आरबीआई अधिनियम की रूपरेखा के अंतर्गत केन्द्रीय बैंक की स्वायत्तता गवर्नेंस से जुड़ी एक अनिवार्य एवं अविवादित आवश्यकता है



नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

सरकार का कहना है, ‘आरबीआई अधिनियम की रूपरेखा के अंतर्गत केन्द्रीय बैंक की स्वायत्तता गवर्नेंस से जुड़ी एक अनिवार्य एवं अविवादित आवश्यकता है। देश में विभिन्न सरकारों ने इसे ध्यान में रखा है और इसका सम्मान किया है। सरकार एवं केन्द्रीय बैंक दोनों ही अपने कामकाज में जन हित और भारतीय अर्धव्यवस्था की आवश्यकताओं से निर्देशित होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए समय-समय पर सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अनेक मुद्दों पर विस्तार से सलाह-मशविरा करते हैं। यह बात अन्य नियामकों के लिए भी सही है। भारत सरकार ने इस तरह के पारस्परिक सलाह-मशविरा की विषय-वस्तु को कभी भी सार्वजनिक नहीं किया है। केवल अंतिम निर्णयों के ही बारे में जानकारी दी जाती है। सरकार इस तरह से होने वाले सलाह-मशविरा के जरिये विभिन्न मुद्दों पर अपने आकलन को प्रस्तुत करती है और संभावित समाधान सुझाती है। सरकार आगे भी इसी तरह से कदम उठाती रहेगी।

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