केन्‍द्र, मांग आधारित उद्योगों से जुड़े कौशल विकास को प्रोत्‍साहित करने के लिए 560 करोड़ रुपये देगा



नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।

· ढाई लाख से ज्‍यादा युवाओं को एप्रेन्टिसशिप प्रशिक्षण अवसर उपलब्‍ध कराने के लिए 22 संगठनों के साथ सहभागिता;

· सरकार मानक आकलन प्रणाली सुनिश्चित करेगी

· विजन 2025 पर राज्‍य सरकारों के साथ विस्‍तार से चर्चा

· एप्रेन्टिसशिप प्रशिक्षण को प्रोत्‍साहित करने पर विशेष ध्‍यान केन्द्रित करना; कार्यक्रम के विस्‍तार के लिए पायलट स्‍तर पर प्रयास के तहत टीपीए को प्रोत्‍साहित करना

केन्‍द्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री डॉ• महेन्‍द्रनाथ पांडेय ने सोमवार को घोषणा की कि केन्‍द्र सरकार मांग आधारित उद्योगों से जुड़े कौशल विकास को प्रोत्‍साहित करने के लिए 560 करोड़ रुपये देगी। श्री पांडेय ने यह घोषणा नई दिल्‍ली में राज्‍यों के मंत्रियों के वार्षिक राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में की। आज ही के दिन एप्रेन्टिसशिप पखवाड़े की शुरूआत हुई। एप्रेन्टिसशिप पखवाड़े के दौरान एप्रेन्टिसशिप के बारे में व्‍यापक स्‍तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अवसर पर देश के ढाई लाख से ज्‍यादा युवाओं को एप्रेन्टिसशिप प्रशिक्षण का अवसर उपलब्‍ध कराने के लिए 22 संगठनों के साथ सहयोग किया गया है।

यह वार्षिक सम्मेलन देश भर में विभिन्न कौशल योजनाओं के हितधारकों के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जहां विशेष रूप से राज्य सरकार के कौशल मंत्री अपने राज्यों में कौशल विकास के प्रयासों पर चर्चा करते हैं। कार्यक्रम में राज्‍यों के 80 से ज्‍यादा प्रतिनिधियों ने हिस्‍सा लिया।

श्री पांडेय ने राज्‍यों के कौशल विकास मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल विकास एक मांग आधारित विषय है, इसलिए यह जरूरी है कि केन्‍द्र इस बारे में राज्‍यों को ऐसी मदद दे, जिससे गुणवत्‍ता और बाजार के अनुकूल कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा सके। उन्‍होंने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण देते समय परम्‍परागत और नये समय के अनुकूल प्रशिक्षण के बीच संतुलन होना चाहिए। असंगठित बाजारों के साथ ही संगठित बाजारों का भी इसमें ध्‍यान रखा जाना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि राज्‍य सरकारों को स्‍कूल स्‍तर से ही बच्‍चों में कौशल विकास प्रशिक्षण के बारे में ध्‍यान देना चाहिए। कॉलेज स्‍तर पर एप्रेन्टिसशिप प्रशिक्षण को डिग्री पाठ्यक्रमों का हिस्‍सा बनाया जाना चाहिए, क्‍योंकि किसी भी नौकरी के लिए पहले से प्रशिक्षण जरूरी हो गया है।

केन्‍द्रीय मंत्री ने कहा कि केन्‍द्र और राज्‍य दोनों स्‍तर पर सरकारों को लोगों के काम के आकलन के लिए एक सामान्‍य मानक प्रक्रिया बनानी चाहिए। हमें ऐसे लोगों को प्रोत्‍साहित करना चाहिए, जो अपने काम के माध्‍यम से गुणवत्‍तापरक योगदान देते हैं और साथ ही हर प्रकार के भ्रष्‍टाचार को हतोत्‍साहित करना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान स्किल इंडिया के विजन 2025 तथा इस दिशा में केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर विस्‍तार से चर्चा की गई। श्री पांडेय ने कहा कि यह जरूरी है कि केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों विजन 2025 का लक्ष्‍य पाने के लिए एक दूसरे के साथ मिलकर काम करें।

कौशल विकास के बारे में राज्‍य सरकारों को निर्देश जारी करते हुए कौशल विकास और उद्यमिता राज्‍य मंत्री आर• के• सिंह ने कहा कि हमें अब नौकरियों के अवसरों के लिए प्राथमिक क्षेत्रों की तुलना में उससे ऊंचे स्‍तर के क्षेत्रों पर तथा वैश्विक तुलना में वस्तुओं और सेवाओं के लिए स्थानीय मांगों पर ज्‍यादा ध्‍यान देना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि बाजार के अनुकूल कौशल के लिए राज्यों को लगातार परिवेश की समीक्षा करनी चाहिए। हमें भविष्य में नौकरियों के अवसर के लिए अपने संरेखण को सुनिश्चित करना चाहिए ताकि भारत को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हो। उन्‍होंने कहा कि कौशल विकास प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षण कर्मियों को लगातार नई जानकारियों से अवगत कराया जाना चाहिए। साथ ही हमारा बुनियादी ढांचा भी वैश्विक स्‍तर का होना चाहिए, ताकि हम गुणवत्‍तायुक्‍त सेवाएं दे सकें।

कार्यक्रम में हाल ही में संशोधित एप्रेन्टिसशिप अधिनियम पर भी चर्चा की गई। अधिनियम में संशोधन इसे अधिक से अधिक कंपनियों और उद्योगों के साथ जोड़ने के लिए किया गया। चालू वित्त वर्ष के दौरान 10 लाख प्रशिक्षुओं को रोजगार उपलब्‍ध कराने का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए थर्ड पार्टी एग्रीगेटर्स के लिए कुछ प्रोत्साहनों की भी घोषणा की गई। इस कार्यक्रम में 3000 से अधिक एप्रेंटिस वाले उद्योगों को सम्मानित किया गया और प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरूआत 2015 में की गई थी। अब तक इसके तहत 80 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कौशल विकास मंत्रालय के 25000 से अधिक संस्थान और केंद्र देश के 37 क्षेत्रों में 3000 से अधिक कौशल विकास पाठ्यक्रम चला रहे हैं। इनमें अत्याधुनिक 629 प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (पीएमकेके) भी शामिल हैं, जो देश के प्रत्येक जिले में एक केंद्र को लक्षित करते हैं।

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