मंत्रिमंडल द्वारा दी गयी मंजूरी



• मंत्रिमंडल ने कांडला पोर्ट का नाम बदलकर दीनदयाल पोर्ट किए जाने को मंजूरी दी

04 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कांडला पोर्ट का नाम बदलकर दीन दयाल पोर्ट किए जाने को अपनी कार्येतर मंजूरी कर दी है। भारत में बन्दरगाहों के नाम प्राय: उन शहरों अथवा कस्बों के नाम पर रखे जाते थे जहां पर ये स्थिति हैं। तथापि, सरकार ने विशेष मामलों में पर्याप्त रूप से विचार करने के उपरान्त अतीत में बन्दरगाहों के नाम बदलकर महान नेताओं के नाम पर रखा है। कांडला पोर्ट का नाम ‘दीनदयाल पोर्ट कांडला’ किए जाने से राष्ट्र के इस महानतम सपूत पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा किए गए अमूल्यं योगदान को याद करते हुए कृतज्ञता प्रकट करेगा। इससे गुजरात के लोग, विशेषकर युवाजन को प्रेरणा हासिल होगी जो महान नेताओं द्वारा किए गए योगदान से भली-भांति परिचित नहीं होते।

पृष्ठीभूमि:-
गुजरात, विशेषकर कच्छ जिले में विभिन्न संगठनों द्वारा जनता से यह मांग प्राप्त हो रही थी कि ‘कांडला पोर्ट’ का नाम बदलकर दीनदयाल पोर्ट कांडला कर दिया जाए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय (25.09.1916-1.2.1968) एक प्रमुख नेता थे जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित करने का संकल्प लिया था। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्री को अर्पित किया और जन सामान्य के बीच काम किया और इसके साथ ही उन्होंने निर्धन और मेहनतकश वर्ग के उत्थान के लिए स्वयं को अर्पित एवं बलिदान कर दिया। सहिष्णुता, अनुशासन, नि:स्वार्थता की नींव पर लोकतंत्र के मूल्यों की स्थापना और देश के कानून के प्रति सम्मान यह सभी उनके क्रियाकलाप “एकात्म मानववाद’’ के सिद्धांतों पर आधारित थे। वे आजीवन लोकतंत्र के भारतीयकरण, जन सामान्य के विचारों के सम्मान, नि:स्वार्थ एवं देश के कानून के प्रति सम्मान के लिए अथक रूप से काम करते रहें। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपना सम्पूर्ण जीवन जन सेवा और सादगी, ईमानदारी एवं गरीब लोगों और दलितों के लिए नि:स्वार्थ सेवा के लिए अर्पित कर दिया।

चूंकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी 25 सितंबर, 2017 को मनाई जानी थी, अत: यह महसूस किया गया कि इस महान राष्ट्रीय नेता की जन्म शताब्दी आयोजन के एक अंग के रूप में कांडला पोर्ट का नाम दीनदयाल पोर्ट किए जाने के सम्बंकध में निर्णय लिया जाना सर्वथा उपयुक्त होगा।


• मंत्रिमंडल ने भारत और लिथुआनिया के बीच प्रत्यबर्पण संधि को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और लिथुआनिया के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर और इसकी पुष्टि को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। इस संधि में आतंकवादियों, आर्थिक अपराधियों और अन्य अपराधियों के लिथुआनिया से भारत और भारत से लिथुआनिया को प्रत्यर्पण किए जाने हेतु कानूनी फ्रेम वर्क उपलब्ध हो सकेगा। इस संधि से लिथुआनिया से आतंकवादियों सहित भगोड़े अपराधियों के आपराधिक अभियोजन हेतु प्रत्यारोपण में मदद मिलेगी, जो भारत के खिलाफ आपराधिक गतिविधियां कर चुके हैं। इससे बड़े पैमाने पर लोगों में शांति एवं सामंजस्य सुनिश्चित करने की दृष्टि से अपराधियों को न्याचय दिलाया जा सकेगा।


• मंत्रिमंडल को रेल क्षेत्र में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच तकनीकी सहायता के संबंध में समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बारे में अवगत कराया गया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए भारत गणराज्य के रेल मंत्रालय और स्विस कंफेडरेशन के फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ द इनवायरमेंट, ट्रांसपोर्ट, एनर्जी एण्ड कम्यूनिकेशन्स के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बारे में अवगत कराया गया। इस एमओयू पर 31 अगस्त, 2017 को हस्ताक्षर किए गए थे।

इस समझौता ज्ञापन से निम्नसलिखित क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग प्राप्त होगा:-
क. कर्षण चल स्टॉस
ख. ईएमयू तथा ट्रेन सेट्स
ग. कर्षण प्रोपल्शन उपकरण
घ. फ्रेट और पैसेंजर कार
ङ. टिल्टिंग ट्रेन
च. रेल विद्युतीकरण उपकरण
छ. रेलगाड़ी शिड्यूलिंग और परिचालन में सुधार
ज. रेलवे स्टेशन आधुनिकरण
झ. मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट
ञ. सुरंग बनाने संबंधी प्रौद्योगिकी

पृष्ठभूमि

रेल मंत्रालय ने विभिन्नन विदेशी सरकारों और राष्ट्रीय रेलों के साथ रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। सहयोग के चिन्हित क्षेत्रों में अन्य बातों के साथ-साथ हाई स्पीड कॉरिडोर, मौजूदा मार्गों की गति बढ़ाना, विश्वस्तरीय स्टेशनों को विकसित करना, भारी कर्षण का परिचालन और रेल अवसंरचना का आधुनिकीकरण आदि शामिल है। यह सहयोग रेलवे के प्रौद्योगिकी और परिचालन क्षेत्र में विकासात्मिक कार्यों की सूची का आदान-प्रदान करके, आपस में जानकारी साझा करके, तकनीकी दौरा करके, प्रशिक्षण और आपसी हितों के क्षेत्रों में सेमिनारों और वर्कशॉपों का आयोजन करके प्राप्त किया जाता है।

ये समझौता ज्ञापन भारतीय रेलवे को रेल क्षेत्र में हुए नवीनतम विकासात्मक कार्यों और आपस में जानकारी बांटने का प्लेयटफॉर्म उपलब्धर कराते है। इन समझौता ज्ञापनों से तकनीकी विशेषज्ञों, रिपोर्टों और तकनीकी प्रलेखों के आदान-प्रदान, प्रशिक्षण और सेमिनारों/वर्कशॉपों, जिनमें विशिष्ट प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है और आपस में अन्य जानकारी बांटने के लिए सम्पर्क मुहैया होता है।

• मंत्रिमंडल ने यमेथिन, म्यांनमार स्थित महिला पुलिस प्रशिक्षण केंद्र के उन्नियन संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने यमेथिन, म्यांमार स्थित महिला पुलिस प्रशिक्षण केन्द्रं के उन्नयन संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अपनी कार्येतर मंजूरी प्रदान कर दी है। इस एमओयू पर 6 सितम्बनर, 2017 को हस्ताएक्षर हुए थे।

इस एमओयू में भारत सरकार से तकनीकी एवं वित्तीय सहायता के साथ म्यांमार सरकार की क्षमताओं में और वृद्धि के लिए यमेथिन महिला पुलिस प्रशिक्षण केंद्र का उन्नायन किया जाना शामिल है।

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