गुरुग्राम 4 मई। सहायक पुलिस कमीश्नर धारणा यादव ने कहा है कि गुरुग्राम क्षेत्र में केाई भी तंबाकू विक्रेता खुली सिगरेट व अन्य धूम्रपान उत्पादेां को बेचता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ कोटपा अधिनियम में कार्यवाही हेागी। वे पुलिस मुख्यालय में तंबाकू विक्रेताओं को कोटपा अधिनियम की जागरुकता पर आयोजित बैठक को संबोधित कर रही थी।
उन्होने तंबाकू विक्रेताओं से कहा कि आप सभी किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादा बच्चों को नही दे और ना ही शिक्षण संस्थाओं के 100 गज के दायरे में विक्रय करें, यदि कोई भी इन स्थानों पर विक्रय करता है तो आप पुलिस को इसकी सूचना दे ताकि संबधित के खिलाफ कार्यवाही हो सके। इसके साथ ही खुली सिगरेट की बिक्री ना करें साथ ही माचिस व लाईटर भी ना दे। किसी प्रकार से खुली सिगरेट की बिक्री होने पर कोटपा अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन होता है। तंबाकू विक्रेता यदि 18 वर्ष से कम उम्र के लेागों को इस तरह के उत्पाद विक्रय करती है तो उनके खिलाफ जेजे एक्ट की धारा 77 में कार्यवाही की जायेगी। इसमें कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना और सात साल की सजा का प्रावधान है। सभी विक्रेताओं से शहर में जो तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के विज्ञापन, बोर्ड लगे हुए है उसको हटाने को कहा है, ताकि बच्चों व युवाओं में इसका नकारात्मक संदेश ना जा पाए। शहर के अधिकतर स्थानों पर इस तरह के बोर्ड लगे है जिन पर सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन है ये सभी अपनी और आकर्षित करते है इसलिए इनको शीघ्र हटाने को कहा गया है।
एसीपी ने सभी पुलिसथानाधिकारियों से कहा कि उनके थानाक्षेत्र में यदि किसी प्रकार से कोटपा अधिनियम का उल्लंघन होता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही करें। इस दौरान सभी पुलिसथाना के द्वारा जो चालान की कार्यवाही की गई है उसका रिव्यू भी किया गया। उन्होने कहा कि सभी पुलिसथानाधिकारी अधिक से अधिक कोटपा एक्ट में चालान बनाएं ताकि आम जनता में यह संदेश जाये तो इस पर रोक संभव हो पायेगी।
इस दौरान एसीपी ने कहा कि प्रदेश में करीब 116 बच्चे प्रतिदिन तंबाकू उत्पादों के सेवन की शुरुआत करते है, साथ ही 28 हजार लोग बेमौत इससे मर रहे है। जो कि बेहद चिंता का विषय है। पुलिस व अन्य सहयेागी संस्थांए मिलकर तंबाकू उत्पादों की रोकथाम के लिए कोटपा 2003 केा लागू कराने के लिए काम कर रही है। पुलिस द्वारा अभियान भी चलाया जा रहा है। लेकिन इस तरह के अभियान सभी की सकारात्मकता से ही आगे बढ़ सकतें है।
प्रदेश में 43 लाख लोग किसी न किसी रुप में तंबाकू उत्पादों का सेवन करतें है जिसमें 35 लाख लोग सीधे तौर पर धूम्रपान करते है। वंही भारत में 5500 बच्चें हर दिन तंबाकू सेवन की शुरुआत करते हैं और वयस्क होने की आयु से पहले ही तम्बाकू के आदी हो जाते हैं। तंबाकू उपयोगकर्ताओं में से केवल 3 प्रतिशत ही इस लत को छोड़ने में सक्षम हैं इसीलिए यह आवश्यक है की हम बच्चों को तम्बाकू सेवन की पहल करने से ही रोके।
पुलिस द्वारा इस प्रकार के अभियान चलाने से आमजनता में जागरुकता आएगी और कोटपा का पालन करने से सार्वजनिक स्थानेां पर इसका प्रचलन भी कम होगा। उन्होने बताया कि सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम, 2003, के तहत सरकारी कार्यालयों, मनोरंजन केंद्र, पुस्तकालयों, अस्पतालों, स्टेडियमों, होटल, शॉपिंग मॉल, कॉफी हाउस, निजी कार्यालयों, अदालत परिसरों, रेलवे स्टेशनों, बस सभागारों, सार्वजनिक परिवहन, शैक्षणिक संस्थानों, चाय-स्टालों, सड़क के किनारे भोजनालयों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में धूम्रपान पर पाबंदी है।
इस अवसर पर डा० सोमिल रस्तौगी ने समस्त तंबाकू विक्रेताओं को इससे होने वाले दुष्प्रभावों व कोटपा अधिनियम के बारे में जानकारी दी।
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