खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 21 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत-अफ्रीका फोरम सम्मेलन (आईएएफएस-III) की वचनबद्धताओं को क्रियान्वित करने के संबंध में अफ्रीका में मिशन स्थापित करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2018-2021 की चार वर्षीय अवधि के दौरान अफ्रीका में 18 नए भारतीय मिशनों की स्थापना को मंजूरी दी है।

अफ्रीका में बरकीना फासो, केमरून, केप वर्डे, शाड, कांगो गणतंत्र, जिबूती, इक्वेटोरियल गिनी, एरीट्रीया, गिनी, गिनी बिसाऊ, लाइबेरिया, मॉरीटानिया, रवांडा, साओ टोम एवं प्रिंसिपे, सियरा लियोन, सोमालिया, स्वाजीलैंड और टोगो में 18 नए भारतीय मिशन 2018-2021 की चार वर्षीय अवधि के दौरान खोले जाएंगे। इस तरह अफ्रीका में भारतीय मिशनों की संख्या 29 से बढ़कर 47 हो जाएगी।

इस फैसले से अफ्रीकी महाद्वीप में भारत की राजनयिक पहुँच बढ़ेगी और अफ्रीकी देशों में भारतीय प्रवासियों के साथ संपर्क करने में आसानी होगी। नए मिशनों को स्थापित करने के कदम से अफ्रीका के साथ सहयोग और संपर्क का उद्देश्य पूरा करने में सहायता होगी।


(●) मंत्रिमंडल ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भारत-विकास फाउंडेशन को बंद करने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने विदेशों में रहने वाले भारतीयों के भारत-विकास फाउंडेशन (आईडीएफ-ओआई) को बंद करने की मंजूरी दे दी है, ताकि राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन और स्‍वच्‍छ भारत मिशन जैसे सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों, के लिए प्रवासी भारतीयों के योगदान को दिशा देने के लिए तालमेल बढ़ाया जा सके।

• पृष्‍ठभूमि :

सरकार ने 2008 में मंत्रिमंडल की मंजूरी से आईडीएफ-ओआई की स्‍थापना एक स्‍वायत्‍तशासी गैर-लाभकारी न्‍यास के रूप में की थी, ताकि भारत की सामाजिक और विकास परियोजनाओं में प्रवासी भारतीयों के स्‍वेच्‍छा से योगदान को सरल बनाया जा सके।

चूंकि विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय से दान के रूप में फाउंडेशन को दिसंबर 2008 से मार्च 2015 के बीच केवल 36.80 लाख रूपए प्राप्‍त हुए थे, आईडीएफ-ओआई की 2015 में एक विस्‍तृत समीक्षा की गई। सरकार के राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन और स्‍वच्‍छ भारत मिशन जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को बढ़ावा देने; और राज्‍य सरकारों द्वारा पहचानी गई सामाजिक और विकास परियोजनाओं को आईवीएफ-ओआई के आदेश पत्र में शामिल कर लिया गया।

हालांकि अप्रैल 2015 और मार्च 2018 के बीच न्‍यास को 10.16 करोड़ रूपए प्राप्‍त हुए, इनमें से प्राप्‍त अधिकांश राशि राष्‍ट्रीय स्‍वच्‍छ गंगा मिशन अथवा स्‍वच्‍छ भारत मिशन से जुड़ी थी, जिनका प्रबंध उनकी संबंध एजेंसियों द्वारा अलग-अलग किया जा रहा था। तालमेल बढ़ाने, क्षमता में सुधार लाने और काम का दोहरीकरण रोकने के लिए आईडीएफ-ओआई के न्‍यास बोर्ड की 9वीं बैठक में न्‍यास को 31 मार्च, 2018 को बंद करने का फैसला किया गया।


(●) मंत्रिमंडल ने दोहरे कराधान से बचने और आय पर कर के संबंध में वित्‍तीय वंचना की रोकथाम के लिए भारत और कतर के बीच समझौते में संशोधन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने दोहरे कराधान से बचने और आय पर कर के संबंध में वित्‍तीय वंचना की रोकथाम के लिए भारत और कतर के बीच समझौते में संशोधन को मंजूरी दे दी है।

कतर के साथ वर्तमान दोहरे कराधानवंचना समझौते (डीटीएए) पर 7 अप्रैल 1999 को हस्‍ताक्षर किए गए थे और यह 15 जनवरी 2000 को अमल में आया। संशोधित समझौते में नवीनतम मानक की सूचना के आदान-प्रदान के लिए प्रावधानों में सुधार की व्‍यवस्‍था है। इसमें लाभ के सीमांकन का प्रावधान है ताकि ट्रीटी शॉपिंग को रोका जा सके और भारत के साथ हाल ही में हुई संधियों के प्रावधानों को शामिल किया जा सके। संशोधित समझौता एक्‍शन 6 और जी-20 ओईसीडी आधारित क्षरण और लाभ परिवर्तन (बीईपीएस) परियोजना के एक्‍शन-14 के अन्‍तर्गत आपसी समझौते की प्रक्रिया के अन्‍तर्गत संधि के दुरूपयोग के बारे में न्‍यूनतम मानकों को पूरा करता है, जिसमें भारत बराबरी का भागीदार है।


(●) मंत्रिमंडल ने पूर्वोत्‍तर औद्योगिक विकास योजना (एनईआईडीएस) 2017 को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2020 तक 3000 करोड़ रुपये के वित्‍तीय आवंटन के साथ पूर्वोत्‍तर विकास योजना (एनईआईडीएस), 2017 को स्‍वीकृति दे दी है। सरकार मार्च 2020 से पहले मूल्‍यांकन के बाद शेष अवधि के लिए आवश्‍यक आवंटन उपलब्‍ध कराएगी। एनईआईडीएस अधिक आवंटन के साथ पहले की दो योजनाओं के अंतर्गत कवर किए गये प्रोत्‍साहनों का समुच्‍चय है।

• विवरण : सरकार पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में रोजगार को प्रोत्‍साहित करने के लिए इस योजना के जरिये मुख्‍य रूप से एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्‍साहन दे रही है। सरकार रोजगार सृजन के लिए इस योजना के माध्‍यम से विशिष्‍ट प्रोत्‍साहन दे रही है।

सभी पात्र औद्योगिक इकाईयां जो भारत सरकार की अन्‍य योजनाओं के एक या उससे अधिक घटकों का लाभ ले रही हैं उनके लिए भी इस योजना के अन्‍य घटकों के लाभ के लिए विचार किया जाएगा। योजना के अंतर्गत सिक्‍कम सहित पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में स्‍थापित नई औद्योगिक इकाइयों को निम्‍नलिखित प्रोत्‍साहन उपलब्‍ध कराये जाएंगे :

ऋण तक प्रवेश के लिए केन्‍द्रीय पूंजी निवेश प्रोत्‍साहन (सीसीआईआईएसी)
प्रति इकाई प्रोत्‍साहन राशि पर 5 करोड़ रुपये की ऊपरी सीमा के साथ प्‍लांट और मनीशरी में निवेश का 30 प्रतिशत

केन्‍द्रीय ब्‍याज प्रोत्‍साहन (सीआईआई)
इकाई द्वारा वाणिज्यिक उत्‍पादन प्रारंभ करने की तिथि से पहले पांच वर्षों के लिए पात्र बैंकों/वित्‍तीय संस्‍थानों द्वारा दिये गये कार्य पूंजी ऋण पर 3 प्रतिशत

केन्‍द्रीय व्‍यापक बीमा प्रोत्‍साहन (सीसीआईआई)
इकाई द्वारा वाणिज्यिक उत्‍पादन प्रारंभ करने की तिथि से पांच वर्षों के लिए भवन तथा प्‍लांट और मशीनरी की बीमा पर 100 प्रतिशत बीमा प्रीमियम की अदायगी

वस्‍तु औरसेवाकर (जीएसटी) अदायगी
इकाई द्वारा वाणिज्यिक उत्‍पादन प्रारंभ करने की तिथि से पांच वर्षों के लिए सीजीएसटी तथा आईजीएसटी के केन्‍द्र सरकार के हिस्‍से तक अदायगी।

आयकर (आईटी) अदायगी
इकाई द्वारा वाणिज्यिक उत्‍पादन प्रारंभ करने के वर्ष सहित पहले पांच वर्षों के लिए आयकर के केद्रींय हिस्‍से की अदायगी

परिवहन प्रोत्‍साहन (टीआई)
तैयार उत्‍पादों को लाने-लेजाने के लिए रेलवे/रेलवे के सार्वजनिक प्रातिष्‍ठानोंद्वारा उपलब्‍ध करायी गई वर्तमान सब्सिडी सहित परिवहन लागत का 20 प्रतिशत
भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के माध्‍यम से तैयार सामानों की आवाजाही के लिए परिवहन लागत का 20 प्रतिशत
देश के किसी भी हवाई अड्डे के निकट के उत्‍पादन स्‍थल से विमान से भेजे जाने वाले नष्‍ट होने वाले सामानों (आईएटीए द्वारा परिभाषित रूप में) की परिवहन लागत का 33 प्रतिशत

रोजगार प्रोत्‍साहन (ईआई)
सरकार कर्मचारी भविष्‍य निधि (ईपीएफ) में नियोक्‍ता के अभिदान का 3.67 प्रतिशत का भुगतान करेगी, जो प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्‍साहन योजना (पीएमआरपीवाई) में कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में सरकार द्वारा वहन किए जाने वाले नियोक्‍ता के 8.33 प्रतिशत अभिदान के अतिरिक्‍त है।

प्रोत्‍साहन के सभी घटकों के अंतर्गत लाभ की समग्र सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी।

नई योजना पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में औद्योगिकीकरण को प्रोत्‍साहित करेगी और रोजगार तथा आय सृजन को बढ़ावा देगी।


(●) मंत्रिमंडल ने रेशम उत्‍पादन क्षेत्र के लिए केन्‍द्रीय क्षेत्र की ‘समेकित सिल्‍क विकास योजना’’ को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 2017-18 से 2019-20 तक अगले तीन वर्षों के लिए केन्‍द्रीय क्षेत्र की ‘समेकितसिल्‍क उद्योग विकास योजना’’ को मंजूरी दे दी है।

इस योजना के चार भाग हैं –

1. अनुसंधान और विकास, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी का हस्‍तांतरण और सूचना प्रौद्योगिकी पहल।
2. अंडा संरचना और किसान विस्‍तार केंद्र।
3. बीज, धागे और रेशम उत्‍पादों के लिए समन्‍वय और बाजार विकास।
4. रेशम परीक्षण सुविधाओं, खेत आधारित और कच्‍चे रेशम के कोवे के बाद टेक्‍नोलॉजी उन्‍नयन और निर्यात ब्रांड का संवर्द्धन करने की श्रृंखला के अलावा गुणवत्‍ता प्रमाणन प्रणाली।

वित्‍तीय व्‍यय : वर्ष 2017-18 से 2019-20 के तीन वर्षों में योजना के कार्यान्‍वयन के लिए 2161.68 करोड़ रूपए के कुल आवंटन की मंजूरी दी गई है। मंत्रालय केन्‍द्रीय रेशम बोर्ड के जरिए योजना को लागू करेगा।

प्रभाव : इस योजना से रेशम का उत्‍पादन निम्‍नलिखित प्रक्रियाओं के साथ 2016-17 के दौरान 30348 मीट्रिक टन के स्‍तर से बढ़कर 2019-20 की समाप्ति तक 38500 मीट्रिक टन होने की उम्‍मीद है :

वर्ष 2020 तक आयात के विकल्‍प के रूप में प्रतिवर्ष 8,500 मीट्रिक टन बाइवोल्टाइन रेशम का उत्‍पादन।
वर्ष 2019-20 की समाप्ति तक रेशम का उत्‍पादन वर्तमान 100 किलोग्राम प्रति हेक्‍टेयर के स्‍तर से 111 किलोग्राम के स्‍तर तक लाने के लिए अनुसंधान और विकास।
बाजार की मांग को पूरा करने के लिए गुणवत्‍तापूर्ण रेशम के उत्‍पादन संबंधी मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अर्न्‍तगत उन्‍नत रीलिंग मशीनों (शहतूत के लिए स्‍वचालित रीलिंग मशीन; बेहतर रीलिंग / कताई मशीनरी और वन्‍य रेशम के लिए बुनियाद रीलिंग मशीनें) का बड़े पैमाने पर प्रसार।
इस योजना से महिला अधिकारिता को बढ़ावा मिलेगा और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति तथा समाज के अन्‍य कमजोर वर्गों को आजीविका के अवसर मिलेंगे। इस योजना से 2020 तक 85 लाख से 1 करोड़ लोगों के लिए लाभकर रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पूर्व की योजना के मुकाबले सुधार :

इस योजना में पूर्व की योजना के मुकाबले निम्‍नलिखित सुधार किए गए है :

इस योजना का उद्देश्‍य 2022 तक रेशम उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भरता हासिल करना है। इस लक्ष्‍य को हासिल करने पर, वर्ष 2022 तक भारत में उच्‍च कोटि के रेशम का उत्‍पादन 20,650 मीट्रिक टन तक पहुंच जाएगा, जो वर्तमान में 11,326 मीट्रिक टन है। इससे आयात घटकर शून्‍य हो जाएगा।
पहली बार उच्‍च श्रेणी की गुणवत्‍ता वाले रेशम के उत्‍पादन में सुधार पर स्‍पष्‍ट रूप से ध्‍यान दिया गया है। प्रस्‍ताव रखा गया है कि 2020 तक 4ए ग्रेड के रेशम का उत्‍पादन शहतूत के उत्‍पादन का वर्तमान 15 प्रतिशत के स्‍तर से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाए।
कार्यान्‍वयन की रणनीति रेशम उत्‍पादकों को अधिकतम लाभ देने के लिए स्‍पष्‍ट रूप से ग्रामीण विकास की मनरेगा, आरकेवीवाईऔर कृषि मंत्रालय की पीएमकेएसवाई जैसी अन्‍य मंत्रालयों की योजनाओंके साथ राज्‍य स्‍तर की योजनाओं के मिलन पर आधारित है।
बीमारी प्रतिरोधी रेशम के कीड़े, जीवधारी पौध में सुधार, उत्‍पादकता बढ़ाने संबंधी साधनों और रीलिंग और कताई के लिए सामग्री आदि से जुड़ी अनुसंधान और विकास परियोजनाओं का कार्य मंत्रालयों यानि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि और मानव संसाधन विकास मंत्रालयों के स‍हयोग से किया जाएगा।

विवरण : योजना का प्रमुख उद्देश्‍य अनुसंधान और विकास के जरिए रेशम की उत्‍पादकता और गुणवत्‍ता में सुधार लाना है। अनुसंधान और विकास का मुख्‍य जोर उन्‍नत क्रॉसब्रीड रेशम और आयात के विकल्‍प के रूप में बाइवोल्‍टाइन रेशम को बढ़ावा देना है ताकि भारत में बाइवोल्‍टाइन रेशम का उत्‍पादन इस स्‍तर तक बढ़ाया जा सके कि 2022 तक कच्‍चे रेशम का आयात नगण्‍य हो जाए और भारत रेशम उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर हो।

अनुसंधान और विकास में उन्‍नत जीवधारी पौध की किस्‍मों के विकास के जरिए प्रजाति में सुधार और प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय अनुसंधान संगठनों जैसे आईआईटी, सीएसआईआर, भारतीय विज्ञान संस्‍थान और जापान, चीन, बल्‍गारिया आदि में रेशम उत्‍पादन के अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थानों के साथ मिलकर अनुसंधान के जरिए बीमारी प्रतिरोधी रेशम कीट पालन में सुधार; कच्‍चे रेशम के कोवे से पूर्व और कोवे के बाद के क्षेत्रों में तकनीकी सुधार शामिल है। तकनीकी सुधार और सस्‍ते मशीनीकरण पर विशेष रूप से ध्‍यान दिया जाएगा। कुक्‍कुटों के भोजन के लिए रेशम के कीड़ों के उप-उत्‍पादों (प्‍यूपा), कॉस्‍मेटिक में इस्‍तेमाल के लिए सेरिसिनऔर बिना बुने वस्‍त्रों, रेशम डेनिम, रेशम निट आदि के विविधिकरण पर वर्धित मूल्‍य वसूली के लिए विशेष ध्‍यान दिया जाएगा।

अंडा क्षेत्र के अंतर्गत अंडा उत्‍पादन इकाइयों को मजबूत बनाया जाएगा ताकि बढ़े हुए रेशम उत्‍पादन के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए उत्‍पादन क्षमता को बढ़ाने के अलावा उत्‍पादन नेटवर्क में गुणवत्‍तापूर्ण मानकों को स्‍थापित किया जा सके। गुणवत्‍तापूर्ण अंडा ककूनों के उत्‍पादन के लिए चौकी कीटों के उत्‍पादन और आपूर्ति के लिए इनक्‍यूबेशन की सुविधाओं के साथ चौकी रियरिंग केंद्रों और गुणवत्‍तापूर्ण अंडों के लिए निजी ग्रेनियरों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। अन्‍य प्रयासों में नए शीत-भंडारण स्‍थापित करना, मोबाइल डिसइंफेक्‍शन इकाइयां प्रदान करना और मशीनीकरण के लिए उपकरण सहायता शामिल है।

सीड कानून के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया और अंडा उत्‍पादन केंद्रों द्वारा रिपोर्टिंग, मूलभूत सीड फार्म, विस्‍तार केंद्रों को वेब आधारित सॉफ्टवेयर विकसित कर स्‍वचालित बनाया जाएगा। योजना के अंतर्गत सभी लाभान्वितों रेशम पालकों, सीड उत्‍पादकों चौकी रियररों को आधार से जोड़कर डीबीटी मोड में लाया जाएगा। शिकायतों के समय पर निवारण और सभी पहुंच कार्यक्रमों के लिए एक हेल्‍पलाइन स्‍थापित की जाएगी।

भारतीय रेशम के ब्रान्‍ड प्रमोशन को सिल्‍क मार्क द्वारा गुणवत्‍ता प्रमाणपत्र के जरिए न केवल घरेलू बाजार में बल्कि निर्यात बाजार में भी प्रोत्‍साहित किया जाएगा। रेशम के कीड़ों के अंडे, ककून और कच्‍चे रेशम को ककून परीक्षण केंद्र और रेशम परीक्षण केंद्रों की स्‍थापना कर बढ़ावा दिया जाएगा। उत्‍पाद और डिजाइन विकसित करने के लिए निफ्ट और एनआईडी के साथ सहयोग को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे है।


(●) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अमेरिका में टेलिकम्‍यूनिकेशन्‍स कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) के शत-प्रतिशत मालिकाना हक वाले सी- कॉरपोरेशन के गठन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अमेरिका में टेलिकम्‍यूनिकेशन्‍स कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) के शत-प्रतिशत मालिकाना हक वाले सी-कॉरपोरेशन के गठन को मंजूरी दी है। इसका ब्यौरा इस प्रकार है:-

• अमेरिका के टेक्सास राज्य में टेलिकम्‍यूनिकेशन्‍स कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) के सी-कॉरपोरेशन का गठन किया जाएगा, जिसे अमेरिका के अन्य राज्यों में व्यापार करने के लिए पंजीकरण करने का अधिकार प्राप्त होगा।

• सी-कॉरपोरेशन में टीसीआईएल का 100 प्रतिशत प्रतिभूति निवेश पांच मिलियन अमेरिकी डालर के बराबर होगा। यह धनराशि भारतीय मुद्रा में विदेशी मुद्रा विनिमय दर 67.68 रूपए के आधार पर कुल 33.84 करोड़ रूपए होगी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

• टीसीआईएल की काउंटर गारंटी पांच मिलियन अमेरिकी डालर के बराबर होगी जो ऋण/सुविधा/विक्रेता सहित बोली संबंधी बॉण्ड/अग्रिम/कामकाजी गारंटी इत्यादि के संबंध में है। अमेरिका में परियोजनाओं के संचालन के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक होती है।

सी-कॉरपोरेशन देश के लिए बहुमूल्य विदेशी मुद्रा अर्जन करेगा और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम टीसीआईएल के लाभ में बढ़ोत्तरी करेगा।

अमेरिका में परियोजनाओं के संचालन के संबंध में सी-कॉरपोरेशन का गठन अमेरिका के टेक्सास राज्य में किया गया है।

नव स्थापित सी-कॉरपोरेशन एक आंकलन के अनुसार आरंभिक वर्षों में लगभग 10 प्रतिशत लाभ कमाएगा और उसका कारोबार 10 मिलियन अमेरिकी डालर होगा। काम के परिमाण के अनुसार उसका कारोबार बढ़ने की संभावना है।

अमेरिका में सी-कॉरपोरेशन के गठन से टीसीआईएल को अपना व्यापार/कारोबार/लाभ का विस्तार करने में सहायता होगी तथा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम होने के नाते सरकार को अधिक लाभांश प्राप्त होगा।

टीसीआईएल अपने अंदरूनी संसाधनों से प्रतिभूति के रूप में कुल पांच मिलियन अमेरिकी डालर का निवेश करेगा। इसके अलावा अमेरिका में व्यापार का विस्तार करने तथा बोली बॉण्ड/अग्रिम भुगतान गारंटी/सरकारी प्राधिकार को कारोबार बैंक गारंटी सुनिश्चित करने के लिए लगभग पांच मिलियन अमेरिकी डालर की काउंटर गारंटी सी-कॉरपोरेशन की तरफ से देनी होगी। इस समय सरकार के ऊपर कोई वित्तीय उत्तरदायित्व नहीं है।

पृष्ठभूमि:- टीसीआईएल एक अग्रणी आईएसओ- 9001: 2008 और आईएसओ 14001: 2004 प्रमाणित, अनुसूची- ए, मिनी रत्न वर्ग-1, 100 प्रतिशत स्वामित्व वाला सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। इसने दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 70 से अधिक देशो में परियोजनाएं चलाई हैं। यह कंपनी दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी और असैन्य संरचना के क्षेत्र में परामर्श प्रदान करती है तथा अवधारणा से पूरा होने तक परियोजना सेवाएं मुहैया कराती है।

कंपनी की समेकित पूंजी 31-03-2017 को 2433.66 करोड़ रूपए थी। कंपनी की अपनी पूंजी 588.92 करोड़ रूपए थी। कंपनी ने 31-03-2017 तक सरकार को कुल 192.99 करोड़ रूपए का लाभांश प्रदान/घोषित किया है।

अमेरिका में उच्च क्षमता ब्रॉडबैंड इंटरनेट और हर शहर में केबल टेलिविजन उपलब्ध कराने के लिए ‘गूगल फाइबर’ कार्यरत है, जो गूगल की ‘फाइबर-टू-दी-प्रेमाइसेस प्रोजेक्ट’ है। मेसर्स गूगल ने अपने तकनीकी साझेदार के तौर पर कुछ अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को चुना है। इनमें मेसर्स एरिक्सन, मेसर्स मास्टेक, मेसर्स एटी एंड टी, मेसर्स जोया इत्यादि शामिल हैं। इन कंपनियों ने विभिन्न गतिविधियों के लिए कई अन्य कंपनियों को आगे ठेके दे दिए हैं। मेसर्स टेलीटेक ऐसी ही एक कंपनी है जिसने ऑस्टिन (टेक्सास) और सैन होसे (कैलिफोर्निया) में नेटवर्क लगाने के लिए मेसर्स मास्टेक ओर मेसर्स एरिक्सन के साथ सेवा समझौता किया है। मेसर्स टेलीटेक ने तीन परियोजनाओं के तकनीकी- वाणिज्यिक तथा साजोसामान मुहैया कराने के लिए टीसीआईएल से संपर्क किया है। मेसर्स टेलीटेक ने 13-04-2016 को टीसीआईएल के साथ एक समझौता- ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद 27-05-2016 को एक संयुक्त सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए। विदेशी कंपनी होने के नाते टीसीआईएल को सी-कारपोरेशन का गठन करना आवश्यक है, जिसे एक अलग करदाता कंपनी के रूप में मान्य किया जा सके। इस कदम से श्रमशक्ति संसाधन उपलब्ध कराने के लिए टीसीआईएल को एल-1 वीजा प्राप्त करने में सहायता होगी।


(●) मंत्रिमंडल ने 25 प्रतिशत न्‍यूनतम शेयर धारक आवश्‍यकता को प्राप्‍त करने के लिए मैसर्स आईटीआई लिमिटेड को पब्लिक इश्‍यू निकालने की अनुमति दी, जो सेबी की शर्तों के अनुरूप हो और नई परियोजनाओं तथा देनदारियों में कमी लाने के लिए कार्यशील पूंजी को बढ़ाने की अनुमति दे

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने मेसर्स आईटीआई लिमिटेड को इजाजत देने के लिए दूरसंचार विभाग के निम्‍नलिखित प्रस्‍ताव को अपनी मंजूरी दे दी है :

नई परियोजनाओं के लिए कार्यशील पूंजी जुटाने, ऋण दायित्‍वों को कम करने और सार्वजनिक हिस्‍सेदारी हासिल करने के लिए सेबी की न्‍यूनतम 25 प्रतिशत की जरूरत को पूरा करने के लिएसेबी के नियमों और शर्तों के अनुसार घरेलू बाजार में एक और पब्लिक इश्‍यू (एफपीओ) आधारित संभावनाओं के जरिए आम जनता के लिए 18 करोड़ के ताजा इक्विटी शेयरों की पेशकश
डीपीई के दिशा निर्देशों और आईसीडीआर नियम 42 के अनुसार आईटीआई के कर्मचारियों को एफपीओ दिया जाएगा, जो ताजा शेयरों में उससे अधिक 5 प्रतिशत रिजर्व होंगे।
आईसीडीआर नियम 29 के अनुसार खुदरा निवेशकों के साथ-साथ कर्मचारियों को 5 प्रतिशत तक छूट की पेशकश।
कंपनी को सलाह देने और प्रस्‍तावित लेन-देन में सहायता के लिए सलाहकार (सलाहकारों) का चयन और नियुक्ति।
इश्‍यू के दौरान शेयरों के लिए निवेशकों की मांग को दर्ज करने के लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति और मर्चेंट बैंकरों की सहायता से सेबी के नियमों और शर्तों के अनुसार प्रक्रियाओं का पालन।

लाभान्वितों की संख्‍या :

एफपीओ कंपनी को आवश्‍यक कार्यशील पूंजी प्रदान करेगा और उसे आदेशों को समय पर अमल में लाने में मदद मिलेगी, बदले में वर्तमान रोजगार को बचाने और खासतौर से नई दूरसंचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कंपनी में रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।

कार्यान्‍वयन रणनीति और लक्ष्‍य :

मैसर्स आईटीआई लिमिटेड सेबी की न्‍यूनतम सार्वजनिक हिस्‍सेदारी की जरूरत को पूरा करने के लिए सेबी के नियमों और शर्तों के अनुसार घरेलू बाजार में एफपीओ के जरिए आम जनता के लिए ताजा इक्‍विटी शेयरों की आवश्‍यक संख्‍या की पेशकश करेगी।

प्रमुख प्रभाव :

मैसर्स आईटीआई लिमिटेड सेबी की न्‍यूनतम सार्वजनिक हिस्‍सेदारी जरूरत को पूरा कर सकेगी और अपनी कार्यशील पूंजी में सुधार ला सकेगी।

पृ‍ष्‍ठभूमि :

मैसर्स आईटीआई लिमिटेड दूरसंचार विभाग के संचार मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत केन्‍द्रीय सार्वजनिक उद्यम सूचीबद्ध अनुसूची ‘’ए’’ है। कंपनी रक्षा संचार और नेटवर्क जरूरतों की आपूर्ति करता है और भारतीय सेना के एनक्रिप्‍शन उत्‍पादों की एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इसके प्रमुख ग्राहक बीएसएनएल, एमटीएनएल, रक्षा, अर्धसैनिक बल और राज्‍य सरकारें हैं। आईटीआई की बंगलूरू (कर्नाटक), रायबरेली, नैनी और मनकापुर (सभी उत्‍तर प्रदेश में), पलक्‍कड़ (केरल)और श्रीनगर (जम्‍मू कश्‍मीर) में छह निर्माण इकाइयां है।

कंपनी की निर्गमित और अभिदत्‍त इक्‍विटी पूंजी 31.12.2017 को 760 करोड़ रूपए (अंकित मूल्‍य प्रत्‍येक दस रूपये के इक्विटी शेयर का 76 करोड़) है, जिसमें 92.59 प्रतिशत इक्विटी यानि 70,36,87500 शेयर सरकार के हैं।

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