नई दिल्ली, 02 जुलाई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
● डॉ• जितेन्द्र सिंह ने सिविल सेवकों और अधिकारियों के लिए आयोजित 44वें एडवांस प्रोफेशनल प्रोग्राम को संबोधित किया
केन्द्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ• जितेन्द्र ने कहा कि संयुक्त सचिव स्तर की सीधी भर्ती (लैटेरल इंट्री) से शासन समृद्ध होगा।
सिविल सेवकों व अधिकारियों के लिए आयोजित 44वें एडवांस प्रोफेशनल प्रोग्राम इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एपीपीपीए) के उद्घाटन भाषण में डॉ• जितेन्द्र सिंह ने हाल के सप्ताहों में मीडिया के एक वर्ग में फैली गलतफहमी को दूर करते हुए कहा कि सेवाओं में सीधी भर्ती पहले भी रही है और सरकार ने केवल इसे संस्थागत रूप देने व व्यवस्थित करने का प्रयास किया है, ताकि प्रक्रिया उद्देश्यपूर्ण हो और सर्वश्रेष्ठ लोगों का चयन किया जा सके। यह चयन प्रक्रिया, मेधा और कार्य की विशिष्ट आवश्यकताओं पर ही पूर्णतः आधारित होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी नियुक्तियां संविदा आधारित होंगी और नियमित नहीं होंगी। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) ने किया था।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शुभारंभ किए गए कुछ नये कार्यक्रमों के लिए विशिष्ट उद्यमिता की आवश्यकता है। सीधी भर्ती के माध्यम से यह उद्देश्य प्रभावी ढंग से पूरा होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त सचिव, उप-सचिव व निदेशक स्तर के विभिन्न पद रिक्त हैं।
अपने संबोधन के दौरान डॉ• जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने कई नये और क्रांतिकारी निर्णय लिए हैं। 2014 में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने हमें अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार का मंत्र दिया था। जब हम पिछले चार सालों को देखते हैं तो लगता है कि हमने इस प्रतिज्ञा को काफी हद तक पूरा किया है।
डॉ• जितेन्द्र सिंह ने कहा कि आजादी के 70 सालों में पहली बार सरकार ने नये कानून बनाने का श्रेय लेने की बजाए 1500 पुराने, अप्रचलित व अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करने में संतुष्टि पाई है। इनमें से कुछ कानून ब्रिटिश राज के दौरान बनाए गए थे। उदाहरण के लिए दस्तावेज को राजपत्रित अधिकारी द्वारा सत्यापित करना।
डॉ• जितेन्द्र सिंह ने कहा कि पिछले चार वर्षों में सिविल सेवकों के लिए कार्य-अनुकूल माहौल बनाने का हरसंभव प्रयास किया गया है। दूसरी तरफ अधिकांश सरकारी कार्यक्रमों में नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों को भी जन-अभियान बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने दो उदाहरण दिए- पहला भारत सरकार द्वारा नये आईएएस अधिकारियों के लिए तीन महीने की परामर्श सेवा की व्यवस्था तथा दूसरा प्रधानमत्री उत्कृष्टता पुरस्कारों के लिए नये प्रारूप को अपनाना। पहले का प्रारूप व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित था। नये प्रारूप में लोक कल्याण कार्यक्रमों के संदर्भ में विभिन्न जिलों द्वारा लक्ष्य की प्राप्ति व परिणाम को आधार बनाया गया है।
आईआईपीए के चेयरमैन तथा कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल टी• एन• चतुर्वेदी, आईआईपीए के निदेशक डॉ• तिष्यारक्षित चटर्जी और कार्यक्रम के निदेशक प्रो• अशोक विशनदास ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
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