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नई दिल्ली, 01 मई 2019, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥●॥ सरकार ने आठ सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत बनाने के लिए जीआरएसई को 6300 करोड़ रुपये का ठेका दिया

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए आठ सबमरीन रोधी युद्धक सतही जल पोत (एएसडब्‍ल्‍यूएसडब्‍ल्‍यूसी) बनाने के लिए गार्डन रिच शिप बिल्‍डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) को ठेका दिया है। यह ठेका 6,311.32 करोड़ रुपये का है। इस पर रक्षा मंत्रालय की ओर से संयुक्‍त सचिव और खरीद प्रबंधक (मैरीटाइम प्राणाली) रविकांत तथा जीआरएसी की ओर से एस• एस• डोगरा निदेशक (वित्‍त) ने हस्‍ताक्षर किए।

भारतीय नौसेना ने अप्रैल 2014 में डीपीएसयू शिपयार्ड तथा इंडिया प्राइवेट शिपयार्ड को आरएफपी जारी किया और इसमें आठ एएसडब्‍ल्‍यूएसडब्‍ल्‍यूसी बनाने तथा सप्‍लाई के लिए जीआरएसई ने सफल बोली लगाई। ठेके पर हस्‍ताक्षर करने की तिथि से 42 महीने के अंदर पहला जहाज दिया जाएगा और बाकी जहाजों की डिलीवरी प्रति वर्ष दो जहाज के हिसाब से की जाएगी। परियोजना पूरी होने की अवधि आज से 84 महीने की होगी। पी17ए परियोजना के अंतर्गत भारतीय नौसेना के लिए अभी जीआरएसई तीन राडार से बचने वाले पोत बनाने का कार्य कर रही है।

जीआरएसई देश के लिए युद्धक जहाज बनाती है। 1960 में डीपीएसयू के रूप में जीआरएसई ने अब तक सबसे अधिक लड़ाकू जहाज बनाए हैं। अब तक बनाए गए एक सौ लड़ाकू पोतों में एडवांस जहाज सबमरीन रोधी युद्धक जलपोत फ्रेगट टैंकर, फास्‍ट अटैक पोत शामिल हैं। वर्तमान परियोजना से जीआरएसई की स्थिति और मजबूत होगी।

सतही जल में कार्य करने वाले सबमरीन रोधी जलपोत 750 टन भार के होंगे और इसकी गति 25 नॉट होगी। इसके अतिरिक्‍त इन जहाजों की क्षमता तटीय जल में सतही लक्ष्‍यों को भेदने की होगी।

ये जहाज अत्‍याधुनिक होंगे और इनमें प्रोपल्‍सन मशीनरी, सहायक मशीनरी, विद्युत उत्‍पादन और वितरण मशीनरी तथा क्षति नियंत्रण मशीनरी शामिल होगी।

जीआरएसई में इन जहाजों का डिजाइन और निर्माण भारत सरकार की मेक इन इंडिया का एक महत्‍वपूर्ण उदाहरण है।


॥●॥ सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज में राष्ट्रीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं की सराहना की

युवाओं के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी मुद्दों में एक रणनीतिक संस्कृति और रुचि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय सेना के थिंक टैंक (सीएलएडब्‍ल्‍यूएस), नई दिल्ली की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर एक राष्ट्रीय-स्तरीय निबंध-लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

सेना प्रमुख ने प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल सामान्य रूप से देश के नागरिकों और विशेष रूप से युवाओं के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जागरूकता को बढ़ावा देने में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


॥●॥ परिदृश्य निर्माण और प्रत्‍युत्‍तर पर साइबर अभ्‍यास

साइबर वारफेयर एंड टेक्नोलॉजी पर कार्यशाला के सफल आयोजन के बाद भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय निदेशालय की ओर से पर्पल बे, जोधपुर ऑफिसर्स होस्टल, नई दिल्ली में 29-30 अप्रैल, 2019 को परिदृश्य निर्माण और प्रत्‍युत्‍तर पर दो-दिवसीय साइबर अभ्यास का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सीखने के अनेक विषय उभरकर सामने आए। इस अभ्‍यास का प्रतिनिधित्व एनएससीएस, एनटीआरओ, सीईआरटी-इन, डीआरडीओ, एनआईसी, सीएसआरसी, एकेडेमिया और उद्योगजगत द्वारा किया गया। इस अभ्यास में उन सभी सर्वोत्तम प्रचलनों को शामिल किया जाएगा, जो स्थिति और स्वयं की क्षमता के आकलन के आधार पर समन्वित प्रतिक्रिया के निर्धारण के लिए विभिन्न स्तरों पर अभ्‍यास के विकल्पों के साथ साइबर कार्यशाला के दौरान अनुशंसित थे। अभ्यास के दायरे में खतरे का परिदृश्य और इसके प्रभाव, घटना की रिपोर्टिंग और प्रत्‍युत्‍तर की रूपरेखा, सूचना के आदान-प्रदान की प्रक्रिया, साक्ष्य एकत्र करने और दुर्भावनापूर्ण सेवा लेने, सूचना की रक्षा करने के लिए आवश्यक क्षमताओं में वृद्धि करने और सूचना प्रणाली, साइबर जागरूकता शामिल है।

एकीकृत रक्षा कर्मचारियों के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीएस राजेश्वर, एवीएसएम, वीएसएम ने दो-दिवसीय साइबर अभ्यास के लिए मुख्य भाषण दिया। हितधारकों से प्रतिक्रियाओं की तलाश करने के लिए परिदृश्यों की पेंटिंग के बाद यह किया गया था।

इस अभ्यास को भारतीय रक्षा विश्वविद्यालय के तत्वावधान में वार्षिक आधार पर आयोजित करने की योजना है, जिसमें भारतीय एजेंसियां ​​भी शामिल होंगी और बाद में दोस्ताना देशों की एजेंसियों से संयुक्त रूप से साइबर खतरों के खिलाफ क्षमता निर्माण किया जाएगा।

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