पटना, 09 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) प्रधानमंत्री कल पटना के लिए 1111.56 करोड़ रुपये की लागत वाली चार सीवरेज परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे
● नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत बिहार में वर्तमान समय में 5042.11 करोड़ रुपये की लागत वाली 29 परियोजनाओं का क्रियान्वयन जारी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार 10 अप्रैल 2018 को पटना शहर के लिए 1111.56 करोड़ रुपये की लागत वाली चार सीवरेज परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। यह समारोह बिहार के मोतिहारी शहर में आयोजित किया जाएगा। ये चारों परियोजनाएं आपस में मिलकर 60 एमएलडी की क्षमता वाले नए सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) की स्थापना सुनिश्चित करेंगी और इसके साथ ही पटना के सैदपुर एवं पहाड़ी क्षेत्रों (जोन) में 376.12 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क बिछाएंगी।
पटना स्थित उन परियोजनाओं का विवरण जिनके लिए आधारशिला प्रधानमंत्री द्वारा रखी जाएगीः
परियोजना
लागत (करोड़ रुपये में)
1) पटना के सैदपुर जोन में 172.50 किलोमीटर लंबे सीवरेज नेटवर्क को बिछाना (समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर किए जा चुके हैं)
431.22 करोड़
2) पटना के पहाड़ी सीवरेज जोन में 87.696 किलोमीटर लंबे सीवरेज नेटवर्क को बिछाना (समझौते पर शीघ्र ही हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है)
167.80 करोड़
3) पटना के पहाड़ी सीवरेज जोन में 115.93 किलोमीटर लंबे सीवरेज नेटवर्क को बिछाना (समझौते पर शीघ्र ही हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है)
364.90 करोड़
4) पटना के पहाड़ी सीवरेज जोन में 60 एमएलडी की क्षमता वाले एसटीपी को विकसित करना
147.64 करोड़
कुल
1111.56 करोड़
इनके अलावा, तीन और परियोजनाओं पर कार्य शीघ्र ही पटना के कर्मलीचक, दीघा और कंकड़बाग सीवरेज जोन में शुरू किए जाएंगे ताकि कुल मिलाकर 150 एमएलडी की एसटीपी क्षमता सृजित की जा सके और 534.54 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क बिछाया जा सके। इन तीन परियोजनाओं में से दो परियोजनाओं को हाईब्रिड वार्षिकी आधारित पीपीपी मोड पर क्रियान्वित किया जाएगा।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अक्टूबर, 2017 को बिहार के मोकामा में पटना स्थित चार परियोजनाओं के लिए आधारशिला रखी थी। इनमें बेऊर एसटीपी, बेऊर सीवरेज नेटवर्क, सैदपुर एसटीपी एवं निकटवर्ती नेटवर्क और कर्मलीचक एसटीपी शामिल थे। इन परियोजनाओं की कुल अनुबंधित लागत 738.04 करोड़ रुपये थी। इन समस्त परियोजनाओं के तहत 140 एमएलडी की एसटीपी क्षमता का सृजन करने के साथ-साथ पटना के इन सीवरेज क्षेत्रों (जोन) में 422.88 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क भी बिछाया जाएगा।
पटना में 3237.69 करोड़ रुपये की लागत वाली उपर्युक्त परियोजनाओं से कुल मिलाकर 350 एमएलडी की सीवेज शोधन क्षमता सृजित होगी और 1140.26 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइनें बिछाई जाएंगी। वर्ष 2035 तक शहर का सीवेज बोझ 320 एमएलडी रहने की संभावना है। इन परियोजनाओं के पूरा हो जाने के बाद पटना से कुछ भी सीवेज जल गंगा नदी में प्रवाहित नहीं होगा। इन परियोजनाओं के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पटना में कुछ भी अशोधित जल गंगा नदी में प्रवाहित न हो और सीवर लाइनें इस शहर के प्रत्येक घर में अवश्य ही पहुंच जाएं। इनके अलावा, ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत बिहार में वर्तमान समय में 5042.11 करोड़ रुपये की लागत वाली कुल 29 परियोजनाओं का क्रियान्वयन जारी है।
(●) प्रधानमंत्री कल बिहार में एनएच-2 के औरंगाबाद- चौर्डहा खंड को छह लेन में तब्दील करने के लिए आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मोतिहारी में आयोजित होने वाले एक समारोह के दौरान बिहार-झारखंड सीमा पर अवस्थित चौर्डहा से लेकर बिहार के औरंगाबाद तक एनएच-2 के 70 किलोमीटर लंबे खंड को छह लेन में तब्दील करने के लिए एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना पर 882 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
एनएच-2 का यह खंड स्वर्णिम चतुर्भुज के दिल्ली-कोलकाता खंड का एक हिस्सा है। इस हिस्से को चौड़ा करने का काम पूरा हो जाने के बाद इस खंड में एक फ्लाईओवर, 15 अंडरपास, 7 बड़े पुल, 24 छोटे पुल, 174 पुलिया, 12 फुट ओवर ब्रिज, 26 बस डिपो (बे), 7 ट्रक बे और 2 जगहों पर सड़क किनारे आवश्यक सुविधाएं होंगी।
(●) प्रधानमंत्री कल चंपारण में स्वच्छाग्रहियों को संबोधित करेंगे
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिहार में चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समापन समारोह के अवसर पर देश भर में होने वाले कार्यक्रम से जुड़ेंगे।
प्रधानमंत्री इस अवसर पर मोतिहारी में 20,000 स्वच्छाग्रहियों अथवा स्वच्छता के दूतों को संबोधित करेंगे। स्वच्छाग्रही गांव स्तर पर स्वच्छता के प्रति सामुदायिक दृष्टिकोण (सीएएस) को क्रियान्वित करने वाले जमीनी स्तर के अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यकर्ता और अभिप्रेरक हैं। स्वच्छाग्रही खुले में शौच मुक्त राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में होने वाली प्रगति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
महात्मा गांधी ने एक सदी पहले 10 अप्रैल 1917 को अंग्रेजों के खिलाफ उन किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने के उद्देश्य से चंपारण सत्याग्रह का शुभारंभ किया था, जिन्हें नील की खेती करने के लिए विवश किया गया था। 10 अप्रैल, 2018 को चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के समापन के रूप में चिन्हित किया गया है और इसे ‘सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह’ अभियान के माध्यम से मनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री इस अवसर पर कई विकास परियोजनाओं का अनावरण भी करेंगे।
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