ई-वाणिज्‍य में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश 'एफडीआई' पर नीति की समीक्षा



नई दिल्ली, 26 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

ई-वाणिज्‍य सेक्‍टर की एफडीआई नीति पर स्‍पष्‍टीकरण के संबंध में समेकित एफडीआई नीति सर्कुलर 2017 का पैराग्राफ 5.2.15.2 अब इस प्रकार होगा:

5.2.15.2 ई-वाणिज्‍य गतिविधियां

सेक्‍टर/गतिविधि
% इक्‍विटी/एफडीआई कैप
प्रविष्‍टि

ई-वाणिज्‍य गतिविधियां
100%
स्‍वमेव

5.2.15.2.1 एफडीआई नीति के प्रावधानों के अनुरूप ई-वाणिज्‍य ने कहा है कि केवल व्‍यापार से व्‍यापार (बी2बी) ई-वाणिज्‍य में सम्‍मिलित होंगे और व्‍यापार से उपभोक्‍ता (बी2सी) ई-वाणिज्‍य में नहीं।

5.2.15.2.2 परिभाषाएं :

1. ई-वाणिज्‍य– ई-वाणिज्‍य का अर्थ डिजिटल और इलैक्‍ट्रॉनिक नेटवर्क पर सामानों और सेवाओं की खरीद और बिक्री है, जिसमें डिजिटल उत्‍पाद शामिल हैं।

2. ई-वाणिज्‍य निकाय- ई-वाणिज्‍य निकाय का मतलब कंपनी अधिनियम, 1956 या कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत निगमित कंपनी या कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (42) के दायरे में आने वाली विदेशी कंपनी या फेमा 1999 की धारा 2 (v) (iii) में उल्‍लेखित भारत में कार्यालय, शाखा या एजेंसी है, जिसे भारत के बाहर रहने वाले व्‍यक्‍ति द्वारा नियंत्रित किया जाय या वह उसका स्‍वामी हो तथा जो ई-वाणिज्‍य में सम्‍मिलित हो।

3. ई-वाणिज्‍य का माल-सूची आधारित स्‍वरूप- ई-वाणिज्‍य के माल-सूची आधारित स्‍वरूप का अर्थ ई-वाणिज्‍य गतिविधि है, जहां ई-वाणिज्‍य निकाय के स्‍वामित्‍व वाले सामानों और सेवाओं को सीधे उपभोक्‍ताओं को बेचा जाता है।

4. ई-वाणिज्‍य का बाजार आधारित स्‍वरूप- ई-वाणिज्‍य के बाजार आधारित स्‍वरूप का अर्थ किसी ई-वाणिज्‍य निकाय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी मंच प्रदान करना है, जो डिजिटल तथा इलेक्‍ट्रॉनिक नेटवर्क पर होगा, ताकि वह विक्रेता और क्रेता के बीच समन्‍वयक के रूप में कार्य कर सके।

5.2.15.2.3 ई-वाणिज्‍य सेक्‍टर में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश के लिए दिशा-निर्देश

1) ई-वाणिज्‍य के बाजार आधारित स्‍वरूप में स्‍वमेव प्रविष्‍टि के तहत शत प्रतिशत विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश की अनुमति।

2) ई-वाणिज्‍य के माल-सूची आधारित स्‍वरूप में एफडीआई की अनुमति नहीं।

5.2.15.2.4 अन्‍य शर्तें

1) डिजिटल और इलेक्‍ट्रॉनिक नेटवर्क में कम्‍प्‍यूटर, टेलीविजन चैनल और अन्‍य इंटरनेट एप्‍लीकेशन शामिल हैं, जो वेबपेज, एक्‍सट्रानेट, मोबाइल इत्‍यादि जैसे स्‍वमेव प्रणालियों में इस्‍तेमाल होते हैं।

2) बाजार आधारित ई-वाणिज्‍य निकायों को बी2बी आधार पर अपने प्‍लेटफॉर्म पर पंजीकृत विक्रेताओं के साथ लेनदेन में शामिल होने की अनुमति।

3) ई-वाणिज्‍य बाजार भंडारण, लॉजिस्‍टिक्‍स, कॉल सेंटर, भुगतान संग्रह और अन्‍य सेवाओं के संबंध में विक्रेताओं को सहयोगी सेवाएं प्रदान करेगा।

4. विपणन स्‍थान प्रदान कर रहे ई-वाणिज्‍य निकाय मालसूची यानी बेची जाने वाली वस्‍तुओं पर स्‍वामित्‍व अथवा नियंत्रण नहीं करेंगे। माल सूची पर इस तरह का स्‍वामित्‍व अथवा नियंत्रण व्‍यवसाय को मालसूची आधारित मॉडल बना देगा। विक्रेता की माल सूची ई-वाणिज्‍य विपणन बाजार द्वारा नियंत्रित होगी यदि ऐसे विक्रेता की खरीद का 25 प्रतिशत से अधिक विपणन के स्‍थल निकाय अथवा उसकी समूह कंपनियों से होगी।

5. ई-वाणिज्‍य विपणन स्‍थल निकाय द्वारा इक्विटी में भागीदारी वाले किसी निकाय अथवा उसकी समूह कंपनियों, अथवा ई-वाणिज्‍य विपणन स्‍थल निकाय अथवा उसकी समूह कंपनियों द्वारा मालसूची पर नियंत्रण वाली कंपनियों को ऐसे विपणन स्‍थल निकाय द्वारा चलाए जा रहे प्‍लेटफार्म पर अपने उत्‍पादों को बेचने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

6. वेबसाइट पर इलेक्‍ट्रॉनिक तरीके से बिक्री के लिए उपलब्‍ध मॉडल वस्‍तुओं/सेवाओं को विपणन स्‍थल में नाम, पता और बिक्रीकर्ता का अन्‍य संपर्क विवरण स्‍पष्‍ट रूप से देना होगा। बिक्री के बाद, ग्राहक तक वस्‍तुओं की डिलीवरी और ग्राहक की तसल्‍ली की जिम्‍मेदारी बिक्रीकर्ता की होगी।

7. विपणन स्‍थल मॉडल में, बिक्री का भुगतान भारतीय रिजर्व बैंक की दिशा-निर्देशों के अनुसार ई-वाणिज्‍य निकाय द्वारा की जा सकती है।

8. विपणन स्‍थल मॉडल में, किसी प्रकार की बेची गई वस्‍तुओं और सेवाओं की वारंटी/गारंटी बिक्रीकर्ता की जिम्‍मेदारी होगी।

9. विपणन का स्‍थान प्रदान करने वाले ई-वाणिज्‍य निकाय वस्‍तुओं अथवा सेवाओं के बिक्री मूल्‍य को प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष रूप से प्रभावित नहीं कर सकेंगे और उन्‍हें समान अवसर प्रदान करने की स्थिति को बरकरार रखना होगा। सेवाएं ई-वाणिज्‍य विपणन स्‍थल निकाय अथवा ऐसे अन्‍य निकायों द्वारा प्रदान की जानी चाहिए, जिनमें निष्‍पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से मंच पर विक्रेताओं के लिए ई-वाणिज्‍य विपणन स्‍थल निकाय की प्रत्‍यक्ष अथवा अप्रत्‍यक्ष इक्विटी भागीदारी अथवा सामान्‍य नियंत्रण हो। इस खंड के लिए, किसी विक्रेता को ऐसी शर्तों में सेवाओं का प्रावधान जो ऐसी ही परिस्थितियों में अन्‍य विक्रेता के लिए उपलब्‍ध नहीं है, उसे अनुचित और भेदभावपूर्ण माना जाएगा।

10. एफडीआई नीति के परिपत्र के पैरा 5.2.15.1.2 में दिए गए नकद और प्रभार थोक व्‍यापार के बारे में दिशा-निर्देश बी-2बी ई-वाणिज्‍य पर लागू होंगे।

11. ई-वाणिज्‍य विपणन स्‍थल निकाय किसी बिक्रीकर्ता को यह आदेश नहीं देते कि वह केवल अपने ही प्‍लेटफॉर्म पर किसी उत्‍पाद को विशेष रूप से बेचे।

12. ई-वाणिज्‍य विपणन स्‍थल निकाय की आवश्‍यकता भारतीय रिजर्व बैंक के सांविधिक ऑडिटर की रिपोर्ट के साथ एक प्रमाण पत्र देने के लिए होगी, जिसमें पिछले वित्‍त वर्ष के लिए हर वर्ष 30 सितम्‍बर तक उपरोक्‍त दिशा निर्देशों के पालन की पुष्टि होगी।

सेवा क्षेत्र के बारे में एफडीआई नीति की शर्तों के विषय में और लागू कानूनों/नियमों, सुरक्षा और अन्‍य शर्तों, ई-वाणिज्‍य के जरिए सेवाओं की बिक्री सहज मार्ग के अंतर्गत होगी।

उपरोक्‍त फैसला एक फरवरी, 2019 से प्रभावी होगा।

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