कोरोना के बाद अब बिहार पर स्वाइन फ्लू का खतरा



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● जांच में छह मरीज पाए गए पॉजिटिव

कोरोना जैसी महामारी के बाद अब बिहार के लोगों पर स्वाइन फ्लू का भी खतरा मंडराने लगा है। बिहार में स्वाइन फ्लू से होने वाली बीमारी और मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अब तक 6 मरीजों में स्वाइन फ्लू पाया गया है। मरीजों में स्वाइन फ्लू होने की बात आरएमआरआई की जांच रिपोर्ट में सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक जांच के लिए कुल 33 मरीजों का सैंपल लिया गया था जिसमें से छह का सैंपल पॉजिटिव पाया गया है वहीं दूसरी ओर कोरोना वायरस को लेकर भी सैंपल की जांच हुई है जिसमें आरएमआरआई ने सभी की रिपोर्ट को निगेटिव करार दिया है। सभी रिपोर्ट को अब वायरोलॉजी लैब में भेजा जाएगा। जितने भी लोगों के सैंपल लिए गए हैं उनकी जांच कोरोना और स्वाइन फ्लू दोनों के लिए की जा रही है।

मालूम हो कि विश्व में फैली कोरोना की बीमारी को लेकर पूरे भारत में सतर्कता बरती जा रही है। इसको लेकर बिहार सरकार भी काफी गंभीर है। राज्य में जहां 31 मार्च तक स्कूल कॉलेज विश्वविद्यालय समेत सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टियां कर दी गई है वहीं सभी तरह के सरकारी, गैर सरकारी कार्यक्रम जिसमें लोगों की भीड़ जमा होती है को भी रद्द करने का आदेश जारी किया गया है।

कोरोना से बचाव के लिए जहां सभी जिले में आइसोलेशन वार्ड बनाए गए हैं वहीं पब्लिक प्लेस पर भी लोगों के जमा होने से बचने की अपील की जा रही है इसको लेकर सरकार ने मॉल और शॉपिंग कंपलेक्स को भी बंद कराने का निर्णय लिया।

■ केंद्र के बाद बिहार में भी लागू हुआ महामारी रेगुलेशन एक्ट

कोरोना वायरस से बचने के लिए केंद्र सरकार के बाद अब बिहार सरकार ने भी राज्य में यह एक्ट लागू कर दिया है। महामारी अधिनियम के तहत अब जुर्माना भी वसूला जाएगा और सख्ती भी बरती जाएगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को इस कानून के खंड-दो को लागू करने की बात कही थी, ताकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी परामर्श लागू किये जा सकें।

इसके तहत यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति अस्पताल जाने से इनकार करता है या सभी से अलग रहने से इनकार करता है तो महामारी क़ानून की के सेक्शन 3 के तहत अधिकारी व्यक्ति को जबरन अस्पताल में भर्ती करा सकते हैं, 14 दिनों के लिए या फिर उनकी जाँच रिपोर्ट नॉर्मल आने तक दूसरों से अलग रहने के लिए बाध्य कर सकते हैं।

जब राज्य सरकार को किसी समय ऐसा लगे कि उसके किसी भाग में किसी ख़तरनाक महामारी का प्रकोप हो गया है या होने की आशंका है, तब अगर राज्य सरकार ये समझती है कि उस समय मौजूद क़ानून इस महामारी को रोकने के लिए काफ़ी नहीं हैं, तो कुछ उपाय कर सकती है। ऐसे उपाय, जिससे लोगों को सार्वजनिक सूचना के जरिए रोग के प्रकोप या प्रसार की रोकथाम हो सके।

राज्य सरकार ने सुरक्षा कारणों से राज्य के बाहर से आने वाले करीब 310 लोगों को अब तक सर्विलांस पर लिया है। इनमें से 70 से अधिक व्यक्तियों की रिपोर्ट आ चुकी है। जिनमें इस बात की पुष्टि हुई है कि बिहार में अब तक कोरोना का एक भी केस पॉजिटिव नहीं है। बावजूद सरकार कोरोना को लेकर पूरी तरह सजग है।

मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ कोरोना की अद्यतन स्थिति की जानकारी हासिल करने के लिए बैठक की। करीब 40 मिनट चली बैठक के बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि आज की बैठक में मुख्य सचिव को स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों की ओर से कोरोना से बचाव और जागरूक करने के लिए किए गए कार्यों से अवगत कराया गया।

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