नई दिल्ली, 16 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) मंत्रिमंडल ने दिल्ली मुम्बई औद्योगिक गलियारा परियोजना के अंतर्गत हरियाणा के नंगल चौधरी में ‘माल लदान गांव’के रूप में समेकित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स केन्द्र के लिए ट्रंक आधारभूत संरचना विकास को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति नेऔद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग के निम्नलिखित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है:
हरियाणा के नंगल चौधरी में परियोजना विशेष उद्देश्य वाहन (एसपीवी) द्वारा 886.78 एकड़ जमीन पर माल लदान गांव(फ्रेट विलेज़) समेकित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स केन्द्र (आईएमएलएच) का विकास दो चरणों में किया जाएगा।
पहले चरण के विकास के लिए 1029.49 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई है। परियोजना का दूसरा चरण विकसित करने के लिए सिद्धांत रूप में मंजूरी दी गई है। पहले चरण के खर्च में दूसरे चरण के विकास के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जमीन के मूल्य सहित जमीन का समूचा 266 करोड़ रुपये मूल्य शामिल है।
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (एनआईसीडीआईटी) द्वारा 763.49 करोड़ रुपये का निवेश जिसमें इक्विटी के रूप में 266 करोड़ रुपये और एसपीवी में ऋण के रूप में 497.49 करोड़ रुपये शामिल हैं; और
ईपीसी आधार पर एसपीवी द्वारा ट्रंक बुनियादी ढांचा विकास के लिए बोली।
प्रभाव:
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों के मामले में परियोजना की असाधारण किफायती उपयोगिता है और इसका अर्थव्यवस्था पर कई प्रकार से असर होगा। परियोजना के आर्थिक फायदों में रोजगार सृजन, ईंधन की लागत में कमी, निर्यात को बढ़ावा, वाहन (ट्रकों) की परिचालन लागत में कमी, दुर्घटना से जुड़े खर्च में कमी, राज्य सरकारों द्वारा करों के संग्रह में बढ़ोत्तरी, प्रदूषण में कमी शामिल हैं।
मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स केन्द्र के रूप में माल लदान गांव के प्रस्तावित विकास से चार हजार प्रत्यक्ष और छह हजार अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। रोजगार सृजन मूलभूत लॉजिस्टिक्स सुविधाओं तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि समूची लॉजिस्टिक्स आपूर्ति श्रृंखला के लिए अवसर प्रदान करेगा।
विवरण:
ट्रंक बुनियादी ढांचे का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण वित्त वर्ष 2020-21 तक कार्यान्वित किया जाएगा।
विभिन्न निर्माण पैकेज इस प्रकार से दिए जाएंगे जिससे ट्रंक बुनियादी ढांचे का समूचा निर्माण साथ-साथ पूरा हो।
परियोजना के दूसरे चरण का पुनर्मूल्यांकन जरूरत पड़ने पर, उचित वित्तीय प्रतिबंधों के लिए 2028 अथवा उससे पहले किया जाएगा।
प्रस्तावित माल लदान गांव के क्रियान्वयन के लिए, “डीएमआईसीमल्टीमॉडल लॉजिस्टिककेन्द्र प्रोजेक्ट लिमिटेड” के नाम से एचएसआईडीसी के जरिए एनआईसीडीआईटी और हरियाणा सरकार के जरिए सरकार के 50:50 संयुक्त उद्यम के रूप में एक एसपीवी को शामिल किया गया है।
माल लदान गांव को डबला में पश्चिमी समर्पित भाड़ा गलियारे (डीएफसी) से जोड़ा जाएगा जिसकी दूरी करीब 10 किलोमीटर है। यह लॉजिस्टिक केन्द्र डीएफसी से जुड़ा हुआ है जिसमें निम्नलिखित घटक होंगे:
प्रमुख बंदरगाहों औद्योगिक केन्द्र के लिए उच्च गति कनेक्टिविटी;
आपूर्ति की जाने वाली वस्तुओं की लागत कम करना माल लदान का तेजी से परिचालन और बहु-हैडलिंग लागत समाप्त करना;
बेहतर सेवा गुणवत्ता;
वास्तविक समय माल लदान भाड़े पर नज़र रखना और आंकड़ों का विशलेषण;
लदान/जमाव/पैकेजिंग/भंडारण जैसी सभी लॉजिस्टिक जरूरतों का एक जगह पर समाधान;
समुद्र तट क्षेत्र से बंदरगाहों तक तेजी से पहुंच;
आपूर्ति श्रृंखला परिचालनों में किफायत और कम परिचालन समय के साथ उत्पादन लागत में कमी;
समुद्र तट क्षेत्र से अंतिम मील प्रवेश द्वार बंदरगाह कनेक्टिविटी;
कटेनर माल स्टेशनों की असंगठित वृद्धि को रोकना;
पृष्ठभूमि:
भारत सरकार एक वैश्विक निर्माण और निवेश स्थल के रूप में दिल्ली, मुम्बई औद्योगिक गलियारे को विकसित कर रही है। आधार के रूप में करीब 1504 किलोमीटर लंबे पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (डीएफसी) को विकसित किया जा रहा है। छह राज्यों गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फैले इस गलियारे के विकास के लिए निवेश क्षेत्रों और औद्योगिक इलाकों की पहचान की गई है।
हरियाणा उत्तर भारत का एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापार केन्द्र है। अतिरिक्त आधारभूत संरचना के जरिए कच्चे माल और निर्मित वस्तुओं को भेजने के लिए औद्योगिक विकास की उच्च दर को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उम्मीद है कि हरियाणा में 2025 तक करीब दस मिलियन बीस फुट इकाई के बराबर कंटेनर ट्रैफिक देखने को मिलेगा। अत: हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले में माल लदान गांवका विकास आवश्यक समझा गया ताकि निम्नलिखित उद्देश्यों को हासिल किया जा सके:
क्षेत्र वर्तमान उद्योगों के परिचालनों में तेजी लाने के साथ-साथ उद्योगों, माल गोदाम और लॉजिस्टिक्स परिचालकों की विभिन्न श्रेणियों के लिए एक निवेश स्थल के रूप में आकर्षण बना रहे।
पश्चिम डीएफसी और ऐसे उत्तरी राज्यों में संभावित ट्रैफिक की निकासी जो तेज और उच्च क्षमता की माल वाहन ट्रेनों के महंगे और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के परिचालन के साथ रेल आधारित माल की आवाजाही को प्रेरित करेगा। यह विश्व स्तर की मल्टी मॉडल सुविधा के रूप में कार्य करेगाजिससे डीएफसी से दक्ष भंडारण/वस्तुओं के पारगमन के साथ अधिक माल भेजा जा सकेगा।
माल वाहक कंपनियों और ग्राहकों को आकर्षक स्थल की पेशकश ताकि क्षेत्र में औद्योगिक विकास बढ़ाया जा सके और आर्थिक अवसर पैदा किए जा सके। इस सुविधा से न केवल स्टैंडर्ड कंटेनर हैंडलिंग कार्य हो सकेंगे, बल्कि विभिन्न मानयोजित सेवाएं सृजित होंगी।
(●) मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत नाबार्ड के साथ सूक्ष्म सिंचाई कोष के लिए राशि मंजूर की
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत समर्पित “सूक्ष्म सिंचाई कोष” (एमआईएफ) स्थापित करने के लिए नाबार्ड के साथ 5,000 करोड़ रुपये की आरंभिक राशि देने की मंजूरी दे दी है।
विवरण:
आवंटित 2,000 करोड़ रुपये और 3,000 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल क्रमश: 2018-19 और 2019-20 के दौरान किया जाएगा। नाबार्ड इस अवधि के दौरान राज्य सरकारों को ऋण का भुगतान करेगा। नाबार्ड से प्राप्त ऋण राशि दो वर्ष की छूट अवधि सहित सात वर्ष में लौटाई जा सकेगी।
एमआईएफ के अंतर्गत ऋण की प्रस्तावित दर 3 प्रतिशत रखी गई है जो नाबार्ड द्वारा धनराशि जुटाने की लागत से कम है।
इसके खर्च को वर्तमान दिशा-निर्देशों में संशोधन करके वर्तमान पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी योजना से पूरा किया जा सकता है।
इसका ब्याज दर सहायता पर कुल वित्तीय प्रभाव करीब 750 करोड़ रुपये होगा।
लाभ:
समर्पित सूक्ष्म सिंचाई कोष प्रभावशाली तरीके से और समय पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप घटक (पीडीएमसी) के प्रयासों में वृद्धि करेगा।
सूक्ष्म सिंचाई तक पहुंच एमआईएफ, नवोन्मेष यौगिक/जिन्स/सामाजिक/क्लस्टर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं/ प्रस्तावों के लिए अतिरिक्त निवेश से करीब दस लाख हेक्टेयर जमीन इसके अंदर आएगी।
इस कोष से सचिवों के समूह की सिफारिश के अनुसार पीएमकेएसवाई के पर ड्रॉप मोर क्रॉप घटक के अंतर्गत 14वें वित्त आयोग की शेष अवधि के दौरान करीब 2 मिलियन हेक्टेयर/वर्ष के वार्षिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी के कार्यान्वयन में अतिरिक्त (टॉप अप सब्सिडी) सहित राज्यों को अपनी पहलों के लिए संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य:
राज्यपीएमकेएसवाई-पीडीएमसी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत उपलब्ध अतिरिक्त (टॉप अप) सब्सिडी के जरिए सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहन तथा अतिरिक्त क्षेत्र को शामिल करने के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड की परियोजनाओं सहित नवोन्मेष संबंधित परियोजनाओं के लिए एमआईएफ तक पहुंच सकते हैं। यह पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी में राज्य के हिस्से की एवजी नहीं होनी चाहिए।
किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)/सहकारिताएं/ राज्य स्तर की एजेंसियों की भी राज्य सरकार की गारंटी के साथ कोषों तक पहुंच हो सकती है अथवा वे समान भागीदार हो सकते हैं। किसान सहकारिताओं की नवोन्मेष क्लस्टर आधारित सामुदायिक सिंचाई परियोजना तक पहुंच हो सकती है।
राज्य सरकारों की परियोजनाओं/प्रस्तावों की जांच और मंजूरी (कुल व्यय, राज्य के लिए पात्र ऋण राशि और चरण), समन्वय और निगरानी के लिए स्थायी समिति के साथ नीति संबंधी निर्देश प्रदान करने और प्रभावी योजना, समन्वय और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक सलाहकार समिति बनाई गई है ताकि मंजूर की गई लागत के भीतर सहायता परियोजनाओं/प्रस्तावों को एक निश्चित समय के भीतर कार्यान्वित किया जा सके।
कवरेज़:
मंजूरी की देश भर में विस्तृत सूचना होनी चाहिए। एमआईएफ के परिचालन के साथ यह उम्मीद की जाती है कि ऐसे राज्य को सूक्ष्म सिंचाई अपनाने में पीछे चल रहे हैं उन्हें किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए धनराशि का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा जैसाकि अच्छा प्रदर्शन कर रहे राज्यों द्वारा किया जा रहा है। साथ ही, राज्यों द्वारा हाथ में ली जाने समुदायों द्वारा चलित औरनवोन्मेष परियोजनाओं में सूक्ष्म सिंचाई के लिए अतिरिक्त सूचना होगी।
औचित्य:
सूक्ष्म सिंचाई पर कार्य बल ने सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत 69.5 मिलियन हेक्टेयर की संभावना का अनुमान लगाया है, जबकि अब तक आवृत्त क्षेत्र केवल करीब 10 मिलियन हेक्टेयर (14 प्रतिशत) है। इसके अलावा सचिवों के समूह, 2017 ने अगले पांच वर्ष में सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत 10 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य पर जोर दिया है जिसके लिए कार्यान्वयन की गति की वर्तमान तुलना में करीब 1 मिलियन हेक्टेयर की अतिरिक्त वार्षिक कवरेज़ की जरूरत होगी। इसे पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी और एमआईएफ के संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल से किसी भी अथवा दोनों में निम्नलिखित तरीके से कार्यान्वित किया जा सकता है:
विशेष और नवोन्मेष परियोजनाओं को हाथ में लेकर सूक्ष्म सिंचाई के दायरे का विस्तार करने के लिए संसाधन जुटाने में राज्यों को आगे बढाना।
सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को स्थापित करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित के उद्देश्य से पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी के अंतर्गत उपलब्ध प्रावधानों के अलावा सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित करना।
(●) मंत्रिमंडल ने रक्षा सेवाओं के स्पेक्ट्रम के लिए नेटवर्क लागू करनेका बजट बढ़ाया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने रक्षा सेवाओं के लिए वैकल्पिक संचार नेटवर्क बिछाने के उद्देश्य से स्पेक्ट्रम के लिए नेटवर्क (एनएफएस) परियोजना का बजट 11,330 करोड़ रुपये बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। बुनियादी ढांचे पर मंत्रिमंडल समिति जुलाई 2012 में 13,334 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी दे चुकी है।
भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली परियोजना 24 महीने की अवधि में पूरी हो जाएगी।
एनएफएस परियोजना से बड़े पैमाने पर रक्षा सेवाओं की संचार क्षमता में वृद्धि होगी जिससे राष्ट्रीय परिचालन तैयारियों को बढ़ाया जा सकेगा। इस परियोजना के अन्य संबंधित उद्योगों जैसे दूरसंचार उपकरण निर्माण और दूरसंचार संबंधी अन्य सेवाओं से अग्रिम संपर्क होंगे।
(●) केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने की प्रणाली को सशक्त बनाने को मंत्रिमंडल की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, के बीच तथा अन्य सरकारी विभागों और संगठनों के साथ उनके वाणिज्यिक विवादों को निपटाने की प्रणाली को सशक्त बनाने को आज मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल ने सचिवों की समिति के सुझावों के आधार पर यह फैसला लिया है। इसके तहत ऐसे विवादों को अदालतों के जरिए निपटाने के बजाय इसके लिए एक सशक्त संस्थागत प्रणाली विकसित की जाएगी।
ब्यौरा :
1. नई व्यवस्था के तहत एक ऐसी द्वीस्तरीय प्रणाली विकसित की जाएगी जो केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के बीच तथा अन्य सरकारी संगठनों के साथ होने वाले उनके औद्योगिक विवादों को निपटाने की मौजूदा स्थायी मध्यस्थता प्रणाली (पीएमए) का स्थान लेगी। रेलवे, आयकर विभाग, सीमा शुल्क और आबकारी विभाग को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
2. इस द्वीस्तरीय प्रणाली के तहत ऐसे वाणिज्यिक विवादों को पहले उस समिति के पास भेजा जाएगा जिसमें ऐसे उपक्रमों से संबंधित मंत्रालयों और विभागों के सचिव तथा कानूनी मामलों के विभाग के सचिव होंगे। समिति के समक्ष सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े विवादों का प्रतिनिधित्व उनके मंत्रालयों तथा विभागों से जुड़े वित्तीय सलाहकारों द्वारा किया जाएगा। यदि विवाद से जुड़े दोनों पक्ष एक ही मंत्रालय या विभाग से होंगे तो ऐसी स्थिति में इस विवाद को सुलझाने का काम उस समिति को दिया जाएगा जिसमें संबंधित मंत्रालय या विभाग के सचिव, सार्वजनिक उपक्रम विभाग के सचिव और कानूनी मामलों के विभाग के सचिव होंगे। समिति के समक्ष ऐसे विवादों का प्रतिनिधित्व संबंधित मंत्रालय या विभाग के वित्तीय सलाहकार और संयुक्त सचिव द्वारा किया जाएगा। यदि, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सरकारों के विभागों और संगठनों के बीच ऐसे कोई विवाद उठते हैं तो उन्हें सार्वजनिक उपक्रमों से संबंधित मंत्रालयों/विभागों के सचिव, कानूनी मामलों के सचिव और संबंधित राज्य सरकार के प्रधान सचिव द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी वाली समिति को भेजा जाएगा। समिति में इन विवादों का प्रतिनिधित्व राज्य सरकारों के विभागों और संगठनों से संबंधित प्रधान सचिव द्वारा किया जा सकता है।
• यदि उपरोक्त समिति द्वारा विवादों का समाधान नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में दूसरे स्तर पर इन्हें विवादों को कैबिनेट सचिव को भेजे जाने की व्यवस्था है। इस मामले में कैबिनेट सचिव का फैसला अंतिम होगा और सभी के लिए बाध्यकारी भी होगा।
1. विवादों के त्वरित निपटारे के लिए पहले स्तर पर तीन महीने की अवधि निर्धारित की गयी है।
फैसलों के अनुपालन के लिए सार्वजनिक उपक्रम विभाग तत्काल सभी उपक्रमों को उनके संबंधित मंत्रालयों/विभागों/राज्य सरकारों और संघ शासित प्रदेशों के जरिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करेगा।
नई प्रणाली आपसी और सामूहिक प्रयासों से वाणिज्कि विवादों को निपटाने को प्रोत्साहित करेगी और जिससे अदालतों में ऐसे विवादों की सुनवाई के मामले घटेंगे और जनता का पैसा बर्बाद होने से बचेगा।
(●) चुनाव प्रबंधन और प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और सूरीनाम के बीच समझौता ज्ञापन को मंत्रिमंडल की स्वीकृति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने चुनाव और प्रबंधन और प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और सूरीनाम के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दे दी है। इसके तहत दोनों देशों के बीच चुनाव प्रक्रिया के संगठनात्मक और तकनीकी विकास के क्षेत्र में परस्पर सूचनाओं के आदान-प्रदान, संस्थाओं को सशक्त बनाने, क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए ज्ञान और अनुभवों को साझा करने तथा नियमित विचार-विमर्श की प्रक्रिया को जारी रखने की व्यवस्था है।
इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग तथा सूरीनाम को चुनाव प्रबंधन और प्रशासन के क्षेत्र में सहयोग करना है जिससे विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहित किया जा सके।
(●) भोपाल में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुर्नवास संस्थान खोले जाने को मंत्रिमंडल की मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भोपाल में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुर्नवास संस्थान (एनआईएमएचआर) खोले जाने को मंजूरी दे दी है। यह संस्था निशक्त जन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत एक सोसाइटी के रूप में सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत स्थापित की जाएगी। पहले तीन वर्षों में इस परियोजना पर 179.5 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें 128.54 करोड़ रूपये का गैर आवर्ती व्यय और 51 करोड़ रूपये का आवर्ती व्यय शामिल है।
मंत्रिमंडल ने इस संस्थान के लिए संयुक्त सचिव स्तर के तीन पदों जिनमें निदेशक का एक पद भी शामिल है, के अलावा प्रोफेसरों के दो पदों को भी मंजूरी दी है।
एनआईएमएचआर का मुख्य उद्देश्य मानसिक रूप से बिमार व्यक्तियों के पुर्नवास की व्यवस्था करना, मानसिक स्वास्थ पुर्नवास के क्षेत्र में क्षमता विकास तथा मानसिक स्वास्थ्य पुर्नवास के लिए नीति बनाना और अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
संस्थान में 9 विभाग और केंद्र होंगे। इसमें मानसिक स्वास्थ्य पुर्नवास के क्षेत्र में 12 विषयों में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट, स्नातक, स्नातकोत्तर और एम.फिल डिग्री सहित 12 तरह के पाठ्यक्रम होंगे। पांच वर्षों के भीतर इस संस्था में विभिन्न विषयों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या 400 सौ से ज्यादा हो जाने की संभावना है।
मध्यप्रदेश सरकार ने संस्थान के लिए भोपाल में लिए पांच एकड़ जमीन दी है। यह संस्था दो चरणों में तीन वर्ष के भीतर बनकर तैयार हो जाएगी। पहले दो साल के भीतर संस्थान में निर्माण कार्य और बिजली का काम पूरा कर लिया जाएगा। जब तक भवन निर्माण का काम चलेगा तब तक संस्थान सर्टिफिकेट और डिप्लोमा पाठयक्रम चलाने और ओपीडी सेवाएं देने के लिए भोपाल में एक भवन किराये पर लेगा। संस्थान मानसिक रोगियों के लिए सभी तरह की पुर्नवास सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही स्नात्कोत्तर और एम.फिल डिग्री तक की शिक्षा की भी व्यवस्था करेगा।
एनआईएमएचआर देश में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने किस्म का पहला संस्थान होगा। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्षमता विकास और पुर्नवास के मामले में यह एक अत्याधिक दक्ष संस्थान के रूप में काम करेगा और केंद्र सरकार को मानसिक रोगियों के पुर्नवास की प्रभावी व्यवस्था का मॉडल विकसित करने में मदद करेगा।
(●) पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और इक्वाटोरियल गिनी के बीच समझौता ज्ञापन को मंत्रिमंडल की स्वीकृति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में भारत और इक्वाटोरियल गिनी के बीच सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से मंजूरी दे दी है। इस समझौता ज्ञापन पर 08 अप्रैल, 2018 को हस्ताक्षर किए गए थे।
इस समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत अनुसंधान कार्यों, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, सम्मेलनों और बैठकों के आयोजन और विशेषज्ञों की प्रतिनियुक्तियों के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन आयुष मंत्रालय के लिए आवंटित बजट से जुटाए जाएंगे।
पृष्ठभूमि:
भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली क्षेत्र सुसंगठित है। आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिगपा और होम्योपैथी औषधियों के नामों को सुव्यवस्थित तरीके से कूटबद्ध किया गया है और इनके विवरण वाले दस्तावेज बनाए गए है। भारत की यह प्रणाली वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में काफी संभावनाएं रखती है। इस चिकित्सा प्रणाली के प्रचार-प्रसार और वैश्विक स्तर पर इन्हें पहचान दिलाने की जिम्मेदारी वहन कर रहे आयुष मंत्रालय ने इसके लिए मलेशिया, त्रिनिदादऔर टोबेगो, हंगरी, बंग्लादेश, नेपाल, मॉरिशस, मंगोलिया, ईरान और साओ टोम एंड प्रिंसिपी के साथ भी सहयोग के समझौते किए है।
(●) कैबिनेट ने खनन एवं भूविज्ञान के क्षेत्र में भारत और मोरक्को के बीच एमओयू को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खनन एवं भूविज्ञान के क्षेत्र में भारत और मोरक्को के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने को अपनी पूर्वव्यापी मंजूरी दे दी है। समझौते पर 11 अप्रैल, 2018 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता मोरक्को के ऊर्जा, खान एवं सतत विकास मंत्रालय और भारत सरकार के खान मंत्रालय के बीच हुआ।
उपर्युक्त एमओयू से भूविज्ञान एवं खनन के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और मोरक्को के बीच एक संस्थागत व्यवस्था सुनिश्चित होगी। यह सहयोग दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण क्षेत्र में पारस्परिक तौर पर लाभप्रद साबित होगा।
उपर्युक्त एमओयू का उद्देश्य खनन एवं भूविज्ञान या भूगर्भशास्त्र के क्षेत्र में भारत और मोरक्को के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करना है। सहयोग के दायरे में शामिल विभिन्न गतिविधियों यथा भूगर्भीय बुनियादी ढांचे के विकास, खनन एवं भूविज्ञान को प्रोत्साहन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और भूगर्भीय डेटा बैंक बनाने से नवाचार के उद्देश्य की पूर्ति होगी।
(●) मंत्रिमंडल ने भारत और ब्रुनेई दारुस्सलाम के बीच करों से संबंधित उगाही में सूचना आदान - प्रदान और सहायता के लिए समझौते पर हस्ताक्षर और पुष्टि को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और ब्रुनेई दारुस्सलाम के बीच करों की उगाही में सूचना आदान प्रदान और सहायता के लिए समझौते पर हस्ताक्षर और समझौते की पुष्टि को मंजूरी दे दी है।
विवरण :
यह समझौता भारत और ब्रुनेई दारुस्सलाम के सक्षम प्राधिकारों को प्रशासन तथा करों के संबंध में दोनों देशों के घरेलू कानूनों को लागू करने के लिए सूचना आदान - प्रदान के माध्यम से सहायता प्रदान करने में सक्षम बनाता है।
समझौते के अंतर्गत प्राप्त सूचना गोपनीय होगी। सूचना केवल उन व्यक्तियों और प्राधिकारों (न्यायालय और प्रशासनिक निकाय सहित) को प्रकट की जा सकती है जो निर्धारण, संग्रहण, कानून लागू करने, मुकदमा चलाने या समझौते के अंतर्गत कवर किये गये करों के संबंध में अपीलों के निर्धारण से जुड़े हैं। सूचना किसी भी व्यक्ति या कंपनी या प्राधिकार या क्षेत्राधिकार को सूचना भेजने वाले देश की पूर्व लिखित सहमति के साथ प्रकट की जा सकती है।
• समझौते में मामलों की श्रेणियों के संबंध में भारत और ब्रुनेई के बीच स्वत: सूचना आदान - प्रदान का प्रावधान है।
समझौता दोनों देशों द्वारा दावा किये गये कर राजस्व की वसूली में सहायता का प्रावधान करता है।
समझौते में किसी तरह का मतभेद सुलझाने के लिए या समझौते के अंतर्गत प्रक्रियाओं पर सहमत होने के लिए पारस्परिक समझौता प्रक्रिया का प्रावधान है।
समझौता दोनों देशों के संबंधित कानून द्वारा आवश्यक समझी गई प्रक्रियाओं के पूरा होने की अधिसूचना तिथि से लागू होगा।
यह समझौता कर उद्देश्यों के लिए भारत और ब्रुनेई के बीच सूचना आदान प्रदान की गति को बढ़ावा देगा जिससे कर चोरी और करों को टालने की प्रवृत्ति पर अंकुश रखने में सहायता मिलेगी। समझौता दोनों देशों द्वारा किये गये राजस्व वसूली संग्रह दावों में सहायता देगा।
इस तरह समझौते में किसी तरह की वित्तीय जटीलता नहीं है। समझौते की धारा 9 के अनुसार 500 अमेरिकी डॉलर से अधिक असाधारण लागत की स्थिति में इसका वहन भारत सरकार द्वारा किया जायेगा। कर सूचना आदान प्रदान के अन्य समझौतों में भी भारत के लिए इसी तरह का प्रावधान है।
पृष्ठभूमि :
आयकर अधिनियम, 1961 के अनुच्छेद 90 के अंतर्गत केन्द्र सरकार कर चोरी निवारण के लिए, आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत लगाये जाने वाले आयकर को टालने से रोकने के लिए किसी बाहरी देश या निर्दिष्ट भू-भाग के साथ समझौता करने के लिए प्राधिकृत है। करों के संबंध में सूचना आदान प्रदान समझोते के लिए ब्रुनेई में 11 जनवरी 2017 तक बातचीत हुई। इसके बाद भारत और ब्रुनेई दारुस्सलाम की सरकारें समझौते के पाठ पर सहमत हुईं।
(●) केन्द्रीय मंत्रिमंडल को भारत और फ्रांस के बीच रेलवे के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल को भारतीय रेल और फ्रांस की सरकारी कंपनी एसएनसीएफ मोबिलिटिज़ के बीच रेलवे के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के समझौता ज्ञापन से अवगत कराया गया। समझौता ज्ञापन पर 10 मार्च, 2018 को हस्ताक्षर किए गए थे।
समझौता ज्ञापन के तहत रेलवे के क्षेत्र में ज्ञान और विकास से जुड़ी नवीनतम जानकारियों को साझा करने के लिए भारतीय रेलवे को एक मंच उपलब्ध कराया गया है। इसके जरिए तकनीकी विशेषज्ञता, रिपोर्ट और तकनीकी दस्तावेज के आदान-प्रदान को सुगम बनाने तथा विशेष किस्म की प्रौदयोगिकी पर केंद्रित प्रशिक्षण और संगोष्ठियों तथा कार्यशालाओं का आयोजन और जानकारियों को साझा करना सुगम बनाया गया है।
एमओयू के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तय की गई है:
1. उच्च गति और मध्यम उच्च गति वाली रेल सेवाएं,
2. रेलवे स्टेशनों का उन्नयन और परिचालन,
3. मौजूदा रेल परिचालनों और आधारभूत संरचनाओं का आधुनिकीकरण,
4. उपनगरीय रेल।
पृष्ठभूमि:
रेल मंत्रालय ने रेल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग के लिए विभिन्न देशों की सरकारों और राष्ट्रीय रेल सेवाओं के साथ समझौता किया है। इसके अंतर्गत सहयोग के लिए चिन्हित क्षेत्रों में तीव्र गति वाले रेल कॉरिडोर, मौजूदा रेल मार्गों की गति बढ़ाना, स्टेशनों को विश्व स्तरीय बनाना और रेलवे आधारभूत संरचनाओं का आधुनिकीकरण जैसी बातें शामिल हैं। यह सहयोग रेलवे प्रौद्योगिकी और परिचालन के क्षेत्र में सूचनाओं के आदान-प्रदान परस्पर जानकारी साझा करने तकनीकी जानकारी के लिए दौरे तथा आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षण तथा संगोष्ठियों और कार्यशालाओं के आयोजन से हासिल हो सकेगा।
(●) मंत्रिमंडल ने जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति-2018 को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल समिति ने जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति-2018 को मंजूरी दे दी है।
मुख्य विशेषताएं:
I. नीति में जैव ईंधनों को ‘आधारभूत जैव ईंधनों’ यानी पहली पीढ़ी (1जी) जैव इथनॉल और जैव डीजल तथा ‘’विकसित जैव ईंधनों’ – दूसरी पीढ़ी (2जी) इथनॉल, निगम के ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) से लेकर ड्रॉप इन ईंधन, तीसरी पीढ़ी (3जी) के जैव ईंधन, जैव सीएनजी आदि को श्रेणीबद्ध किया गया है ताकि प्रत्येक श्रेणी में उचित वित्तीय और आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ाया जा सके।
II. नीति में गन्ने का रस, चीनी वाली वस्तुओं जैसे चुकन्दर, स्वीट सौरगम, स्टार्च वाली वस्तुएं जैसे – भुट्टा, कसावा, मनुष्य के उपभोग के लिए अनुपयुक्त बेकार अनाज जैसे गेहूं, टूटा चावल, सड़े हुए आलू के इस्तेमाल की अनुमति देकर इथनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का दायरा बढ़ाया गया है।
III. अतिरिक्त उत्पादन के चरण के दौरान किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिलने का खतरा होता है। इसे ध्यान में रखते हुए इस नीति में राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति की मंजूरी से इथनॉल उत्पादन के लिए पेट्रोल के साथ उसे मिलाने के लिए अतिरिक्त अनाजों के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।
IV. जैव ईंधनों के लिए, नीति में 2जी इथनॉल जैव रिफाइनरी के लिए 1जी जैव ईधनों की तुलना में अतिरिक्त कर प्रोत्साहनों, उच्च खरीद मूल्य के अलावा 6 वर्षों में 5000 करोड़ रुपये की निधियन योजना के लिए व्यावहारिकता अन्तर का संकेत दिया गया है।
V. नीति गैर-खाद्य तिलहनों, इस्तेमाल किए जा चुके खाना पकाने के तेल, लघु गाभ फसलों से जैव डीजल उत्पादन के लिए आपूर्ति श्रृंखला तंत्र स्थापित करने को प्रोत्साहन दिया गया।
VI. इन प्रयासों के लिए नीति दस्तावेज़ में जैव ईंधनों के संबंध में सभी मंत्रालयों/विभागों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का अधिग्रहण किया गया है।
संभावित लाभ:
· आयात निर्भरता कम होगी : एक करोड़ लीटर ई-10 वर्तमान दरों पर 28 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत करेगा। इथनॉल आपूर्ति वर्ष 2017-18 में करीब 150 करोड़ लीटर इथनॉल की आपूर्ति दिखाई देने की उम्मीद है जिससे 4000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
· स्वच्छ पर्यावरण – एक करोड़ लीटर ई-10 से करीब 20,000 हजार टन कार्बनडाइक्साइड उत्सर्जन कम होगा। वर्ष 2017-18 इथनॉल आपूर्ति के लिए कार्बनडाइक्साइड 30 लाख टन उर्त्सजन कम होगा। फसल जलाने में कमी लाने और कृषि संबंधी अवशिष्ट/कचरे को जैव ईंधनों में बदलकर ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में और कमी आएगी।
· स्वास्थ्य संबंधी लाभ : खाना पकाने के लिए तेल खासतौर से तलने के लिए लंबे समय तक उसका दोबारा इस्तेमाल करने से स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो सकता है और अनेक बीमारियां हो सकती हैं। इस्तेमाल हो चुका खाना पकाने का तेल जैव ईंधन के लिए संभावित फीडस्टॉक हो सकता है और जैव ईंधन बनाने के लिए इसके इस्तेमाल से खाद्य उद्योगों में खाना पकाने के तेल के दोबारा इस्तेमाल से बचा जा सकता है।
· एमएसडब्लयू प्रबंध : एक अनुमान के अनुसार भारत में हर वर्ष 62 एमएमटी निगम का ठोस कचरा निकलता है। ऐसी प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं जो कचरा/प्लास्टिक, एमएसडब्ल्यू को ईंधन में परिवर्तित कर सकती हैं। ऐसे एक टन कचरे में ईंधनों के लिए करीब 20 प्रतिशत बूंदें प्रदान करने की संभावना है।
· ग्रामीण इलाकों में आधारभूत संरचना निवेश : एक अनुमान के अनुसार के एक 100 केएलपीडी जैव रिफाइनरी के लिए करीब 800 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है। वर्तमान में तेल विपणन कंपनियां करीब 10,000 करोड़ रुपये के निवेश से बारह 2जी रिफाइनरियां स्थापित करने की प्रक्रिया में है। साथ ही देश में 2जी जैव रिफाइनरियों से ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना में निवेश के लिए प्रोत्साहित किय जा सकेगा।
· रोजगार सृजन : एक 100 केएलपीडी 2जी जैव रिफाइनरी संयंत्र परिचालनों, ग्रामीण स्तर के उद्यमों और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में 1200 नौकरियां देने में योगदान दे सकती हैं।
· किसानों की अतिरिक्त आय : 2जी प्रौद्योगिकियों को अपना कर कृषि संबंधी अवशिष्टों/ कचरे को इथनॉल में बदला जा सकता है और यदि इसके लिए बाजार विकसित किया जाए तो कचरे का मूल्य मिल सकता है जिसे अन्यथा किसान जला देते हैं। साथ ही, अतिरिक्त उत्पादन चरण के दौरान उनके उत्पादों के लिए उचित मूल्य नहीं मिलने का खतरा रहता है। अत: अतिरिक्त अनाजों को परिवर्तित करने और कृषि बॉयोमास मूल्य स्थिरता में मदद कर सकते हैं।
पृष्ठभूमि:
देश में जैव ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2009 के दौरान नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जैव ईंधनों पर एक राष्ट्रीय नीति बनाई थी। पिछले दशक में जैव ईंधन ने दुनिया का ध्यान आकृष्ट किया। जैव ईंधन के क्षेत्र में विकास की गति के साथ चलना आवश्यक है। भारत में जैव ईंधनों का रणनीतिक महत्व है क्योंकि ये सरकार की वर्तमान पहलों मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, कौशल विकास के अनुकूल है और किसानों की आमदनी दोगुनी करने, आयात कम करने, रोजगार सृजन, कचरे से धन सृजन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। भारत का जैव ईंधन कार्यक्रम जैव ईंधन उत्पादन के लिए फीडस्टॉक की दीर्घकालिक अनुप्लब्धता और परिमाण के कारण बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है।
(●) मंत्रिमंडल ने भारत और स्वाजीलैंड के बीच स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य और औषधि के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और स्वाजीलैंड के बीच समझौता ज्ञापन के लिए अपनी पूर्वव्यापी मंजूरी दे दी है। समझौता ज्ञापन पर 9 अप्रैल, 2018 को हस्ताक्षर किए गये थे।
समझौता ज्ञापन में शामिल किए गये सहयोग के क्षेत्र इस प्रकार हैं –
I. दवा और फार्मास्युटिकल उत्पाद;
II. चिकित्सा संबंधी उपभोज्य उत्पाद;
III. चिकित्सा अनुसंधान;
IV. चिकित्सा उपकरण;
V. सार्वजनिक स्वास्थ्य;
VI. संचारी रोग नियंत्रण और निगरानी;
VII. स्वास्थ्य पर्यटन, और
VIII. आपसी हित का कोई अन्य क्षेत्र
सहयोग के विवरण की विस्तृत जानकारी और समझौता ज्ञापन के कार्यान्वयन को देखने के लिए एक कार्यदल स्थापित किया गया है।
(●) कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय के गठन को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित जनथालुरू गांव में निर्मित किए जाने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालय के गठन को सैद्धांतिक रूप में मंजूरी दे दी। इस विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के नाम से जाना जाएगा। विश्व विद्यालय-निर्माण के प्रथम चरण के लिए 450 करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया गया है।
कैबिनेट ने अस्थायी कैंपस से केन्द्रीय विश्वविद्यालय के संचालन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। प्रांरभ में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम,1860 के तहत एक सोसाइटी का पंजीकरण किया जाएगा ताकि केन्द्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 में आवश्यक संशोधन होने तथा शैक्षणिक वर्ष 2018-19 से शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ होने के पहले तक इसे कानूनी दर्जा प्रदान किया जा सके। वर्तमान में कार्यरत एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय, प्रशासनिक संरचना गठन होने तक इस केन्द्रीय विश्वविद्यालय को संरक्षण प्रदान करेगा।
इस मंजूरी से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच में वृद्धि होगी, शैक्षणिक सुविधाओं के क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में मदद मिलेगी तथा आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 को प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
प्रभावः
इस मंजूरी से दो लक्ष्य हासिल होंगे- लोगों को उच्च स्तरीय मेडिकल सुविधा प्राप्त होगी तथा बड़ी संख्या में चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध होंगे। ये स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्राथमिक और द्वितीय स्तर के संस्थानों/सुविधाओं में सेवा प्रदान करने के लिए उपलब्ध होंगे।
(●) मेट्रो कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना
मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश के नोएडा सिटी सेंटर से नोएडा सेक्टर 62 तक दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार को मंजूरी दी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नोएडा में सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश के नोएडा सिटी सेंटर से नोएडा सेक्टर 62 तक दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार को मंजूरी दी है। इस परियोजना में 1,967 करोड़ रुपये की कुल संपूर्ण लागत से 6.675 किलोमीटर तक मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिये भारत सरकार अनुदान और अप्रधान ऋण (सबओर्डिनेट) के रूप में 340.60 करोड़ रुपये देगी।
विवरण :
1. उत्तर प्रदेश के नोएडा सिटी सेंटर से सेक्टर 62, नोएडा तक 6.675 किलोमीटर तक की दूरी में दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार की मंजूरी।
2. परियोजना की कुल संपूर्ण लागत 1,967 करोड़ रुपये।
3. परियोजना का कार्यान्वयन भारत सरकार की वर्तमान विशेष उद्देश्य एजेंसी (एसपीवी) दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार द्वारा जाएगा।
4. परियोजना समय-समय पर संशोधित किये गए केंद्रीय मेट्रो अधिनियम, मेट्रो रेल (निर्माण कार्य) अधिनियम 1978 और मेट्रो रेल (परिचालन तथा रख-रखाव) अधिनियम, 2002 के कानूनी प्रारूप के अंतर्गत होगी।
व्यापक प्रभाव :
नोएडा सिटी सेंटर से नोएडा सेक्टर 62 तक दिल्ली मेट्रो कॉरिडोर का विस्तार दिल्ली मेट्रो प्रणाली की द्वारका – नोएडा सिटी सेंटर लाइन का विस्तार है। इसके परिणामस्वरूप अधिक संख्या में लोग दिल्ली के इस सेटेलाइट कस्बे में आएंगे, जिससे दिल्ली की सड़कों पर भीड़-भाड़ कम होगी। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में अधिक आवासीय और व्यावसायिक परिसर होंगे। मेट्रो रेल से सड़कों पर वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे सड़कों पर भीड़ कम होगी और कम समय में किफायती यात्रा होगी तथा ईंधन की खपत और पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा।
इस विस्तारित लाइन का सबसे अधिक लाभ नोएडा और इसके आसपास के लोगों को मिलेगा। परियोजना स्थल पर इंजीनियर और अन्य कर्मचारियों सहित लगभग 800 कर्मियों को इस कार्य पर लगाया गया है। डीएमआरसी ने इस कॉरिडोर के परिचालन और रख-रखाव के लिए लगभग 200 कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
परियोजना के निर्माण कार्य में लगभग 81 प्रतिशत और कुल 55 प्रतिशत वित्तीय प्रगति हो चुकी है।
पृष्ठभूमि :
उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के अंतर्गत बनाया गया नोएडा शहर उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित है। यहां सभी आधुनिक सुख-सुविधाएं हैं और इसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में दिल्ली का सबसे आधुनिक उप-नगर माना जाता है। 2011 की जनगणना के अनुसार नोएडा की आबादी 6.42 लाख है। शहर की हरियाली और खुले क्षेत्र के कारण दिल्ली और आसपास के अधिक से अधिक लोग नोएडा में बसना पसंद करते हैं।
नोएडा का शहरीकरण बढ़ता जा रहा है। इस शहर में कई औद्योगिक और संस्थान भी स्थापित किए जा रहे हैं। नोएडा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के नजदीकी क्षेत्रों तथा हरियाणा के साथ सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। अन्य स्थानों से लोग काम करने के लिए नोएडा आते और जाते हैं। इसके कारण यातायात की मांग बढ़ेगी और प्रदूषण मुक्त तेज सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता होगी। नोएडा मेट्रो रेल से जुड़ा हुआ है और मेट्रो रेल नोएडा सिटी सेंटर (सेक्टर 32, नोएडा) तक चलती है। 6.675 किलोमीटर की दूरी में 6 स्टेशनों के साथ नोएडा सिटी सेंटर से नोएडा सेक्टर 62 तक मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार का प्रस्ताव किया गया था। नोएडा में रेलवे स्टेशन नहीं है और सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन 15 किलोमीटर की दूरी पर हजरत निजामुद्दीन, नई दिल्ली है। दिल्ली का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा नोएडा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है। आगामी वर्षों में नोएडा क्षेत्र में आबादी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
(●) औषधीय पौधों के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और इक्वाटोरियल गिनी के बीच समझौता ज्ञापन को मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने औषधीय पौधों के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और इक्वाटोरियल गिनी के बीच समझौता ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से स्वीकृति दे दी है।
समझौता ज्ञापन से दोनों देशों के बीच औषधीय पौधों के क्षेत्र में और बढ़ावा मिलेगा। सहयोग के तहत अनुसंधान कार्यों, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, सम्मेलनों और बैठकों के आयोजन के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन आयुष मंत्रालय के तहत गठित राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के लिए आवंटित बजट तथा योजनाओं से प्राप्त किए जाएंगे।
पृष्ठभूमि:
जैव विविधता के मामले में भारत दुनिया के समृद्ध देशों में से एक है। देश में 15 कृषि मौसम वाले क्षेत्र हैं। फूल वाले पौधों की 17 से 18 हजार प्रजातियां हैं। 7 हजार से ज्यादा औषधीय पौधे हैं, जिन्हें आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसे पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली में सूचीबद्ध किया गया है। देश की करीब 1,178 औषधीय पौधों की प्रजातियां का व्यवसाय होता है। इनमें से 242 प्रजातियों की सालाना घरेलू खपत 100 मेट्रिक टन से भी ज्यादा है। औषधीय पौधे पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और औषधीय उद्योग का एक प्रमुख आधार स्रोत होने के साथ ही भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से को आजीविका और स्वास्थ्य सुरक्षा भी उपलब्ध कराते है। विश्व स्तर पर पारंपरिक और वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है जिससे औषधीय पौधों का कारोबार 120 अरब अमरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसके 2050 तक सात खरब अमरिकी डॉलर तक पहुंच जाने की संभावना है। बड़ी संख्या में कई ऐसे पौधे हैं जो उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाते है। ऐसे पौधे भारत और गिनी दोनों जगह में लगभग एक समान भौगोलिक और जलवायु स्थितियां होने की वजह से बड़ी तादात में हैं।
(●) मंत्रिमंडल ने झारखंड के देवघर में नए एम्स की स्थापना को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने झारखंड के देवघर में नया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। परियोजना के लिए 1103 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है और यह एम्स प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के अंतर्गत स्थापित किया जाएगा।
विवरणः
एम्स देवघर मेः 750 बिस्तरों का अस्पताल और ट्रामा सेंटर सुविधाएं होंगी।
प्रतिवर्ष 100 एमबीबीएम विद्यार्थियों के नामांकन के साथ मेडिकल कॉलेज होगा।
प्रतिवर्ष 60 बीएसई (नर्सिंग) विद्यार्थियों के नामांकन के साथ नर्सिंग कॉलेज, आवासीय परिसर तथा एम्स नई दिल्ली की तरह संबंधित सुविधाएं और सेवाएं होंगी।
15 ऑपरेशन थिएटरों सहित 20 स्पेशिऐलिटी/ सुपर स्पेशिऐलिटी विभाग होंगे।
परम्परागत चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत ईलाज की सुविधाएं देने के लिए 30 बिस्तरों के साथ आयुष विभाग होगा।
प्रभावः
देवघर में नए एम्स की स्थापना से स्थानीय आबादी को सुपर स्पेशिऐलिटी स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के साथ-साथ डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का बड़ा पूल बनाया जा सकेगा, जिससे डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा बनाए जा रहे प्राथमिक और द्वितीय स्तर के संस्थानों को उपलब्ध होंगे।
पृष्ठभूमिः
पीएमएसएसवाई के अंतर्गत भुवनेश्वर, भोपाल, रायपुर, जोधपुर, ऋषिकेश और पटना में एम्स स्थापित किए गए हैं। रायबरेली (उत्तर प्रदेश), नागपुर (महाराष्ट्र), कल्याणी (पश्चिम बंगाल) और गुंटुर में मंगलागिरी, (आंध्र प्रदेश) में एम्स का कार्य प्रगति पर है। एम्स गोरखपुर के लिए निर्माण कार्य का ठेका दे दिया गया है।
निम्नलिखित एम्स की स्वीकृति दी गई हैः
बठिंडा, (पंजाब) जुलाई, 2016
गुवाहाटी, (असम), मई 2017
बिलासपुर, (हिमाचल प्रदेश), जनवरी, 2018
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