--अभिजीत पाण्डेय,
पटना-बिहार, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
• तीन जिलों को मिलेगी महाजाम से निजात
करीब दो साल से महाजाम से जूझ रहे तीन जिलाें पटना, भोजपुर और सारण की करीब 2 करोड़ की आबादी को अप्रैल से इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। सोन नदी में बन रहे सिक्स लेन पुल की एक आरएचएस लेन का काम 15 मार्च तक खत्म कर देने की डेडलाइन तय हो गई है। इस पुल के आरएचएस में 37 स्पैन हैं, जिनमें 30 का निर्माण पूरा हो गया है। पुल की लंबाई 1,526 मीटर है। करीब 194 करोड़ की लागत से बन रहे इस सिक्स लेन पुल के डिजाइन में बदलाव के कारण इसके निर्माण में काफी विलंब हुआ है। पहले फोरलेन का था, लेकिन भविष्य की जरूरत के मद्देनजर सरकार ने इसे सिक्स लेन कर दिया। इसके साथ ही बिहटा की ओर एप्रोच रोड की जमीन को लेकर हुए विवाद के कारण काफी समय बर्बाद हुआ।
पटना हाईकोर्ट ने पटना डीएम के यहां लंबित बुद्ध शिक्षा एवं समाज विकास संस्थान की अतिक्रमण अपील को 6 हफ्ते में निष्पादित करने का आदेश दिया। पटना डीएम को यह निर्देश 22 अक्टूबर 2019 को दिया गया। जस्टिस मोहित कुमार शाह की पीठ का यह आदेश भी रहा कि इस अपील का निष्पादन होने तक अतिक्रमणवाद से संबंधित जमीन पर यथावत स्थिति बहाल रहेगी। इस बारे में संस्थान व इसके सचिव मीनू सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इसी आदेश के साथ इस याचिका को निष्पादित कर दिया। हाईकोर्ट से निर्देश मिलने के बाद पटना डीएम ने इस विवाद को निपटा लिया और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
कोईलवर पुल पर वर्षों से गाड़ियों को रोक कर एक-दूसरी तरफ पार कराने की अनुमति रही है। वाहनों के बढ़ते दबाव के कारण यह पुल ऐसे ही बौना साबित होने लगा था। गांधी सेतु व दीघा ब्रिज के निर्णय ने आमलोगों को महाजाम से जूझने को मजबूर कर दिया। भारी वाहन चालकों को 40 किमी की दूरी तय करने में 2 से 3 दिन लग रहे थे, जिससे मजबूर होकर सरकार ने कोईलवर पुल को वनवे कर दिया। लेकिन, निदान नहीं निकला। कोईलवर पुल के वनवे हाेने से डेढ़ वर्ष से ट्रक ऑनर्स व व्यापारियों को जाम से नुकसान हो रहा है।
सोन में स्थित पुराने पुल से फिलहाल दस हजार वाहनों के परिचालन का अनुमान लगाया गया है। बताया जाता है कि इस नए पुल के निर्माण पूरा होने के बाद जैसे ही जाम से मुक्ति मिलेगी, वाहनों की संख्या में इजाफा होगा जो करीब 15 हजार तक पहुंच सकती है।
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