नई दिल्ली, 12 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने मंगलवार 11 दिसम्बर को नई दिल्ली में तमिलनाडु में पर्यटन उद्योग का विकास करने तथा पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए 31 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये।
पर्यटन अवसंरचना विकास निवेश कार्यक्रम के लिए समझौते की चौथी किश्त पर भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामले विभाग के अपर सचिव समीर कुमार खरे (फंड बैंक और एडीबी) तथा एशियाई विकास बैंक की ओर से भारत में बैंक के निदेशक केनिची योकोयामा ने हस्ताक्षर किये।
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद श्री खरे ने कहा कि इस परियोजना से तमिलनाडु में पर्यटन अवसंरचना बेहतर होगी और इससे राज्य में प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर श्री योकोयामा ने कहा कि पर्यटकों की संख्या बढ़ने से तमिलनाडु में अतिरिक्त रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। इससे गरीबों और महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण तथा सामुदायिक गतिविधियों के जरिए लाभ प्राप्त होगा।
सितंबर 2010 में मंजूर 250 मिलियन डॉलर आईडीआईपीटी ऋण का लक्ष्य है-तमिलनाडु के अतिरिक्त पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय समुदायों के लिए अवसरों का निर्माण करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देना। इस लक्ष्य को प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत के स्थलों का विकास व संरक्षित करके प्राप्त किया जाएगा। पर्यटन स्थलों के आस-पास अवसंरचना का विकास किया जाएगा। इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी और पर्यटन-क्षमता का निर्माण होगा।
भारत सरकार ने विकास और रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए पर्यटन, यात्रा और सेवा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी है और इसके लिए त्रिवर्षीय (2017-2018 से 2019-2020) कार्ययोजना तैयार की गयी है। इस कार्य योजना में भारत के संभावना वाले तीन क्षेत्रों की पहचान की गयी है। (क) आगंतुकों की संख्या (ख) सांस्कृतिक उद्योग को मजबूती प्रदान करते हुए वैश्विक उपस्थिति को बेहतर बनाना (ग) आबादी के गरीब तबकों के बीच बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों को सृजित करने के लिए क्षमता निर्माण। कार्य योजना के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गयी है। इनमें शामिल हैं- अवसंचना, विपणन और कौशल विकास। इन सभी को एमएफएफ रोड़ मैप से जोड़ा गया है।
इस परियोजना से 8 विरासत स्मारकों, एक म्यूजियम, तीन मंदिरों तथा एक तालाब को संरक्षित किया जाएगा और इनका पुर्नउद्धार किया जाएगा। पर्यटन स्थलों पर विभिन्न तरह की सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा, जैसे सूचना केन्द्र, विश्राम केन्द्र व शौचालय आदि। इन सुविधाओं में सौर ऊर्जा की आपूर्ति की जाएगी। इस परियोजना की कुल लागत 44.04 मिलियन डॉलर है। इस राशि में भारत सरकार का योगदान 13.04 मिलियन डॉलर रहेगा। अनुमान है कि जून 2020 में यह परियोजना पूरी हो जाएगी।
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