नई दिल्ली/कोच्चि/कोलकाता, 02 मई 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
भारतीय नौसेना के लिए 16 एंटी सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्रॉफ्ट (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) जहाजों के निर्माण के लिए मैसर्स सीएसएल, कोच्चि और जीआरएसई, कोलकाता के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों शिपयार्ड आठ-आठ जहाजों का निर्माण करेंगे। इन जहाजों की आपूर्ति 22 अक्टूबर से शुरू होने वाली है। प्रत्येक शिपयार्ड हर साल दो-दो जहाजों की आपूर्ति करेगा।
भारत की 7516.6 किलोमीटर लम्बी विशाल तट रेखा में 12 प्रमुख बंदरगाह, 184 छोटे बंदरगाह, 1197 द्वीपीय क्षेत्र स्थित होने के कारण एएसडब्ल्यू परिचालनों के लिए तटीय निगरानी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कम ड्रैफ्ट के इन विशेष जहाजों के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय उथले पानी में एंटी सबमरीन वारफेयर क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। इस क्षमता में हथियारों, सेंसरों, हॉल माउंटेड और टोड सोनर्स का बेहतर प्रदर्शन भी शामिल है।
अति आधुनिक स्वदेशी इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम, प्रोपल्शन, सहायक और पीजीडी मशीनरी से युक्त ये जहाज तटीय जल की उपसतह की निगरानी करने और माइन बिछाने में सक्षम हैं। इससे ये सक्षम मंच बनाने के साथ-साथ और भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल में एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि बन जाते हैं।
॥●॥ भारतीय नौसेना का गोताखोर दल इम्फाल नदी में लापता कार्मिकों का पता लगाने के लिए खोज अभियान में शामिल
मणिपुर राज्य सरकार के अनुरोध पर मंगलवार 30 अप्रैल की शाम भारतीय वायु सेना के एक विमान द्वारा नौसेना के 12 गोताखोरों और 2 हाइड्रोग्राफरों का एक दल विशाखापत्तनम से इम्फाल के लिए रवाना हुआ था। नौसेना का गोताखोर दल पानी में मौजूद चीजों का पता लगाने के लिए हलके साइड स्कैन सोनार सहित अन्य आवश्यक गोताखोरी उपकरण भी अपने साथ लेकर आया है। इस दल ने बुधवार 01 मई को खोज अभियान शुरू किया । यह दल राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और असैनिक अधिकारियों द्वारा जारी खोज अभियान में शामिल हुआ। इस खोज अभियान में 28 अप्रैल, 2019 को मणिपुर के कामजोंग जिले में मापीथेल डैम के जलाशय में तूफान के दौरान नाव डूबने से 12 कार्मिकों में से 3 लापता कार्मिकों की तलाश की जा रही है।
॥●॥ भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय निदेशालय द्वारा "स्पेस वारफेयर और टेक्नोलॉजी" पर कार्यशाला
भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय (आईडीयू) निदेशालय 02-03 मई, 2019 को पर्पल बे, इंडिया गेट सर्कल, नई दिल्ली में तीनों सेवाओं के वरिष्ठ और मध्य स्तर के अधिकारियों के लिए "स्पेस वारफेयर एंड टेक्नोलॉजी" पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर रहा है। कार्यशाला में अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण और सैन्यीकरण जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा इसमें अंतरिक्ष संचालन में स्वयं के लिए उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी की लिए तैयारी, अंतरिक्ष नवाचार और प्रौद्योगिकी उपयोग, इनर्शल नेविगेशन सिस्टम और सेंसर, अंतरिक्ष सैन्य उपयोग के कानूनी पहलू, निर्माण क्षमता - प्रशिक्षण, मानव संसाधन और अनुसंधान तथा विकास, भारतीय सशस्त्र बलों के लिए स्पेस डोमेन और वे फॉरवर्ड में सलाहकार क्षमता जैसे विषय शामिल हैं।
हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीजेएस पन्नू स्वागत भाषण देंगे जिसके बाद एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीएस राजेश्वर का मुख्य भाषण होगा। इसके बाद उद्योग जगत, शिक्षाविदों, आईआईटी, इसरो, डीआरडीओ, थिंक टैंकों और सर्विसेज के प्रमुख वक्ता स्पेस वारफेयर एंड टेक्नोलॉजी के विभिन्न पहलुओं पर अपनी व्यावहारिक जानकारी तथा अनुसंधान को साझा करेंगे। इस कार्यशाला का आयोजन विशेष रूप से डिफेंस स्पेस एजेंसी को रेखांकित करने और तीन सेवाओं को अपनी क्षमताओं को विकसित करने के किया जा रहा है।
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