खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

॥■॥ मंत्रिमंडल ने सरहिंद फीडर नहर और राजस्थान फीडर नहर को दुरुस्त करने के लिए 825 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने 5 वर्षों (2018-19 से 2022-23) के दौरान राजस्थान फीडर नहर और सरहिंद फीडर नहर को दुरुस्त करने के लिए क्रमश: 620.42 करोड़ रुपये और 205.758 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता को मंजूरी दे दी। सरहिंद फीडर को आरडी 119700 से 447927 तक तथा राजस्थान फीडर को 179000 से पंजाब के 496000 तक दुरुस्त किया जाएगा।

• प्रभाव:

इन दोहरी परियोजनाओं के कार्यान्वयन से दक्षिण-पश्चिम पंजाब में मुक्तसर, फरीदकोट और फिरोजपुर जिलों में 84800 हेक्टेयर भूमि में जलभराव की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी।
इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन से दक्षिण-पश्चिम पंजाब में जलभराव की समस्या को दूर करने और इन दोनों नहरों में जलप्रवाह/जल उपलब्धि बढ़ाने में मदद मिलेगी।
राजस्थान फीडर को दुरुस्त करने से 98,739 हेक्टेयर भूमि और सरहिंद फीडर को दुरुस्त करने से 69,086 हेक्टेयर भूमि के लिए स्थिर/संशोधित सिंचाई व्यवस्था से क्षेत्र के किसानों को लाभ होगा।

• खर्चः

राजस्थान फीडर और सरहिंद फीडर को केन्द्रीय सहायता के लिए वित्तपोषण एलटीआईएफ के तहत 99 पीएमकेएसवाई-एआईबीपी के वित्तपोषण की मौजूदा प्रणाली के अंतगर्त नबार्ड के जरिए किया जाएगा।
केन्द्रीय जल आयोग द्वारा परियोजनाओं की मौजूदा निगरानी प्रणाली के अलावा इन परियोजनाओं के संपूर्ण कार्यान्वयन की निगरानी करने के लिए एक विशेषज्ञ परियोजना समीक्षा समिति का गठन किया जा सकता है।
2015 पीएल के आधार पर सरहिंद फीडर नहर को दुरुस्त करने की स्वीकृत लागत 671.478 करोड़ रुपये और राजस्थान फीडर नहर की स्वीकृत लागत 1305.267 करोड़ रुपये है। कुल अनुमानित लागत में 826.168 करोड़ रुपये केन्द्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, जिसमें से 205.758 करोड़ रुपये सरहिंद फीडर को और 620.41 करोड़ रुपये राजस्थान फीडर को मिलेंगे।
सरहिंद फीडर और राजस्थान फीडर को दुरुस्त करने के लिए क्रमशः 671.478 करोड़ रुपये और 1305.26 करोड़ रुपये के संशोधित लागत अनुमान संबंधी निवेश क्लियरेंस 6 अप्रैल 2016 को मंजूर किया गया।
वर्ष 2016 के दौरान केन्द्रीय जल आयोग के अध्यक्ष के नेतृत्व में एक दल ने परियोजनाओं का जायजा लिया था। इसके बाद 2017 के दौरान केन्द्रीय जल आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री एबी पंड्या के नेतृत्व में एक अन्य दल ने परियोजनाओं का जायजा लिया। दलों ने सुधार कार्य शुरू करने का सुझाव दिया था। पंजाब सरकार ने भी 26 अप्रैल, 2018 को अपनी वित्तीय सहमति दे दी थी।

• पृष्ठभूमिः

सरहिंद और राजस्थान फीडर हरिके हेड-वर्क्स के ऊपरी प्रवाह से कटकर निकलती हैं तथा राजस्थान से गुजरने से पहले पंजाब से गुजरती हैं। दोनों नहरों के किनारे समान है और इन्हें 1960 के दशक में निर्मित किया गया था। इनका निर्माण खड़ंजा (ईंट) द्वारा बनाया गया था, ताकि पंजाब और राजस्थान के कमान क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा सके।

पंजाब सरकार ने सरहिंद और राजस्थान फीडरों के खड़ंजों में नुकसान होने के कारण पानी के रिसाव की सूचना दी थी। परिणाम स्वरूप इन नहरों में जलप्रवाह में कमी आ गयी थी और आस-पास के इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गयी थी। इसके कारण खेती को भारी नुकसान होने लगा था।

परियोजना से जलभराव की समस्या दूर होगी और इन दोनों नहरों में जलप्रवाह/जल उपलब्धि बढ़ाने में मदद मिलेगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल को प्रयुक्त विज्ञान एवं औद्योगिक प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समझौता-ज्ञापन के विषय में अवगत कराया गया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सम्पन्न मंत्रिमंडल बैठक को प्रयुक्त विज्ञान एवं औद्योगिक प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समझौता-ज्ञापन के विषय में अवगत कराया गया। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति जब भारत की यात्रा पर आये थे, उस दौरान नई दिल्ली में 9 जुलाई, 2018 को समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये थे।

समझौता-ज्ञापन का लक्ष्य एवं उद्देश्य प्रयुक्त विज्ञान एवं औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को प्रोत्साहन देना है। इसका उद्देश्य सतत विकास को प्रोत्साहन देना और जीवन-गुणवत्ता को बढ़ाना है।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने फार्मा क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने दवा उत्पादों के कारोबार, उद्योग और अनुसंधान एवं विकास संबंधी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जाने को मंजूरी दे दी। 01 अक्तूबर, 2018 को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के भारत आगमन के दौरान समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जाएंगे।

दोनों देशों में फार्मा उद्योग के विकास तथा फार्मा क्षेत्र में व्यापार, उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व को ध्यान में रखते हुए दोनों देश द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक औपचारिक प्रणाली बनाने का प्रयास करते रहे हैं। समझौता-ज्ञापन से दोनों देशों में विभिन्न उपचारात्मक वर्गों में सक्रिय औषधीय यौगिकों (एपीआई) सहित दवा उत्पादन की संभावनाएं पैदा होंगी। समझौता ज्ञापन से व्यापार एवं पंजीकरण प्रक्रियाओं, एपीआई सहित दवा उत्पादों के निर्यात एवं आयात के लिए वैधानिक तथा नियमन आवश्यकताओं के संबंध में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी संभव होगा। समझौता-ज्ञापन से दवा उत्पादों के व्यापार, उद्योग तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में उज्बेकिस्तान गणराज्य के साथ सहयोग बढ़ेगा।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने उज्बेकिस्तान के अंदीजान क्षेत्र में उज्बेक-भारत मुक्त फार्मा जोन की स्थापना के लिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में उज्बेकिस्तान के अंदीजान क्षेत्र में उज्बेक-भारत मुक्त फार्मा जोन की स्थापना के लिए भारत और उज्बेकिस्तान के बीच समझौता-ज्ञापन को मंजूरी दे दी। 01 अक्तूबर, 2018 को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के भारत आगमन के दौरान समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जाएंगे।

दोनों देशों में फार्मा उद्योग और बायो-फार्मा उद्योग के विकास तथा फार्मा क्षेत्र में व्यापार, उत्पादन, अनुसंधान एवं विकास में द्विपक्षीय सहयोग के महत्व को ध्यान में रखते हुए दोनों देश द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक औपचारिक प्रणाली बनाने का प्रयास करते रहे हैं। समझौता-ज्ञापन से उज्बेकिस्तान के अंदीजान क्षेत्र में उज्बेक-भारत मुक्त फार्मा जोन की स्थापना के लिए सहयोग की एक सक्षम रूपरेखा तैयार होगी। इससे औषधि निर्माण के लिए उज्बेक-भारत मुक्त फार्मा जोन में भारतीय फार्मा और बायो-फार्मा कंपनियों को निवेश करने तथा उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने में सहायता होगी।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने देश में आवश्‍यकता से अधिक चीनी उत्‍पादन से निपटने के लिए विस्‍तृत नीति को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने आगामी चीनी सीजन 2018-19 में अधिक चीनी उत्‍पादन की संभावना को देखते हुए लागत संतुलन बनाकर चीनी क्षेत्र को समर्थन देने के लिए 5500 करोड़ रूपये की कुल सहायता की स्‍वीकृति दी है।

इस स्‍वीकृति से देश से चीनी के निर्यात को प्रोत्‍साहन मिलेगा और चीनी उद्योग को किसानों की बकाया गन्‍ना राशि का भुगतान करने में मदद मिलेगी।

बकाया स्‍टॉक अधिक होने के कारण तथा चीनी सीजन 2018-19 में अधिक उत्‍पादन की संभावना को देखते हुए इस सीजन में भी चीनी मिलों के लिए तरलता की समस्‍या बनी रहेगी। इसके परिणामस्‍वरूप किसानों के बकाया गन्‍ना मूल्‍यों मे अप्रत्‍याशित रूप से उच्‍च वृद्धि होगी।

• सहायता विवरण:-

चीनी सत्र 2018-19 में निर्यात बढ़ाने के लिए आंतरिक परिवहन, ढुलाई, हैंडलिंग तथा अन्‍य शुल्‍कों पर आय का खर्च वहन करके चीनी मिलों को सहायता प्रदान की जाएगी। इसके तहत बंदरगाह से 100 किलोमीटर के अंदर स्‍थापित मिलों के लिए 1000/एमटी रूपये, तटीय राज्‍यों में बंदरगाह से 100 किलोमीटर आगे स्‍थापित मिलों के लिए 2500/एमटी रूपये तथा तटवर्तीय राज्‍यों के अलावा दूसरी जगहों की मिलों के लिए 3000/एमटी की दर या वास्‍तविक खर्च आधार पर खर्च वहन किया जाएगा। इस पर लगभग कुल 1375 करोड़ रूपये का खर्च आएगा और इसका वहन सरकार करेगी।

किसानों की बकाया गन्‍ना राशि चुकाने में चीनी मिलों की सहायता के लिए सरकार ने चीनी मिलों को चीनी सत्र 2018-19 में 13.88 रूपये प्रति क्विंटल पेरे हुए गन्‍ने की दर से वित्‍तीय सहायता दी का निर्णय लिया है, ताकि गन्‍ने की लागत का समायोजन हो सके। यह सहायता केवल उन मिलों की दी जाएगी जो खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा निर्धारित शर्तें पूरी करती हैं। इस पर कुल 4163 करोड़ रूपये का खर्च आएगा और सरकार इसका वहन करेगी।

किसानों के गन्‍ने की बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए दोनों प्रकार की सहायता राशि चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों के खातों में भेज दी जाएगी। एफआरपी के लिए चीनी मिलें किसानों के खेतों में यह राशि देय बकाया राशि के रूप में देंगी।

इसमें पहले के वर्षों की बकाया राशि और बाद की शेष राशि, यदि कोई हो तो, मिलों के खातों में भेजी जाएगी। यह सहायता उन्‍हीं मिलों को दी जाएगी जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्ते पूरी करेंगे।

• पृष्‍ठभूमि:

बाजार की मंदी और चीनी मूलयों मे गिरावट के कारण चीनी सत्र 2017-18 में चीनी मिलों की तरलता की स्थिति प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई। इससे गन्‍ना किसानों की बकाया राशि बढ़ती गई और मई 2018 के अंतिम सप्‍ताह में बकाया राशि 23,232 करोड़ रूपये के चिंताजनक स्‍तर पर पहुंच गई।

चीनी की कीमतों को उचित स्‍तर पर लाने तथा मिलों की तरलता स्थिति सुधारने के लिए चालू चीनी सत्र 2017-18 के बकाया गन्‍ना मूल्‍यों का भुगतान किसानों को करने में चीनी मिलों की सहायता के लिए केंद्र सरकार ने पिछले छह महीनों में निम्‍नलिखित कदम उठाएं:

देश में किसी तरह के आयात को नियंत्रित करने के लिए चीनी के आयात पर सीमा शुल्‍क 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया।
चीनी उद्योग को चीनी निर्यात की संभावना तलाशने में प्रोत्‍साहन के लिए चीनी निर्यात पर सीमा शुल्‍क वापस लिया गया।
चीनी सत्र 2017-18 के दौरान निर्यात के लिए मिल के अनुसार 20 एलएमटी का न्‍यूनतम सांकेतिक निर्यात कोटा (एमआईईक्‍यू) आवंटित किया गया।
चीनी मिलों द्वारा आवश्‍यकता से अधिक चीनी के निर्यात में सहायता और प्रोत्‍साहन देने के लिए चीनी के संबंध में शुल्‍क मुक्‍त आयात प्राधिकार (डीएफआईए) योजना फिर से लागू की गई।
गन्‍ने के मूल्‍य के समायोजन के लिए चीनी मिलों को, चीनी सत्र 2017-18 के दौरान 5.50 क्विंटल पिराई किए गए गन्‍ने की दर से वित्‍तीय सहायता प्रदान की गई।
अधिसूचित चीनी मूल्‍य (नियंत्रण) आदेश, 2018 में निर्देश दिया गया है कि कोई चीनी उत्‍पादक फैक्‍ट्री गेट पर 29 रूपये प्रति किलोग्राम से कम दर पर श्‍वेत/शोधित चीनी न‍हीं बेचेगा। इसके साथ-साथ मिलों पर स्‍टॉक रखने की सीमा भी लगाई जाएगी।
30 एलएमटी चीनी के सुरक्षित स्‍टॉक की देखभाल एक वर्ष के लिए चीनी मिलें करेंगी। इसके लिए सरकार लगभग 1175 करोड़ रूपये की ढुलाई लागत वहन करेगी।
एथनॉल उत्‍पादन क्षमता मजबूत बनाने और एथनॉल उत्‍पादन में चीनी के उपयोग को प्रोत्‍साहित करने के लिए नई डिस्टिलरी स्‍थापित करने वाली मिलें/वर्तमान डिस्टिलरी का विस्‍तार/राख बनाने वाले बॉयलरों की स्‍थापना तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्‍वीकृत किसी और प्रणाली की स्‍थापना के लिए 4440 करोड़ रूपये के सुलभ ऋण की मंजूरी पहले ही दी गई है। सरकार 1332 करोड़ रूपये की ब्‍याज सहायता राशि वहन करेगी।

उपरोक्‍त कदमों के परिणामस्‍वरूप चीनी का अखिल भारतीय औसत मिल मूल्‍य 24-7 रूपये किलोग्राम से बढ़कर 30-33 रूपये किलोग्राम की बीच हो गया तथा किसानों का बकाया अखिल भारतीय गन्‍ना मूल्‍य घटकर 12988 करोड़ रूपये हो गया। यह बकाया राशि चीनी सत्र 2017-18 के लिए राज्‍य परामर्श मूल्‍य (एसएपी) पर लगभग 23232 करोड़ रूपये थी। एफआरपी आधार पर किसानों का बकाया अखिल भारतीय गन्‍ना राशि 14538 करोड़ रूपये के शिखर से गिरकर 5312 करोड़ रूपये हो गई।


॥■॥ मंडिमंडल ने सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक तथा क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में नीति आयोग और रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक तथा क्षेत्रीय विकास कार्यक्रमों के क्षेत्र में नीति आयोग और रूसी संघ के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी दे दी है।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक तथा क्षेत्रीय विकास की रणनीतियों और कार्यक्रमों को बनाने तथा लागू करने में सहयोग की संभावना तलाशना है। इसमें एक दूसरे की शक्तियों, बाजार, प्रौद्योगिकी, नीतियों आदि को समझने के लिए ढांचा और अनुकूल वातावरण बनाने का प्रावधान है।

समझौता ज्ञापन में सहयोग के निम्‍नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

(i) परस्‍पर हित के विषयों से संबंधित संयुक्‍त शोध परियोजनाएं चलाना और लागू करना।

(ii) दोनों पक्षों के बीच परस्‍पर हित के विषयों से संबंधित सरकारी रणनीतियों तथा विकास कार्यक्रमों पर सूचना सहित सूचना और शोध कार्यों का आदान-प्रदान।

(iii) संयुक्‍त आयोजनों में भागीदारी के लिए दोनों पक्षों के विशेषज्ञों का आवागमन।

(iv) दोनों पक्षों की सहमति वाले कार्यक्रमों पर गोष्ठियां, सम्‍मेलन तथा अन्‍य बैठकें आयोजित करना।

(v) दोनों पक्षों के पारस्‍परिक सहमति के अनुसार सहयोग के अन्‍य रूप।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने होटल गुलमर्ग अशोक, गुलमर्ग तथा होटल पाटलिपुत्र अशोक, पटना की अधूरी परियोजनाओं को क्रमशः जम्मू और कश्मीर तथा बिहार की सरकारों को हस्तांतरित (विनिवेश) करने की स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने विनिवेश नीति का अनुसरण करते हुए आईटीसी की संपत्तियों/इकाइयों/ संयुक्त उद्यमों का आगे विनिवेश की मंजूरी दे दी है। यह विनिवेश होटल गुलमर्ग अशोक, गुलमर्ग तथा होटल पाटलिपुत्र अशोक, पटना की अधूरी परियोजनाओं को क्रमशः जम्मू और कश्मीर तथा बिहार की सरकारों को हस्तांतरित (विनिवेश) करके किया जाएगा।

• पृष्ठभूमिः

भारत सरकार की विनिवेश नीति के अनुसार भारतीय पर्यटन विकास निगम लिमिटेड (आईटीडीसी) के होटलों/संपत्तियों/इकाईयों/संयुक्‍त उद्यमों को पट्टे/उपपट्टे पर राज्‍य सरकारों को देना का निर्णय लिया गया था। पट्टे/उपपट्टे के प्रस्‍ताव पर राज्‍य सरकारों की सहमति न होने की स्थिति में संपत्तियों को अधिकारिक अंकित मूल्‍य पर राज्‍य सरकारों को वापस देने के प्रस्‍ताव को भी स्‍वीकृत किया गया था। यह नीति इस बात को ध्‍यान में रखकर बनाई गई थी कि पेशेवर तरीके से होटलों को चलाना और उनका प्रबंधन करना सरकार या उसकी कंपनियों का काम नहीं है।

भारत सरकार की विनिवेश नीति के अनुपालन और मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति की स्‍वीकृति के साथ अंतर-मंत्रालय समूह (आईएमजी) तथा पर्यटन मंत्रालय, आईटीडीसी ने होटल लेक व्‍यू अशोक, भोपाल, होटल ब्रम्‍हपुत्र अशोक गुहावटी, होटल भरतपुर अशोक भरतपुर, होटल जनपथ, नई दिल्‍ली की संपत्तियों/इकाईयों/संयुक्‍त उद्यमों को आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को हस्‍तांतरित कर दिया है। होटल ललिता महल पैलेस मैसूर, होटल दोनई पोलो अशोक, ईटानगर तथा होटल जयपुर अशोक, जयपुर की संपत्तियों/इकाईयों/संयुक्‍त उद्यमों को संबंधित राज्‍य सरकारों को हस्तांतरित कर दिया है।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय डिजिटल संचार नीति-2018 को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय डिजिटल संचार नीति – 2018 (एनडीसीपी-2018) तथा दूरसंचार आयोग को नया नाम ‘डिजिटल संचार आयोग’ देने की स्‍वीकृति दे दी है।

• प्रभाव:

एनडीसीपी-2018 का उद्देश्‍य भारत को डिजिटल रूप से सशक्‍त अर्थव्‍यवस्‍था और समाज बनाना है। यह कार्य सर्वव्‍यापी, लचीला और किफायती डिजिटल संचार अवसंरचना तथा सेवाओं की स्‍थापना से नागरिकों तथा उद्यमों की सूचना और संचार आवश्‍यकताओं को पूरा करके किया जाएगा।

उपभोक्‍ता केंद्रित और एप्‍ली‍केशन प्रेरित एनडीसीपी-2018 हमें 5जी, आईओटी, एम2एम जैसी अग्रणी टेक्‍नॉलोजी लांच होने के बाद नए विचारों और नवाचार की ओर ले जाएगी।

• उद्देश्य:

I. सभी के लिए ब्रॉडबैंड

II. डिजिटल संचार क्षेत्र में चार मिलियन अतिरिक्‍त रोजगार सृजन

III. भारत के जीडीपी में डिजिटल संचार क्षेत्र के योगदान को 2017 के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत करना।

IV. आईटीयू के आईसीटी विकास सूचकांक में भारत को आगे बढ़ाकर 2017 के 134वें स्‍थान से शीर्ष 50 देशों में पहुंचाना।

V. वैश्विक मूल्‍य श्रृंखला में भारत का योगदान बढ़ाना तथा

VI. डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करना।

यह उद्देश्‍य 2022 तक हासिल किए जाएंगे।

• विशेषताएं:

नीति का उद्देश्‍य

· प्रत्‍येक नागरिक को 50एमबीपीएस की गति से सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।

· सभी ग्राम पंचायतों को 2020 तक 1जीबीपीएस की कनेक्टिविटी प्रदान करना और 2022 तक 10जीबीपीएस की कनेक्टिविटी देना।

· कवर नहीं किए गए सभी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।

· डिजिटल संचार क्षेत्र में 100 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित करना।

· नए युग के कौशल निर्माण के लिए एक मिलियन मानव शक्ति को प्रशिक्षित करना।

· आईओटी प्रणाली का विस्‍तार 5 बिलियन आपस में जुड़े उपकरणों तक करना।

· व्‍यक्ति की निजता, स्‍वायत्‍तता तथा पसंद को सुरखित रखने वाले डिजिटल संचार के लिए व्‍यापक डाटा संरक्षण व्‍यवस्‍था बनाना।

· वैश्विक डिजिटल अर्थव्‍यवस्‍था में भारत की सक्रिय भागीदारी में सहायता देना।

· नागरिकों को सुरक्षा आश्‍वासन देने के लिए उचित संस्‍थागत व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से दायित्‍व लागू करना तथा

· डिजिटल संचार अवसंरचना तथा सेवाओं को सुरक्षित रखना।

• रणनीति:

i. राष्‍ट्रीय फाइबर प्राधिकरण बनाकर राष्‍ट्रीय डिजिटल ग्रिड की स्‍थापना

ii. सभी नए शहर तथा राजमार्ग सड़क परियोजनाओं में समान सेवा मार्ग और उपयोगिता गलियारा स्‍थापित करना।

iii. मार्ग के समान अधिकार, लागत मानक और समयसीमा के लिए केंद्र, राज्‍य तथा स्‍थानीय निकायों के बीच सहयोगी संस्‍थागत व्‍यवस्‍था बनाना।

iv. स्‍वीकृतियों में बाधाओं को दूर करना।

v. ओपन एक्‍सेस नेक्‍स्‍ट जनरेशन नेटवर्कों के विकास में सहायता देना।

• पृष्‍ठभूमि:

विश्‍व के 5जी, आईओटी, एम2एम जैसी अग्रणी टेक्‍नॉलोजी के दौर में पहुंचने के कारण भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के लिए ऐसे उपभोक्‍ता केंद्रित तथा एप्‍लीकेशन प्रेरित नीति लागू करने की आवश्‍यकता महसूस की गई जो डिजिटल भारत का प्रमुख स्‍तंभ बन सके और दूरसंचार सेवाओं तथा दूरसंचार आधारित सेवाओं के विस्‍तार के लिए उभरते अवसरों का लाभ उठा सके।

इसी के अनुसार राष्‍ट्रीय दूरसंचार नीति 2018 तैयार की गई है। ताकि भारत के डिजिटल दूरसंचार क्षेत्र की आवश्‍यकताएं पूरी की जा सकें।


॥■॥ मंत्रिमंडल ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउंटेंट् ऑफ इंडिया (आईसीएआई) तथा केन्‍या के इंस्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफायर्ड पब्लिक एकाउंटेंट्स के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेड एकाउंटेंट् ऑफ इंडिया (आईसीएआई) तथा केन्‍या के इंस्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफायर्ड पब्लिक एकाउंटेंट्स के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को अपनी मंजूरी दे दी है। इससे संयुक्‍त शोध, गुणवत्‍ता समर्थन, क्षमता सृजन, प्रशिक्षु एकाउंटेंट आदान-प्रदान कार्यक्रम के माध्‍यम से ज्ञान साझा करने के क्षेत्र में परस्‍पर सहयोग में मदद मिलेगी और निरंतर पेशेवर विकास (सीपीडी) पाठ्यक्रमों, कार्यशालाओं तथा सम्‍मेलनों के आयोजन में सहायता मिलेगी।

• विवरण:

· आईसीएआई तथा आईसीपीएके दोनों संस्‍थानों के कर्मियों को कार्यक्रम के अनुसार सहमति वाले औपचारिक कार्य प्‍लेसमेंट के जरिए अवसर प्रदान करेंगे।

· जागरूकता बढ़ाने तथा आईसीएआई/आईसीपीएके की रणनीतिक साझेदारी की गतिविधियों को संयुक्‍त रूप से प्रोत्‍साहन दिया जाएगा और समझौता ज्ञापन में दिए गए क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्‍साहित किया जाएगा।

· आईसीएआई/आईसीपीएके मानक पहलों तथा प्रशिक्षु एकाउंटेंट आदान-प्रदान कार्यक्रम पर सहयोग करेंगे।

• प्रमुख प्रभाव:

भारत केन्‍या का छठा सबसे बड़ा व्‍यापार साझीदार है और केन्‍या का सबसे बड़ा निर्यातक है। अफ्रीकी काउंटियों पर एक रिपोर्ट के अनुसार केन्‍या की अर्थव्‍यवस्‍था सकल घरेलू उत्‍पाद की दृष्टि से 2017 में अफ्रीका की शीर्ष प्रदर्शन करने वाली अर्थव्‍यवस्‍था रही है। केन्‍या का आर्थिक आधार व्‍यापक है और वह अपने यहां बनी वस्‍तुओं के लिए भारतीय बाजार में पहुंच बढ़ाना चाहता है। दूसरी ओर भारत केन्‍या का शीर्ष विदेशी व्‍यापार सहयोगी बनने का इच्‍छुक है।

अफ्रीकी देशों में केन्‍या की अर्थव्‍यवस्‍था शीर्ष अर्थव्‍यवस्‍था होने के कारण तथा दोनों देशों के निवेश और विश्‍वास को देखते हुए भारत के चार्टेड एकाउंटेंट केन्‍या के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे है और केन्‍या में भारत के चार्टेड एकाउंटेंटों के लिए अपार अवसर शेष है।


॥■॥ हवाई अड्डा अवसंरचना को प्रोत्‍साहन

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने पटना हवाई अड्डे पर 1,216.90 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से नया घरेलू टर्मिनल भवन तथा संबंधित अवसंरचना के निर्माण को अपनी स्‍वीकृति दे दी है।

• प्रभाव:

नया टर्मिनल भवन बनने के बाद हवाई अड्डे की यात्री क्षमता बढ़कर प्रतिवर्ष 4.5 मिलियन हो जाएगी। अभी हवाई अड्डे की यात्री क्षमता प्रतिवर्ष 0.7 मिलियन है। नया टर्मिनल भवन 65,155 वर्ग मीटर का होगा जिसमें 18,650 वर्गमीटर क्षेत्र भूतल होगा। इस भवन को विश्‍व स्‍तरीय यात्रा सुविधाओं से लैस किया जाएगा। नया टर्मिनल भवन बनने से पटना क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे अतिरिक्‍त रोजगार सृजन होगा। इस परियोजना के साथ बिहार के लोगों की आकांक्षाएं पूरी हुई हैं।

यह परियोजना प्रधानमंत्री द्वारा बिहार के लिए घोषित पैकेज का अंग है।

• पृष्‍ठभूमि:

बिहार का पटना हवाई अड्डा पूर्वी क्षेत्र के प्रमुख हवाई अड्डों में एक है। हवाई अड्डे का वर्तमान टर्मिनल भवन दो मंजिला पुराना ढांचा है और इसका उपयोग क्षमता से चार गुणा अधिक किया जा रहा है। सरकार को बिहार सरकार तथा बिहार की जनता की ओर से वर्तमान हवाई अड्डे को नया रूप देने और विस्‍तार करने के बारे में अनेक अनुरोध प्राप्‍त हुए। पटना हवाई अड्डे पर नया टर्मिनल भवन बनाना तथा संबंधित ढांचा निर्माण करना आवश्‍यक हो गया था, क्‍योंकि पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्‍या काफी बढ़ी है।


॥■॥ कटघोरा से डोंगरगढ़ के बीच 294.53 किलोमीटर की नई ब्रॉडगेज विद्युतीकृत रेल लाइन से छत्‍तीसगढ़ के रेल संपर्क से अछूते क्षेत्रों को रेल संपर्क उपलब्‍ध होगा

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने निम्‍नलिखित मंजूरी दी है:

• कटघोरा से डोंगरगढ़ के बीच 294.53 किलोमीटर की नई ब्रॉडगेज विद्युतीकृत रेल लाइन से छत्‍तीसगढ़ के रेल संपर्क से अछूते क्षेत्रों को रेल संपर्क उपलब्‍ध होगा और अछूते क्षेत्रों के लिए औद्योगिक विकास का द्वार खुलेगा। इससे हावड़ा मुंबई मार्ग के व्‍यस्‍त झरसुगुडा-नागपुर सेक्‍शन से माल की आवाजाही होगी और बिलासपुर-चांपा तथा दुर्ग स्‍टेशनों के व्‍यस्‍त यार्डों से नहीं गुजरना होगा।
• इस नई रेल लाइन से छत्‍तीसगढ़ के कोरबा, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम तथा राजनांदगांव जिलों को लाभ मिलेगा।
• इस परियोजना की लागत 5950.47 करोड़ रूपये है और इसे राज्‍य, संयुक्‍त उद्यम छत्‍तीसगढ़ कटघोरा-डोंगरगढ़ रेलवे लिमिटेड द्वारा लागू किया जाएगा। इस परियोजना में रेल मंत्रालय तथा छत्‍तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीआरसीएल) के माध्‍यम से छत्‍तीसगढ़ सरकार तथा निजी हितधारकों की इक्विटी भागीदारी होगी।

कोयला खनन के लिए राजगढ़ जिला (राजगढ़-मांड) के खुलने से आशा है कि दक्षिण पश्चिमी कोलफील्‍ड लिमिटेड तथा अन्‍य खनन कंपनियां छत्‍तीसगढ़ राज्‍य में कोयला खनन निकट भविष्‍य में वर्तमान 150एमटीपीए से बढ़ाकर 250एमटीपीए कर देंगी। यह परियोजना वर्तमान झरसुगुड़ा-नागपुर मार्ग पर भीड़ कम करेगी। इस मार्ग का उपयोग 2014-15 में 135 प्रतिशत से अधिक किया गया। यह भारतीय रेल प्रणाली में 30-35 एमटीपीए क्षमता सृजन करेगी जो कि वर्तमान आउटपुट का 3 प्रतिशत है। यह परियोजना एसईसीआर के पश्चिम की ओर जाने वाले यातायात को तेज मार्ग उपलब्‍ध कराएगी, छत्‍तीसगढ़ राज्‍य के अछूते क्षेत्रों में सेवा देगी और इन मार्गों में उद्योग स्‍थापना में सहायता देगी। यह अपने किस्‍म की पहली परियोजना है और इसे राज्‍य संयुक्‍त उद्यम के माध्‍यम से चलाया जाएगा।

• पृष्‍ठभूमि:

छत्‍तीसगढ़ रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीआरसीएल) रेल मंत्रालय तथा छत्‍तीगढ़ सरकार की 49:51 अनुपात का संयुक्‍त उद्यम है, जिसे कंपनी अधिनिमय 2013 के अंतर्गत कंपनी का रूप दिया गया है। रेल मंत्रालय और छत्‍तीगढ़ सरकार संयुक्‍त रूप से विभिन्‍न राज्‍यों में रेल परियोजनाओं की पहचान, संसाधन एकत्रीकरण और निगरानी करेंगी। इसके लिए सीआरसीएल ने एक विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट नागपुर-रायपुर मार्ग पर वर्तमान डोंगरगढ़ स्‍टेशन तथा गेवरा रोड़-पेंडरा रोड़ के निष्‍पादन के अंतर्गत कटघोरा स्‍टेशन के बीच नई सिंगल विद्युतीकृत लाइन के लिए है।

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