डाक टिकट संग्रह राजस्‍व वृद्धि का एक अच्‍छा स्रोत हो सकता है : मनोज सिन्‍हा



नई दिल्ली, 21 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

केन्‍द्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्‍हा ने डाक विभाग से आग्रह करते हुए कहा कि विभाग को डाक टिकट संग्रह के क्षेत्र में राजस्‍व वृद्धि के अवसरों की तलाश करनी चाहिए। विश्‍व के अनेक देशों में यह प्र‍चलित है। उन्होंने उक्‍त बातें 20 मार्च को एक पुरस्‍कार समारोह के पश्‍चात अपने संबोधन में कहीं। यह समारोह दीनदयाल स्‍पर्श (डाक टिकट को एक पसंदीदा कार्य के रूप में प्रोत्‍साहन देने के लिए छात्रवृत्ति) योजना 2017-18 के पहले संस्‍करण के विजेताओं को पुरस्‍कार देने के लिए आयोजित किया गया था। मनोज सिन्‍हा ने दिल्‍ली क्षेत्र से चयनित 40 छात्रों को पुरस्‍कार प्रदान किया। पूरे भारत के 22 क्षेत्रों से कुल 880 छात्रों को विजेता घोषित किया गया है। इन छात्रों ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए मनोज सिन्‍हा से बातचीत की। इस प्रतियोगिता में 20,000 छात्रों ने भाग लिया था। श्री सिन्हा ने डाक विभाग से अगले प्रतियोगिता के लिए एक लाख छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर सौर ऊर्जा प्रणाली पर आधारित एक स्‍मारक डाक टिकट तथा विख्‍यात वैज्ञानिक स्‍टीफन हॉकिंग पर आधारित एक विशेष कवर भी जारी किया गया। डाक विभाग और सीसीआईसी के बीच तथा डाक विभाग और डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूएफ के बीच दो सहमति पत्रों पर भी हस्‍ताक्षर किए गए।

डाक टिकट संग्रह के अंतर्गत डाक टिकटों का अध्‍ययन और संग्रह किया जाता है। इसमें टिकट तलाश करना, प्राप्‍त करना, सूचीबद्ध करना, भंडारण आदि कार्य शामिल होते हैं। डाक टिकट संग्रह को पसंदीदा कार्यों का राजा कहा जाता है क्‍योंकि इसके कई शैक्षिक लाभ हैं। यह सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक वास्‍तविकता को दर्शाता है। डाक टिकट संग्रह की पहुंच बढ़ाने के लिए डाक विभाग ने 3 नवम्‍बर, 2017 को स्‍कूली बच्‍चों के लिए दीनदयाल स्‍पर्श छात्रवृत्ति‍ कार्यक्रम का शुभारंभ किया था। इस योजना के तहत छठी कक्षा से नवी कक्षा के छात्रों को वार्षिक छात्रवृत्ति पुरस्‍कार दिया जाता है। 2017-18 में 20,000 छात्रों ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया। इनमें से 880 छात्रों को अंतिम रूप से चयन किया गया। चयनित छात्र को 500 रुपये प्रति महीने के दर से 6,000 रुपये छात्रवृत्ति के रूप में दिए जाते हैं। छठी, सातवीं, आठवीं और नौवीं कक्षा से कुल 40 छात्रों (प्रति कक्षा 10) का चयन किया जाता है।

स्‍टीफन हॉकिंग (8 जनवरी, 1942- 14 मार्च, 2018) को इतिहास के सबसे विख्‍यात भौतिक वैज्ञानिकों में एक माना जाता है। ब्रह्माण्‍ड का जन्‍म तथा संरचना, बिग बैंग सिद्धांत तथा ब्‍लैक हॉल के संबंध में किए गए उनके कार्य अतुलनीय है। हॉकिंग रेडिएसन ने विषय वस्‍तु से संबंधित हमारी समझ को बेहतर किया है। डाक विभाग ने उनके सम्‍मान में एक विशेष कवर जारी किया है। सौर प्रणाली पर आधारित आठ स्‍मारक डाक टिकटें जारी की गई। सौर मंडल के आठों ग्रहों को इसमें शामिल कि‍या गया है।

डाक विभाग और केन्‍द्रीय गृह उद्योग इंपोरियम (सीसीआईसी) ने एक सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किए हैं। सीसीआईसी डाक टिकट से संबंधित सहायक सामग्री का विकास करेगा। ख्‍याति प्राप्‍त कलाकार डाक टिकट से संबंधित उत्‍पादों का निर्माण करेंगे। डाक टिकट के संदर्भ में पिछले 150 वर्षों के समृद्धि विरासत को बौद्धिक सम्‍पदा के रूप में विकसित किया जाएगा।

डाक विभाग और विश्‍व व्‍यापी कोष (डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूएफ) ने एक सहमति पत्र पर हस्‍ताक्षर किए हैं। इसके अंतर्गत हमारी प्राकृतिक विरासत के संरक्षण विषय पर डाक टिकट संबंधी सहायक सामग्री विकसित की जाएगी। इस साझेदारी द्वारा डाक टिकट सामग्री के माध्‍यम से पर्यावरण और वन्‍य जीव के संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन का सामना करने के प्रति लोगों को जागरूक बनाया जाएगा।


(●) भारतीय डाक सेवा और भारतीय कॉरपोरेट विधि सेवा के परीविक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

भारतीय डाक सेवा और भारतीय कॉरपोरेट विधि सेवा के परीविक्षा अधिकारियों के अलग-अलग समूहों ने (20 मार्च, 2018) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की।

इस अवसर पर बोलते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों सेवाओं की भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। डाकघर ऐसे दूरदराज स्थानों पर भी स्थित हैं जहां अभी तक बैंक नहीं पहुंचे हैं। संचार के इस युग में डाकघरों और डाक नेटवर्क प्रणाली की पुनः संरचना करने की आवश्यकता है। भारत सरकार ने डाकघरों को आधुनिक बैंक संबंधी कार्यों और भुगतान प्रणालियों के साथ जोड़ने की कई पहल की हैं। कुछ विकसित देशों की तरह भारत में भी डाकघर महत्वपूर्ण 'वन स्टॉप शॉप्स' बन सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि कॉरपोरेट और बैंकिंग प्रणाली किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय कॉरपोरेट विधि सेवा के अधिकारियों की कंपनियों और व्यवसायों की स्थापना और चलाने की प्रक्रिया को सरल बनाने की जिम्मेदारी है। यह उनका संवैधानिक दायित्व है कि वे प्रत्येक कंपनी को भरोसेमंद बनाए और जनता की उसमें विश्वसनीयता कायम करने में मदद करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का वर्तमान सकल घरेलू उत्पाद लगभग 20.3 खरब (2.3 ट्रिलियन) अमरीकी डॉलर है। हमने 2025 तक 50 खरब अमरीकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इस प्रक्रिया में भारतीय कॉरपोरेट विधि सेवा के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। व्यापार को सुविधाजनक बनाते समय, उन्हें कॉर्पोरेट क्षेत्र में वैध और नैतिक आचरण की आवश्यकता को भी ध्यान में रखना होगा।

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