नई दिल्ली, 10 दिसम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ सरकार ने कल से प्रारंभ होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सभी दलो के नेताओं के साथ बैठक की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सरकार संसद के दोनों संदनों में राजनीतिक दलों द्वारा उठाये जाने वाले राष्ट्रीय महत्व के सभी विषयों पर विचार विमर्श करने को तैयार हैं। नरेन्द्र मोदी कल से प्रारंभ होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र-2018 से पहले राज्यसभा और लोकसभा में राजनीतिक दलों के नेताओं को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों को शीतकालीन सत्र में सकारात्मक माहौल बनाने तथा लोक कल्याण से संबंधित विषयों का सामूहिक समाधान निकालने के लिए प्रोत्साहित किया।
‘प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का सुचारू रुप से कामकाज सुनिश्चित करते हुए देश और जनता की सेवा के लिए योगदान करने के हम लोगों का प्राथमिक दायित्व है।‘
सभी नेताओं ने पूर्व मंत्री एच एन अनंत कुमार को श्रृंद्धाजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने बाधारहित ढंग से संसद का कामकाज सुचारूरप से सुनिश्चत करने तथा संसद के दोनों संदनों में सकारात्मक विचार विमर्श के माध्यम से गतिरोध समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केन्द्रीय संसदीय कार्य, ग्रामीण विकास पंचायती राज तथा खान मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने संसद के दोनों संदनों का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों, विशेष कर विपक्षी दल, से सहयोग का अनुरोध किया है।
श्री तोमर ने बताया कि शीतकालीन सत्र में सभी दलों ने कामकाज सुचारू रूप से चलाने के पक्ष में राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार प्रक्रिया नियमों के अंतगर्त किसी भी विषय पर संदन में विचार विमर्श के लिए तैयार है।
श्री तोमर ने बताया कि संसद का शीतकालीन सत्र 2018 मंगलवार 11 दिसंबर 2018 से प्रारंभ होगा और सत्र 8 जनवरी 2019 को समाप्त होगा। उन्होंने बताया कि 29 दिन के सत्र में संसद की 20 बैठकें होंगी। शीतकालीन सत्र-2018 के दौरान 46 विषयों (इसमें 45 विधेयक तथा एक वित्तीय विषय शामिल हैं) पर चर्चा होगी।
शीतकालीन सत्र में (1) मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) अध्यादेश, 2018 (2) भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2018 तथा (3) कंपनी संशोधन अध्यादेश 2018 का स्थान तीन विधेयक लेंगे।
शीतकालीन सत्र में कुछ महत्वपूर्ण लंबित विधेयकों पर चर्चा होगी और उन्हें पारित किया जाएगा। ये विधेयक हैं (1) दंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक, 2017 (2) उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018 (3) नई दिल्ली अंतरार्ष्ट्रीय मध्यस्थता केन्द्र विधेयक, 2018 (4) सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जा खाली कराना) संशोधन विधेयक, 2017 (5) किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2018 (6) डीएनए टैक्नालोजी (उपयोग और एप्लीकेशन) नियमन विधेयक, 2018 (7) प्रमुख बंदरगाह प्राधिकार विधेयक, 2016 (8) व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, संरक्षण तथा पुर्नवास) विधेयक, 2018 (9) ऑटिज्म सेरेब्रल पाल्सी, मंदबुद्धि तथा विविध दिव्यांगता (संशोधन) विधेयक, 2018 तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग 2017 हैं। इस सत्र में अध्यादेशों के स्थान पर लाये जाने वाले तीन विधेयकों के अतिरिक्त कुछ महत्वपूर्ण विधेयक पर प्रस्तुत किये जा सकते हैं, उन पर विचार विमर्श हो सकता है और उन्हें पारित किया जा सकता है। ऐसे विधेयक हैं (1) भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएम) विधेयक, 2018 (2) होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीएच) विधेयक, 2018 (3) विमान संशोधन विधेयक, 2018 (4) जालियान वाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2018) (5) सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) विधेयक, 2018 (6) संबंद्ध तथा स्वास्थ्य देखभाल पेशा विधेयक, 2018 और (7) केन्द्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2018
सर्वदलीय बैठक में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त और कारपोरेट मामलों के मंत्री अरूण जेटली, संसदीय कार्य तथा सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन राज्य मंत्री विजय गोयल, संसदीय कार्य तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा अन्य मंत्री उपस्थित थे।
शीतकालीन सत्र-2018 के दौरान संसद के दोनों संदनों में लाये जाने वाले सरकारी कार्य के विषय
प्रस्तुतीकरण विचार और पारित करने के लिए विधेयक
कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2018 (अध्यादेश के स्थान पर)
मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) विधेयक, 2018 (अध्यादेश के स्थान पर)
भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2018 (अध्यादेश के स्थान पर)
भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएम) विधेयक, 2018
होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनएच) विधेयक, 2018
योग तथा प्राकृतिक चिकित्सा के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीवाईएन) विधेयक, 2018
भारतीय औषधि तथा होम्योपैथी फार्मेसी परिषद विधेयक, 2018
विमान (संशोधन) विधेयक, 2018
राष्ट्रीय डिजाईन संस्थान (एनआईडी) (संशोधन) विधेयक, 2018
जालियानवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2018
मेरिटाईम पायरेसी रोधी विधेयक, 2018
सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) विधेयक, 2018
भारतीय स्टैम्प (संशोधन) विधेयक, 2018)
राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यशीलता तथा प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम) विधेयक, 2018
संबंद्ध तथा स्वास्थ्य देखभाल पेशा विधेयक, 2018
गैर-कानून गतिविधि (रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2018
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (संशोधन) विधेयक, 2018
बांध सुरक्षा विधेयक, 2018
केन्द्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2018
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान तथा प्रशिक्षण विधेयक, 2018
विचार और पारित करने के लिए बिल
लोकसभा में लंबित बिल
अनियमित जमा योजना विधेयक, 2018 पर प्रतिबंध
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2018
लोक परिसर (अनधिकृत कब्जा खाली कराना) संशोधन विधेयक, 2017
दंत चिकित्सक (संशोधन) विधेयक, 2017
उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018
नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2018
एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (संशोधन) विधेयक, 2018
किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2018
डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और ऐप्पलीकेशन) विनियमन विधेयक, 2018
मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018
व्यक्तिगत कानून (संशोधन) विधेयक, 2018
ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, 2016
सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, 2016
प्रमुख बंदरगाह प्राधिकरण विधेयक, 2016
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2017
चिट फंड (संशोधन) विधेयक, 2018
राज्यसभा में लंबित बिल
लोक सभा द्वारा पारित व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018
लोक सभा द्वारा पारित शिक्षक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2018
लोक सभा द्वारा पारित जन प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक, 2018
लोक सभा द्वारा पारित मध्यस्थता और समझौता (संशोधन) विधेयक, 2018
ऑटिज़्म, सेरेब्रल पाल्सी मानसिक मंदता और विविध दिव्यांगता के शिकार व्यक्तियों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय ट्रस्ट (संशोधन) विधेयक, 2018
लोक सभा द्वारा पारित बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2018
लोकसभा द्वारा पारित मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2017
वित्तीय कामकाज
2018-19 के लिए पूरक अनुदान मांग (रेलवे समेत) की दूसरी बैच।
वापसी के लिए बिल
राज्यसभा में मुस्लिम महिलाएं (विवाह अधिकारों संरक्षण) विधेयक, 2017,
नालंदा विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2013
॥■॥ सत्तारुढ़ और विपक्षी दलों ने राज्यसभा के शीतकालीन सत्र के सुचारु संचालन में पूरे सहयोग का दिया आश्वासन : सभी को एक समान समय दिए जाने की अपील की राज्यसभा के सभापति ने सत्र के सुचारू संचालन के लिए सभी का सहयोग मांगा
सत्तारुढ़ और विपक्षी दलों ने कल से शुरु हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के सुचारु संचालन में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम• वेंकैया नायडू को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली और विपक्षी दल के नेता गुलाम नबी आजाद ने सत्र के पहले आज श्री नायडू द्वारा बुलाई गई बैठक में उन्हें सदन के कामकाज को लेकर हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया और इसके साथ ही सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले विधायी प्रस्तावों के साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए एक समान समय आंवटित करने का अनुरोध भी किया।
बैठक में श्री नायडू ने सभी नेताओं से शीतकालीन सत्र को सार्थक बनाने में सहयोग देने की अपील करते हुए कहा कि वह इसमें उनकी मदद करने के साथ ही अपने अहम सुझाव भी दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को सदन में अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह काम शांतिपूर्वक होना चाहिए ताकि कार्यवाही में किसी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।
श्री नायडू ने 5 राज्यों के हाल में सम्पन्न विधान सभा चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं के हिस्सा लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए निर्वाचन आयोग और संबंधित राज्यों की सरकारों को बधाई दे हुए कहा कि यह संसदीय लोकतंत्र पर लोगों के विश्वास का एक और प्रमाण है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से लोगों की आशाओं के अनुरूप काम करने का अनुरोध किया।
उपराष्ट्रपति ने बैठक में आए नेताओं को बताया कि सदस्यों द्वारा सदन में नोटिस लाने के लिए शुरू की गई ऑनलाइन व्यवस्था ई-नोटिस को और प्रभावी बनाने के लिए अब नोटिस सुबह 10 बजे की बजाय 9.30 बजे दिया जा सकेगा। इससे उन्हें उपलब्ध समय में ऐसे नोटिसों की प्राथमिकता तय करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।
वित्त मंत्री और सदन के नेता अरूण जेटली ने कहा कि जहां तक सरकार का सवाल है हम किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों को बोलने के लिए बराबर का समय मिलना चाहिए।
सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि सत्र में कामकाज हो और सभी विधेयक पारित हो जाएं। लोगों की उम्मीदें तभी पूरी हो पाएंगी जब हम उनसे जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी तरीके से उठा सकेंगे। संसद का शीतकालीन सत्र पिछले सत्र के पूरे चार महीने बाद हो रहा है। ऐसे में विपक्ष चाहता है कि इसमें सभी महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हो जाए। बैठक में सभी पक्षों में इस बात पर भी सहमति बनी कि बुधवार को होने वाली कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विधेयकों पर चर्चा के लिए सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों को बराबर समय दिए जाने के मुद्दे पर एक दूसरे का ख्याल रखा जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि सदन की कार्यवाही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कल दिन भर के लिए स्थगित कर दी जाएगी।
श्री नायडू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश के अलावा मंत्री अरुण जेटली और नरेंद्र सिंह तोमर तथा विजय गोयल (भाजपा), गुलाम नबी आजाद (कांग्रेस), शरद पवार (एनसीपी), राम गोपाल यादव (एसपी), ए नवनीथकृष्णन (एआईएडीएमके), कनिमोझी (द्रमुक), डेरेक ओ`ब्रायन (टीएमसी), प्रसन्ना आचार्य (बीजेडी), सुखदेव सिंह ढिंडसा (एसएडी), वाई एस चौधरी (टीडीपी), वी विजयसाई रेड्डी (वाईएसआरसीपी), संजय सिंह (आप) और डी राजा (सीपीआई) सहित कुल 31 नेता उपस्थित थे।
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