प्रतिस्पर्धा अधिनियम की समीक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम समीक्षा समिति का गठन



नई-दिल्ली, 30 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

सशक्त आर्थिक आधारभूत ढांचे की आवश्यकता के लिए संबधित अधिनियम को समकालीन बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम की समीक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम समीक्षा समिति का गठन किया है।

वर्ष 2002 में प्रतिस्पर्धा अधिनियम पारित के बाद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की स्थापना की गई। वर्ष 2009 से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कार्य करना प्रारंभ किया और देश में प्रतिस्पर्धा के विकास और बाजार में उचित नीतियों के प्रयोग के प्रति सराहनीय कार्य किया। गत 9 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से वृद्धि हुई है और आज भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है और इसके और प्रगति करने की आशा है। इस संदर्भ में प्रतिस्पर्धा अधिनियम को सशक्त करने और नागरिकों को सर्वश्रेष्ठ नियमों द्वारा उनके द्वारा दिए गए मूल्यों के अनुरूप गुणवत्ता को प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा अधिनियम को सशक्त करने की आवश्यकता है।

● समीक्षा समिति के सदस्य :

•सचिव, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय - अध्यक्ष
• अध्यक्ष, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) – सदस्य
• अध्यक्ष, भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड - सदस्य
• हैग्रिव खेतान, मैसर्स खेतान एंड कंपनी- सदस्य
• हर्ष वर्धन सिंह, आईकेडीएचवीएजे एडवाईजर्स एलएलपी- सदस्य
• मैसर्स शार्दुल अमरचंद्र मंगलदास एंड कंपनी
• डॉ• एस• चक्रवर्ती, आईएएस (सेवानिवृत्त), विजिटिंग प्रोफेसर, एएससीआईआई- सदस्य
• आदित्य भट्टाचार्य, प्रोफेसर, इकानमिक्स- सदस्य, दिल्ली स्कूल ऑफ इकानमिक्स
• संयुक्त सचिव( प्रतिस्पर्धा) एमसीए, सदस्य सचिव

● समिति के संदर्भ निम्नलिखित है

• बदलते हुए व्यापारिक वातावरण के अनुरूप प्रतिस्पर्धा अधिनियम/नियम/नियमावली की समीक्षा करना और आवश्यकता होने पर अपेक्षित बदलाव करना
• प्रतिस्पर्धा क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ अंतराष्ट्रीय कार्यप्रणाली का अध्ययन करना। इसमे विशेष तौर पर साख विरोधी कानून, विलय दिशा-निर्देश और सीमा व्यापार प्रतिस्पर्धा मुद्दे सम्मिलित हैं।
• प्रतिस्पर्धा अधिनियम के साथ परस्पर व्याप्त अन्य नियामक व्यवस्था/संस्थागत प्रक्रिया/सरकारी नीतियो का अध्ययन करना
• प्रतिस्पर्धा विषय से जुडा कोई अन्य मुद्दा, जिसे समिति आवश्यक समझे।

समिति अपनी बैठक की तिथि से तीन महीने के भीतर अपना कार्य पूर्ण करेगी और रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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