नई दिल्ली, 04 अप्रैल 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।
(●) मंत्रिमंडल ने मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018 को स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में मानव अधिकारों के बेहतर संरक्षण और संवर्धन के लिए मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2018 को अपनी स्वीकृति दे दी है।
● प्रमुख विशेषताएं:
(1) विधेयक में आयोग के मानित सदस्य के रूप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को शामिल करने का प्रस्ताव है।
(2) विधेयक आयोग के गठन में एक महिला सदस्य को जोड़ने का प्रस्ताव करता है।
(3) विधेयक राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तथा राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद के लिए पात्रता और चयन के दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव करता है।
(4) विधेयक में केन्द्रशासित प्रदेशों में मानव अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को देखने के लिए एक व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है।
(5) विधेयक में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग तथा राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि इसे अन्य आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल के अनुरूप बनाया जा सके।
● लाभः
इस संशोधन से भारत में मानव अधिकार संस्थानों को मजबूती मिलेगी और संस्थान अपने दायित्वों और भूमिकाओं तथा जिम्मेदारियों का कारगर निष्पादन कर सकेंगे। इतना ही नहीं, संशोधित अधिनियम से मानवाधिकार संस्थान जीवन, स्वतंत्रता, समानता तथा व्यक्ति के सम्मान से संबंधित अधिकारों को सुनिश्चित करने में सहमत वैश्विक मानकों का परिपालन करेंगे।
● पृष्ठभूमिः
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम. 1993 में संशोधन से राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) तथा राज्य मानव अधिकार आयोग (एसएचआरसी) कारगर तरीके से मानव अधिकारों का संरक्षण और संवर्धन करने के लिए अपनी स्वायत्तता, स्वतंत्रता, बहुलवाद तथा व्यापक कार्यों से संबंधित पेरिस सिद्धांत का परिपालन करेंगे।
(●) मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग में कटौती को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) में वर्तमान दो रिक्त स्थानों तथा एक अतिरिक्त रिक्त स्थान को नहीं भरकर उसका आकार एक अध्यक्ष और छह सदस्य (कुल सात) से घटाकर एक अध्यक्ष और तीन सदस्य (कुल चार) करने की मंजूरी दे दी है। एक स्थान सितम्बर, 2018 में रिक्त होने की उम्मीद है, जब वर्तमान एक पदाधिकारी का कार्यकाल पूरा हो जाएगा।
● लाभ :
इस प्रस्ताव से आयोग के सदस्यों के तीन पदों में कटौती हो जाएगी, जो न्यूनतम सरकार-अधिकतम शासन के सरकार के उद्देश्य को पूरा करता है।
देश में विलय और एकीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के सरकार के उद्देश्य के अंतर्गत मंत्रालय ने 2017 में अल्पतम स्तरों में संशोधन किया था, जो परिसम्पत्तियों की संगणना और ऐसे कार्यों से जुड़े एक लक्ष्य के कारोबार के लिए अपनाई जाने वाली युक्तियों और कार्य पद्धतियों पर लागू है। इससे आयोग में जमा करने के लिए उद्यमों के लिए अनिवार्य नोटिसों में कमी आएगी। इससे आयेाग पर पड़ने वाला बोझ कम होगा।
सुनवाईयों में तेजी से तब्दीली के कारण शीघ्र स्वीकृति की उम्मीद है, जिससे कॉरपोरेट की व्यवसाय प्रक्रिया तेज होगी और देश में रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।
इस प्रस्ताव से आयोग के सदस्यों के तीन पदों में कटौती हो जाएगी, जो कम से कम सरकार-अधिकतम शासन के सरकार के उद्देश्य को पूरा करता है।
● पृष्ठभूमि :
प्रतिस्पर्धा कानून, 2002 के अनुच्छेद 8(1) में व्यवस्था है कि आयोग में एक अध्यक्ष होगा तथा दो से कम और छह से अधिक सदस्य नहीं होंगे। इस समय पद पर अध्यक्ष और चार सदस्य आसीन हैं।
कानून में केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित के स्थान पर कम से कम दो सदस्यों को मिलाकर एक प्रमुख बेंच, अन्य अतिरिक्त बेंच अथवा मर्जर बेंच स्थापित करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए एक अध्यक्ष और 10 से अधिक सदस्य नहीं होने की आरंभिक सीमा प्रदान की गई थी। प्रतिस्पर्धा (संशोधन) कानून, 2007 (2007 के 39) में कानून के अनुच्छेद 22 में बेंचों के गठन का प्रावधान समाप्त करने के लिए संशोधन किया गया था। इसी संशोधन कानून मेंएक अध्यक्ष और दो सदस्यों को मिलाकर प्रतिस्पर्धा अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन किया गया। आयोग के आकार में आनुपातिक कटौती नहीं की गई और इसमें एक अध्यक्ष और दो से कम लेकिन छह से अधिक सदस्य नहीं रखने की व्यवस्था की गई।
आयोग अपने अस्तित्व में आने के बाद से कोलेजियम के रूप में कार्य कर रहा है। प्रतिस्पर्धा प्राधिकार का आकारजापान, अमरीका और ब्रिटेन जैसे अनेक प्रमुख अधिकार क्षेत्रों की तरह है।
(●) मंत्रिमंडल ने असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, 1951 की अद्यतनीकरण योजना के संशोधित लागत अनुमानों को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 1220.93 करोड़ रुपये के व्यय से 31.12.2018 तक असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, 1951की अद्यतनीकरण योजना के संशोधित लागत अनुमानों को मंजूरी दे दी है।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, 1951 योजना असम राज्य के लिए है, जिसमें 3.29 करोड़ आवेदनकर्ता शामिल हैं।
● लाभ
इससे असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को तैयार करने में मदद मिलेगी।राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को प्रकाशित करने की प्रस्तावित आखिरी तारीख 31 दिसम्बर, 2018 है। असम केराष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का आंशिक मसौदा 31 दिसम्बर, 2017 को प्रकाशित किया गया था, जिसमें 3.29 करोड़ आवेदनकर्ताओं में से 1.90 करोड़ लोगों को शामिल किया गया था। इनमें उन लोगों के नाम भी शामिल थे, जोसत्यापन की समूची प्रकिया पूरी कर चुके हैं।
शेष आवेदनकर्ता जो जांच की विभिन्न अवस्थाओं में हैं, उनका सत्यापन और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का सम्पूर्ण मसौदा 30.06.2018 तक प्रकाशित किया जाएगा। जिसके बाद दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी और उनका निपटारा करने के साथ ही अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर प्रकाशित किया जाएगा।
● विवरण
असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का अद्यतनीकरण नागरिकता कानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान-पत्र जारी करने) नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुसार किया जा रहा है। इसमें उन लोगों के नाम और उनके वंश शामिल होंगे, जिनके नाम 24 मार्च, 1971 की आधी रात तक किसी भी मतदाता सूची मेंअथवा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, 1951में हैं।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में अपने नाम दर्ज कराने के लिए 2015 में 6.63 करोड़ दस्तावेजों के साथ 29 करोड़ लोगों ने आवेदन किया था। इसके बाद बड़े पैमाने पर प्रत्येक आवेदनकर्ता के क्षेत्र और दस्तावेजों का सत्यापन किया गया।
कार्यान्वयन की रणनीति और लक्ष्य :
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के अद्यतनीकरण का वास्तविक कार्यान्वयन वैधानिक प्राधिकारों यानी स्थानीय रजिस्ट्रारों और राज्य सरकार द्वारा नियुक्त जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा किया जाएगा। राज्य सरकार का एक वरिष्ठ अधिकारी राज्य समन्वयक के रूप में कार्य करेगा और विभिन्न गतिविधियों के संबंध में आरजीआई/भारत सरकार के साथ सहयोग करेगा।
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के अद्यतनीकरण का कार्य नागरिक पंजीकरण के महापंजीयक की निगरानी और नियंत्रण में किया जाएगा। प्रशासनिक और संचालन संबंधी मामलों को राज्य सरकार उनके वर्तमान नियमों के अनुसार देखेगी।
● प्रमुख प्रभाव :
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करने का कार्य नागरिकों को बड़े पैमाने पर शामिल करने का कार्य है, जो असम के प्रत्येक निवासी को शामिल करता है। यह असम समझौते को पूरा करने और प्रधानमंत्री के स्तर पर 2005 में हुई त्रिपक्षीय बैठक में बनी सहमति का हिस्सा है। असम केराष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम शामिल होंगे और इससे सरकार को भारत में गैर कानूनी तरीके से प्रवेश को रोकने में मदद मिलेगी।
● पृष्ठभूमि :
असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में भारतीय नागरिकों के नाम शामिल हैं। इसे 1951 की जनगणना के दौरान गिनती किये गये सभी लोगों का विवरण दर्ज करके गैर-संविधिक प्रक्रिया के रूप में 1951 में तैयार किया गया था। अवैध विदेशियों के खिलाफ असम आंदोलन (1979-85) के कारण केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, अखिल भारतीय छात्र संघ (एएएसयू) और अखिल असम गण संग्राम परिषद (एएजीएसपी) के बीच 15 अगस्त, 1985 को असम समझौते पर हस्ताक्षर किये गये, जिसमें पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से गैर कानूनी तरीके से प्रवेश करने वालों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए 24 मार्च, 1971 की अंतिम तिथि निर्धारित की गई। तदनुसार नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन किया गया और इसमें असम के लिए विशेष प्रावधानों के रूप में अनुच्छेद 6ए को शामिल किया गया।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मई, 2005 में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और एएएसयू के बीच त्रिपक्षीय बैठक में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, 1951 के अद्यतनीकरण पर सहमति बनी। असम सरकार के साथ सलाह-मशविरा करके सरकार ने इसके तौर-तरीकों को मंजूरी दे दी है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए, असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के अद्यतनीकरण का कार्य दिसम्बर, 2013 में शुरू हुआ, जिसे तीन वर्ष में पूरा किया जाना था। उच्चतम न्यायालय लगातार राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के अद्यतनीकरण की प्रगति पर निगरानी रखे हुए है और समय-समय पर विभिन्न निर्देश देता रहता है।
(●) मंत्रिमंडल ने टीसीएल से एचपीआईएल को अतिरिक्त भूमि का विलय खत्म करने और उसे हस्तांतिरत करने की स्वीकृति दी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार विभाग के सार्वजनिक प्रतिष्ठान हेमीस्फेयर प्रोपर्टीज इंडिया लिमिटेड (एचपीआईएल) का प्रशासनिक नियंत्रण आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी कंपनी को 700 करोड़ रुपये की इक्विटी राशि देने और भारत सरकार का 51 करोड़ रुपये का प्रतिभूति ऋण देने के बाद दी गई है और शेष भूमि के अलगाव की प्रबंधन योजना लागू करने के बाद दी गई है।
● विवरणः
(ए) निजी प्लेसमेंट आधार पर 10 रुपये के सममूल्य के 70 करोड़ संचित भुगतान पश्चात वापसी योग्य वरीयता शेयर अधिग्रहित करने के लिए हेमीस्फेयर प्रोपर्टी इंडिया लिमिटेड कंपनी में 700 करोड़ रुपये की इक्विटी लगाई गई और भारत सरकार से प्रतिभूति ऋण के माध्यम से 51 करोड़ रुपये दिए गए, जिसकी कूपन दर/ब्याज दर आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तय की जाएगी और योजना को लागू किया जाएगा।
(बी) रियल इस्टेट कारोबार में एचपीआईएल को प्रत्यक्ष विदेशी निवेशके संबंध में भारत सरकार की नीति से छूट प्रदान करना।
(सी) एचपीआईएल को शक्ति विकेन्द्रित करना, ताकि बिक्री, दीर्घकालिक पट्टे और जमीन की बिक्री सहित समझौते ज्ञापन के उद्देश्यों को प्रभावी रूप देने के लिए उचित निर्णय लिए जा सकें।
(डी) संचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग से आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को इक्विटी शेयरों का हस्तांतरण तथा एचपीआईएल प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण करना।
(ई) संचार मंत्रालय से आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को इक्विटी शेयर हस्तांतरित करने, इक्विटी लगाने और प्रंबधन योजना लागू करने के लिए दूरसंचार विभाग को अधिकृत करना।
● लाभः
इससे शेष भूमि टाटा कम्युनिकेशन लिमिटेड से अलग होकर हेमीस्फेयर प्रोपर्टीज इंडिया लिमिटेड (एचपीआईएल) की हो जाएगी तथा एचपीआईएल का कामकाज और सहज तरीके से चलेगा।
● क्रियान्वयन रणनीति तथा लक्ष्यः
मंत्रिमंडल द्वारा इस प्रस्ताव की उचित स्वीकृति के बाद शेष भूमि टीसीएल से एचपीआईएल को स्टैम्प ड्यूटी के भुगतान पर हस्तांतरित कर दी जाएगी। जैसा कि टीसीएल द्वारा सूचित किया गया है, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा प्रबंधन योजना की स्वीकृति के लिए लगभग सात से आठ महीनों की जरूरत होगी। एनसीएलटी द्वारा इसे स्वीकृति देने के बाद शामिल विभिन्न कदमों को लागू करने में पांच से छह महीनों की आवश्यकता होगी। समग्र रूप से निर्णय को लागू करने के लिए एक वर्ष का समय लगेगा।
● पृष्ठभूमिः
मेसर्स विदेश संचार निगम लिमिटेड (अब टाटा कम्युनिकेशन लिमिटेड, टीसीएल) का भारत सरकार द्वारा 13 फरवरी, 2002 को विनिवेश किया गया और कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण रणनीतिक साझेदार, टाटा समूह की कंपनियों के अंतर्गत एक स्पेशल परपस व्हेकिल, मेसर्स पानाटोन फाइनवेस्ट लिमिटेड (पीएफएल) को सौंप दिया गया।
विनिवेश के समय चार शहरों यथा पुणे, कोलकाता, नई दिल्ली और चेन्नई के पांच स्थानों की 773.13 एकड़ (कुल 1230.13 एकड़ जमीन में से) शेष भूमि का सीमांकन किया गया था और यह निर्णय लिया गया था कि शेष भूमि विनिवेश बोली का हिस्सा नहीं होगी।
शेयरधारक समझौता/शेयर खरीद समझौता के अनुसार कंपनी अधिनियम 1956 के अनुच्छेद 391 से 394 के अंतर्गत पीएफएल का दायित्व शेष भूमि एक रियलिटी कंपनी को सौंपना था।
(●) मंत्रिमंडल ने घाटे में चल रहे केन्द्रीय सार्वजनिक प्रतिष्ठान बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड को बंद करने की स्वीकृति दी
● यह निर्णय 10 वर्षों से अधिक समय में कंपनी के निरंतर गिरते भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन तथा भविष्य में पुनरोत्थान की कम संभावना के कारण लिया गया वर्तमान में घाटे में चल रही बीएससीएल के लिए उपयोग में लाए जा रहे सार्वजनिक धन की बचत होगी और इसका उपयोग अन्य विकास कार्य के लिए किया जा सकेगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रेल मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक प्रतिष्ठान बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड (बीएससीएल) को बंद करने की स्वीकृति दे दी है। यह निर्णय 10 वर्षों से अधिक समय में कंपनी की निरंतर गिरते भौतिक और वित्तीय प्रदर्शन तथा भविष्य में पुनरोत्थान की कम संभावना के कारण लिया गया है। इससे घाटे में चल रही बीएससीएल के लिए उपयोग में लाए जा रहे सार्वजनिक धन की बचत होगी और इसका उपयोग अन्य विकास कार्य के लिए किया जा सकेगा।
सरकार बंटवारा पैकेज और कंपनी की चालू देनदारियों को खत्म करने के लिए 417.10 करोड़ रुपये का एक समय का अनुदान देगी। इसके अतिरिक्त भारत सरकार (रेल मंत्रालय) द्वारा कंपनी को दिए गए 35 करोड़ रुपये के बकाया ऋण का मोचन कर दिया जाएगा। बीएससीएल के 508 कर्मचारी स्वैच्छिक अवकाश योजना (वीआरएस) से लाभान्वित होंगे।
● पृष्ठभूमिः
बर्न स्टैंडर्ड कंपनी लिमिटेड 1976 में गठित की गई थी। वर्ष 1987 में राष्ट्रीकरण और बर्न एंड कंपनी तथा इंडिया स्टेंडर्ड वैगन कंपनी लिमिटेड का भारी उद्योग विभाग के अंतर्गत एकीकरण कर दिए जाने के बाद 1994 में कंपनी का मामला औद्योगिक तथा वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड (बीआईएफआर) को भेजा गया और इसे 1995 में बीमार घोषित कर दिया गया। तब से कंपनी बीमार स्थिति में है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की स्वीकृति के अनुसार 15-09-2010 को कंपनी का प्रशासनिक नियंत्रण डीएचआई से रेल मंत्रालय को सौंप दिया गया। कंपनी वैगनों के निर्माण और मरम्मत तथा इस्पात उत्पादन का कार्य करती है।
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