खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 23 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) मंत्रिमंडल ने कार्मिक प्रबंधन तथा लोक प्रशासन के क्षेत्र में भारत और सिंगापुर के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने कार्मिक प्रबंधन तथा लोक प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और सिंगापुर के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को अपनी स्‍वीकृति दे दी है।

प्रमुख विशेषताएं :

समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य शासन संचालन की वर्तमान प्रणाली विशेषकर कार्यबल, कार्यस्‍थल तथा नौकरी, जनसेवा डिलिवरी, मानव संसाधन प्रबंधन, सार्वजनिक क्षेत्र सुधार, नेतृत्‍व/प्रतिभा विकास तथा ई-गवर्नेंस/डिजिटल सरकार के क्षेत्र में सुधार करना है।

लाभ :

समझौता ज्ञापन लोक प्रशासन तथा शासन संचालन सुधारों के क्षेत्र में भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग की रूपरेखा प्रदान करेगा।

इसका उद्देश्‍य लोक प्रशासन, सुशासन तथा जन सेवा सुधार में उत्‍कृष्‍टता प्राप्‍त करना है जिससे अधिक सार्वजनिक दायित्‍व सुनिश्चित होगा और इसे प्रोत्‍साहन मिलेगा।

इसका उद्देश्‍य नवाचारी शिष्‍ट व्‍यवहारों का प्रयोग करना भी है, ताकि ऑनलाइन जनसेवा, डिलिवरी सुधार में उत्‍कृष्‍टता हासिल की जा सके।


(●) मंत्रिमंडल ने तुर्की से पोस्‍ता दाना आयात के लिए तेज और पारदर्शी प्रोसेसिंग सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से पोस्‍ता दाना व्‍यापार पर भारत और तुर्की के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने पोस्‍ता दाना व्‍यापार पर भारत और तुर्की के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर को स्‍वीकृति दे दी है। इसका उद्देश्‍य तुर्की से पोस्‍ता दाना आयात के लिए तेज और पारदर्शी प्रोसेसिंग सुनिश्चित करना है।

विवरण:

एमओयू में प्रावधान है कि –

• तुर्की अनाज बोर्ड (टीएमओ) पोस्‍ता दाना तुर्की से भारत निर्यात करने के नियमों के लिए ऑनलाइन प्रणाली का संचालन करेगा। ऑनलाइन प्रणाली की सदस्‍यता प्राप्‍त करने के लिए निर्यातक कंपनियां एजियन एक्‍सपोटर्स एसोसिशएन (ईआईबी) (कानून द्वारा प्रदत्‍त जिम्‍मेदारी) के माध्‍यम से टीएमओ को आवेदन प्रस्‍तुत करेंगी।

• प्रत्‍येक वर्ष भारत द्वारा आयात किये जाने वाले पोस्‍ता दाना की मात्रा भारत सरकार तुर्की सरकार के साथ विचार-विमर्श करके तय करेगी। इसमें पैदावार वर्ष में तुर्की में पोस्‍ता दाना उत्‍पादन, पिछले पैदावार वर्षों के शेष और तुर्की गणराज्‍य की घरेलू या अन्‍य निर्यात आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखा जाएगा।

• निर्यातक कंपनियां टीएमओ से पंजीकृ‍त होंगी। भारतीय आयातक के साथ निर्यातक कंपनी द्वारा किया गया प्रत्‍येक बिक्री करार ऑनलाइन प्रणाली के माध्‍यम से टीएमओ से पंजीकृत होंगे। उपरोक्‍त पैरा-2 में वर्णित मात्रा से अधिक के बिक्री करार को पंजीकृत नहीं करने की जिम्‍मेदारी टीएमओ की होगी।

• उपरोक्‍त पैरा-2 में वर्णित मात्रा को ध्‍यान में रखते हुए प्रत्‍येक वर्ष दोनों पक्ष किसी भारतीय आयातक द्वारा पैदावार वर्ष में आयात की जाने वाली मात्रा तय कर सकते हैं।

• केन्‍द्रीय नार्कोटिक्‍स ब्‍यूरो (सीबीएन) टीएमओ द्वारा पंजीकृत बिक्री करार को पंजीकृत करेगा। यह पंजीकरण टीएमओ द्वारा संचालित ऑनलाइन प्रणाली और भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय द्वारा पंजीकरण के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगा। सीबीएन अपने द्वारा पंजीकृत बिक्री करार ऑनलाइन प्रणाली पर अपलोड करेगा। टीएमओ सीबीएन द्वारा पंजीकृत करारों के संबंध में भी निर्यात की अनुमति देगा।

• बिक्री करार तथा अन्‍य आवश्‍यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद टीएमओ निर्यातकों को पोस्‍ता दाना के लिए कानूनी उत्‍पादन प्रमाण-पत्र उपलब्‍ध कराएगा।

यह समझौता ज्ञापन तुर्की से पोस्‍ता दाना आयात के लिए कोटा निर्धारण और पूर्व प्राधिकार प्रोसेसिंग को तेज और पारदर्शी बनाएगा। इस तरह उचित आयात करार आसानी से किया जा सकता है और आयात में बाधा डालने वाले अनेक मामले टाले जा सकेंगे।

समझौता ज्ञापन भारत के घरेलू बाजार में पोस्‍ता दाना की निरंतर उपलब्‍धता सुनिश्चित करेगा और अंतत: इससे भारत के पोस्‍ता दाना उपभोक्‍ता लाभांवित होंगे।

पृष्‍ठभूमि :

कानूनी विवादों के कारण तुर्की से पोस्‍ता दाना का आयात रूक गया था। इससे भारत के घरेलू बाजार में पोस्‍ता दाना की कीमत में काफी वृद्धि हुई और कुछ आयातकों द्वारा जमाखोरी भी गई। अदालत द्वारा अनेक स्‍थगन आदेश जारी करने और सुनवाई स्‍थगित होने के कारण स्थिति गंभीर हुई और देश में पोस्‍ता दाना की उपलब्‍धता कम हो गई। ऐसी कानूनी अड़चनों को टालने के लिए, मूल्‍यवृद्धि और जमाखोरी रोकने के लिए भारत सरकार और तुर्की सरकार के बीच समझौता ज्ञापन के माध्‍यम से एक वैकल्पिक व्‍यवस्‍था बनाने की आवश्‍यकता है जिसमें वास्‍तविक समय डाटा का आदान-प्रदान किया जा सके ताकि यह सुनिश्चित हो कि तुर्की से आयात किये गये पोस्‍ता दाना की मात्रा उचित है, उत्‍पादन सही है तथा कानूनी रूप से तुर्की में उत्‍पादित है।


(●) मंत्रिमंडल ने भारत और डेनमार्क के बीच खाद्य सुरक्षा और सहयोग समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और डेनमार्क के बीच खाद्य सुरक्षा और सहयोग समझौता ज्ञापन को अपनी पूर्वव्‍यापी (एक्‍सपोस्‍ट फेक्‍टो) मंजूरी प्रदान कर दी है। भारत और डेनमार्क के बीच इस समझौता ज्ञापन पर 16 अप्रैल, 2018 को हस्‍ताक्षर किए गये थे।

लाभ:

इस समझौता ज्ञापन से खाद्य सुरक्षा की दिशा में दोनों देशों को अपनी क्षमता निर्माण को सुदृढ़ बनाने और खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को तेजी से सुलझाने तथा द्विपक्षीय सहयोग के मजबूत होने, पारस्‍परिक समझबूझ एवं विश्‍वास कायम करने में मदद मिलेगी।

इस समझौता ज्ञापन से सर्वोत्‍तम व्‍यवसायों तक पहुंच और खाद्य व्‍यापार में महत्‍वपूर्ण वस्‍तुओं के खाद्य सुरक्षा मानकों के सुधार में मदद मिलेगी।


(●) मंत्रिमंडल ने भारत और फ्रांस के बीच नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और फ्रांस के बीच 10 मार्च, 2018 को नई दिल्‍ली में हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन को अपनी कार्यव्‍यापी (एक्‍सपोस्‍ट फेक्‍टो) मंजूरी प्रदान कर दी है।

दोनों देशों का उद्देश्‍य राष्‍ट्रीय सौर ऊर्जा संस्‍थान (एनआईएसई), भारत और आई एनर्जी एटॉमिक एट ऑक्‍स एनर्जीज़ अल्‍टर्नेटिव्‍स (सीईए) फ्रांस, के बीच चुने गये क्षेत्रों में अनुसंधान/प्रदर्शन/पायलट परियोजना की पहचान करना है। पारस्‍परिक करार पर आधारित दोनों पक्ष आई. एस. ए. सदस्‍य देशों में पायलट परियोजना के कार्यान्‍वयन और संचालन के लिए काम करेगी। यह सहयोग संयुक्‍त अनुसंधान परियोजनाओं, संयुक्‍त अनुसंधान एवं विकास, संयुक्‍त कार्यशालाओं, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान जिसमें दोनों देशों के विशेषज्ञों के आदान-प्रदान भी शामिल हैं, सहित अनेक संसाधनों के तौर-तरीकों के माध्‍यम से हो सकता है। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य विशेषज्ञों के आदान-प्रदान एवं जानकारी की नेटवर्किंग करना भी है।

समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।


(●) मंत्रिमंडल ने भारत और मोरक्‍को के बीच नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और मोरक्‍को के बीच समझौता ज्ञापन को अपनी कार्यव्‍यापी (एक्‍सपोस्‍ट फेक्‍टो) मंजूरी प्रदान कर दी है। इस समझौता ज्ञापन पर 10 अप्रैल, 2018 को नई दिल्‍ली में हस्‍ताक्षर हुए थे।

दोनों पक्षों का उद्देश्‍य नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के विषयों पर पारस्‍परिक लाभ, समानता एवं हितों के आधार पर तकनीकी द्विपक्षीय समझौते को प्रोत्‍साहित करने और इसके संवर्द्धन के लिए सहयोगात्‍मक संस्‍थागत संबंध स्‍थापित करना है। इस समझौता ज्ञापन में सहयोग के क्षेत्रों से संबंधित विषयों की समीक्षा, निगरानी और चर्चा करने के संबंध में प्रावधान किया गया है। समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और जानकारी की नेटवर्किंग करना भी है।

इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौतों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।


(●) मंत्रिमंडल ने वाम चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल संपर्क के प्रावधान को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने गृह मंत्रालय द्वारा चिन्हित 4072 टॉवर लोकेशनों पर मोबाइल सेवा प्रदान करने के लिए सार्वभौमिक दायित्‍व कोष (यूएसओएफ) समर्थित योजना को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। यह दूसरे चरण की परियोजना के लिए 10 राज्‍यों के 96 वाम चरमपंथ प्रभावित (एलडब्‍ल्‍यूई) क्षेत्रों के लिए है। परियोजना की कुल लागत 7,330 करोड़ रुपये होगी।

इस नेटवर्क का इस्‍तेमाल वाम चरमपंथ प्रभावित इलाकों में तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा किया जाएगा। यह परियोजना मोबाइल सेवाएं भी प्रदान करेगी ताकि संपर्क रहित आबादी वाले निवासियों की मदद की जा सके। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में सुधार होगा। यह परियोजना डिजिटल मोबाइल संपर्क की उपलब्‍धता के साथ पिछड़े और वाम चरमपंथ प्रभावित (एलडब्‍ल्‍यूई) क्षेत्र में ई-गवर्नेंस गतिविधियों को गति प्रदान करेगी। दस राज्‍यों में प्रभावित टॉवर लोकेशनों की संख्‍या इस प्रकार है :

क्रम संख्‍या
राज्‍य
जि़ले
टॉवर लोकेशनों की संख्‍या

1
आंध्र प्रदेश
8
429

2
बिहार
8
412

3
छत्‍तीसगढ़
16
1028

4
झारखंड
21
1054

5
मध्‍य प्रदेश
1
26

6
महाराष्‍ट्र
2
136

7
ओडि़शा
18
483

8
तेलगांना
14
118

9
उत्‍तर प्रदेश
3
179

10
पश्चिम बंगाल
5
207

कुल
10 राज्‍य
96
4072

पृष्‍ठभूमि :

ए. एलडब्‍ल्‍यूई चरण-1 परियोजना

एलडब्‍ल्‍यूई चरण-1 परियोजना चरमपंथ प्रभावित क्षेत्रों में 2जी टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल करते हुए मोबाइल सेवाएं प्रदान करने के लिए है। इसकी कुल स्‍वीकृत लागत 4080.78 करोड़ रुपये है और पूरी होने वाली है।

अब तक 2355 में से कुल 2335 स्‍थल विकिरण कर रहे हैं।


बी. एलडब्‍ल्‍यूई चरण-II परियोजना

गृह मंत्रालय ने दस राज्‍यों के 96 जिलों में तैनात सुरक्षाकर्मियों की संचार आवश्‍यकता के लिए संबंधित राज्‍यों के साथ विचार-विमर्श करके 4072 टॉवर लोकेशनों को चिन्हित किया है और 27 अक्‍टूबर 2017 को दूरसंचार विभाग को प्रदान किया है।
हितधारकों की आवश्‍यकता के अनुसार चरण-II परियोजना में प्रस्‍तावि‍त टेक्‍नोलॉजी उन्‍नत बनाई गई है। मोबाइल संपर्क प्रदान करने के लिए अब इस परियोजना में 2जी तथा 4जी टेक्‍नोलॉजी दी जा रही है।


(●) मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए विस्‍तृत दूरसंचार विकास योजना के अंतर्गत मेघालय में मोबाइल सेवाओं के प्रावधान के लिए यूएसओएफ योजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 3911 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मेघालय में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र के लिए विस्‍तृत दूरसंचार विकास योजना (सीटीडीपी) को लागू करने और पूर्वोत्‍तर की सीटीडीपी परियोजना के लिए बढ़ी हुई 8120.81 करोड़ रुपये (10.09.2014 को मंत्रिमंडल द्वारा 5336.18 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है) की राशि की मंजूरी दे दी है। इसके लिए धनराशि सार्वभौमिक सेवा अनुग्रह कोष (यूएसओएफ) द्वारा दी जाएगी।

मुख्‍य विशेषताएं:

योजना के बारे में:

मेघालय राज्‍य के पहचाने गए ऐसे क्षेत्र जहां मोबाइल सेवा नहीं है वहां 2जी+4जी मोबाइल कवरेज का प्रावधान; और मेघालय में राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर समेकित 2जी+4जी मोबाइल कवरेज का प्रावधान।
लाभ:

• दूरसंचार नेटवर्क को मजबूत बनाने से मेघालय में मोबाइल संपर्क की पैठ बढ़ेगी। जिसके परिणामस्‍वरूप लोगों की संचार, सूचना और संचालन प्रणाली तक सस्‍ती और समान पहुंच होगी।

• मेघालय के ऐसे क्षेत्रों में जहां सार्वजनिक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं है, इस नेटवर्क को पहुंचाने से वहां के नागरिकों को सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ाने में सूचना और संचार प्रौदयोगिकी के लाभ मिल सकेंगे।

• जिन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है वहां इसे ब्रॉडबैंड और इंटरनेट के जरिए बढ़ाया जाएगा।


(●) मंत्रिमंडल को इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं संचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत और अंगोला के बीच समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं संचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए भारत और अंगोला के बीच समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य ई-गवर्नेंस, सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा के लिए मानव संसाधन विकास, सूचना सुरक्षा, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, हार्डवेयर निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी युक्‍त साफ्टवेयर उद्योग, टेली मेडिसिन आदि के क्षेत्रों में निकट सहयोग को बढ़ावा देना है।

पृष्‍ठभूमि:

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय(मैती) सहयोग के द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय फ्रेम वर्क के अंतर्गत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के क्षेत्र में आसन्‍न एवं अग्रणी क्षेत्रों में क्षेत्रों में अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अनिवार्य है। मैती ने आईसीटी के क्षेत्र में निकट सहयोग एवं सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न देशों के समकक्ष संगठनों/एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन एवं करार निष्‍पादित किए हैं। विभिन्‍न देशों के साथ सहयोग को और बढ़ावा देने विशेषकर ‘डिजिटल इंडिया’, ‘मेक इन इंडिया’आदि जैसी भारत सरकार की विभिन्‍न नई पहलों के विशेष मद्देनज़र इसको और बढ़ावा देना है, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हितों के दृष्टिगत व्‍यावसायिक अवसरों का पता लगाने की जरूरतों में वृद्धि हुई है।

मैती ने ई-गवर्नेंस, सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा के लिए मानव संसाधन विकास, सूचना सुरक्षा, इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, हार्डवेयर निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी युक्‍त साफ्टवेयर उद्योग, टेली मेडिसिन आदि जैसे आईटीसी क्षेत्रों में केन्‍द्रीयकृत सहयोग के लिए एक विस्‍तृत समझौता ज्ञापन किया है। विदेश राज्‍य मंत्री एम• जी• अकबर के दौरे के दौरान मैती, भारत सरकार तथा डोमिंगोज कस्‍टोडोओ वीयरा लोप्‍स, सेक्रेटरी ऑफ स्‍टेट और इंटरनेशनल कॉरपोरेशन और अंगोलियाई समुदाय ने दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, अंगोला सरकार की ओर से विचार-विमर्श के उपरांत इस पर हस्‍ताक्षर किए गये।


(●) मंत्रिमंडल ने स्‍कूटर्स इंडिया लिमिटेड, लखनऊ का तुलनपत्र नए सिरे से तैयार करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने स्‍कूटर्स इंडिया लिमिटेड, लखनऊ (एसआईएल) का तुलनपत्र इस प्रकार नए सिरे से तैयार करने की मंजूरी दे दी है:

1. भारत सरकार द्वारा स्‍कूटर्स इंडिया लिमिटेड की अंश पूंजी में संचित हानियों के प्रति 85.21 करोड़ रुपये की इक्विटी में कटौती करना। यह कटौती 31.03.2013 से प्रभावी मानी जाएगी और

2. वर्ष 2012-13 के दौरान स्‍कूटर्स इंडिया लिमिटेड के लिए जारी 1.89 करोड़ रुपये के गैर-योजना ऋण पर ब्‍याज को कम्‍पनी को जारी ऋण की तारीख से रोकना और उसे 1.89 करोड़ रुपये की बकाया मूल धन की राशि की इक्विटी में बदलना।

इस मंजूरी के साथ 2012-13 से स्‍कूटर्स इंडिया लिमिटेड का तुलनपत्र नियमित हो जाएगा और तद्नुसार नए सिरे से प्रभावी हो सकेगा। इससे कम्‍पनी के विनिवेश की प्रक्रिया में आने वाली बाधा के भी खत्‍म होने की उम्‍मीद है।


(●) मंत्रिमंडल ने विशाखापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट को अग्रिम सरकारी ऋणों पर दंडस्‍वरूप ब्‍याज माफ करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने विशाखापत्तजनम बंदरगाह ट्रस्ट को अग्रिम सरकारी ऋणों पर दंड स्वरूपब्याज में इस प्रकार माफी की मंजूरी दी है:

1. 31.03.2017 को विशाखापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट के संबंध में 250.89 करोड़ रुपये की राशि पर दंडस्‍वरूप ब्‍याज और माफी की मंजूरी की तारीख तक बढ़ती राशियों पर माफी

2. दंडस्‍वरूप ब्‍याज में माफी की मंजूरी की तारीख से विशाखापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट को 0.25 प्रतिशत की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज का भुगतान करना होगा।

3. विशाखापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट को वित्‍त वर्ष 2018-19 में माफी की मंजूरी की तारीख से 44.69 करोड़ रुपये के बकाया मूलधन और बकाया ब्‍याज का केवल एक किश्‍त में भुगतान करना होगा।

पृष्‍ठभूमि:

विशाखापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट (वीपीटी) ने लौह अयस्‍क निर्यात के लिए 100,000 डीडब्‍ल्‍यूटी के गहरे समुद्र में चलने वाले जहाजों को खड़ा के लिए बाहरी बंदरगाह परियोजना के निधियन के लिए 1970-71 से 1985-85 तक अलग-अलग मौकों पर 110.41 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। प्रत्‍येक ऋण की मंजूरी की तारीख से मोहलत अवधि पांच वर्ष की थी। विशाखापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट ने 1978-79 तक विभिन्‍न ऋणों पर मोहलत की अवधि के लिए ब्‍याज का भुगतान किया। लेकिन बंदरगाह को राजस्‍व घाटा होने के कारण 1979-80 से 1989-90 की अवधि के दौरान ऋण की अदायगी नहीं की जा सकी। उसने 1990-91 से ऋण राशि (मूलधन और ब्‍याज दोनों) की अदायगी शुरू कर दी। 31.03.2017 को विशापत्‍तनम बंदरगाह ट्रस्‍ट की कुल ऋण देनदारी 354.23 करोड़ रुपये (भुगतान नहीं किया गया मूलधन 44.69 करोड़ रुपये, भुगतान नहीं किया गया ब्‍याज 58.65 करोड़ रुपये और दंडात्‍मक ब्‍याज 250.89 करोड रुपये) थी।

इसके अलावा भविष्‍य में बंदरगाह को आगामी विभिन्‍न विकास परियोजनाओं और कर्मचारियों की 2018-19 तक पेंशन की देनदारियों के लिए करीब 2671.79 करोड़ रुपये की आवश्‍यकता है। लेकिन बंदरगाह 354.23 करोड़ रुपये की कुल ऋण देनदारी की अदायगी करने की स्थिति में नहीं है।


(●) मंत्रिमंडल ने पारादीप बंदरगाह ट्रस्‍ट को दिए गए अग्रिम सरकारी ऋणों परदंडात्‍मक ब्‍याज माफ करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने पारादीप बंदरगाह ट्रस्ट (पीपीटी) को दिए गए अग्रिम सरकारी ऋणों पर दंडात्‍मक ब्‍याज इस प्रकार माफ करने की मंजूरी दे दी है:

1. 31.03.2017 को पारादीप बंदरगाह ट्रस्ट के संबंध में 1076.59 करोड़ रुपये की राशि पर दंड स्‍वरूप ब्‍याज और माफी की मंजूरी की तारीख तक बढ़ती राशियों पर माफी।

2. पारादीप बंदरगाह ट्रस्ट को दंडस्‍वरूप ब्‍याज का माफी की मंजूरी की तारीख तक 0.25 प्रतिशत की दर से दंडात्‍मक ब्‍याज का भुगतान करना होगा।

3. पारादीप बंदरगाह ट्रस्‍ट को माफी की मंजूरी की तारीख तक 387.74 करोड़ रुपये के बकाया मूलधन की अदायगी और बकाया ब्‍याज की पुन: अदायगी शुरू करनी होगीक और अदायगी को 2018-19 और 2019-20 में दो किश्‍तों में पूरा करना होगा।

पृष्‍ठभूमि:

पारादीप बंदरगाह ट्रस्‍ट (पीपीटी) ने अपनी विभिन्‍न बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं के निधियन के लिए 1967 से 2002 के बीच की अवधि में विभिन्‍न मौकों पर विभिन्‍न मदों के अंतर्गत 642.69 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। प्रत्‍येक ऋण का पांच वर्ष की मोहलत अवधि के साथ बीस वा‍र्षिक किश्‍तों में भुगतान किया जाना था। पारादीप बंदरगाह ट्रस्‍ट वर्ष 1987-88 तक घाटे में चल रहा था। अपर्याप्‍त पोतभार के कारण राजस्‍व खाते में भारी घाटा हुआ था। जिसके परिणामस्‍वरूप पारादीप बंदरगाह ट्रस्‍ट निर्धारित समय सीमा के अनुसार अपने ऋणों की अदायगी शुरू नहीं कर पा रहा था। 31.03.2017 को पारादीप बंदरगाह ट्रस्‍ट की कुल ऋण देनदारी 1743.69 करोड़ रुपये (भुगतान नहीं किया गया मूलधन 387.74 करोड़ रुपये, भुगतान नहीं किया गया ब्‍याज 279.36 करोड़ रुपये और दंडात्‍मक ब्‍याज 1076.59 करोड रुपये) थी।

इसके अलावा भविष्‍य में बंदरगाह को आगामी विभिन्‍न विकास परियोजनाओं और कर्मचारियों की 2018-19 तक पेंशन की देनदारियों के लिए करीब 6,695 करोड़ रुपये की आवश्‍यकता है। लेकिन बंदरगाह 1,743.69 करोड़ रुपये की कुल ऋण देनदारी की अदायगी करने की स्थिति में नहीं है।

https://www.indiainside.org/post.php?id=2741