आयुर्वेद की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे है वैध बालेन्दु प्रकाश



---प्रदीप फुटेला, गदरपुर, 17 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

● पद्मश्री से सम्मानित हो चुके हैं बालेन्दु प्रकाश

● पेनक्रियाज कैंसर का अचूक इलाज है इनके पास

● अमेरिका में भी प्रस्तुत कर चुके हैं शोध पत्र

● कई जानी मानी हस्तियों का कर चुके है उपचार

वैद्य बालेन्दु प्रकाश का नाम आयुर्वेद के उन चुनिंदा वैद्यो में है जिन्होंने आयुर्वेद की प्राचीन परम्परा को अपने पिताश्री शशि चन्द्र प्रकाश की आयुर्वेदीय परंपरा को आगे बढ़ाया। वैद्य बालेन्दु प्रकाश को सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वैद्य बालेन्दु प्रकाश ने उत्तरप्रदेश एवं उत्त्तराखण्ड की सीमा पर शशि चन्द्र रसशाला को स्थापित किया है। इस रसशाला में ताजी जड़ी बूटियों से ‘अमर’, प्रेक् -20 जैसी दवाओं का निर्माण किया जा रहा है। वैद्य बालेन्दु की रसशाला में एक औषधि भस्म के निर्माण में लगभग एक से दो वर्ष का समय लगता है।

वैद्य बालेन्दु प्रकाश का नाम प्रोटोकोल विकसित कर आयुर्वेदिक चिकित्सा करने के एक नए तरीके को विकसित किया है। उनके द्वारा विकसित दवा स्नीजक्योर झंडू फार्मा द्वारा बाजार मे लाई जा रही है। वैद्य बालेन्दु प्रकाश द्वारा रसशाला के समीप ही प्रकाश डेयरी स्थापित की गई है जहां देशी एवं विदेशी नस्लों की 90 गायें सेवा हेतु रखी गई है। इससे ग्रामीणों को स्वरोजगार के भी अवसर मिल रहे हैं उनके द्वारा गदरपुर में पड़ाव आयुर्वेदिक़ चिकित्सा केंद्र स्थापित किया गया है जिसमें एक साथ सैकड़ो मरीजों के इंडोर भर्ती होने की सुविधा है। मरीजों की भर्ती के लिए डीलक्स, सेमीडीलक्स और सामान्य कमरे उपलब्ध किया जा रहा है। वैद्यजी द्वारा स्थापित उक्त आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र में पेंक्रियाटाइटिस के देश भर के मरीज भर्ती हैं।

इस चिकित्सा पद्धति के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में इस लाइलाज बीमारी का उपचार नहीं है लेकिन उन्होंने अपने पिता से प्राप्त आयुर्वेदिक नुस्खे को देखा तथा इससे कई पीड़ित रोगी पूरी तरह ठीक हुए है। उन्होंने बताया कि उनके पास 668 रोगी अब तक आये हैं जिनमे 319 मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं।

● सड़क निर्माण न होने से भड़के वैध बालेन्दु

पड़ाव अस्पताल के वैध बालेन्दु प्रकाश की पीड़ा उस समय सामने आई जब उन्होंने महतोष - नबाबगंज सड़क का मुद्दा उठाया उन्होंने कहा कि जब इस अस्पताल का शुभारंभ हुआ था तब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। उनके द्वारा सार्वजनिक रूप से इस सड़क का निर्माण करवाने की घोषणा की गई थी लेकिन आज तक इस सड़क की कोई सुध लेने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों का उपचार कर रहे हैं जो हर तरफ से निराश हो चुके है उन्हें अब जिंदगी में आशा की किरण दिखाई देने लगी है लेकिन सरकार की उदासीनता का आलम यह है कि वह एक सड़क का निर्माण नहीं कर पा रही है यह जनता का हक है वह कोई भीख नही मांग रहे है यदि शीघ्र ही सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ वह भी धरने पर बैठ जाएंगे।

● एक तीर्थ से कम नही है बालेन्दु की रसशाला

आज के दौर में ऐसे भी वैध है जिन्हें मरीजों को छूने से भी एक प्रकार की एलर्जी हो गई है इसे पेशेंट फोबीया नामकी बीमारी कहा जा सकता है, ऐसे वैद्यगण अपने मूल कार्य चिकित्सा से पूर्ण रूप विरत हो आयुर्वेद समाज को केवल वैद्य होने का छद्म आवरण ही प्रस्तुत कर रहे हैं। वैद्यजी की रसशाला एक आयुर्वेद का तीर्थ है जहां आयुर्वेद पुरातन रूप एवं आधुनिक रूप द्वय में जीवित है। यही वजह है कि वैध बालेन्दु द्वारा खोले गए इस अस्पताल में देश विदेश के हजारों मरीज पेन्क्रियाज केन्सर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करवाने हेतु पहुंच रहे हैं, इनमें मासूम बालक एवं युवा अधिक हैं जिन्हें एक उम्मीद की किरण जगी है।

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