नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ हवा से हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ बीवीआर मिसाइल का सफल हवाई परीक्षण
देश में तैयार की गई बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल (बीवीआरएएमएएम) 'अस्त्र' का आज भारतीय वायु सेना ने एसयू -30 लड़ाकू विमान के जरिए एयर फोर्स स्टेशन, कलाईकुंडा से सफलतापूर्वक परीक्षण किया। कृत्रिम लक्ष्य के साथ किया गया परीक्षण मिशन के सभी मानकों और उद्देश्यों पर खरा उतरा। अभी तक किए गए परीक्षणों की श्रृंखला में, ‘अस्त्र’ को पूरी तरह से एसयू- 30 लड़ाकू विमान से छोड़ा गया था। यह हवाई परीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पूर्व परीक्षणों की श्रृंखला का अंतिम हिस्सा था। ‘अस्त्र’ मिसाइल हथियार प्रणाली में सर्वश्रेष्ठ है और अभी तक इसके बीस से अधिक परीक्षण हो चुके हैं।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय वायुसेना, डीआरडीओ और मिशन में शामिल टीम के सदस्यों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने उन्नत हथियार प्रणालियों के स्वदेशी डिजाइन और विकास में शानदार क्षमता हासिल की है।
॥■॥ भारी बर्फबारी के चलते लेह और लाहौल घाटी में फंसे पर्यटकों को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) मानवीय सहायता प्रदान कर रहा है
हिमाचल प्रदेश में 22 से 24 सितम्बर के बीच हुई भारी बारिश और ऊंचाई वाले जगहों पर समय से पहले हुए हिमपात तथा बादल फटने के कारण राज्य के अधिकतर हिस्से तबाह हो गये हैं। कुल्लू जिला तथा लाहौल स्पीति सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रोहतांग दर्रा, लाहौल तथा स्पीति घाटी में हुई भारी बर्फबारी के कारण इसका संपर्क अन्य हिस्सों से टूट गया है जिस कारण बड़ी संख्या में लेह तथा लाहौल घाटी में गये पर्यटक बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। ये पर्यटक कई जगहों पर फंसे हुए हैं।
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने विभिन्न मार्गों को साफ करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कर दिया है। आज प्रोजेक्ट रोहतांग सुरंग से मेजर शशि चौहान तथा कैप्टन आशीष सिंह लाल के नेतृत्व में बचाव दल को तैनात किया गया है ताकि शिशु और लाहौल घाटी के कोकसर तक सड़कों को साफ किया जा सके। इसके लिए 38बीआरटीएफ की 70 आरआरसी भी लगातार प्रयास कर रही है। शाम तक रोहतांग सुरंग के जरिए शिशु और कोकसर से 300 लोगों को सुरक्षित निकालकर लाहौल घाटी से मनाली के सोलंग तक पहुंचाया गया। सुरक्षित निकाले गये लोगों में आईआईटी मंडी, आईआईटी रूडकी, गुवाहाटी और मुम्बई के शिक्षक और छात्र सहित ट्रेकिंग पर आये कुछ विदेशियों के अलावा हिमाचल प्रदेश के स्थानीय नागरिक भी शामिल हैं।
रोहतांग सुरंग में सुरक्षित निकाले गये लोगों को बीआरओ द्वारा चिकित्सीय सहायता मुहैया कराने के अलावा जलपान भी प्रदान कराया गया। बचाये गये लोगों को मनाली और उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया जा चुका है।
फंसे हुए पर्यटकों को लाहौल घाटी से लेकर मनाली तक सुरक्षित पहुंचाने में बीआरओ द्वारा तैयार की गई रोहतांग सुरंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अगले कुछ दिनों तक बचाव प्रयास तब तक जारी रहेगा जब तक फंसे हुए सभी लोगों को लाहौल और स्पीति घाटी से सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता है।
॥■॥ कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग ने वर्ष 2018-19 के लिए प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन के प्रथम अग्रिम अनुमान जारी किए
कृषि, सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग ने आज वर्ष 2018-19 के लिए प्रमुख खरीफ फसलों के उत्पादन के प्रथम अग्रिम अनुमान जारी कर दिए। विभिन्न फसलों के उत्पादन का यह आकलन राज्यों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है और अन्य स्रोतों से उपलब्ध सूचनाओं से इसका सत्यापन हो गया है। वर्ष 2018-19 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक विभिन्न फसलों का अनुमानित उत्पादन और वर्ष 2003-04 के बाद के वर्षों के लिए तुलनात्मक अनुमान यहां संलग्न किए गए हैं।
प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक खरीफ 2018-19 के दौरान प्रमुख फसलों के अनुमानित उत्पादन का विवरण नीचे दिया गया है:
·खाद्यान्न – 141.59 मिलियन टन
·चावल – 99.24 मिलियन टन
·पौष्टिक /मोटे अनाज– 33.13 मिलियन टन
·मक्का – 21.47 मिलियन टन
·दलहन – 9.22 मिलियन टन
·अरहर – 4.08 मिलियन टन
·उड़द – 2.65 मिलियन टन
·तिलहन – 22.19 मिलियन टन
·सोयाबीन – 13.46 मिलियन टन
·मूंगफली – 6.33 मिलियन टन
·अरंडी– 1.52 मिलियन टन
·कपास – 32.48 मिलियन गांठें (प्रत्येक 170 किलोग्राम)
·जूट एवं मेस्ता -10.17 मिलियन गांठें (प्रत्येक 180 किलोग्राम)
·गन्ना – 383.89 मिलियन टन
मानसून सीजन यानी 01 जून से लेकर 12 सितंबर, 2018 तक की अवधि के दौरान देश में कुल बारिश लम्बी अवधि के औसत (एलपीए) की तुलना में 8 प्रतिशत कम रही है। इस अवधि के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीप में कुल वर्षा सामान्य रही है। तदनुसार, ज्यादातर प्रमुख फसल उत्पादक राज्यों में सामान्य वर्षा हुई है। हालांकि, यह प्रारंभिक अनुमान है और राज्यों से इस बारे में आवश्यक जानकारी मिलने पर इनमें संशोधन किए जाएंगे।
प्रथम अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, वर्ष 2018-19 के दौरान खरीफ खाद्यान्न का कुल उत्पादन 141.59 मिलियन टन होने का अऩुमान लगाया गया है। यह पिछले साल हुए 140.73 मिलियन टन के खरीफ खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में 0.86 मिलियन टन अधिक है। इसके अलावा, इस दौरान खरीफ खादयान्न उत्पादन पिछले पांच वर्षों (2012-13 से लेकर 2016-17 तक) में हुए 129.65 मिलियन टन के औसत उत्पादन से 11.94 मिलियन टन अधिक है।
खरीफ चावल का कुल उत्पादन 99.24 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया है। यह पिछले साल की 97.50 मिलियन टन की पैदावार से 1.74 मिलियन टन अधिक है। यही नहीं, इस दौरान खरीफ चावल का उत्पादन पिछले पांच वर्षों में हुए औसत उत्पादन से 6.64 मिलियन टन अधिक है।
देश में पौष्टिक/मोटे अनाजों का कुल उत्पादन वर्ष 2017-18 के 33.89 मिलियन टन की तुलना में घटकर 33.13 मिलियन टन के स्तर पर आ गया है। मक्का उत्पादन 21.47 मिलियन टन रहने की आशा है जो पिछले साल के 20.24 मिलियन टन के उत्पादन से 1.23 मिलियन टन अधिक है। इतना ही नहीं, यह पिछले पांच वर्षों में हुए औसत मक्का उत्पादन से 4.40 मिलियन टन अधिक है।
खरीफ दालों का कुल उत्पादन 9.22 मिलियन टन होने का अनुमान है जो पिछले वर्ष में हुए 9.34 मिलियन टन की तुलना में 0.12 मिलियन टन कम है। हालांकि, खरीफ दालों का अनुमानित उत्पादन पिछले पांच वर्षों के औसत उत्पादन से 2.67 मिलियन टन अधिक है।
देश में खरीफ तिलहन का कुल उत्पादन 22.19 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया है जो वर्ष 2017-18 में हुए 21.00 मिलियन टन के उत्पादन की तुलना में 1.19मिलियन टन अधिक है। यही नहीं, यह पिछले पांच वर्षों में हुए औसत उत्पादन की तुलना में 2.02 मिलियन टन अधिक है।
गन्ना उत्पादन 383.89 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया है जो पिछले साल के दौरान हुए 376.90 मिलियन टन के उत्पादन की तुलना में 6.99 मिलियन टन अधिक है। इसके अलावा, यह पिछले पांच वर्षों में हुए औसत उत्पादन की तुलना में 41.85 मिलियन टन अधिक है।
कपास का उत्पादन 32.48 मिलियन गांठ (प्रत्येक 170 किलोग्राम) और जूट एवं मेस्ता का उत्पादन 10.17 मिलियन गांठ (प्रत्येक 180 किलोग्राम) होने का अनुमान लगाया गया है।
॥■॥ प्रधानमंत्री की ‘प्रगति’ के जरिए बातचीत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रगति – आईसीटी आधारित प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन के जरिए 29वीं बैठक की अध्यक्षता की।
प्रधानमंत्री ने दूरसंचार क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों के समाधान में प्रगति की समीक्षा की। उन्हें हाल ही में इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के हस्तक्षेप सहित इस दिशा में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान आधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिए निकालना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सेवा प्रदाताओं को उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की सेवाएं मुहैया करानी चाहिए।
अब तक परियोजनाओं की समीक्षा के लिए ‘प्रगति’ की 28 बैठक हो चुकी हैं जिनमें कुल 11.75 लाख करोड़ के निवेश हुए। दूरसंचार क्षेत्र में जन शिकायतों के समाधान की भी समीक्षा की गई।
‘प्रगति’ की बैठक में प्रधानमंत्री ने रेलवे, शहरी विकास, सड़क, ऊर्जा और कोयला क्षेत्र में 8 महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में चल रही हैं।
प्रधानमंत्री ने ‘प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना’ खासकर जिला खनिज फाउंडेशन की कार्यप्रणाली में प्रगति की समीक्षा की। खनिज संपदा से संपूर्ण कई जिलों में संसाधनों की उपलब्धता पर जोर देते हुए उन्होंने केन्द्र और राज्य स्तर के अधिकारियों से लोगों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में फंड का इस्तेमाल करने और इन जिलों में लोगों के सहज जीवन सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि इन जिलों में आकांक्षी जिलों को शामिल करने का यह एक सुअवसर भी है।
॥■॥ वीवीपैट और ईवीएम की व्यवस्थित आपूर्ति जारी है और चिंता की कोई बात नहीं है : निर्वाचन आयोग
निर्वाचन आयोग 2019 में लोकसभा चुनाव के लिए वीवीपैट की आपूर्ति को लेकर किसी निराधार शंका को कम करना चाहता है। निर्वाचन आयोग लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनाव और उप चुनाव के लिए भविष्य में सभी मतदान केन्द्रों पर वीवीपैट की 100 फीसदी तैनाती को लेकर प्रतिबद्ध है।
2019 में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सभी मतदान केन्द्रों पर वीवीपैट की 100 फीसदी जरूरतें पूरी करने के लिए निर्वाचन आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), बैंगलोर और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद को 17.45 लाख वीवीपैट के लिए आदेश जारी किया है। अब तक दोनों कंपनियां 9.45 लाख वीवीपैट का निर्माण कर चुकी हैं। दोनों कंपनियों ने निर्वाचन आयोग को आश्वासन दिया है कि बाकी 8 लाख वीवीपैट का निर्माण कर लिया जाएगा और नवम्बर 2018 से पहले विभिन्न राज्यों / केन्द्रशासित प्रदेशों को आसानी से आपूर्ति कर दी जाएंगी।
निर्वाचन आयोग दोनों कंपनियों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों और तकनीकी विशेषज्ञ समिति के साथ लगातार वीवीपैट के उत्पादन और आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करता रहा है ताकि ईवीएम और वीवीपैट के डिजाइन, उत्पादन और आपूर्ति से जुडी गतिविधियां जारी रखना और उत्पादन प्रक्रिया एवं उत्पादों के प्रदर्शन के निरीक्षण के बाद तकनीकी विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाये गये फीचरों को शामिल कर समयबद्ध तरीके से आपूर्ति पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जा सके। निर्वाचन आयोग के अधिकारी ईवीएम और वीवीपैट की समय से आपूर्ति और चुनाव पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रोजाना आधार पर मशीनों के निर्माण और आपूर्ति का निरीक्षण कर रहे हैं।
निर्वाचन आयोग ने बीते चुनाव में वीवीपैट मशीनों के विफल होने की दर को देखते हुए अतिरिक्त वीवीपैट की जरूरत 125 फीसदी से बढ़ाकर 135 फीसदी कर दी है। निर्वाचन आयोग ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए 171 फीसदी मतपत्र ईकाइयों, 125 फीसदी नियंत्रण ईकाइयों और 135 फीसदी वीवीपैट की जरूरतों का अनुमान लगाया है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि वीवीपैट में कोई खामी आने पर सिर्फ वीवीपैट को ही अतिरिक्त वीवीपैट से बदला जायेगा जबकि ईवीएम के मतपत्र ईकाई या नियंत्रण ईकाई में कोई खामी आने पर मतपत्र ईकाई, नियंत्रण ईकाई और वीवीपैट के पूरे समूह को बदल दिया जाएगा, इससे ईवीएम की तुलना में अधिक वीवीपैट की जरूरत होगी।
पिछले 25 वर्षों में ईवीएम का इस्तेमाल करते हुए निर्वाचन आयोग ने 113 राज्य विधानसभा चुनाव और तीन लोकसभा चुनाव सफलतापूर्वक सम्पन्न कराये हैं। जून 2017 से राज्य विधानसभा चुनाव और संसदीय चुनाव में मतदाताओं की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीनों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया है। निर्वाचन आयोग सभी आगामी चुनाव में वीवीपैट का इस्तेमाल करने को लेकर तैयार है।
॥■॥ नियोक्ताओं द्वारा अब पंजीकरण और अनुज्ञप्ति के लिये ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य
सरकार के भारत को डिजिटल इंडिया बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुये जिसमें कि विभिन्न सरकारी सेवाओं को नागरिकों को इलेक्ट्रानिक माध्यम से उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जा रहा है और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही ला कर के विश्वास पर आधारित कुशल नागरिक सेवाएं प्रदान करने के लिये श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने श्रम सुविधा पोर्टल के जरिये पंजीकरण और अनुज्ञप्ति देने की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से ऑनलॉइन बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है ये सेवायें इस इन कानूनों के तहत दी जाती हैं
1. 1970 का अनुबंध श्रम (नियमन एवं निरस्तीकरण) कानून (1970 का 37वां कानून),
2. 1979 का अंतर-राज्यीय प्रवासी कामगार (रोजगार एवं कार्य की शर्तों का नियमन) कानून (1979 का 30वां कानून), और
3. 1996 का भवन एवं अन्य निर्माण कामगार (रोजगार एवं कार्य की शर्तों का नियमन) (1996 का 27वां कानून)।
4 सितंबर 2018 को जारी अधिसूचना संख्या जी.एस.आर 830(ई) के अनुसार अब नये संशोधित 'भवन एवं अन्य निर्माण कामगार (रोजगार एवं कार्य की शर्तों का नियमन) केंद्रीय (संशोधन) कानून, नियम, 2018' के अनुसार अब नियोक्ताओं को प्रतिष्ठान के पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये अनिवार्य रूप से श्रम सुविधा पोर्टल पर ऑनलॉइन आवेदन करना होगा और पोर्टल के जरिये ही इसे नियोक्ताओं को जारी किया जायेगा।
अनुबंध श्रम (नियमन एवं निरस्तीकरण) केंद्रीय नियम, 1971 को संशोधित करने के नियमों के मसौदे और अंतर-राज्यीय प्रवासी कामगार (रोजगार एवं कार्य की शर्तों का नियमन) केंद्रीय नियम, 1980 के तहत पंजीकरण प्रमाण पत्र और अनुज्ञप्ति जारी करने के लिये श्रम सुविधा पोर्टल पर आनलाइन आवेदन करने संबंधी नियमों को 4 सितंबर 2018 को भारत के राजपत्र में अधिसूचना संख्या जी.एस.आर 829(ई) और जी. एस. आर 830(ई) के जरिये प्रकाशित कर दिया गया है।
इसके अलावा 4 सितंबर 2018 को भारत के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना संख्या एस. ओ. 4259(ई) और एस. ओ. 4260(ई) के अनुसार जब तक कि मसौदा नियमों को अंतिम रूप ना दिया जाये तब तक पंजीकरण एवं अनुज्ञप्ति के लिये श्रम सुविधा पोर्टल के जरिये ही आनलाइन आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके अलावा हाल ही में प्रकाशित अधिसूचनाओं के अनुसार उपरोक्त तीन कानूनों के अंतर्गत जमा किया जाने वाला पंजीकरण एवं अनुज्ञप्ति शुल्क एवं सुरक्षा राशि अब केवल इ-भुगतान के जरिये ही जमा की जा सकेगी।
॥■॥ वित्त मंत्रालय ने वित्तीय समावेशन के तहत मोबाइल एप ‘जन धन दर्शक’ लांच किया
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने वित्तीय समावेशन (एफआई) पहल के तहत संयुक्त रूप से ‘जन धन दर्शक’ नामक एक मोबाइल एप विकसित किया है। जैसा कि इसके नाम से ही साफ जाहिर है, यह मोबाइल एप देश में किसी भी निर्धारित स्थान पर किसी ‘वित्तीय सेवा टच प्वाइंट’ का पता लगाने में आम जनता का मार्गदर्शन करेगा।
वैसे तो ‘लोकेटर एप’ कई अलग-अलग बैंकों और वित्तीय सेवा प्रदाताओं द्वारा दी जाने वाली एक आम सुविधा है, लेकिन अंतर-संचालन योग्य बैंकिंग सेवाओं के इस युग में ‘जन धन दर्शक’ एप इस लिहाज से अनूठा होगा कि वह बैंकों, डाकघरों, सीएससी जैसे समस्त वित्तीय सेवा प्रदाताओं के वित्तीय सेवा टच प्वाइंट्स का पता लगाने के लिए एक जन केंद्रित प्लेटफॉर्म सुलभ कराएगा। आम जनता की आवश्यकताओं और सुविधा के अनुसार इन सेवाओं का लाभ आसानी से उठाया जा सकता है।
इस एप पर 5 लाख से भी अधिक वित्तीय सेवा टच प्वाइंट्स (बैंक शाखाएं, एटीएम, डाकघर) की मैपिंग की गई है। इसके साथ ही लगभग 1.35 लाख बैंक मित्रों को 01 दिसंबर 2018 तक इनसे जोड़ दिया जाएगा। इस एप्लिकेशन या एप की मुख्य विशेषताओं में से कुछ इस प्रकार हैं:
• वर्तमान स्थान (शाखाएं/एटीएम/डाकघर) को ध्यान में रखते हुए निकटवर्ती वित्तीय सेवा टच प्वाइंट्स का पता लगा सकते हैं।
• जगह के नाम से खोज सकते हैं।
• वॉयस इंटरफेस के जरिए भी जगह के नाम से खोजने की सुविधा है
• एकीकृत डायलिंग के लिए कॉल बटन की सुविधा के साथ एप में बैंक शाखाओं के फोन नंबर भी उपलब्ध हैं
• वित्तीय सेवा टच प्वाइंट्स से जुड़े डेटा को अनिवार्य रूप से अपडेट करने के लिए उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) से मिली जानकारियां सीधे संबंधित बैंक को भेजी जाएंगी।
॥■॥ अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना से 3 करोड़ से ज्यादा बीमित लोगों को लाभ मिलेगा
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की हाल ही में शुरू की गई जारी 'अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना' के जरिये लगभग 3.2 करोड़ बीमित व्यक्तियों को लाभ मिलेगा। ईएसआई निगम ने राज्य कर्मचारी बीमा कानून, 1948 के तहत बीमित व्यक्तियों के लिये 'अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना' को मंजूरी दी है। इस योजना में बेरोजगार होने की दशा में नौकरी ढूंढ़ने की अवधि के दौरान राहत राशि का भुगतान सीधे बैंक खाते में करने का प्रावधान है। बेरोजगार व्यक्ति जो कि नया रोजगार ढूंढ़ रहा हो उसे नगद लाभ उसकी पिछले 90 दिनों की औसत आय के 25% के बराबर दिया जायेगा।
केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार आज नयी दिल्ली में कार्यस्थल में सुरक्षा और संरक्षा के सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन और संरक्षा प्रणाली श्रेष्ठता पुरस्कार वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि इस समय संगठित क्षेत्र में करीब 6 करोड़ कामगार हैं जिन्हें ईपीएफओ, ईएसआईसी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलता है। और केंद्रीय सरकार ने उनके काम की परिस्थितियों को सुधारने, संरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये कई कदम उठाये हैं ताकि उनके जीवन को स्तर को सुधारा जा सके। वर्तमान सरकार असंगठित क्षेत्र के करीब 40 करोड़ कामगारों की स्थिति को सुधारने के लिये लगातार प्रयास कर रही है। पिछले दो वर्षों में करीब एक करोड़ कर्मियों को ईएसआईसी के लाभों से जोड़ा गया है और एक करोड़ से ज्यादा को ईपीएफओ के दायरे में लाया गया है। और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिये प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना पूरी तरह से निशुल्क हैं।
उन्होंने आगे कहा कि करीब 3 करोड़ कर्मियों को इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
14 लाख आंगनवाड़ी कर्मियों का मानदेय 3,000 रु. से बढ़ाकर 4,500 रु. प्रति महीने कर दिया गया है। इसी प्रकार आंगनवाड़ी सहायकों का मानदेय डेढ़ हजार से बढ़ाकर ढाई हजार रु. प्रति महीने कर दिया गया है। साथ ही आशा कर्मियों का प्रोत्साहन मानदेय भी दोगुना कर दिया गया है।
श्री गंगवार ने कहा कि उनका मंत्रालय प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के जरिये रोजगार के अवसरों को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि कोष में नये कर्मचारियों के लिये सरकार 12% का योगदान दे रही है ताकि इसका भार नियोक्ताओं पर ना पड़े। सरकार ने पिछले दो वर्षों में 87,000 संस्थानों के 72 लाख कर्मियों के लिये 1,744 करोड़ रुपये का भुगतान इस विषय में किया है।
उन्होंने संरक्षा प्रणाली श्रेष्ठता पुरस्कारों के सभी विजेताओं तो बधाई दी और उम्मीद जतायी कि इस सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी भागीदार इस मंच पर अभिव्यक्त विचारों का लाभ उठायेंगे।
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