• उपराष्ट्रपति एम० वैंकेया नायडू ने राजघाट में महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया
• गांधी जी के जीवन व उनके कार्यों पर संवादमूलक व्याख्या केन्द्र, आगंतुकों के लिए एक नया आकर्षण
02 अक्टूबर, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में राजघाट को पहली बार एक नयी विशेषता हासिल हुई है जो भारी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित करती है। भारत के उपराष्ट्रपति एम० वैंकेया नायडू ने आज स्वतंत्र भारत के शूरवीर की 148वीं जन्मशताब्दी पर महात्मा गांधी की 1.80 लम्बी कांस्य प्रतिमा अनावरण किया।
राम सुतार द्वारा तराशी गई प्रतिमा को राजघाट समाधि परिसर के पार्किग क्षेत्र में 8.73 लाख रूपये की लागत से स्थापित किया गया है। यह 2 फीट ऊँचे मूर्तितल पर ग्रेनाइट धातु में लिपटा हुआ है। मूर्तितल के सामने की दिशा में गांधी जी का प्रसिद्ध संदेश “जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वही बनो” को उत्कीर्ण किया गया है। प्रतिमा को स्थापित करना, गत तीन वर्षों में राजघाट में किए गए बहुसंख्य सुधार कार्यों का हिस्सा है।
प्रतिदिन 10 हजार लोग राजघाट आते है और विदेशी मान्यगण, सादे काले रंग के पत्थर के चबूतरे पर जहाँ गांधी जी का दाह संस्कार किया गया था, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते है। यह नई प्रतिमा उस महान आत्मा को सम्मान देने के लिए एक अन्य स्थान प्रदान करेगी।
उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने परिसर के पार्किग क्षेत्र में व्याख्या केन्द्र का उद्धाटन भी किया। 5.9 लाख की यह सुविधा एलईडी स्क्रीन पर डिजिटल डिसप्ले द्वारा महात्मा के जीवन और कार्यो के बारे में संवादमूलक व्याख्या सीखने की सुविधा प्रदान करती हैं। यह आने वाले आगंतुक चित्रपट, जीवन वृत्तांत देख सकते हैं, गांधीजी के भाषणों को सुन सकते हैं, प्रश्नोत्तरी में भाग लेने के अलावा कान फोन का प्रयोग बिना बाधा के बातचीत के लिए कर सकते हैं।
इस समाधि परिसर को नया प्रशासनिक खण्ड मिला है जो आगंतुक कक्ष, प्रकाशन इकाई, स्टाफ कक्ष, पेयजल सुविधा से सुसज्जित है जिसका उद्धाटन भी उपराष्ट्रपति ने किया। इसका निर्माण लगभग 75 लाख रूपये की लागत से किया गया हैं। पिछले तीन वर्ष के दौरान आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और राजघाट समाधि समीति ने राजघाट पर आगंतुकों के अनुभव को बढ़ाने के लिए बहुत से कार्यों को शुरू करने का दायित्व लिया हैं।
उपराष्ट्रपति एम० वैंकेया नायडू ने कहा कि गांधी जी के सपनों को समझने और ‘राम राज्य’ के लिए, जहां सभी बराबर है और किसी भी प्रकार का भेदभाव नही है, हमे साथ मिलकर प्रयत्न करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी के विचार अमर हैं, उनकी राम राज्य इच्छा को उचित रूप से समझना चाहिए और सरकार तथा लोगों को उस दिशा में अवश्य काम करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि राम राज्य का आदर्श शासन है, जहां कोई डर नहीं है, जहां कोई भूखा नहीं है, जहां कोई भ्रष्टाचार नहीं है, जहां कोई शोषण नहीं है, जहां कोई भेदभाव नहीं है। उन्होंने कहा विभिन्न स्तरों पर यह हमारा कर्तव्य है कि हम सभी महात्मा गांधी की अपेक्षाओं के अनुरूप रामराज्य के आदर्शों के लिए मिलजुल कर अवश्य कार्य करें।
इस अवसर पर आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी और अन्य मान्यगण व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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