नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
उपराष्ट्रपति एम• वेंकैया नायडू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री एक अनुकरणीय नेता थे। उनके नैतिक मूल्य, नम्रता, साहस, सत्यनिष्ठा और दृढ़ संकल्प शक्ति महान थी। श्री नायडू लोक सोमवार 22 अक्टूबर को प्रशासन के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए फली एस नरीमन को 19वां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान करने के अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे।
स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लेने से लेकर देश का प्रधानमंत्री बनने तक की शास्त्री जी की जीवन यात्रा की अहम उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनकी नेतृत्व क्षमता और देश की जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता की सराहना की। उन्होंने एक रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शास्त्री जी द्वारा रेल मंत्री के पद से त्याग पत्र देने की घटना को याद करते हुए कहा कि उनका यह गुण उनकी नैतिकता और सत्य निष्ठा का अनुपम उदाहरण है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भविष्य को लेकर शास्त्री जी की सोच स्पष्ट थी। अपने प्रिय राष्ट्र की क्षमता पर उनका दृढ़ विश्वास था और यह मानते थे कि तमाम बाधाओं के बावजूद देश मजबूत बना रहेगा। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी के प्रधानमंत्री रहने के दौरान कई घटनाक्रम हुए। उन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के अशांत समय में भी देश को आगे ले जाने के लिए हरित और श्वेत क्रांति को बढ़ावा दिया।
श्री नायडू ने कहा कि शास्त्री जी बाहर से जितने नम्र और सरल थे अंदर से उतने ही सख्त और साहसी व्यक्तित्व वाले थे। देश की सुरक्षा और राष्ट्र हित के लिए कई अवसरों पर उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ कठोर फैसले लिए।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों के बीच नैतिक मूल्यों और समाज के प्रति जवाबदेही के गुण विकसित करने तथा जन कल्याण के शास्त्री जी के विजन को आगे बढ़ाने में योगदान के लिए लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान की सराहना की। उन्होंने लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए 19वां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने के लिए फली एस नरीमन को बधाई दी और विधि के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
श्री नायडू ने कहा कि कानून का पेशा एक जन सेवा है। न्यायालय से अधिकारियों की जनता के प्रति कुछ जवाबदेही होती है। उन्होंने कहा कि श्री नरीमन कानून के पेशे से जुड़े लोगों के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। श्री नरीमन ने न्याय की भावना को संजोय रखने और अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा सत्यनिष्ठ रहे हैं।
पुरस्कार समारोह में उपस्थित युवाओ को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश को आज ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जिसकी भविष्य के प्रति सोच बिल्कुल स्पष्ट हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के युवा राष्ट्र को एक समग्र विकास के पथ पर आगे ले जाएंगे। उन्होंने युवाओं से लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन से सीख लेने की अपील की और आशा व्यक्त की कि उस महान नेता का बलिदान और जीवन मूल्यों की शिक्षा भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। श्री नायडू ने कहा कि भौतिक वस्तुओं से लगाव की अपेक्षा अपने कार्यों के प्रति प्रेम युवाओं के लिए जीवन में आगे बढ़ने का प्रेरणा स्रोत होना चाहिए।
इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ• मनमोहन सिंह, लाल बहादुर शास्त्री प्रबंधन संस्थान के अध्यक्ष अनिल शास्त्री, निदेशक प्रोफेसर डी• के• श्रीवास्तव, कई अधिकारी और छात्र तथा जाने माने राजनयिक भी उपस्थित थे।
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