मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 02 मई 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) कैबिनेट ने प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवेश सीमा को 7.5 लाख रुपये से दोगुना कर 15 लाख रुपये करने को मंजूरी दी

• इससे वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 10,000 रुपये तक पेंशन मिल सकेगी पीएमवीवीवाई के तहत सदस्यता की समय सीमा 4 मई, 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 कर दी गई है यह कदम वित्तीय समावेश और सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वित्तीय समावेश और सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरकारी प्रतिबद्धता के अंतर्गत प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) के तहत निवेश सीमा को 7.5 लाख रुपये से दोगुना कर 15 लाख रुपये करने के साथ-साथ इसकी सदस्यता की समय सीमा को 4 मई, 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 करने की भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा पहलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मौजूदा योजना में प्रति परिवार 7.5 लाख रुपये की निवेश सीमा को बढ़ाकर संशोधित पीएमवीवीवाई में प्रति वरिष्ठ नागरिक 15 लाख रुपये कर दिया गया है। इस तरह वरिष्ठ नागरिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवर सुलभ करा दिया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को प्रति माह 10,000 रुपये तक पेंशन मिल सकेगी।

मार्च 2018 तक कुल मिलाकर 2.23 लाख वरिष्ठ नागरिक पीएमवीवीवाई के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना-2014 नामक पिछली स्कीम में कुल मिलाकर 3.11 लाख वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

पृष्ठभूमि : पीएमवीवीवाई को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के जरिए क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके और इसके साथ ही 60 साल एवं उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को अनिश्चित बाजार स्थितियों के चलते उनकी ब्याज आमदनी में किसी भी भावी कमी से उन्हें सुरक्षा प्रदान की जा सके। इस स्कीम के तहत 10 साल तक प्रति वर्ष 8 प्रतिशत की गारंटीड रिटर्न दर के आधार पर एक निश्चित या आश्वासित पेंशन दी जाती है और इसमें मासिक/तिमाही/छमाही एवं वार्षिक आधार पर पेंशन का चयन करने का विकल्प दिया गया है। रिटर्न में अंतर अर्थात एलआईसी द्वारा सृजित रिटर्न और प्रति वर्ष 8 प्रतिशत के आश्वासित रिटर्न में अंतर को वार्षिक आधार पर सब्सिडी के रूप में भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।


(●) मंत्रिमंडल ने इंडियन पेट्रोलियम एक्‍सप्‍लोसिव्‍स सेफ्टी सर्विस (आईपीईएसएस) के नाम से पेट्रोलियम एंड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) के तकनीकी कैडर के तहत ग्रुप ‘ए’सेवा के गठन एवं कैडर समीक्षा को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने इंडियन पेट्रोलियम एक्‍सप्‍लोसिव्‍स सेफ्टी सर्विस (आईपीईएसएस) के नाम से पेट्रोलियम एंड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) के तकनीकी कैडर के तहत ग्रुप ‘ए’ सेवा के गठन एवं कैडर समीक्षा को मंजूरी दी है।

इस पहल से संगठन की क्षमता एवं कुशलता में सुधार होगा। साथ ही इससे ग्रुप ‘ए’अधिकारियों के करियर में प्रगति भी बेहतर होगी।

पृष्‍ठभूमि:

पीईएसओ औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी) के तहत एक सहायक कार्यालय है। यह संगठन विस्‍फोटक, संपिडि़त गैस एवं पेट्रोलियम जैसे विनियमित पदार्थों की सुरक्षा के लिए 1898 से ही एक नोडल एजेंसी के रूप में राष्‍ट्र की सेवा कर रहा है। समय के साथ-साथ पीईएसओ की भूमिका और दायित्‍व में कई गुना इजाफा हुआ और उसका विस्‍तार विविध क्षेत्रों तक हो चुका है। आज यह संगठन विस्‍फोटक पदार्थों, पेट्रो‍लियम, संपिड़ित गैस, प्रेशर वेसल गैस सिलेंडर, अंतर्राष्‍ट्रीय पाइप लाइन, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), संपिडि़त प्राकृतिक गैस (सीएनजी), वाहन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (ऑटो एलपीजी) आदि से संबंधित व्‍यापक विषयों में कार्यगत है। लाइसेंसयुक्‍त परिसरों एवं अन्‍य गतिविधियों की संख्‍या में उल्‍लेखनीय वृद्धि होने के साथ-साथ इस संगठन पर काम का दबाव काफी बढ़ा है।

पीईएसओ के तकनीकी कैडर ग्रुप ‘ए’के तहत वर्तमान में 137 पद आवंटित किये गये हैं, जिनमें 60 जूनियर टाइम्‍स स्‍केल (जेटीएस) स्‍तर के अधिकारी, 46 सीनियर टाइम्‍स स्‍केल (एसटीएस) स्‍तर के अधिकारी, 23 जूनियर एडमिनिस्‍ट्रेटिव ग्रेड (जेएजी) स्‍तर के अधिकारी (लेवल 12), 7 जेएजी स्‍तर के अधिकारी (लेवल 13) और एक मुख्‍य विस्‍फोट नियंत्रक स्‍तर के वरिष्‍ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) के अधिकारी शामिल हैं।

सभी ग्रेडों में कर्मचारियों के प्रदर्शन और मनोबल को बढ़ाने के लिए आईपीईएसएस के नाम से पीईएसओ के तहत ग्रुप ‘ए’ तकनीकी सेवा कैडर के गठन का निर्णय लिया गया। साथ ही नवगठित सेवा को 13वें स्‍तर पर पांच पद उठाने, 12वें स्‍तर पर तीन पद उठाने और 11वें स्‍तर पर आठ पद घटाने का निर्णय भी लिया गया है।


(●) मंत्रिमंडल ने कृषि क्षेत्र में छतरी योजना ‘हरित क्रांति-कृषोन्‍नति योजना’को जारी रखने की स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने कृषि क्षेत्र में छतरी योजना ‘हरित क्रांति-कृषोन्‍नति योजना’ को 12वीं पंचवर्षीय योजना से आगे यानी 2017-18 से 2019-20 तक जारी रखने को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इसमें कुल केंद्रीय हिस्‍सा 33,269.976 करोड़ रूपये का है।

छतरी योजना में 11 योजनाएं/मिशन शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्‍य समग्र और वैज्ञानिक तरीके से उत्‍पादन और उत्‍पादकता बढ़ाकर तथा उत्‍पाद पर बेहतर लाभ सुनिश्‍चत करके किसानों की आय बढ़ाना है। ये योजनाएं 33,269.976 करोड़ रूपये के व्‍यय के साथ तीन वित्‍तीय वर्षों यानी 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए जारी रहेंगी।

3. छतरी योजनाओं के हिस्‍से के रूप में निम्‍नलिखित योजनाएं हैं –

बागबानी के एकीकृ‍त विकास के लिए मिशन (एमआईडीएच) – 7533.04 करोड़ रूपये के कुल केंद्रीय हिस्‍से के साथ एमआईडीएच का उद्देश्‍य बागबानी उत्‍पादन बढ़ाकर, आहार सुरक्षा में सुधार करके तथा कृषि परिवारों को आय समर्थन देकर बागबानी क्षेत्र के समग्र विकास को प्रोत्‍साहित करना है।
तिलहन और तेल पाम पर राष्‍ट्रीय मिशन (एनएमओओपी) सहित राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) में कुल केंद्रीय हिस्‍सा 6893.38 करोड़ रूपये का है। इसका उद्देश्य देश के चिन्हित जिलों में उचित तरीके से क्षेत्र विस्‍तार और उत्‍पादकता बढ़ाकर चावल, गेंहू, दालें, मोटे अनाज तथा वाणिज्यिक फसलों का उत्‍पादन बढ़ाना है। यह कार्य व्‍यक्तिगत कृषि स्‍तर पर मिट्टी की उर्वरता तथा उत्‍पादकता बहाल करके और कृषि स्‍तरीय अर्थव्‍यवस्‍था बढ़ाकर किया जाएगा। इसका एक और उद्देश्‍य खाद्य तेलों की उपलब्‍धता को सुदृढ़ बनाना और खाद्य तेलों के आयात को घटाना है ।
सतत कृषि के लिए राष्‍ट्रीय मिशन (एनएमएसए) में 3980.82 करोड़ रूपये का कुल केंद्रीय हिस्‍सा है। एनएमएसए का उद्देश्‍य विशेष कृषि परिस्थितिकी में एकीकृत कृषि, उचित मृदा स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन और संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकी के मेलजोल से सतत कृषि को प्रोत्‍साहित करना है।
2961.26 करोड़ रूपये के कुल केंद्रीय हिस्‍से के साथ कृषि विस्‍तार पर उप मिशन (एसएमएई) का उद्देश्‍य राज्‍य सरकारों, स्‍थानीय निकायों आदि की जारी विस्‍तार व्‍यवस्‍था को मजबूत बनाना, खाद्य और आहार सुरक्षा हासिल करना तथा किसानों का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण करना है ताकि कार्यक्रम नियोजन और क्रियान्‍वयन व्‍यवस्‍था संस्‍थागत बनाई जा सके, विभिन्‍न हितधारकों के बीच कारगर संपर्क कायम किया जा सके, मानव संसाधन विकास को समर्थन दिया जा सके तथा इलेक्‍ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया, अंतर व्‍यक्तिगत संचार और आईसीटी उपायों को नवाचारी बनाया जा सके।
बीज तथा पौध रोपण सामग्री पर उप मिशन में कुल केंद्रीय हिस्‍सेदारी 920.6 करोड़ रूपये की है। इसका उद्देश्‍य प्रमाणित/गुणवत्‍ता संपन्‍न बीज का उत्‍पादन बढ़ाना, एसआरआर में वृद्धि करना, कृषि से बचे बीजों की गुणवत्‍ता को उन्‍नत करना, बीज प्रजनन श्रृंखला को मजबूत बनाना, बीज उत्‍पादन में नए टेक्‍नॉलोजी और तौर-तरीकों को प्रोत्‍साहित करना, प्रसंस्‍करण परीक्षण आदि को बढ़ावा देना है।इसका उद्देश्‍य बीज उत्‍पादन भंडारण, प्रमाणिकरण तथा गुणवत्‍ता के लिए संरचना को मजबूत और आधुनिक बनाना है।
कृषि मशीनीकरण पर उपमिशन (एसएमएएम) में कुल केंद्रीय हिस्‍सेदारी 3250 करोड़ रूपये की है। एसएमएएम का उद्देश्‍य छोटे और मझौले किसानों तक कृषि म‍शीनीकरण पहुंच में वृद्धि करना, उन क्षेत्रों में कृषि मशीनीकरण बढ़ाना जहां कृषि बिजली की उपलब्‍धता कम है, जमीन के छोटे पट्टे और व्‍यक्तिगत स्‍वामित्‍व की उच्‍च लागत के कारण होने वाले आर्थिक नुकसानों की भरपाई के लिए ‘कस्‍टम हायरिंग सेंटरों’को प्रोत्‍साहित करना, उच्‍च तकनीकी और उच्‍च मूल्‍य के कृषि उपकरणों का केंद्र बनाना, प्रदर्शन और क्षमता सृजन गतिविधियों के माध्‍यम से हितधारकों में जागरूकता कायम करनाऔर देशभर में स्‍थापित निर्दिष्ट परीक्षण केंद्रों पर प्रमाणिकरण और प्रदर्शन, परीक्षण सुनिश्चित करना है।
पौध संरक्षण और पौधों के अलगाव पर उपमिशन (एसएमपीपीक्‍यू) में कुल केंद्रीय हिस्‍सेदारी 1022.67 करोड़ रूपये की है। एसएमपीपीक्‍यू का उद्देश्‍य कीड़े-मकोड़ों, बीमारियों, अनचाहे पौधों, छोटे किटाणुओं और अन्‍य किटाणुओं आदि से कृषि फसलों तथा उनकी गुणवत्‍ता को होने वाले नुकसान को कम करना है। इसका उद्देश्‍य बाहरी प्रजाति के कीड़े-मकोड़ों के हमलों से कृषि जैव सुरक्षा करना और विश्‍व बाजार में भारतीय कृषि सामग्रियों के निर्यात में सहायता करना और संरक्षण रणनीतियों के साथ श्रेष्ठ कृषि व्‍यवहारों को प्रोत्‍साहित करना है।
कृषि गणना, अर्थव्‍यवस्‍थाएं तथा सांख्यिकी पर एकीकृत योजना (आईएसएसीईएस) में कुल केंद्रीय हिस्‍सेदारी 730.58 करोड़ रूपये की है। इसका उद्देश्‍य कृषि गणना करना, प्रमुख फसलों की उपज/लागत का अध्‍ययन करना, देश की कृषि आ‍र्थिक समस्‍याओं पर शोध अध्‍ययन करना, कृषि सांख्यिकी के तौर-तरीकों में सुधार करना और फसल रोपण से लेकर फसल के काटे जाने तक की स्थिति के बारे में अनुक्रमिक सूचना प्रणाली बनाना है।
कृषि सहयोग पर एकीकृत योजना (आईएसएसी) में कुल केंद्रीय हिस्‍सेदारी 1902.636 करोड़ रूपये की है। इसका उद्देश्‍य सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराना, क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करनाऔर कृषि विपणन, प्रसंस्‍करण, भंडारण, कम्‍प्‍यूटरीकरण और कमजोर वर्गों के लिए कार्यक्रमों में सहकारी विकास में तेजी लाना है। इसका और उद्देश्‍य कपास उपादकों को उनके उत्‍पादों के लिए लाभकारी मूल्‍य दिलाना तथा विकेंद्रीकृत बुनकरों को उचित दरों पर गुणवत्‍ता संपन्‍न रूई की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
कृषि विपणन पर एकीकृत योजना (आईएसएएम) में कुल केंद्रीय हिस्‍सेदारी 3863.93 करोड़ रूपये की है। इसका उद्देश्‍य कृषि विपणन संरचना विकसित करना, कृषि विपणन संरचना में नवाचार तथा नवीनतम प्रौद्योगिकी तथा स्‍पर्धी विकल्‍पों को प्रोत्‍साहित करना है। आईएसएएम का उद्देश्‍य कृषि उत्‍पादों के श्रेणीकरण, मानकीकरण और गुणवत्‍ता प्रमाणिकरण के लिए संरचना सुविधा उपलब्‍ध कराना, राष्‍ट्रीव्‍यापी विपणन सूचना नेटवर्क स्‍थापित करना तथा कृषि सामग्रियों के अखिल भारतीय व्‍यापार के लिए साझा ऑनलाइन बाजार प्‍लेटफॉर्म के जरिए बाजारों को एकीकृत करना है।
राष्‍ट्रीय ई-गवर्नेंस (एनईजीपी-ए) में केंद्र की कुल हिस्‍सेदारी 211.06 करोड़ रूपये की है और इसका उद्देश्‍य विभिन्‍न कार्यक्रमों के अंतर्गत किसान और किसान केंद्रित सेवाओं को लाना है। इस योजना का उद्देश्‍य विस्‍तार सेवाओं की पहुंच और प्रभाव को बढ़ाना, पूरे फसल चक्र में सूचनाओं और सेवाओं तक किसानों की सेवाओं में सुधार करना, केंद्र और राज्‍य की वर्तमान आईसीटी पहलों को बढ़ाना और एकीकृत करना और किसानों उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को समय पर प्रासंगिक सूचना उपलब्‍ध कराकर कार्यक्रमों की क्षमता और प्रभाव में वृद्धि करना है।
इन योजनाओं/मिशनों का फोकस उत्‍पादन संरचना सृजन/सुदृढीकरण , उत्‍पादन लागत में कमी और कृषि तथा संबंद्ध उत्‍पाद के विपणन पर है। ये योजनाएं/मिशन अलग-अलग अवधि के लिए पिछले कुछ वर्षों से क्रियान्वित की जा रही हैं।

इन सभी योजनाओं/मिशनों को अलग योजना/मिशन के रूप में अवगत कराया गया और स्‍वतंत्र रूप से स्‍वीकृत किया गया। वर्ष 207-18 में यह निर्णय लिया गया है कि इन सभी योजनाओं/मिशनों को एक छतरी योजना ‘हरित क्रांति-कृषोन्‍नति योजना’ के अंतर्गत लाया जाए।


(●) कैबिनेट ने किसानों की बकाया गन्ना रकम निपटाने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने चीनी सीजन 2017-18 में पेराई किये गये प्रति क्विटंल गन्ने पर 5.50 रुपये की वित्तीय सहायता चीनी मिलों को देने को अपनी मंजूरी दे दी है, ताकि गन्ने की लागत की भरपाई हो सके। इससे चीनी मिलों को किसानों की बकाया गन्ना रकम निपटाने में मदद मिलेगी।

विवरणः

यह सहायता चीनी मिलों की ओर से सीधे किसानों को दी जाएगी।
इसका समायोजन विगत वर्षों से संबंधित बकाया रकमों सहित उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के सापेक्ष किसानों को देय गन्ना मूल्य में किया जाएगा।
इसके बाद भी यदि कुछ राशि शेष रह जाती है तो उसे मिलों के खाते में डाल दिया जाएगा।
इसके तहत सहायता उन मिलों को दी जाएगी जो सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करेंगी।

पृष्ठभूमिः

चालू चीनी सीजन 2017-18 के दौरान अनुमानित खपत के सापेक्ष चीनी उत्पादन अधिक रहने के कारण सीजन की शुरुआत से ही घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में सुस्ती का रुख देखा जा रहा है। बाजार में सुस्ती का माहौल रहने और चीनी की कीमतों के धराशायी हो जाने के कारण चीनी मिलों की तरलता की स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई है जिससे गन्ना मूल्य मद में किसानों की बकाया रकम बढ़कर 19,000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गई है।

चीनी की कीमतों को समुचित स्तर पर स्थिर करने एवं मिलों की तरलता की स्थिति बेहतर करने और इस तरह किसानों की बकाया गन्ना रकम निपटाने में चीनी मिलों को समर्थ करने के उद्देश्य से सरकार ने विगत तीन महीनों के दौरान निम्नलिखित कदम उठाये हैं-

ए) किसानों के हित में चीनी आयात पर सीमा शुल्क को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया।

बी) फरवरी एवं मार्च, 2018 के लिए चीनी उत्पादकों पर रिवर्स स्टॉक होल्डिंग सीमा लागू कर दी गयी।

सी) सरकार ने चीनी उद्योग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर देय सीमा शुल्क को भी पूरी तरह से वापस ले लिया है, ताकि चीनी निर्यात की संभावनायें तलाशने का काम शुरू किया जा सके।

डी) चीनी उद्योग के यहां जमा तैयार माल के स्टॉक को ध्यान में रखने के साथ-साथ वित्तीय तरलता की प्राप्ति में सुगमता हेतु चीनी सीजन 2017-18 के लिए मिल-वार न्यूनतम संकेतक निर्यात कोटा (एमआईईक्यू) तय किया गया है। चीनी की सभी किस्मों यथा कच्ची, सफेद एवं रिफाइंड चीनी के 20 लाख टन के निर्यात कोटे को चीनी मिलों के बीच यथानुपात निर्धारित किया गया है जिसके लिए परिचालन वाले पिछले दो चीनी सीजनों और वर्तमान सीजन (फरवरी 2018 तक) के दौरान चीनी मिलों के औसत चीनी उत्पादन को ध्यान में रखा गया।

ई) इसके अलावा, चीनी मिलों द्वारा अधिशेष चीनी के निर्यात में सुगमता के साथ-साथ इसे प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने चीनी के संबंध में शुल्क मुक्त आयात अनुमोदन (डीएफआईए) योजना की अनुमति दे दी है।


(●) मंत्रिमंडल ने तम्बाकू उत्पादों में अवैध व्यापार को समाप्त करने के लिए तम्बाकू नियंत्रण पर डब्ल्यूएचओ रूपरेखा समझौते के अंतर्गत प्रोटोकॉल स्वीकार करने की स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तम्बाकू उत्पादों में अवैध व्यापार को समाप्त करने के लिए तम्बाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के रूपरेखा समझौते के अंतर्गत प्रोटोकॉल को स्वीकार करने की स्वीकृती दी है। यह ध्रूमपान और तम्बाकू चबाने या धुआं रहित तम्बाकू (एसएलटी) रूपों में तम्बाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रूपरेखा समझौते की धारा 15 के अंतर्गत समझौता वार्ता (डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी) और अंगीकार रूप में लागू होगा। भारत डब्लूयएचओ एफसीटीसी समझौतें में शामिल है।

विवरणः

प्रोटोकॉल में विभिन्न पक्षों के दायित्व निर्धारित किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सप्लाई चैन नियंत्रण उपाय सभी पक्षों द्वारा अपनाए जाने चाहिए। इन उपायों में तम्बाकू उत्पाद बनाने के लिए लाइसेंस, तम्बाकू बनाने के लिए मशीनीरी, उत्पादन में शामिल पक्षों के लिए उचित उद्यम, ट्रैकिंग और ट्रैसिंग व्यवस्था, रिकॉर्ड कीपिंग और सुरक्षा शामिल हैं। ई-कॉमर्स, मुक्त व्यापार क्षेत्रों में निर्माण, तथा शुल्क मुक्त बिक्री में शामिल पक्षों द्वारा कदम उठाए जाएंगे।

प्रोटोकॉल में अपराधों, जब्ती तथा जब्त उत्पादों के निस्तारण जैसे प्रवर्तन उपायों को शामिल किया गया है। इसमें सूचना साझा करने, गोपनीयता बनाए रखने, प्रशिक्षण, वैज्ञानिक तथा तकनीकी और प्रौद्योगिकी मामलों में तकनीकी सहायता और सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का प्रावधान किया गया है।

प्रभावः

नियमों को मजबूत बनाकर तम्बाकू उत्पाद में अवैध व्यापार की समाप्ति से व्यापक तम्बाकू नियंत्रण को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और इससे तम्बाकू उत्पादों का इस्तेमाल कम होगा और परिणामस्वरूप बीमारी बोझ में कमी आएगी और तम्बाकू के इस्तेमाल के कारण होने वाली मृत्यु में भी कमी होगी।

ऐसी संधि को मान लेने से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले वर्तमान व्यवहारों के विरुद्ध कार्रवाई योग्य विकल्प उपलब्ध होंगे। भारत तम्बाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अग्रणी है और ऐसे अवैध व्यवहार को नियंत्रित करने में विश्व सीमा शुल्क संगठन सहित अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को प्रभावित करने में समक्ष होगा।

तम्बाकू के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को मजबूत बनाने में तम्बाकू उत्पाद में अवैध व्यापार की समाप्ति से संबंधी प्रोटोकॉल पथ प्रदर्शक पहल है और सार्वजनिक स्वास्थ्य में नया कानूनी उपाय भी है। यह तम्बाकू उत्पादों में अवैध व्यापार का मुकाबला करने और उसे समाप्त करने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग के लिए कानूनी पहलुओं को मजबूत बनाने का व्यापक औजार है।

पृष्ठभूमिः

तम्बाकू नियंत्रण पर विश्व स्वास्थ्य संगठन समझौता (डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी) डब्ल्यूएचओ के तत्वाधान में की गई पहली अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संधि है। एफसीटीसी का उद्देश्य राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर तम्बाकू नियंत्रण के लिए आपूर्ति मांग कटौती उपायों की रूपरेखा उपलब्ध कराना है।

डब्ल्यूएचओ एफसीटीसी की धारा 15 में शामिल प्रमुख तम्बाकू आपूर्ति कटौती रणनीति में सभी तरह के अवैध व्यापार यानी तस्करी, अवैध निर्माण तथा जालसाजी सहित सभी तरह के अवैध व्यापार की समाप्ति की परिकल्पना की गई है। इसी के अनुरूप यह प्रोटोकॉल विकसित किया गया है और सम्मेलन में शामिल पक्षों (सीओपी) द्वारा अपनाया गया है। सीओपी एफसीटीसी की गवर्निंग बॉडी है। प्रोटोकॉल दस भागों में विभाजित है और इसमें 47 धाराएं है।


(●) मंत्रिमंडल ने नई दिल्‍ली के नजफगढ़ में 100 बिस्‍तरों के सामान्‍य अस्‍पताल निर्माण एवं परिचालन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने नई दिल्‍ली के नजफगढ़ के ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य प्रशिक्षण केंद्र (आरएचटीसी) में करीब 95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 100 बिस्‍तरों के सामान्‍य अस्‍पताल निर्माण एवं परिचालन को मंजूरी दी।

इस परियोजना की परिक्‍लपना दो वर्ष पूर्व नजफगढ़ के आसपास के 73 गांवों की 13.65 लाख स्‍थानीय आबादी को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए 100 बिस्‍तरों वाले अस्‍पताल की स्‍थापना की गई थी।

इस अस्‍पताल में ब्‍लड बैंक, नैदानिक सेवाएं, एवं अलग से बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सहित मेडिसन, ऑब्‍सटेट्रिक्‍स एंड गायनेकोलॉजी, पेडियाट्रिक्‍स एंड सर्जरीमें चार प्रमुख क्‍लीनिकल सेवाएं उपलब्‍ध होंगी। इसमें जनरल मेडिसन, सर्जरी, डेंटल, ईएनटी, ऑप्‍थेलमोलॉजी, ऑडियोमेट्री एवं पेडियाट्रिक केयर ओपीडी के संचालन के लिए 30 डॉक्‍टर, 40 नर्स एवं 50 से अधिक सहायक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा कर्मचारी होंगे।

इस अस्‍पताल से स्‍थानीय आबादी खासकर महिलाओं और बच्‍चों जैसे वंचित तबकों के लिए स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी। यह इस क्षेत्र में लोगों को शिशु एवं मातृत्‍व देखभाल सेवाएं, ट्रॉमा देखभाल सेवाएं एवं बुनियादी नैदानिक, थेराप्‍यूटिक, प्रिवेंटिव एवं क्‍यूरेटिव सेवाएं मुहैया कराएगा।

इस अस्‍पताल के अपने सभी विभागों और पर्याप्‍त मानव संसाधन के साथ मई 2020 तक पूरी तरह परिचालन में होने का अनुमान है।


(●) कैबिनेट ने संयुक्‍त सचिव स्‍तर तथा इससे ऊपर के पदों के निर्माण, उन्‍मूलन तथा उन्‍नयन के साथ भारतीय खान ब्‍यूरो (आईबीएम) के पुर्नगठन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्‍त सचिव स्‍तर तथा इससे ऊपर के पदों के निर्माण, उन्‍मूलन तथा उन्‍नयन के साथ भारतीय खान ब्‍यूरो (आईबीएम) के पुर्नगठन को मंजूरी दे दी। भारतीय खान ब्‍यूरो के वर्तमान 1477 पदों को बनाये रखा गया है।

पुनर्गठन से आईबीएम को खान क्षेत्र में नियमों को बदलने तथा सुधार करने में सहायता मिलेगी। इससे आईबीएम, खनिज नियमन तथा विकास में सुधार के लिए आईटी तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की सेवाएं अपनाने में सक्षम होगा। इसके अलावा संगठन के कार्य संचालन में इन पदों से निर्णय प्रक्रिया में तेजी आयेगी तथा उत्‍तरदायित्‍व में वृद्धि होगी।

प्रभाव :

प्रस्‍ताव से खनिज क्षेत्र के तेजी से विकास में योगदान के लिए गंभीर उत्‍तरदायित्‍व वाले तकनीकी कर्मियों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

इस प्रकार पूरे क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में उल्‍लेखनीय वृद्धि होगी। आईबीएम के बेहतर प्रदर्शन से खनन क्षेत्र को लाभ मिलेगा।

विवरण :

आईबीएम में संयुक्‍त सचिव स्‍तर के कुछ पदों के उन्‍नयन, निर्माण तथा उन्‍मूलन में शामिल हैं –

ए. स्‍तर 15 में मुख्‍य खान नियंत्रक के एक पद का निर्माण तथा स्‍तर 14 में खान नियंत्रक के 3 पदों का निर्माण।

बी. 11 पदों का उन्‍नयन अर्थात महानियंत्रक के 1 पद का स्‍तर 15 से स्‍तर 16 में, मुख्‍य खान नियंत्रक तथा निदेशक (अयस्‍क ड्रेसिंग) के दो पदों का स्‍तर 14 से स्‍तर 15 में तथा 8 पदों का उन्नयन (खान नियंत्रक के 5 पद, मुख्‍य खनिज अर्थशास्‍त्री, अयस्‍क ड्रेसिंग अधिकारी तथा मुख्‍य खनन भू-विशेषज्ञ का एक-एक पद) स्‍तर 13 ए से स्‍तर 14 में, तथा

सी. उप महानिदेशक (सांख्यिकी) के 1 कैडर पद का उन्‍मूलन, भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारी के एक पद का उन्‍नमूलन (स्‍तर 14 के वेतनमान में)।

पृष्‍ठभूमि :

भारत सरकार ने 1 मार्च, 1948 को केंद्रीय कार्य, खान तथा ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत आईबीएम की स्‍थापना की थी। इसका प्रारंभिक उद्देश्‍य खनन क्षेत्र के लिए नीति निर्धारण और कानूनी प्रावधानों के निर्माण में एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करना था। इसके साथ ही आईबीएम खनिज संसाधनों के विकास और उपयोग के संदर्भ में केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों को सलाह प्रदान करता था। खनन क्षेत्र की बढ़ती आवश्‍यकताओं के अनुरूप आईबीएम की भूमिका और उत्‍तरदायित्‍व में बदलाव हुआ है। अब यह खनन क्षेत्र (कोयला, पेट्रोलियम तथा परमाणु खनिज के अलावा) में सुविधा प्रदाता तथा नियामक की भूमिका निभा रहा है।

राष्‍ट्रीय खनिज नीति (एनएमपी) 2008 के आलोक में खान मंत्रालय ने आईबीएम की भूमिका तथा कार्य की समीक्षा तथा पुर्नगठन विषय पर एक समिति का गठन किया। समिति ने 4 मई, 2012 को अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसे मंत्रालय ने स्‍वीकार कर लिया।

खनिज क्षेत्र में सुविधा प्रदान करने तथा इसके नियमन के लिए खान मंत्रालय ने आईबीएम के माध्‍यम से कई पहलों की शुरूआत की है।

1. सतत विकास फ्रेमवर्क (एसडीएफ) का कार्यान्‍वयन तथा खनन गतिविधि के वैज्ञानिक, पर्यावरण और समाजिक आयामों के संदर्भ में किये गये प्रयासों व पहलों के लिए खानों की स्‍टार रेटिंग।
2. भास्‍कराचार्य इंस्‍टीटयूट ऑफ स्‍पेस एप्‍लीकेशन एंड ज्‍यो – इन्‍फोर्मेटिक (बीआईएसएजी) के सहयोग से खनन निगरानी प्रणाली (एमएसएस) का विकास। इसके तहत सेटेलाइट से प्राप्‍त तस्‍वीरों के आधार पर मुख्‍य खनिज क्षेत्र के 500 मीटर के दायरे में अवैध खनन का पता लगाया जाता है।
3. खनिज प्रसंस्‍करण में अनुसंधान व विकास पर विशेष जोर। इसमें निम्‍न स्‍तर के अयस्‍क के उन्‍नयन के लिए प्रक्रिया का विकास तथा खनिज क्षेत्र की गतिविधियों को कंप्‍यूटरकृत करने के लिए आईटी आधारित खनन प्रणाली का विकास आदि गतिविधियां शामिल हैं।

आईबीएम का पुर्नगठन आवश्‍यक था ताकि यह एक संगठन के रूप में अपनी जिम्‍मेदारियों का निर्वहन कर सके। नीति तथा कानूनों में बदलाव, आईबीएम की कार्यसूची में संशोधन तथा आईबीएम द्वारा प्रारंभ की गई नई गतिविधियों के कारण आईबीएम की भूमिका बदल गई है। खनिज रियायतों के आवंटन में बेहतर पारदर्शिता के लिए आईबीएम खनिज ब्‍लॉकों की नीलामी में राज्‍यों को सहायता प्रदान कर रहा है। आईबीएम, राज्‍यों को नीलामी ब्‍लॉकों को तैयार करने, औसत विक्रय मूल्‍य प्रकाशित करने, नीलामी के पश्‍चात निगरानी में मदद करने तथा मंजूरी प्रक्रिया में सहायता प्रदान कर रहा है।

अपने उत्‍तरदायित्‍व को पूरा करने के क्रम में आईबीएम के कार्यालयों का स्‍थानांतरण हुआ है। रायपुर और गांधी नगर में नए कार्यालयों की स्‍थापना की गई है तथा गुवाहाटी स्थित उप क्षेत्रीय कार्यालय का उन्‍नयन कर इसे क्षेत्रीय कार्यालय का दर्जा दिया गया है। कोलकाता और उदयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालयों का उन्‍नयन किया गया है और इन्‍हें मंडल कार्यालय (पूर्व) तथा मंडल कार्यालय (उत्‍तर) बनाया गया है। कौशल विकास के उद्देश्‍य से उदयपुर में ससटेनेबल डेवलपमेंट फ्रेमवर्क संस्‍थान, हैदराबाद में रिमोर्ट सेंसिंग केन्‍द्र तथा कोलकाता में इंस्‍टीटयूट ऑफ ससटेनेबल माइनिंग की शुरूआत की गई है। वाराणसी में कौशल विकास केन्‍द्र शीघ्र ही प्रारंभ होगा।


(●) मंत्रिमंडल ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटैंट्स ऑफ इंडिया और साउथ अफ्रीकन इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटैंट्स के बीच आपसी मान्‍यता समझौते को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटैंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और साउथ अफ्रीकन इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटैंट्स (एसएआईसीए) के बीच आपसी मान्‍यता समझौते को मंजूरी दी है।

ब्‍यौरा : लेखा ज्ञान के उन्‍ययन, पेशेवर एवं बौद्धिक विकास, उनकी संख्‍या में वृद्धि एवं भारत और दक्षिण अफ्रीका में लेखांकन पेशे के विकास में सकारात्‍मक योगदान के लिए आपसी सहयोग ढांचे की स्‍थापना के लिए आईसीएआई और एसएआईसीए के बीच आपसी मान्‍यता समझौते (एमआरए) के संदर्भ में मंत्रिमंडल ने यह मंजूरी दी है।

यह समझौता : मौजूदा आईसीएआई योग्‍यता के साथ स्‍थानीय लेखांकन योग्‍यता में भारतीय लेखांकन पेशेवरों को मान्‍यता मुहैया कराएगा, जिससे दक्षिण अफ्रीकी बाजारों में उनके लिए पेशेवर अवसर बढ़ेंगे।
इन दोनों लेखा संस्‍थानों के बीच कामकाजी संबंधों को मजबूत करेगा।
दोनों देशों के बीच लेखा पेशेवरों की आवाजाही को रफ्तार देगा, जिससे दोनों देशों में लघु एवं मझोले उद्यमों को एक नई दिशा मिलेगी।

फायदें

रणनीतिक तौर पर एसएआईसीए के साथ करीबी संबंधों को बरकरार रखना आईसीएआई के लिए काफी महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि इससे संस्‍थान को अफ्रीकी क्षेत्र में आईसीएआई ब्रांड को मजबूती देने और सदस्‍यों की संख्‍या बढ़ाने में मदद मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान विकसित हुए संबंधों की प्रकृति रणनीतिक एवं आपसी हितों को साधने है। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंटों के लिए एमआरए उस क्षेत्र में बेहतर रोजगार की संभावनाएं मुहैया करा सकती है। साथ ही भारत से चार्टर्ड अकाउंटेंटों की आवाजाही भी बढ़ेगी।

पृष्‍ठभूमि:

आईसीएआई भारतीय संसद द्वारा पारित कानून ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एक्‍ट 1949’ के तहत स्‍थापित एक वैधानिक संस्‍था है। इसकी स्‍थापना भारत में चार्टर्ड अकाउंटेंसी के पेशे को विनियमित करने के लिए की गई है। एसएआईसीए दक्षिण अफ्रीका की अग्रणी लेखा संस्‍था है और वह विश्‍व के अग्रणी संस्‍थाओं में से एक है।

https://www.indiainside.org/post.php?id=2524