नई दिल्ली, 20 सितम्बर 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
॥■॥ आशा कर्मियों के लाभ पैकेज को कैबिनेट की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आशा कर्मियों के लाभ पैकेज को पूर्व प्रभाव से मंजूरी दे दी है। ये पैकेज अक्टूबर 2018 से प्रभावी होगा। इसका भुगतान दो अलग मदों के तहत नवम्बर 2018 से किया जाएगा।
इस पैकेज की लाभार्थी के रूप में उन आशा कर्मियों और आशा सहायिकाओं को नामित किया जाएगा, जो प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के नाम से भारत सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना के लिए सभी पात्रताएं पूरी करती हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा कर्मियों को मिलने वाली नियमित राशि और प्रोत्साहन राशि को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति माह किया गया है।
इस पैकेज के लिए केन्द्र सरकार की ओर से 2018-19 और 2019-20 की अवधि में किया जाने वाला भुगतान 1,224.97 करोड़ रुपये होगा।
लाभार्थियों की संख्या
अनुमानित एक करोड़ छह लाख छत्तीस हजार सात सौ एक आशा कर्मी और आशा सहायिकाएं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के दायरे में आएंगी।
अनुमानित नौ लाख सत्तावन हजार तीन सौ तीन आशा कर्मी और आशा सहायिकाओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ मिलेगा।
· अनुमानित दस लाख बाईस हजार दो सौ पैंसठ आशा कर्मियों को नियमित गतिविधियों के लिए मौजूदा एक हजार रुपये के स्थान पर न्यूनतम दो हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे।
विवरण
आशा कर्मी और आशा सहायिकाएं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना की लाभार्थी होंगी। योजना के लिए तय शर्तों के मुताबिक इसका लाभ 18 से 70 वर्ष की आयु वाली महिलाएं ले सकेंगी। बीमा की अवधि एक वर्ष की (1 जून से 31 मई) होगी। बीमा के तहत मिलने वाले लाभ –
दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर दो लाख रुपये का भुगतान।
दोनों आंखें, दोनों हाथ, दोनों पैर या एक हाथ और एक पैर पूरी तरह खराब हो जाने तथा एक आंख की रोशनी पूरी तरह चले जाने की स्थिति में दो लाख रुपये का भुगतान।
एक आंख की रोशनी पूरी तरह खत्म हो जाने या एक पैर और एक हाथ पूरी तरह खराब हो जाने की स्थिति में एक लाख रुपये का भुगतान।
केन्द्र सरकार की ओर से प्रति लाभार्थी 12 रुपये की प्रीमियम राशि हर साल दी जाएगी।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (दुर्घटना बीमा) का लाभ 18 से 50 वर्ष आयु की उन आशा कर्मियों और आशा सहायिकाओं को मिलेगा, जो इसके लिए सभी पात्रताएं पूरी करती हैं। इस योजना के लिए केन्द्र सरकार की ओर से सालाना औसतन 330 रुपये की प्रीमियम राशि का भुगतान किया जाएगा। बीमा कवर की अवधि 1 जून से 31 मई तक एक वर्ष की होगी। किसी कारणवश मृत्यु हो जाने पर लाभार्थी को दो लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।
· आशा कर्मियों को नियमित कार्यों के लिए प्रति माह मौजूदा एक हजार रुपये के स्थान पर दो हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह राशि केन्द्र और राज्य स्तर पर अनुमोदित कार्य निष्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि के अतिरिक्त होगी।
क्रियान्वयन नीति और लक्ष्य :
आशा लाभार्थी पैकेज के क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मौजूदा संस्थागत प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा।
लक्ष्य
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 31 मार्च 2019 तक 65 प्रतिशत आशा कर्मियों और आशा सहायिकाओं को पंजीकृत किया जाना।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत 30 अक्टूबर, 2019 तक 100 प्रतिशत आशा कर्मियों और आशा सहायिकाओं को पंजीकृत किया जाना।
नियमित गतिविधियों के लिए तथा प्रोत्साहन राशि के रूप में आशा कर्मियों को अक्टूबर से बढ़ी हुई दर से प्रति माह दो हजार रुपये का भुगतान। यह भुगतान नवम्बर 2018 से किया जाएगा।
॥■॥ तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड में आरसीएफ के इक्विटी निवेश को कैबिनेट की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने तालचर फर्टिलाइजर लिमिटेड (टीएफएल) में गैस आधारित फर्टिलाइजर परियोजना शुरू करने के लिए राष्ट्रीय केमिकल एंड फर्टिलाइजर लिमिटेड (आरसीएफ) की ओर से 1033.54 करोड़ रुपये (+/-) के इक्विटी निवेश करने के उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निवेश राशि परियोजना की कुल लागत का 29.67 प्रतिशत होगी।
तालचर परियोजना के फिर से चालू होने से देश के उर्वरक क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रम के जरिए सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर निवेश सुनिश्चित होगा। इससे देश के पूर्वी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं पैदा होने के साथ ही संबंधित राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उर्वरक इकाई के बहाल होने से स्वेदशी स्तर पर यूरिया का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे यूरिया के क्षेत्र में देश ज्यादा आत्मनिर्भर हो जाएगा।
पृष्ठभूमि
तालचर फर्टिलाइजर लिमिटेड (टीएफएल) गेल, राष्ट्रीय कैमिकल्स एंड फर्टिलाइजर लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड, और एफसीआईएल का संयुक्त उपक्रम है। इसका गठन नवम्बर 2015 में किया गया था। इसमें गेल, आरसीएफ और सीआईएल में से प्रत्येक की 29.67 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि 10.99 प्रतिशत हिस्सेदारी एफसीआईएल की है। ये कंपनियां मिलकर टीएफएल को फिर से खड़ा करना चाहती हैं। टीएफएल का गठन ओडिशा के अंगुल जिले में तालचर में गैस आधारित उर्वरक संयंत्र लगाने के लिए किया गया है। गेल और सीआईएल महाराष्ट्र की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं। इन कंपनियों के बोर्ड को टीएफएल में इक्विटी निवेश की मंजूरी देने का पूरा अधिकार है। आरसीएफ एक मिनी रत्न कंपनी है। कंपनी बोर्ड के पास इक्विटी निवेश के अनुमोदन के वित्तीय अधिकार नहीं हैं।
॥■॥ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 31(7) के अंतर्गत लिंडे एक्टींगसेलशेफ्ट एवं प्रैक्सेयर इन्कॉर्पोरेशन के संयोजन को सशर्त अनुमति प्रदान की; संयोजन की वजह से प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रभावों को दूर करने के लिये सुधारों/ उपायों की शर्त रखी गई
लिंडे एक्टिंगसेलशेफ्ट (लिंडे) एवं प्रैक्सेयर इन्कॉर्पोरेशन (प्रैक्सेयर) द्वारा एक नई कम्पनी के अंतर्गत दोनों के सम्मिलन के बारे में संयुक्त रूप से दिया गया एक नोटिस दिनांक 11 जनवरी 2018 को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को प्राप्त हुआ, नई कंपनी का मालिकाना अधिकार इन कंपनियों के वर्तमान शेयरधारकों के पास होगा।
जर्मनी के म्यूनिख में मुख्यालय वाली लिंडे एक अंतर्राष्ट्रीय गैस एवं इंजीनियरिंग कंपनी है एवं मुख्यतः औद्योगिक गैसों, चिकित्सा में प्रयुक्त गैसों, विशिष्ट गैसों एवं संबंधित इंजीनियरिंग एवं सेवा क्षेत्रों में कार्यरत है। अमेरिका के कनेक्टिकट में मुख्यालय वाली प्रैक्सेयर एक अंतर्राष्ट्रीय गैस कंपनी है एवं मुख्यतः औद्योगिक गैसों, चिकित्सा में प्रयुक्त गैसों एवं विशिष्ट गैसों के निर्माण एवं/ या आपूर्ति के क्षेत्र में सक्रिय है।
अपने अध्ययन के आधार पर आयोग का विचार था कि प्रस्तावित संयोजन भारत के कुछ बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा पर विवेचना करने योग्य प्रतिकूल प्रभाव डालेगा, किंतु इस प्रभाव को प्रस्तावित संयोजन में बदलाव के माध्यम से दूर किया जा सकता है। तदनुसार आयोग ने प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 31(7) के अंतर्गत प्रस्तावित संयोजन को निम्न विनिवेशों के अधीन अनुमति प्रदान कर दी, जिसका दोनों कंपनियों द्वारा कार्यान्वयन किया जाना हैः
क. लिंडे इण्डिया की संपूर्ण शेयरधारिता का बेल्लारी ऑक्सीजन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (बेलॉक्सी), लिंडे इण्डिया एवं आइनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के संयुक्त उद्यम, में विनिवेश;
ख. पूर्वी क्षेत्र में प्रैक्सेयर के तीन ऑन-साइट संयंत्रों यानी जमशेदपुर स्थित टाटा 1 तथा टाटा 2 एवं 3 एवं आसनसोल व कोलकाता स्थिति दो सिलेण्डर भरण स्टेशनों का विनिवेश; एवं
ग. दक्षिण क्षेत्र में लिंडे के ऑन-साइट संयंत्र यानी- बेल्लारी, कर्नाटक स्थित जेएसडबल्यू- 2 एवं हैदराबाद व चेन्नई स्थित दो सिलेण्डर भरण स्टेशनों का विनिवेश ।
उपरोक्त उपाय, इन व्यवसायों को आयोग के आदेश में उल्लिखित शर्तों का पालन करने वाली एक स्वतंत्र सत्ता (एक से अधिक सत्ता), को विक्रय एवं हस्तानांतरित कर कार्यान्वित किये जाएंगे ।
आयोग द्वारा आदेशित उपायों का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद कंपनियों के अतिव्यापन को रोकना एवं स्वतंत्र प्रतिस्पर्धी या एकाधिक प्रतिस्पर्धियों की स्थापना करना अथवा मौजूदा प्रतिस्पर्धियों को यह सुनिश्चित कर सशक्त बनाना है कि उनकी औद्योगिक गैसों के टनभार, थोक एवं सिलेण्डर व्यवसायों में बाज़ारों में समेकित मौजूदगी है।
क़ानूनी रूप से बाध्यकारी बदलावों एवं अन्य विस्तृत जानकारी के लिये, कृपया निम्न लिंक पर जाएं https://www.cci.gov.in/sites/default/files/Notice_order_document/C-2018-01-545.pdf
॥■॥ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यू डब्ल्यू एस) और आंगनवाड़ी सहायिकाओं (एडब्ल्यूएचएस) का मानदेय बढ़ाने तथा (अंब्रेला आईसीडीएस स्कीम) के तहत आंगनवाड़ी सहायिकाओं को कार्य निष्पादन के अनुरुप प्रोत्साहन राशि दिए जाने को मंत्रिमंडल की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यूएस) और आंगनवाड़ी सहायिकाओं (एडब्ल्यूएचएस) का मानदेय बढ़ाने तथा आंगनवाड़ी सेवाओं (समेकित बाल विकास सेवा अम्ब्रेला स्कीम) के तहत आंगनवाड़ी सहायिकाओं को कार्य निष्पादन के अनुरुप प्रोत्साहन राशि दिए जाने को मंजूरी दे दी है। इसके लिए 1 अक्टूबर 2018 से 31 मार्च 2020 की अवधि के लिए केन्द्र सरकार के हिस्से के रूप में कुल 10649.41करोड़ रूपए का भुगतान किया जाएगा।
मानदेय बढ़ाए जाने से करीब 27 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लाभान्वित होंगी। आंगनवाड़ी सेवा (अंब्रेला आईसीडीएस) योजना एक वृहत योजना है जिसके तहत देशभर में एडब्ल्यूसी/गांव स्तर के लाभार्थी हैं।
ब्यौरा:
कार्यकर्ताओं की श्रेणी
पुरानी दरें /प्रति माह
संशोधित दरें/ प्रति माह
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता
3000/-रुपये
4500/- रुपये
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (मिनी-एडब्ल्यूसी)
2250/- रुपये
3500/- रुपये
आंगनवाड़ी सहायिका
1500/- रुपये
2250/- रुपये (*)
(*) आंगनवाड़ी केन्द्रों के बेहतर संचालन के लिए कार्यप्रदर्शन के हिसाब से आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए प्रतिमाह 250/-रूपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि के भुगतान को भी मंजूरी दी गयी है।
मानदेय तथा प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी 1 अक्टूबर 2018 से प्रभावी होगी।
प्रभाव:
लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से शुरू किये गये इस कार्यक्रम से नवजात शिशुओं में कुपोषण और रक्त अल्पता तथा जन्म के समय कम वजन जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी, किशोरवय बालिकाओं का सशक्तिकरण, कानूनी मामलों में उलझे बच्चों को सुरक्षा उपलब्ध कराने और कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा लक्षित उद्देश्यों की प्राप्ति और ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए संबंधित मंत्रालयों तथा राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के बीच समन्वय तथा उन्हें सही दिशा-निर्देश जारी करने और उनके प्रदर्शन पर निगरानी रखने की व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
वित्तीय प्रभाव
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/ सहायिकाओं के मानदेय और प्रोत्साहन राशि में वृद्धि पर 1 अक्टूबर, 2018 से 31 मार्च, 2020 की अवधि में होने वाले खर्च का ब्यौरा इस प्रकार है-
संघटकों की श्रेणी
2018-19 (6 माह)
2019-20
कुल
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय
2182.63
4365.27
6547.97
मिनी-आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का मानदेय
154.60
309.19
463.79
आंगनवाड़ी सहायिकाओं का मानदेय
1212.57
2425.15
3637.72
कुल
3549.8
7099.61
10649.41
पृष्ठभूमि
समेकित बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) का उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। इस योजना के लाभार्थियों में इन बच्चों के अलावा गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं भी शामिल हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं को दिये जाने वाले मानदेय में पिछली बढ़ोतरी 2011 में की गई थी। जीवन यापन तथा बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार के खर्चों में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए मानदेय में 2017 में भी वृद्धि की गई थी।
॥■॥ मंत्रिमंडल ने विद्युतीकरण के साथ इंदौर (मांगलियागांव)-बुधनी नई रेल लाईन (205.5 किमी.) की स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति ने बुधनी से इंदौर (मांगलियागांव) के बीच 205.5 किलोमीटर लम्बी नई रेल लाईन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 3261.82 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों का विकास तथा इंदौर से जबलपुर के बीच यात्रा समय में कमी और इंदौर से मुम्बई तथा दक्षिण की ओर यात्रा समय में कमी लाना है। इससे भोपाल के रास्ते वर्तमान मार्ग की तुलना में इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी 68 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे क्षेत्र के लोगों और उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। इससे परियोजना क्षेत्र में रोजगार सृजन होगा। निर्माण अवधि के दौरान 49.32 लाख मानवदिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा।
प्रस्तावित लाईन बुधनी के वर्तमान यार्ड से प्रारंभ होगी और इंदौर के निकट पश्चिमी रेलवे के वर्तमान स्टेशन मांगलियागांव से जुड़ेगी। इस मार्ग पर दस नए क्रॉसिंग स्टेशन और सात नए हाल्ट स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। नई लाईन से सिहोर, देवास तथा इंदौर जिलों को लाभ होगा और बुधनी से इंदौर के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। अभी बुधनी से बरखेड़ा घाट सेक्शन सहित भोपाल-इटारसी के भीड़ वाले मार्ग से जाना पड़ता है।
नई लाईन आस-पास के क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए बुनियादी ढ़ाचागत सुविधा प्रदान करेगी और इससे सामाजिक-आर्थिक लाभ होंगे। यह परियोजना इस क्षेत्र के पिछड़े वर्ग का विकास करने तथा नसरुल्लागंज, खातेगांव तथा कन्नौद जैसे विभिन्न शहरो/गांवों से रेल संपर्क स्थापित होगा, जहां अभी रेल संपर्क नहीं है।
॥■॥ जम्मू-कश्मीर में कमजोर ग्रामीण परिवारों को प्रोत्साहन
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू और कश्मीर के लिए दीन दयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत विशेष पैकेज लागू करने के लिए 2018-19 के दौरान एक वर्ष की अवधि के लिए समय सीमा विस्तार को मंजूरी दे दी है।
मंत्रिमंडल ने विशेष पैकेज लागू करने के लिए डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत राज्य को आवश्यकता आधार पर गरीबी अनुपात से जोड़े बिना कोष आवंटन की भी स्वीकृति दे दी है। इस पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं आएगा क्योंकि मूल रूप से स्वीकृत 755.32 करोड़ रुपये के वित्तीय आवंटन के अंतर्गत राज्य में दो तिहाई कमजोर परिवारों को कवर करने के लिए समय सीमा विस्तार को स्वीकृति दी गई है। 2018-19 के दौरान एक वर्ष की अवधि के लिए 143.604 करोड़ रुपये की राशि की आवश्यकता होगी।
प्रभावः
• इससे राज्य में सभी कमजोर ग्रामीण परिवारों (परिवारों की कुल संख्या का अनुमानित दो तिहाई) को निश्चित समय सीमा के अंदर कवर करने में मदद मिलेगी।
• इससे स्वतः समावेशन श्रेणी के अंतर्गत आने वाले परिवारों तथा सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना-2011 में सूचीबद्ध कम से कम एक वंचित श्रेणी में आने वाले परिवारों का जुटाव सुनिश्चित होगा।
• इससे डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत जम्मू और कश्मीर में सभी ब्लॉकों का कवरेज भी सुनिश्चित होगा तथा राज्य में सामाजिक समावेश, सामाजिक विकास और गरीबी उपशमन में आजीविका प्रोत्साहन सुनिश्चित होगा।
पृष्ठभूमिः
राज्य में अपिहार्य कारणों तथा गड़बड़ी की स्थिति के कारण मई, 2013 में स्वीकृत विशेष पैकेज को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। अब राज्य सरकार ने भारत सरकार से पहले स्वीकृत विशेष पैकेज को लागू करने की समय सीमा के विस्तार तथा जम्मू-कश्मीर में विस्तारित अवधि के दौरान गरीबी अनुपात से जोड़े बिना मांग आधार पर डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत धन पोषण को जारी रखने पर विचार करने का अनुरोध किया हैं। इस तरह मंत्रिमंडल की स्वीकृति जम्मू और कश्मीर में कमजोर ग्रामीण परिवारों को प्रोत्साहन देगी।
॥■॥ मंत्रिमंडल ने बांध पुन:स्थापन और सुधार परियोजना के संशोधित लागत अनुमान को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक समिति (सीसीईए) ने 3466 करोड़ रुपए की संशोधित लागत पर बांध पुन:स्थापन और सुधार परियोजना (डीआरआईपी) के संशोधित लागत अनुमान को अपनी मंजूरी दे दी है। 198 बांधों की सुरक्षा और संचालन प्रदर्शन में सुधार तथा व्यापक प्रबंधन प्रणाली के साथ संस्थागत मजबूती के लिए विश्व बैंक वित्तीय सहायता देगा। 3466 करोड़ रुपए की परियोजना में 2628 करोड़ रुपए विश्व बैंक देगा और 747 करोड़ रुपए डीआरआईपी राज्य/क्रियान्वयन एजेंसियां और शेष 91 करेाड़ रुपए केन्द्रीय जल आयोग देगा।
सीसीईए ने पूर्व प्रभाव से 01 जुलाई, 2018 से 30 जून, 2020 तक दो वर्ष के समय विस्तार की स्वीकृति भी दी है।
प्रभाव:
यह परियोजना चयनित वर्तमान बांधों की सुरक्षा और संचालन प्रदर्शन में सुधार लाएगी तथा जाखिम मिटाकर निचले इलाकों की आबादी और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। परियोजना से प्राथमिक रूप में जलाशय पर निर्भर शहरी और ग्रामीण समुदाय तथा नीचले इलाके के समुदाय लाभान्वित होंगे। नीचले इलाकों में रहने वाले लोग बांध के विफल होने या संचालन विफलता के कारण जोखिम में रहते हैं। संस्थागत व्यवस्था को मजबूत बनाकर बांध सुरक्षा संगठनों को और अधिक करागर बनाया जाएगा ताकि बांध ढांचागत दृष्टि से मजबूत हों और कर्मचारी तथा अधिकारियों के क्षमता सृजन के साथ संचालन की दृष्टि से भी मजबूत हों।
डीआरआईपी के निम्नलिखित उद्देश्य हैं
ए) घटक -। बांध तथा इसके आसपास के ढांचों का पुन:स्थापन
बी) घटक -।। संस्थागत मजबूती तथा
सी) घटक -।।। परियोजना प्रबंधन
इस योजना में 198 बांध परियोजनाओं के पुन:स्थापन का प्रावधान है। ये परियोजनाएं भारत के 7 राज्यों – केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक, झारखंड (दामोदर घाटी निगम) तथा उत्तराखंड (उत्तराखंड जल विद्युत निगम लि.) – में हैं।
क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा प्रारम्भिक और संशोधित लागत के साथ बांधों की संख्या इस प्रकार दी गई है:-
क्रियान्वयन एजेंसी
परियोजना बांधों की सं.
कुल प्रारंभिक परियोजना लागत (करोड़ रु. में)
कुल परियोजना संशोधित लागत (करोड़ रु. में)
मध्य प्रदेश, डब्ल्यूआरडी
25
315
169
ओडिशा, डब्ल्यूआरडी
26
148
751
तमिलनाडु, डब्ल्यूआरडी
69
486
543
टैनजेडको
20
260
260
केरल, डब्ल्यूआरडी
16
158
360
केएसईबी
12
122
154
सीडब्ल्यूसी
-
132
270
कर्नाटक, डब्ल्यूआरडी
22
276
581
यूजेवीएनएल
5
64
235
डीवीसी
3
139
143
कुल लागत (करोड़ रु. में)
198
2100
3466
पृष्ठभूमिः
मूल रूप से डीआरआईपी की कुल लागत राज्य के हिस्से के 1968 करोड़ रुपये और केंद्रीय हिस्से के 132 करोड़ रूपये के साथ 2100 करोड़ रुपये थी। प्रारंभ में यह परियोजना 6 वर्ष की अवधि की थी। यह 18 अप्रैल, 2012 से प्रारंभ हुई और इसकी समाप्ति अवधि 30 जून, 2018 थी। केंद्रीय जल संसाधन , नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय तथा विश्व बैंक द्वारा 2017 में सिद्धांत रूप में 30 जून, 2020 तक परियोजना समाप्ति की संशोधित तिथि के साथ परियोजना क्रियान्वयन का विस्तार दो वर्षों के लिए किया गया।
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