में कोरोना वायरस से निपटने के लिए ज़िला प्रशासन को पत्र लिखा है। पर विधायकों के मामले में फिलहाल मामला फंसता हुआ लग रहा है।

दरअसल नियम ये है कि कोई भी सांसद या विधायक अगर अपने फ़ंड की राशि खर्च करता है तो वो राशि उसके संसदीय क्षेत्र या विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों में खर्च हो सकता है, लेकिन कोरोना वायरस से निपटने के लिए जो राशि ख़र्च करने के लिए जो ज़िला प्रशासन को पत्र लिखा जा रहा है उसे देख अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि राशि किस मद में खर्च करे।

सांसदों के लिए तो नियम में बदलाव कर दिया गया है और 24 मार्च को गाइडलाइन भी जारी कर दिया गया है कि किसी आपदा के लिए 25 लाख की राशि दे सकते थे, लेकिन कोरोना के लिए वो अपने फ़ंड का कितनी भी राशि दे सकते हैं। लेकिन, बिहार के विधायकों के सामने ये समस्या फ़िलहाल खड़ी हो गई है।

बता दें कि कई विधायकों ने अपने-अपने विधायक फंड की राशि कोरोना से निपटने के लिए जो सामान खरीदने के लिए लिखा है उसे देख अधिकारी भी मुश्किल में हैं और अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इसका रास्ता पूछ रहे हैं।

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