बिहार व कर्नाटक के लिए : 200 व 75 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर



नई दिल्ली, 27 नवम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक ने बिहार में राजमार्गों के सुधार के लिए 200 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किये

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और भारत सरकार ने बिहार में करीब 230 किलोमीटर लंबे राजमार्गों को चौड़ा करने और उनमें सुधार के उद्देश्‍य से वित्‍तीय सहायता देने के लिए 26 नवम्‍बर, 2018 को नई दिल्‍ली में 200 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये। इन राजमार्गों को प्रत्‍येक मौसम की मार झेल सकने योग्‍य और सड़क सुरक्षा को ध्‍यान में रखकर बनाया जाएगा।

बिहार राज्‍य राजमार्ग III परियोजना (बीएसएचपी-III) के लिए ऋण समझौते पर भारत सरकार की ओर से वित्‍त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में अपर-सचिव (फंड बैंक और एडीबी) समीर कुमार खरे और एडीबी की ओर से एडीबी के इंडिया रेजीडेंट मिशन के प्रभारी अधिकारी राजीव पी• सिंह ने हस्‍ताक्षर किये। परियोजना समझौते पर बिहार सरकार के रेजीडेंट कमीश्‍नर विपिन कुमार और बिहार राज्‍य सड़क विकास निगम लिमिटेड के मुख्‍य महाप्रबंधक चन्‍द्र शेखर ने हस्‍ताक्षर किये।

ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के बाद श्री खरे ने कहा कि इस ऋण से राज्‍य के सभी राजमार्गों में सुधार के बिहार सरकार के प्रयासों को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे बेहतर सम्‍पर्क के लिए सुधार और सड़क सुरक्षा के साथ कम से कम दो लेन वाली सड़कों के मानक को पूरा किया जा सकेगा।

श्री सिंह ने कहा कि नये ऋण से बिहार में सड़क क्षेत्र के विकास में एडीबी का सहयोग जारी रहेगा। परियोजना के अंतर्गत सुधरी हुई सड़कों से वाहनों की संचालन लागत और समय बचाने, वाहनों से उत्‍सर्जन कम करने और सड़क सुरक्षा में सुधार हो सकेगा। परियोजना के तहत एक राज्‍य स्‍तर के सड़क अनुसंधान संस्‍थान की स्‍थापना की जाएगी, ताकि सड़क एजेंसी कर्मचारियों की तकनीकी और प्रबंध क्षमता में सुधार लाया जा सकें।

एडीबी 2008 से अब तक बिहार में करीब 1,453 किलोमीटर लंबे राजमार्ग के सुधार और पटना के नजदीक गंगा नदी पर एक नये पुल के निर्माण के लिए 1.43 अरब डॉलर के चार ऋण प्रदान कर चुका है।

एडीबी बोर्ड द्वारा इस वर्ष अक्‍टूबर में मंजूर बीएसएचपी-III परियोजना में राज्‍य राजमार्गों में सुधार कर उन्‍हें सड़क सुरक्षा के साथ दो लेन वाले राजमार्गों में बदलना और पुलियाओं और पुलों का पुनर्निर्माण, उन्‍हें चौड़ा करना और मजबूत बनाना शामिल है। इस परियोजना से सड़क डिजाइन और रखरखाव के लिए राज्‍य की संस्‍थागत क्षमता का निर्माण होगा और राज्‍य के सड़क उपक्षेत्र का रखरखाव हो सकेगा और उसमें उपयुक्‍त नई प्रौद्योगिकी को शामिल किया जा सकेगा।


॥■॥ भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कर्नाटक के चार नगरों में शहरी सेवाओं को बेहतर करने के लिए 75 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर किए

भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने कर्नाटक के चार तटीय शहरों कुंडापुरा, मंगलोर, पुत्तुर एवं उडूपी में चौबीसों घंटे जलापूर्ति मुहैया कराने और मंगलोर शहर में स्‍वच्‍छता से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को बेहतर करने के लिए नई दिल्‍ली में 75 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्‍ताक्षर कि‍ए।

कर्नाटक एकीकृत शहरी जल प्रबंधन निवेश कार्यक्रम से संबंधित दूसरी किस्‍त वाले ऋण समझौते पर भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में अपर सचिव (फंड बैंक एवं एडीबी) समीर कुमार खरे और एशियाई विकास बैंक की ओर से एडीबी के भारत निवासी मिशन के डिप्‍टी कंट्री डायरेक्‍टर सब्‍यसाची मित्रा ने हस्‍ताक्षर किए।

एडीबी के बोर्ड द्वारा वर्ष 2014 में मंजूर किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्‍य कर्नाटक की चुनिंदा नदी घाटियों में शहरी जल संसाधन के प्रबंधन को बेहतर करना है। शहरी जलापूर्ति एवं स्‍वच्‍छता से जुड़े बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण एवं विस्‍तारीकरण के जरिए यह कार्य पूरा किया जाएगा। इसका एक उद्देश्‍य संबंधित संस्‍थानों को सुदृढ़ बनाना भी है, ताकि जल उपयोग से जुड़ी दक्षता एवं जल संसाधन से संबंधित नियोजन, निगरानी और सेवा डिलीवरी व्‍यवस्‍था को बेहतर बनाया जा सके। 75 मिलियन डॉलर के पहली किस्‍त वाले ऋण से इस राज्‍य के तीन अन्‍य शहरों अथवा कस्‍बों यथा बयादगी, देवनगेरे और हरिहर में शहरी जलापूर्ति एवं स्‍वच्‍छता सेवाओं से जुड़ी व्‍यवस्‍था को सुदृढ़ करने में मदद मिल रही है।

निवेश कार्यक्रम से कर्नाटक के चार तटीय शहरों में रहने वाले लोगों को पाइपलाइन के जरिए निरंतर जलापूर्ति करने और जल के दक्ष एवं सतत उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। श्री खरे ने कहा कि इसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित स्‍मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली अपनाई जाएगी और जल संरक्षण एवं मांग प्रबंधन से जुड़े समुदाय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

श्री मित्रा ने कहा कि लगभग 10 लाख लोगों को पाइपलाइन के जरिए निरंतर जलापूर्ति करने के साथ-साथ बेहतर स्‍वच्‍छता सेवाएं मुहैया कराने के अलावा यह कार्यक्रम शहरी स्‍थानीय निकायों को दक्ष एवं उत्तरदायी शहरी जल सेवाप्रदाता बनने में भी मददगार साबित हो रहा है।

एशियाई विकास बैंक द्वारा इस राज्‍य में एक अन्‍य शहरी परियोजना में प्रायोगिक आधार पर शुरू की गई ‘प्रदर्शन आधारित निर्माण एवं परिचालन अनुबंध (पीबीसीओसी)’ विधि के प्रावधान से सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र के ऑपरेटर के बीच अपेक्षित जोखिम आवंटन के जरिए सतत रूप से जल सेवा प्रदान करने में मदद मिलेगी।

इस परियोजना से जुड़ी धनराशि का उपयोग जल शोधन उत्‍पादन क्षमता में लगभग 16 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की वृद्धि करने, लगभग 90 किलोमीटर लंबी नई जल पारेषण लाइनों एवं फीडर मेन लाइनों को बिछाने, 29 ओवरहेड टैंकों एवं जमीनी स्‍तर के चार वितरण जलाशयों का निर्माण करने और जल प्रवाह तथा जल दबाव के केन्‍द्रीय पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण व्‍यवस्‍था को मजबूत करने के लिए शहर स्‍तरीय पर्यवेक्षी नियंत्रण व डेटा अधिग्रहण प्रणाली स्‍थापित करने में किया जाएगा। अन्‍य कार्यों में 1,300 किलोमीटर लंबा वितरण नेटवर्क और नए मीटरों के साथ लगभग 1,40,000 घरेलू कनेक्‍शनों का प्रावधान शामिल हैं। मंगलोर में नए सिरे से सीवरेज प्रणाली की बेहतरी सुनिश्चित करने के लिए लगभग 11 किलोमीटर लंबी पंपिंग मेन लाइनें स्‍थापित की जाएंगी।

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