नई-दिल्ली, 06 अक्टूबर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
देश में कुपोषण की चुनौतियों से निपटने और समग्र पोषण के महत्व के बारे में देशवासियों को संवेदनशील बनाने के लिहाज से पोषण अभियान के तहत सितंबर माह को पूरे देश में राष्ट्रीय पोषण माह के तौर पर मनाया गया। पोषण माह का उद्देश्य लोगों को पोषण की आवश्यकता के बारे में जागरूक करना और लोगों की पहुंच उन सरकारी सेवाओं तक बनाना है जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली माताओं के लिए पूरक आहार को बढ़ावा देती है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नोडल एजेंसी के तौर पर पूरे देश में 1 सितंबर, 2018 को राष्ट्रीय पोषण माह की शुरूआत की थीं। इसमें बच्चें के जन्म से पूर्व देखभाल, एनीमिया, बच्चे की वृद्धि की निगरानी, बच्चियों की शिक्षा, भोजन, विवाह के समय सही आयु, साफ-सफाई और स्वच्छता और खान-पान की आदतों को थीम के तौर पर लिया गया था। इन थीमों का प्रदर्शन भोजन मेलों, रैलियों, स्कूल स्तरीय अभियान, एनीमिया जांच शिविरों, रेडियों एवं टेलीविजन वार्ता शो तथा सेमीनार के जरिए किया गया था। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पूरे देश में जन-आंदोलन डेश बोर्ड पर 23 लाख गतिविधियां दर्ज की गई जहां लगभग 27 करोड़ लोगों ने इस राष्ट्र व्यापी कवायद में अपनी गतिविधियों के जरिए हिस्सा लिया।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव ने राजधानी में दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि पोषण माह को लेकर लोगों का जबर्दस्त उत्साह देखा गया और राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय मंत्रालयों का इस दौरान बेहतरीन समायोजन रहा ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर लोगों को इनका फायदा मिले। उन्होंने बताया कि डेश बोर्ड पर भारी संख्या में जन-आंदोलन और समुदाय आधारित कार्यक्रमों/गतिविधियों को अपलोड किया जाना इस बात का अनुपम उदाहरण है कि सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों से हर चीज हासिल की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि देशभर में लोगों के बीच इसे लेकर जो जागरूकता बनी है उसे बनाए रखने के लिए मंत्रालय बेहतर प्रदर्शन करने वालों को 10 अक्टूबर को पोषण पुरस्कारों से सम्मानित करेगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पोषण संस्थान अगले वर्ष भारत के पोषण स्तर पर एक रिपोर्ट जारी करेगा। इस रिपोर्ट में पोषण के विभिन्न मानकों को शामिल किया है और देश में पोषण के स्तर पर प्रायः पूछे जाने वाले सवालों और प्रतिक्रियाओं के बारे में इसका संकलन प्रति वर्ष किया जाएगा। उन्होंने बताय कि इस वर्ष दिसंबर तक चार लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आईसीडीएस-सीएएस से संबद्ध किया जाएगा।
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