एक बहुमूल्य शख्सियत, महान साहित्यकार, कवि व हर दिल अजीज थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी



नई दिल्ली, 16 अगस्त 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार 16 अगस्त 2018 को लंबे इलाज के बाद नई दिल्ली एम्स में 5:05 अपराह्न निधन हो गया। उन्हें 07 जून 2018 को एम्स में भर्ती कराया गया था। मंगलवार से ज्यादा तबीयत बिगड़ी के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। वे 93 वर्ष के थे। एक शिक्षक परिवार में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी जनता के बीच प्रसिद्ध अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं। इनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर, मध्यप्रदेश में हुआ था।

राजनीतिक विज्ञान और कानून के छात्र रहे अटल बिहारी बाजपेयी ने एक पत्रकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। वहीं भारतीय राजनीति में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत छोड़ो आंदोलन के साथ ही 1942 में कदम रखा था। सांसद के रूप में उन्होंने चार दशक तक वर्चस्व कायम रखा, 1951 में भारतीय जन संघ में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी।

आज की भारतीय जनता पार्टी को पहले भारती जन संघ के नाम से जाना जाता था जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का अभिन्न अंग है। वे लोकसभा में नौ बार और राज्य सभा में दो बार चुने गए जो अपने आप में ही एक कीर्तिमान है। उन्होंने भारत के विदेश मंत्री का पद भी संभाला। उन्होंने आजादी के बाद भारत की घरेलू और विदेश नीति को आकार देने में एक सक्रिय भूमिका निभाई। अटल बिहारी बाजपेयी तीन बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। पहली बार अटल बिहारी 1996 में और दूसरी बार 1998 में प्रधानमंत्री बने। इसके बाद वह तीसरी बार 1999 में बने और 2004 तक अपना कार्यकाल पूरा किया।

एक ओर जहाँ एम्स में पूर्व प्रधानमंत्री की तबीयत पिछले 24 घंटे में काफी खराब हो गई है थी वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, आदित्यनाथ येागी सहित अनेक नेता, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, अशेाक गहलोत, समेत कई विपक्षी दलों के नेता भी पूर्व प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी लेने गुरुवार को एम्स पहुंचे थे। 5:05 अपराह्न 16 अगस्त 2018 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अंतिम सांस लीं। इससे पहले उनके रिश्तेदारों को एम्स बुला लिया गया था। उन्होंने

इनकी प्रमुख कृतियां न दैन्यं न पलायनम, मृत्यु और हत्या, अमर बलिदान है।

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