नई दिल्ली,
इंडिया इनसाइड न्यूज़।
उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने कहा है कि कला दिलों को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि संगीत भूगोल की परम्परागत सीमाओं को तोड़कर लोगों के जीवन को समृद्ध बनाता है। उपराष्ट्रपति ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में पिछले दिनों शास्त्रीय संगीत की गायिका सूर्यगायत्री के भजन सुने।
कर्नाटक संगीत और हनुमान चालीसा की उनकी प्रस्तुतियों को सुनने के बाद उपराष्ट्रपति ने युवा और प्रतिभाशाली गायिका की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अपनी गायकी से यू-ट्यूब और अन्य मंचों पर सूर्यगायत्री ने दुनियाभर के संगीत प्रेमियों के दिलों को जीत लिया है।
श्री नायडू ने कहा कि सूर्यगायत्री जैसे संगीतज्ञों को भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध करने तथा उसे दुनिया के हर कोने तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।
सूर्यगायत्री को अनुकरणीय उदाहरण बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका समर्पण, सीखने की जिज्ञासा और अपने गुरू की शिक्षाओं का अनुसरण करने के उनके गंभीर प्रयास प्रेरणादायक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सूर्यगायत्री को सुनने के बाद अनेक युवा भारत की लुभावनी संगीत परम्परा से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
यह कहते हुए कि भारतीय संगीत में गीतों का विशाल खजाना दिल, दिमाग और आत्मा को लगातार मजबूती प्रदान करता है, श्री नायडू ने कहा कि भारतीय संगीतज्ञ जैसे स्वर्गीय भारत रत्न डॉ• एम• एस• सुब्बुलक्ष्मी, पंडित रवि शंकर और अली अकबर खान तथा अनेक अन्य ने दुनिया को एक दुर्लभ और आत्मा को ताजगी प्रदान करने वाला संगीत दिया है और इसे दुनिया में लोकप्रिय किया है।
भारत की परम्परागत कला को प्रोत्साहित करने के लिए जीएमआर वरलक्ष्मी फाउंडेशन की सराहना करते हुए श्री नायडू ने कहा कि भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने, उसकी रक्षा करने और उसे बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता है।
सूर्यगायत्री, जो उत्तरी केरल के वड़कारा में पुरामेरी गांव से तालुक रखती है, उन्होंने कर्नाटक संगीत की औपचारिक शिक्षा आनंदी और निशांत से ग्रहण की। संगीत और आध्यात्म की दृष्टि से संगीतकार कुलदीप एम• पई उनके उस्ताद रहे।
सूर्यगायत्री को 10 वर्ष की उम्र में मुम्बई शनमुखानंद सभा द्वारा संगीत के क्षेत्र में एम• एस• सुब्बुलक्ष्मी फैलोशिप, त्रिवेन्द्रम कलानिधि संगीत रत्न पुरस्कार और 2017 में समाज शक्ति पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। हरिहरपुत्र भजन समाज मुम्बई ने उन्हें उनके गुरू कुलदीप एम• पई के साथ सम्मानित किया।
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