खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 28 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) मंत्रिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय अपराधों या मुकाबला करने और गंभीर संगठित अपराध से निपटने के लिए सहयोग और सूचना आदान-प्रदान पर भारत तथा ब्रिटेन और उत्‍तरी आयरलैंड के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतराष्‍ट्रीय अपराधों से मुकाबला करने और गंभीर संगठित अपराध से निपटने के लिए सहयोग और सूचना आदान-प्रदान पर भारत तथा ब्रिटेन और उत्‍तरी आयरलैंड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है।

भारत और ब्रिटेन के बीच अपराध से हुई प्राप्‍तियों तथा अपराध के उपायों (करेंसी ट्रांसफर शामिल अपराध सहित) तथा आतंकवादी कोषों की खोज, रोक और जब्‍ती के लिए पहले से ही समझौता है। इस समझौते पर 1995 में हस्‍ताक्षर किए गए थे। दोनों देश अंतराष्‍ट्रीय अपराध और गंभीर संगठित अपराधों से लड़ने में सहयोग को मजबूत बनाना चाहते हैं। इस समझौता ज्ञापन से सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत होगा और पारस्‍परिक रूप से लाभकारी होगा।


(●) मंत्रिमंडल ने न्‍यायिक सहयोग के क्षेत्र में भारत और जांबिया के बीच समझौता ज्ञापन को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीयमंत्रिमंडल ने न्‍यायिक सहयोग के क्षेत्र में भारत और जांबिया के बीच समझौता ज्ञापन को स्‍वीकृति दे दी है।

हाल के वर्षों में भारत और जांबिया के बीच साम‍ाजिक, सांस्‍कृतिक और वाणिज्‍यक संबंध सार्थक दिशा में विकसित हुए हैं। न्‍याय के क्षेत्र में सहयोग समझौते पर हस्‍ताक्षर से दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध और मजबूत होंगे और न्‍यायिक सुधारों को नई दिशा मिलेगी।


(●) मं‍त्रिमंडल ने आईपीआर पर भारत और कनाडा के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मं‍त्रिमंडल ने भारत और कनाडा के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को अपनी पूर्व-व्‍यापी मंजूरी दे दी है। बौद्धिक संपदा (आईपी) के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग कार्यकलापों को स्‍थापित करने के लिए 23 फरवरी, 2018 को इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर किया गया। इस एमओयू का उद्देश्‍य दोनों देशों में नवोन्‍मेषण, रचनाशीलता एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

यह समझौता ज्ञापन एक व्‍यापक और लचीले संरचना की स्‍थापना करता है, जिसमें दोनों देश सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और आईपीआर पर जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा तकनीकी विनिमयों पर एकजुट होकर काम कर सकते हैं तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की बेहतर तरीके से सुरक्षा कर सकते हैं।

• एमओयू के तहत प्राथमिकता पहलों में शामिल हैं :-

दोनों देशों के नागरिकों, व्‍यवसायों तथा सार्वजनिक संस्‍थानों के बीच आईपी जागरूकता बढ़ाने पर सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों, अनुभवों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान।

विशिष्‍ट आईपी क्षेत्रों से जुड़े मानव संसाधनों के साथ परस्‍पर सम्‍पर्क करने के लिए विशेषज्ञों का आदान-प्रदान।

प्रतिभागियों द्वारा एकल रूप से या संयुक्‍त रूप से आयोजित कार्यक्रमों, प्रशिक्षण एवं समारोह में भागीदारी के जरिये उद्योग, विश्‍वविद्यालय, अनुसंधान एवं विकास संगठनों तथा छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के साथ आईपी पर सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों, अनुभवों एवं ज्ञान का आदान-प्रदान एवं प्रसार।

आईपी में आधुनिकीकरण परियोजनाओं, नवीन एवं वर्तमान प्रलेखन एवं सूचना प्रणालियों के स्‍वचालन एवं कार्यान्‍वयन के विकास में सहयोग और आईपी के प्रबंधन के लिए प्रक्रियाएं।

यह समझने में कि किस प्रकार पारम्‍परिक ज्ञान की सुरक्षा की जाए; एवं पारंपरिक ज्ञान संबंधित डाटा आधारों और वर्तमान आईपी प्रणालियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने समेत सर्वश्रेष्‍ठ प्रचलनों के विनिमय में सहयोग।

स्‍थानीय आईपी एवं व्‍यवसाय समुदायों के लिए आईपी संबंधित प्रशिक्षण में सहयोग एवं

ऐसा अन्‍य कोई सहयोग कार्यकलाप, जिस पर इस एमओयू के दायरे के भीतर आपसी रूप से उनमें निर्णय हो।


(●) मंत्रिमंडल ने दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र में तेल तथा रासायनिक प्रदूषण पर सहयोग के लिए भारत और दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम के बीच समझौता ज्ञापन को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र में तेल तथा रासायनिक प्रदूषण पर सहयोगके लिए भारत और दक्षिण एशिया सहकारी पर्यावरण कार्यक्रम (एसएसीईपी) के बीच समझौता ज्ञापन को स्‍वीकृति दे दी है।

• प्रभाव :

समझौता ज्ञापन का उद्देश्‍य भारत और दक्षिण एशियाई समुद्री क्षेत्र के देश यानी बांग्‍लादेश, मालदीव, पाकिस्‍तान और श्रीलंका के बीच क्षेत्र में समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के लिए घनिष्‍ठ सहयोग को प्रोत्‍साहित करना है।

• कार्यान्‍वन :

समझौता ज्ञापन के अंतर्गत भारतीय तटरक्षक (आईसीजी) सक्षम राष्‍ट्रीय प्राधिकार होगा और ‘क्षेत्रीय तेल बिखराव आपात योजना’ को लागू करने के लिए संचालन की दृष्टि से संपर्क सूत्र होगा। भारतीय तटरक्षक भारत सरकार की ओर से तेल और रसायन के बिखराव का समुचित उत्‍तर देगा। आईसीजी समुद्री बचाव समन्‍वय केंद्र (एमआरसीसी) समुद्री दुर्घटनाओं के लिए राष्‍ट्रीय आपदा अनुक्रिया केंद्र होगा।

• पृष्‍ठभूमि :

दक्षिण एशियाई क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, प्रबंधन और प्रोत्‍साहन को समर्थन देने के लिए 1982 में श्रीलंका में अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका की सरकारों ने एसएसीईपी की स्‍थापना की। एसएसीईपी ने इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) के साथ संयुक्‍त रूप से ‘क्षेत्रीय तेल बिखराव आपात योजना’ विकसित की ताकि बांग्‍लादेश, भारत, मालदीव, पाकिस्‍तान तथा श्रीलंका के समुद्रों में तेल प्रदूषण की बड़ी घटना से निपटने के लिए अंतराष्‍ट्रीय सहयोग और पारस्‍परिक सहायता की तैयारी की जा सके।


(●) मंत्रिमंडल ने 1 अप्रैल, 2018 से मार्च, 2020 के लिए नई एकीकृ‍त शिक्षा योजना बनाने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 01 अप्रैल 2018 से 31 मार्च, 2020 के लिए नई एकीकृत शिक्षा योजना बनाने के स्‍कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्‍तावित योजना में, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और शिक्षक शिक्षण अभियान समाहित होंगे। प्रस्‍तावित योजना के लिए 75 हजार करोड़ रूपए मंजूर किये गये है। यह राशि मौजूदा आवंटित राशि से 20 प्रतिशत अधिक है।

प्रस्‍तावित योजना प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘सबको शिक्षा, अच्‍छी शिक्षा’ के विज़न के परिप्रेक्ष्‍य में लाई गई है तथा इसका लक्ष्‍य पूरे देश में प्री-नर्सरी से लेकर बारहवीं तक की शिक्षा सुविधा सबको उपलब्‍ध कराने के लिए राज्‍यों की मदद करना है।

• योजना की प्रमुख विशेषताएं :

योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य शिक्षा के क्षेत्र में सतत विकास के लक्ष्‍यों के अनुरूप नर्सरी से लेकर माध्‍यमिक स्‍तर तक सबके लिए समान रूप से समग्र और गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा सुनिश्‍चित करना है। एकीकृत स्‍कूली शिक्षा योजना में शिक्षकों और प्रौद्योगिकी पर ध्‍यान केंद्रित करते हुए स्‍कूली शिक्षा की गुणवत्‍ता को सुधारने पर खास जोर दिया गया है।

• स्‍कूली शिक्षा के सभी स्‍तरों के लिए योजना के मुख्‍य उद्देश्‍य इस प्रकार है :

गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा की व्‍यवस्‍था और छात्रों के सीखने की क्षमता में वृद्धि,

स्‍कूली शिक्षा में सामाजिक और लैंगिक असमानता को पाटना,

स्‍कूली शिक्षा के सभी स्‍तर पर समानता और समग्रता सुनिश्‍चित करना,

स्‍कूली व्‍यवस्‍था में न्‍यूनतम मानक सुनिश्‍चित करना,

शिक्षा के साथ व्‍यवसायीकरण प्रशिक्षण को बढ़ावा देना,

नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार, 2009 को लागू करने के लिए राज्‍यों की मदद करना तथा,

राज्‍यों की शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषदों, शिक्षण संस्‍थाओं और जिला शिक्षण और प्रशिक्षण संस्‍थाओं (डीआईईटी) को शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में सशक्‍त और उन्‍नत बनाना।

• प्रभाव :

इस योजना से राज्‍यों और संघ शासित प्रदेशों को अपने उपलब्‍ध संसाधनों के हिसाब से अपनी प्राथमिता तय करने और योजना के प्रावधान लागू करने का अवसर मिलेगा। इससे स्‍कूली शिक्षा के विभिन्‍न चरणों में बच्‍चों के आगे शिक्षा जारी रखने के मामलो में बढ़ोतरी होगी तथा बच्‍चों को अपनी स्‍कूली शिक्षा पूरी करने के लिए सार्वभौमिक रूप से मौकामिलेगा। योजना का उद्देश्‍य बच्‍चों को गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा उपलब्‍ध कराने के साथ ही उन्‍हें विभिन्‍न तरह के कौशल और ज्ञान में दक्ष बनाना है जो उनके सर्वांगीण विकास के साथ ही भविष्‍य में कार्यजगत में जाने और उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने के लिए आवश्‍यक है। योजना से बजटीय आवंटन का बेहतर और मानव संसाधन तथा पूर्ववर्ती योजनाओं के लिए तैयार की गई संस्‍थागत संरचनाओं का प्रभावी इस्‍तेमाल हो सकेगा।

• लाभ :

शिक्षा के संदर्भ में समग्र दृष्टिकोण,

पहली बार स्‍कूली शिक्षा के लिए उच्‍चतर माध्‍यमिक और नर्सरी स्‍तर की शिक्षा का समावेश,

सम्‍पूर्ण इकाई के रूप में स्‍कूलों का एकीकृत प्रबंधन,

गुणवत्‍ता युक्‍त शिक्षा पर ध्‍यान, सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने पर जोर,

शिक्षकों के क्षमता विकास को बढ़ाना,

शिक्षक प्रशिक्षण गुणवत्‍ता सुधार के लिए एससीईआरटी जैसे शिक्षक शिक्षण संस्‍थाओं और डीआईईटी को सशक्‍त बनाना,

डीटीके चैनल, डिजिटल बोर्ड और स्‍मार्ट क्‍लासरूम के जरिए शिक्षा में डिजिटल प्रौद्योगिकी के इस्‍तेमाल को बढ़ावा देना,

स्‍वच्‍छ विद्यालय की मदद के लिए स्‍वच्‍छता गतिविधयों की विशेष व्‍यवस्‍था,

सरकारी स्‍कूलों में बुनियादी ढांचे की गुणवत्‍ता सुधारना,

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओअभियान की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए, कक्षा 6-8 से लेकर 12वीं कक्षा तक, कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उन्‍नयन,

स्‍कूलों में कौशल विकास पर जोर,

खेलो इंडिया के समर्थन में स्‍कूलों में खेलों और शारीरिक रूप से इस्‍तेमाल किए जाने वाले उपकरणों की व्‍यवस्‍था,

शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े ब्‍लॉकों, चरमपंथ प्रभावित राज्‍यों, विशेष ध्‍यान देने वाले राज्‍यों/जिलों और सीमावर्ती इलाकों औरविकास की आकांक्षा वाले 115 जिलों को प्राथमिकता।


(●) मंत्रिमंडल ने शिक्षा ऋण योजना के लिए ऋण गांरटी कोष को जारी रखने तथा केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी योजना जारी रखने तथा इसमें संशोधन करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने शिक्षा ऋण योजना के लिए ऋण गांरटी कोष (सीजीएफईएल) को जारी रखने और केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी (सीएसआईएस) योजना को जारी रखने और उसमें संशोधन करने की स्‍वीकृति दे दी है। दोनों योजनाएं 6,660 करोड़ रूपये के आवंटन के साथ 2017-18 से 2019-20 तक जारी रहेंगी। इस अवधि में 10 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा ऋण उपलब्‍ध होंगे।

• वर्तमान प्रस्‍ताव में संशोधन :

अधिक विद्यार्थियों को लाभ तक पहुंचने की अनुमति देने के लिए (और यह विचार करते हुए भी कि ऋण का औसत आकार केवल 4 लाख रूपये रहा है) ऋण राशि की सीमा 7.5 लाख रूपये पर फिर से तय की गई है।

पाठ्यक्रम अवधि + एक वर्ष स्‍थगन अवधि होगी।

गुणवत्‍ता शिक्षा को प्रोत्‍साहित करने के लिए यह योजनाएं उन ऋणों को कवर करेगी जो एनएएसी से मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍थान और एनबीए या राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थानों या केंद्र वित्‍त पोषित तकनीकी संस्‍थानों (सीएफटीआई) द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त पेशेवर/तकनीकी कार्यक्रमों को आगे जारी रखने के लिए है। लेकिन यह स्थिति संभावित प्रभाव से लागू होगी और वर्तमान ऋणों में लागू नहीं होगी।

योजना की बेहतर निगरानी के लिए एक डैश बोर्ड स्‍थापित किया जाएगा।

• कवरेज :

2009 में योजना लागू होने के बाद से प्रति वर्ष औसत शिक्षा ऋण केवल 2.78 लाख रहा। संशोधित योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष ऋणों की संख्‍या अनुमान के अनुसार कम से कम 3.3 लाख होगी। इस तरह यह पहले की योजना की तुलना में 20 प्रतिशत की वृद्धि है।

योजना का उपरोक्‍त नया ढांचा सभी को गुणवत्‍ता संपन्‍न शिक्षा देने की सरकार की नीति के अनुरूप है।

• पृष्‍ठभूमि :

केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी (सीएसआईएस) योजना :

केंद्रीय क्षेत्र ब्‍याज सब्सिडी योजना (सीएसआईएस) पहली अप्रैल 2009 को लांच की गई। योजना के अंतर्गत स्‍थगन अवधि के लिए भारत में आगे के पेशेवर/तकनीकी पाठ्यक्रमों को जारी रखने के लिए भारतीय बैंक एसोसिएशन की आर्दश शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत अनु‍सूचित बैंकों से लिए गए शिक्षा ऋण पर पूरी ब्‍याज सब्सिडी उपलब्‍ध कराई जाती है। ऋणों का वितरण बिना किसी जमानती सुरक्षा और तीसरे पक्ष की गारंटी के किया जाता है। जिन विद्यार्थियों के अभिभावकों की आय 4.5 लाख रूपये तक है वे विद्यार्थी योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह सब्सिडी स्‍नातक और स्‍नातकोत्‍तर या एकीकृत पाठ्यक्रमों के लिए स्‍वीकार्य है। योजना के प्रारंभ होने के समय से ब्‍याज सब्सिडी रूप में 9,408.52 करोड़ रूपये की राशि वितरित की गई है और अभी तक 25.10 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।

शिक्षा ऋणों के लिए ऋण गांरटी कोष (सीजीएफईएल) योजना :

इस योजना के अंतर्गत भारतीय बैंक एसोसिएशन की आर्दश शिक्षा ऋण योजना के अंतर्गत शिक्षा ऋण के लिए गांरटी दी जाती है। इसका वितरण बैंकों द्वारा जमानती सुरक्षा और तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना किया जाता है और यह 7.5 लाख रूपये की अधिकतम ऋण राशि के लिए होती है।

आईआईएम बैंगलूरू द्वारा योजना का तीसरे पक्ष का मूल्‍यांकन किया गया है। इसमें सुझाव है कि योजना को विवेकसंगत बनाया जाए ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के और अधिक विद्यार्थी लाभ उठा सकें।


(●) मंत्रिमंडल ने सरसों के तेल को छोड़कर अन्य सभी खाद्य तेलों के थोक में निर्यात की अनुमति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने सरसों के तेल को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के खाद्य तेलों के बड़ी मात्रा में निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरसों के तेल के लिए 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के न्यूनतम मूल्य पर पांच किलोग्राम के उपभोक्ता पैक में निर्यात की अनुमति जारी रहेगी।

आर्थिक मामलों की समिति ने खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभागके सचिव की अध्यक्षता वाली समिति को अधिकार सम्पन्न बनाने कीभी स्वीकृति दे दी है। इस समिति में वाणिज्य, कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण, राजस्व, उपभोक्ता मामले तथा विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के सचिव शामिल हैं। समिति को घरेलू उत्पादों और मांग, घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय कीमतों तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की मात्रा के आधार पर विभिन्न प्रकार के खाद्य तेलों की आयात-निर्यात नीति की समीक्षा करने तथा उन पर मात्रात्मक प्रतिबंध, पूर्व पंजीकरण, न्यूनतम निर्यात मूल्य तय करने और आयात शुल्क में बदलाव के संबंध में आवश्यक उपाय करने का अधिकार होगा।

खाद्य तेलों का उपभोक्ता पैक में निर्यात करने तथा समय-समय पर उनका न्यूनतम निर्यात मूल्य तय करने का वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालय समिति का अधिकार समाप्त कर दिया गया है।

• प्रभावः

सभी तरह के खाद्य तेलों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाने से खाद्य तेलों के अतिरिक्त विपणन के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे किसानों को तिलहनों से ज्यादा वसूली हो सकेगी, जिससे वे लाभान्वित होंगे। खाद्य तेलों के निर्यात की अनुमति मिलने से मंद पड़े देश के खाद्य तेल उद्योग की क्षमता में वृद्धि होगी। इससे निर्यात प्रतिबंध और कई तरह की रियायतों की वजह से उत्पन्न हुई दुविधा की स्थिति खत्म हो सकेगी और कारोबारी सहूलियत का मार्ग प्रशस्त होगा।

• पृष्ठभूमिः

पिछले दो वर्षों की तुलना में 2016-17 के दौरान देश में तिलहन उत्पादन में भारी वृद्धि देखी गई है। ऐसी संभावना है कि 2017-18 में भी उत्पादन वृद्धि का यह स्तर बना रहेगा। अभी तक केवल कुछ खाद्य तेलों को ही बड़ी मात्रा में निर्यात की अनुमति है। अन्य खाद्य तेलों का निर्यात पांच किलोग्राम के उपभोक्ता पैक में न्यूनतम निर्यात मूल्य पर में ही किया जा सकता है। देश में खाद्य तेलों के बढ़ते उत्पादन को सहारा देने तथा इन तेलों के विपणन के लिए अतिरिक्त संभावनाएं तलाशने के लिए सरसों के तेल को छोड़कर अन्य खाद्य तेलों के बड़े पैमाने पर निर्यात की अनुमति दिया जाना जरूरी हो गया था। सरसों के तेल का भारत में बड़े पैमाने पर उपभोग किया जाता है।


(●) मंत्रिमंडल ने पोषक तत्‍व आधारित सब्सिडी योजना और शहर कम्‍पोस्‍ट योजना 2019-20 तक जारी रखने की स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पोषक तत्‍व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) तथा शहर कम्‍पोस्‍ट योजना 12वीं पंचवर्षीय योजना से आगे 2019-20 तक जारी रखने के उर्वरक विभाग के प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दे दी है। दोनों योजनाओं को 2019-20 तक जारी रखने पर 61,972 करोड़ रुपये का कुल व्‍यय होगा।

योजना के लिए खर्च वास्‍तविक आधार पर होगा क्‍योंकि प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) को राष्‍ट्रीय स्‍तर पर लागू करने में उर्वरक बनाने वाली कंपनियों को सब्सिडी दर पर किसानों को बेचे गए खाद पर सौ प्रतिशत सब्सिडी के भुगतान का प्रावधान है।

पी और के उर्वरकों पर तथा शहर कम्‍पोस्‍ट पर बाजार विकास सहायता (एमडीए) पर सब्सिडी मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति द्वारा वार्षिक आधार पर स्‍वीकृतसब्सिडी दरों पर उपलब्‍ध कराई जाएगी।

पोषक तत्‍व आधारित समिति योजना और शहर कम्‍पोस्‍ट योजना यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को वैधानिक रूप से नियंत्रित मूल्‍य पर प्रर्याप्‍त मात्रा में पी और के उपलब्‍ध हों।

• पृष्‍ठभूमि :

सरकार उर्वरक उत्‍पादकों और आयातकों के माध्‍यम से किसानों को सब्सिडी मूल्‍य पर यूरिया तथा पी के उर्वरक की 21 श्रेणीयों को उपलब्‍ध करा रही है। पी और के उर्वरकों पर सब्सिडी का संचालन 01.04.2010 से पोषक तत्‍व आधारित सब्सिडी योजना द्वारा किया जा रहा है। इसी तरह 10.02.2016 से एमडीए का संचालन शहर कम्‍पोस्‍ट योजना द्वारा किया जा रहा है। ये दोनों योजनाएं 12वीं पंचवर्षीय योजना से आगे 2019-20 तक बढ़ा दी गई हैं।


(●) मंत्रिमंडल ने वर्ष 2018-19 के लिए फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दर निर्धारित करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने 2018-19 की अवधि में फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दर निर्धारित करने के उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

• एनबीएस के लिए प्रस्तावित दरें इस प्रकार हैः

प्रति किलोग्राम सब्सिडी दर (रुपये में)

नाइट्रोजन(एन) 18.901
फॉस्फोरस (पी) 15.216
पोटाश (के) 11.124
सल्फर (एस) 2.722

सीसीईए ने इसके साथ ही उर्वरक विभाग के उन प्रस्तावों को भी पूर्व प्रभाव से अनुमति दे दी है, जिसके तहत विभाग द्वारा 2012-13 से लेकर अब तक विभिन्न वर्षों में फरवरी और मार्च के महीनों में कई जिलों में फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों की एक विशेष मात्रा पर अगले वित्त वर्ष के लिए निर्धारित उस दर से सब्सिडी दी गई, जो उस वर्ष सीसीईए द्वारा स्वीकृत की गई दर से कम थी।

आर्थिक मामलों की समिति ने उर्वरक विभाग को आवश्यकतानुसार निर्धारित दरों के आधार पर सब्सिडी जारी करने के लिए अधिकृत किया है। यह दर उस वित्त वर्ष या अगले वित्त वर्ष के हिसाब से फरवरी और मार्च में जिलों द्वारा फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों की विशेष श्रेणी या मात्रा पर प्राप्त की गई दरों में जो भी कम होगी के आधार पर निर्धारित की जाएगी।

• वित्तीय परिव्ययः

फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों पर 2018-19 में दी जाने वाली सब्सिडी पर अनुमानित व्यय 23007.16 करोड़ रुपये होगा।

• पृष्ठभूमिः

सरकार उत्पादकों और आयातकों के जरिए किसानों को यूरिया तथा 21 अन्य श्रेणी के फॉस्फेट और पोटाश उर्वरक रियायती दरों पर उपलब्ध करा रही है। फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों पर सब्सिडी एनबीएस योजना का संचालन तहत 01.04.2010 से किया जा रहा है। सरकार किसान हितैषी अपनी नीतियों के तहत किसानों को रियायती दरों पर फॉस्फेट और पोटाश उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 की तुलना में उर्वरकों पर सब्सिडी व्यय बढ़ाकर 1913.07 करोड़ कर दिया है। सरकार की ओर से यह कदम किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों के बड़ी कीमतों के असर से बचाने के लिए उठाया गया है।


(●) मंत्रिमंडल ने वर्ष 2019-20 तक कृषि विज्ञान केंद्रों की निरंतरता, सुदृढ़ीकरण और स्‍थापना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 31 मार्च 2017 तक स्‍थापित 669 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों (केवीके) एवं 11 कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्‍थानों (एटीएआरआई) की वर्ष 2019–20 तक निरंतरता/सुदृढ़ीकरण, कृषि विश्‍वविद्यालयों (एयू) के विस्‍तार शिक्षा निदेशालयों (डीईई) और इस योजना से जुड़े सभी विशेष कार्यक्रमों को सहायता देने और 12वीं योजना में पहले ही मंजूर किये जा चुके 76 केवीके की स्‍थापना करने संबंधी कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

• वित्‍तीय परिव्यय :

वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2020 तक की अवधि के लिए केवीके योजना [कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय (डीकेएमए) सहित] का वित्‍तीय परिव्‍यय 2,82,400.72 लाख रुपये का होगा।

• विवरण :

केवीके विभिन्‍न जिलों में कृषि क्षेत्र में ज्ञान एवं अनुसंधान केन्‍द्र के रूप में काम करेंगे और प्रौद्योगिकी के उपयोग एवं किसानों के सशक्तिकरण के मॉडलों का निर्माण करेंगे जिससे किसानों की आमदनी दोगुनी करने संबंधी भारत सरकार की पहल को आवश्‍यक सहायता सुनिश्चित होगी।

केवीके योजना के जरिए जिन विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत की जायेगी उनमें निम्‍नलिखित शामिल हैं –

नई विस्‍तार कार्य पद्धतियों एवं अवधारणाओं; पोषण–संवेदी कृषि संसाधनों एवं नवाचारों (एनएआरआई) पर एक नेटवर्क परियोजना।

जनजातीय क्षेत्रों में ज्ञान प्रणालियों और वासभूमि कृषि प्रबंधन (क्षमता) के शीर्षक वाले कार्यक्रम।

कृषि में मूल्‍य वर्द्धन और प्रौद्योगिकी इन्‍क्‍यूबेशन केन्‍द्र (वाटिका)
कृषि नवाचार संसाधन प्रबंधन (फर्म), और

कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केन्‍द्र की स्‍थापना

इसके अलावा वर्षा जल के संचयन, एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) के प्रसंस्‍करण, मत्‍स्‍य बीज के उत्‍पादन, आईसीटी आधारित सेवाओं, हरित कृषि और मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के सुदृढ़ीकरण के लिए भी सहायता दी जाएगी। इसके अतिरिक्‍त दो महत्‍वपूर्ण कार्यक्रमों को मंजूरी दी गई जिनमें 52 केंद्रों में ‘फार्मर फर्स्‍ट’ और 11 जिलों के लिए कृषि क्षेत्र की ओर युवाओं को आकर्षित करना एवं बनाये रखना (आर्य) शामिल हैं।

‘आर्य’ घटक को वर्तमान समय में केवीके के जरिए 25 राज्‍यों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास के जरिए उद्यमिता गतिविधियां शुरू करने के लिए आईसीएआर संस्‍थानों और कृषि विश्‍वविद्यालयों से प्राप्‍त तकनीकी साझेदारों के साथ प्रत्‍येक राज्‍य के एक जिले में इसे क्रियान्वित किया जा रहा है जिससे रोजगारों का सृजन हो रहा है। वर्ष 2015-16 और वर्ष 2016-17 के दौरान क्रमश: 1,100 और 4,400 युवाओं को आर्य के जरिए जोड़ा गया है। वर्ष 2017 से लेकर वर्ष 2020 तक की अवधि के दौरान 75 और जिलों को शामिल करते हुए 100 जिलों को कवर करने के लिए इस घटक का विस्‍तार करने की योजना बनाई गई है। किसानों के क्षमता विकास और युवाओं (हर वर्ष लगभग 14 लाख) को व्‍यावसायिक प्रशिक्षण देने से खेती-बाड़ी में सकारात्‍मक सहभागिता बढ़ेगी।

• सामंजस्‍य :

केवीके से सामंजस्‍य स्‍थापित करना आसान हो सकता है और ये कृषि सहयोग एवं किसान कल्‍याण विभाग, पशुपालन, डेयरी एवं मत्‍स्‍य पालन विभाग, खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय के साथ-साथ विभिन्‍न स्‍कीमों जैसे कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्‍ट्रीय गोकुल मिशन, राष्‍ट्रीय पशुधन मिशन एवं प्रधानमंत्री कृषि संपदा योजना के जरिए कृषि एवं ग्रामीण विकास पर फोकस करने वाले अन्‍य विभागों और मंत्रालयों की अनेक योजनाओं के लिए प्रमुख एजेंसी के रूप में काम करेंगे, ताकि सूक्ष्‍म सिंचाई, एकीकृत पोषक तत्‍व प्रबंधन (आईएनएम), एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम), पशुधन प्रबंधन, प्रसंस्‍करण एवं मूल्‍य वर्द्धन और मोबाइल प्रौद्योगिकी के उपयोग, इत्‍यादि से जुड़े मसलों को सुलझाया जा सके।

• पृष्‍ठभूमि :

केवीके योजना :

केवीके योजना को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), कृषि शोध एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के तहत शत-प्रतिशत केंद्रीय वित्‍त पोषण के जरिए संचालित किया जा रहा है। 31 मार्च 2017 तक 669 केवीके की स्‍थापना की गई है, जो जिला स्‍तर पर कृषि विज्ञान केंद्रों के रूप में काम कर रहे हैं और जिन्‍हें प्रौद्योगिकी के आकलन और इसके विभिन्‍न अनुप्रयोगों एवं क्षमता विकास को प्रदर्शित करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। केवीके की गतिविधियों में प्रौद्योगिकियों का खेतों में परीक्षण एवं प्रदर्शन करना, किसानों एवं विस्‍तार कर्मियों का क्षमता विकास करना, कृषि प्रौद्योगिकियों के एक ज्ञान एवं अनुसंधान केन्‍द्र के रूप में कार्य करना और किसानों के हित वाले विभिन्‍न विषयों पर आईसीटी तथा अन्‍य मीडिया साधनों का उपयोग कर कृषि परामर्श जारी करना शामिल हैं। इसके अलावा, केवीके गुणवत्‍तापूर्ण प्रौद्योगिकी उत्‍पादों (बीज, रोपण सामग्री, बॉयो–एजेंट, पशुधन) का उत्‍पादन करते हैं एवं इन्‍हें किसानों को उपलब्‍ध कराते हैं, विस्‍तार गतिविधियां आयोजित करते हैं, चयनित कृषि नवाचारों की पहचान करने के साथ साथ उनका प्रलेखन करते हैं और पहले से ही जारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के साथ सामंजस्‍य सुनिश्चित करते हैं।

• डीकेएमए :

कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय (डीकेएमए) को प्रिंट, इलेक्‍ट्रॉनिक एवं वेब मोड में मूल्‍य वर्द्धित सूचना उत्‍पादों के जरिए कृषि ज्ञान एवं सूचनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ साथ उन्‍हें साझा करने, कृषि ज्ञान पर ई-संसाधनों का विकास करने, वैश्विक स्‍तर पर जानकारी देने के लिए सूचनाएं उपलब्‍ध कराने, आईसीएआर के संस्‍थानों, कृषि विश्‍वविद्यालयों (एयू) तथा केवीके के बीच ई-कनेक्टिविटी के सुदृढ़ीकरण को सुविधाजनक बनाने और कृषि ज्ञान प्रबंधन तथा संचार के लिए क्षमता निर्माण करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है।

केवीके के तहत उपलब्धियां :

नियमित निर्धारित गतिविधियों के अलावा 12वीं योजना के दौरान केवीके की कुछ उल्‍लेखनीय गतिविधियों में 97 दाल बीज केन्‍द्रों की स्‍थापना करना एवं दालों पर 1,11,150 प्रौद्योगिकी प्रदर्शन आयोजित करना (जिससे वर्ष 2016-17 में दालों का रिकॉर्ड उत्‍पादन संभव हो पाया), जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से कठिन माने जाने वाले विभिन्‍न क्षेत्रों में 151 जलवायु स्‍मार्ट गांवों की स्‍थापना कर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना एवं इनमें कमी करने संबंधी रणनीतियां क्रियान्वित करना, राज्‍य सरकारों द्वारा अपनाये जा रहे इच्छित नियुक्ति‍ केंद्र का एक सफल मॉडल विकसित करना, विशेषकर सोयाबीन के रोपण (मध्‍य प्रदेश में 3 मिलियन हेक्‍टेयर) के लिए कृषि के संरक्षण एवं शून्‍य जुताई, लेजर भूमि समतल एवं हैप्‍पी सीडर (पंजाब, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश एवं बिहार) सहित संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सुविधा प्रदान करना, मृदा के स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में किसानों को शिक्षित करने और मृदा परीक्षण प्रक्रिया में कृषि विद्यार्थियों को शामिल करने के लिए केवीके स्‍तर पर सामंजस्‍य प्‍लेटफॉर्म सृजित करना, ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ पहल के तहत अनुसंधान प्रणाली से 13500 गांवों को जोड़ना, ‘कृषि में युवाओं को आकर्षित करना एवं बनाये रखना (आर्य)’ शीर्षक वाले कार्यक्रम के तहत आर्थिक उद्यम शुरू करने के लिए 4400 युवाओं को सशक्‍त बनाना और ‘फार्मर फर्स्‍ट परियोजना’ के तहत सहभागितापूर्ण प्रौद्योगिकी अनुपालन प्रक्रिया में 20000 किसान परिवारों को जोड़ना शामिल हैं।

100 केवीके ने कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किया है तथा कौशल विकास मंत्रालय के सहयोग से 154 और केवीके को कौशल विकास से जोड़ा गया है। केवीके स्‍वदेशी ज्ञान और प्रथाओं को भी राष्‍ट्रीय मुख्‍य धारा में ला रहे हैं जिनमें राष्‍ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (एनएआरएस) के अनुसंधान कार्यक्रमों के तहत जनजातीय क्षेत्रों में उपलब्‍ध ज्ञान एवं प्रथाएं भी शामिल हैं। पिछली योजनावधि के दौरान विभिन्‍न कमजोरियों को दूर करने के लिए विशिष्‍ट खूबियों एवं क्षमताओं से युक्‍त 5500 जर्मप्‍लाज्‍म परिग्रहण की पहचान की गई और पौध किस्‍म एवं किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण में इनका पंजीकरण किया गया। इनका उपयोग नई किस्‍मों के विकास में किया जाएगा।

केवीके सहभागितापूर्ण अवधारणा के तहत जागरूकता पैदा करने में सबसे आगे हैं। 564 केवीके द्वारा हाल ही में आयोजित ‘संकल्‍प से सिद्धि’ कार्यक्रम में पांच लाख किसानों के साथ 49 केंद्रीय मंत्रियों, 284 सांसदों, राज्‍य सरकारों के 111 मंत्रियों, 300 विधायकों और बड़ी संख्‍या में सरकार के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की थी।

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