हिसार, 5 सितंबर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की और से जिलेभर के न्यायिक मजिस्ट्रेट के लिए संबध हैल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ), फोर्टिस फाउंडेशन, वायस ऑफ टोबेको विक्टिमस (वीओटीवी) की और से तंबाकू नियंत्रण पर विशेष कानूनी चर्चा का एडीआर सेंटर में मंगलवार को आयेाजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित सहरावत ने की। इस कार्यक्रम में जिलेभर के 23 न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भाग लिया।
वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस (वीओटीवी) के पैट्रन रेडि़येशन आंकोलॉजिस्ट डा• अरुण कुमार अग्रवाल ने कहा कि सभी को स्वस्थ वातावरण और स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार है इसलिए जो लेाग सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करतें है, उससे पर्यावरण दूषित हेाता है। नॉन स्मोकर को भी स्वच्छ हवा लेने का संवैधानिक अधिकार है इसलिए हम सभी का मौलिक कर्तव्य है कि उनके अधिकारों का हनन नहीं हो। इसके लिए सभी की सामूहिक भागीदारी से ही युवाओं व बच्चों को इस प्रकार के नशों से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी को मिलकर सामूहिक रुप से प्रयास करनें होंगे तभी सभी को स्वच्छ वातावरण मिल पायेगा। सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट इत्यादि का सेवन करने से नॉन स्मोकर को बहुत अधिक नुकसान होता है। इसके लिए हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की और से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व अन्य सहयेागी संस्थाओं को इस प्रकार के नशों को रोकने के लिए मुहिम चलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
उन्होंन कहा कि शहर को पूरी तरह से स्वच्छ व स्वस्थ बनाने के लिए सभी का सामूहिक रुप से सहयोग चाहिए और इसमें सभी को साथ आना चाहिए। तंबाकू का बढ़ता प्रचलन जन स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। प्रदेश में कोटपा अधिनियम (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) की पालना होने से प्रतिवर्ष हजारेां की संख्या में हो रही जनहानि को रोका जा सकता है।
संबध हैल्थ फाउंडेशन के सीनियर मैनेजर डा• सेामिल रस्तौगी ने कहा कि प्रदेश में करीब 28 हजार लोग प्रतिवर्ष तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के सेवन से अपनी जान गंवा रहे है और प्रतिदिन 116 से अधिक बच्चे तंबाकू सेवन की शुरुआत कर रहे है। हरियाणा में 23.7 प्रतिशत (43 लाख) लोग किसी न किसी रुप में तंबाकू उत्पादों का सेवन करते है जिसमें 35 लाख लोग धम्रपान करते है जो कि बेहत चिंता का विषय है।
डा• रस्तौगी ने कहा कि जिले की सभी शिक्षण संस्थाओं, सार्वजनिक स्थानेां को तंबाकू मुक्त बनाने और बच्चों को स्वस्थ वातावरण देने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानून की सख्ती से पालना कराई जाए।
उन्होने तंबाकू से होने वाली हानियों पर चर्चा करते हुए बताया कि इसमें 7 हजार तरह के रासायन होतें है जो कि पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक होतें है। इसका मूल कारण है कि बच्चों में इसकी शुरुआत यंही से पड़ती है। वंही देश की 30 प्रतिशत आबादी परेाक्ष रुप से धम्रपान की शिकार है। इससे खासतौर पर बच्चे एंव घरेलू महिलांए प्रभावित है।
डा• रस्तौगी ने कहा कि तंबाकू निंयत्रण कानून कोटपा (सिगरेट एंव अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003) के अनुच्छेद 4 में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान की रोक, अनुच्छेद 5 में तंबाकू पदार्थों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर प्रतिबंध, अनुच्छेद 6 अ में अवयस्कों को और उनके द्वारा तंबाकू की बिक्री पर रोक, अनुच्छेद ब में सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे भीतर व बाहर तंबाकू की बिक्री का निषेध, अनुच्छेद 7 में सभी प्रकार के तंबाकू पदार्थों के पैकेट पर अनिवार्य निर्दिष्ट सचित्र स्वास्थ्य चेतावनी का प्रावधान है। इसके साथ ही किशोर न्याय अधिनियम (जे.जे.एक्ट) अनुच्छेद 77 में अवयस्कों को तंबाकू/मादक पदार्थ देने पर एक लाख रुपए का दंड तथा 7 साल की कैद का प्रावधान है।
इस चर्चा में हिसार जिले के न्यायिक मजिस्ट्रेट, एसएचएफ के जमुना प्रसाद इत्यादि उपस्थित थे।
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