--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
केंद्र सरकार के निर्देश के दो महीने के बाद भी बिहार में लगभग 15 लाख चार पहिया वाहनों पर में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआडी) टैग, यानि फास्टैग नहीं लगा है। ये वाहन बिहार के 8 एनएच पर स्थित 20 टोल प्लाजा पर मैन्युअल रसीद कटा रहे हैं। इसमें पटना में ही 70 हजार ऐसे चार पहिया वाहन हैं। केंद्र के निर्देश के बाद पूरे देश में एक दिसंबर से चार पहिया वाहनों पर फास्टैग लगाना अनिवार्य है। इसके लिए देश के 22 बैंकों के साथ ही 228 राजमार्गों पर स्थित 550 टोल प्लाजा पर फास्टैग लगाने की व्यवस्था की गई है। ये टैग 200 से 800 रुपए तक मिल रहा है। फास्टैग लगाने का उद्देश्य प्रदूषण के साथ ही ईंधन की बचत और लोगों को जाम से राहत दिलाना है।
• प्रदेश में 80 लाख वाहनों का हुआ है रजिस्ट्रेशन, पटना में 14 लाख गाड़ियां
बिहार में लगभग 80 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। बिहार में रजिस्टर्ड वाहनों में दो पहिया गाड़ियों की संख्या लगभग 55 लाख है और 25 लाख चार पहिया वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं। पटना में सबसे अधिक कार, पश्चिम चंपारण में सबसे अधिक ट्रैक्टर और मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक ट्रकों का रजिस्ट्रेशन किया गया है। 2019 में भी प्रदेश में लगभग 12 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। पटना के डीटीओ कार्यालय में 14 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।
बिहार में विभिन्न माध्यमों से 10 लाख वाहनों पर फास्टैग लगाया जा चुका है। जिसमें बैक, टोल प्लाजा और पेटीएम शामिल है। इसके तहत बैंक ऑफ बड़ौदा ने लगभग दो लाख फास्टैग बेचा है। इसके साथ ही एसबीआई ने 35 हजार, एक्सिस बैंक ने 1.10 लाख, पेटीएम के माध्यम से लगभग 70 हजार फास्टैग वाहनों पर लगाया है।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से फास्टैग का रेट 100 रुपए निर्धारित किया गया है। जिसमें रिचार्ज, सक्योरिटी मनी और दूसरी सुविधा के साथ 200 से 800 रुपए तक फास्टैग बेचा जा रहा है। बैंक ऑफ बड़ौदा से फास्टैग लगाने वालों को 200 से 800 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। जिसमें कार के लिए 200, बस के लिए 700 और ट्रक के लिए 800 रुपए निर्धारित किया गया है।
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