गुरुद्वारा लंगर: ऐसी जगह जहां जात-पात नहीं, बल्कि सेवाभाव और दूसरों की मदद करने की सीख मिलती है



--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

इक ओंकार सतनाम करता पुरख
निर्मोह निर्वैर अकाल मूरत
अजूनी सभम
गुरु परसाद जप आड़ सच जुगाड़ सच
है भी सच नानक होसे भी सच...

गुरूद्वारे में जाकर ये गुरबानी सुनकर मन को जितना सुकून और शान्ति मिलती है, शायद ही कहीं और मिले। ये मेरा ख़ुद का अनुभव है, और शायद अधिकतर लोग मेरी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते होंगे। मैं जब-जब पटना स्थित हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा गया हूं, तब-तब मुझे बहुत सुकून और शान्ति मिली है। मगर हर बार एक चीज़ और है जो मुझे सोचने पर मजबूर कर देती है कि कैसे सालों से पटना स्थित हरमंदिर साहिब गुरुद्वारा जैसे देश और विदेश में स्थित गुरूद्वारे हर दिन लाखों लोगों का पेट भरते हैं वो भी मुफ्त में। सच सिख धर्म और उनके लंगर से कोई जितना सीख सकता है, उतना शायद ही किसी और धर्म में हो। इस वाक्य से मैं किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती हूं।

सिख धर्म की स्थापना दूसरों की पीड़ा और दर्द को कम करने के लिए ही हुई थी, ऐसा कहा जाता है। इसी सीख पर चलते हुए सदियों से ये लंगर भूखे लोगों का पेट भरने का काम करते हैं। ये लंगर केवल गुरुद्वारों में ही नहीं, बल्कि युद्ध के हालातों, बाढ़ या किसी प्राकृतिक आपदा में फंसे लोगों तक पहुंचकर उनकी सेवा और मदद करते हैं। पिछले वर्ष पटना के भीषण जलजमाव के दौरान तख्त हरमंदिर साहिब के द्वारा लगभग दो सप्ताह तक पीड़ित परिवारों के बीच भोजन और राहत सामग्री बांटी गयीं।

दुनिया और देश में जिस तरह के हालात हैं उनको देखते हुए, तो मेरा मानना है कि हमको इनसे ज़रूर सीख लेनी चाहिए। हम इनसे बहुत कुछ सीख सकते हैं।

लंगर की सबसे ख़ास बात ये है कि इसमें धर्म, ऊंच-नीच, जात-पात, अमीर-गरीब के नाम पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। यहां सब एक बराबर होते हैं और यहां सबको एक साथ, एक लाइन में बैठाकर पेट भर खाना खिलाया जाता है। गुरुद्वारे का लंगर एक ऐसी जगह है, जहां भेदभाव से परे सिर्फ़ और सिर्फ़ इंसानियत ही नज़र आती है। यहां से कोई भी भूखा नहीं जाता सातों दिन चौबीसों घंटे गुरुद्वारे के लंगर के द्वार खुले रहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है वस्तुओं के मूल्य मे वृद्धि होने के बावजूद लंगर नियमित रुप से निर्धारित मीनू के अनुसार ही चलता है।

दूसरों की मदद करना और उनकी सेवा करना सिख समुदाय में भगवान् की पूजा करने के सामान माना जाता है। मेरी तरह आप लोग भी कभी न कभी गुरुद्वारे तो गए ही होंगे और आपने देखा होगा कि वहां अमीर से अमीर इंसान भी जूठे बर्तन धोते हैं, पानी पिलाते हैं। इतना ही नहीं आपके जूते को जूता घर में अपने हाथों से उठाकर रखते हैं और उनको साफ़ भी करते हैं। सिख धर्म के अनुसार, निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही रब की भक्ति करना है।

तख्त हरिमंदिर पटना साहिब गुरुद्वारा के महासचिव सरदार महेन्द्र पाल सिंह ढिल्लन के अनुसार तख्त साहिब के अलावा पटना मे कंगन घाट, गुरु का बाग, बाललीला, गायघाट, सोनार टोली और हांडी साहब गुरुद्वारा है, जहां प्रतिदिन औसतन दस हजार श्रद्धालुगण लंगर छकते (भोजन करना) है। महासचिव के अनुसार इसके अतिरिक्त बिहार और झारखंड के प्रत्येक जिले मे गुरुद्वारा है, जहाँ आवश्यकता अनुसार लंगर चलता है।

लंगर में कई बार ऐसे लोग भी होते हैं जिनके अंदर सब्र नाम की चीज़ नहीं होती, कई बार वो अभद्र व्यवहार करते हैं, लंगर में बैठकर। लेकिन लंगर में खाना परोसने वालों के माथे पर आपको एक शिकन नहीं दिखाई देगी। ये हर काम शान्ति और सौम्यता के साथ करना चाहते हैं।

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