खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी



नई दिल्ली, 01 मार्च 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) मंत्रिमंडल ने भगौड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, 2018 को मंजूरी दी - विधेयक के अंतर्गत 100 करोड़ रुपए अथवा अधिक मूल्‍य के भगौड़ा आर्थिक अपराधियों की संपत्‍ति जब्‍त की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल ने संसद में भगौड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, 2018 को रखने के वित्‍त मंत्रालय के प्रस्‍ताव को अनुमति प्रदान कर दी है। इस विधेयक में भारतीय न्‍यायालयों के कार्यक्षेत्र से बाहर रहकर भारतीय कानूनी प्रक्रिया से बचने वाले आर्थिक अपराधियों की प्रवृत्‍ति को रोकने के लिए कड़े उपाय करने में मदद मिलेगी।

ऐसे अपराधों में कुल 100 करोड़ रुपए अथवा अधिक मूल्‍य के ऐसे अपराध इस विधेयक के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आएंगे।

● प्रभाव: इस विधेयक से भगौड़ा आर्थिक अपराधियों के संबंध में कानून के राज की पुनर्स्‍थापना होने की संभावना है क्‍योंकि इससे उन्‍हें भारत वापस आने के लिए बाध्‍य किया जाएगा और वे सूचीबद्ध अपराधों का कानूनी सामना करने के लिए बाध्‍य होंगे। इससे ऐसे भगौड़ा आर्थिक अपराधियों द्वारा की गई वित्‍तीय चूकों में अंतर्विष्‍ट रकम की उच्‍चतर वसूल करने में बैकों व अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थओं को भी मदद मिलेगी और ऐसी संस्‍थाओं की वित्तीय स्‍थिति में सुधार होगा।

यह आशा की जाती है कि भगौड़े अपराधियों द्वारा भारत और विदेशों में उनकी संपत्‍तियों को तेजी से जब्‍त करने के लिए उन्‍हें भारत लौटने और सूचीबद्ध अपराधों के संबंध में कानून का सामना करने के लिए भारतीय न्‍यायालयों के समक्ष पक्ष रखने के लिए एक विशेष तंत्र का सृजन हो सकेगा।

● विधेयक की मुख्‍य-मुख्‍य बातें:

किसी व्‍यक्‍ति के भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित होने पर विशेष न्‍यायालय के समक्ष आवेदन करना

अपराध के जरिए भगौड़ा आर्थिक के रूप में घोषित व्‍यक्‍ति की संपत्‍ति को जब्‍त करना

भगौड़ा आर्थिक अपराधी होने के आरोपित व्‍यक्‍ति को विशेष न्‍यायालय द्वारा नोटिस जारी करना

अपराध के फलस्‍वरूप व्‍युतपन्‍न संपत्‍ति के चलते भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए गए व्‍यक्‍ति की संपत्‍ति को जब्‍त करना

ऐसे अपराधी की बेनामी संपत्‍ति सहित भारत और विदेशों में अन्‍य संपत्‍ति को जब्‍त करना

भगौड़े आर्थिक अपराधी को किसी सिविल दावे का बचाव करने से अपात्र बनाना, और

अधिनियम के अंतर्गत जब्‍त की गई संपत्‍ति के प्रबंधन व निपटान के लिए एक प्रशासन की नियुक्‍ति की जाएगी।

तथापि, ऐसे मामले में जहां किसी व्‍यक्‍ति के भगौड़ा घोषित होने के पूर्व किसी भी समय कार्यवाही की प्रक्रिया के समानांतर भगौड़ा आर्थिक अपराधी भारत लौट आता है और सक्षम न्‍यायालय के समक्ष पेश होता है, तो उस स्‍थिति में प्रस्‍तावित अधिनियम के अंतर्गत कनूनन कार्यवाही रोक दी जाएगी। सभी आवश्‍यक संवैधानिक रक्षा उपाय जैसे अधिवक्‍ता के माध्यम से व्‍यक्‍ति को सुनवाई का अवसर, उत्‍तर दाखिल करने के लिए समय प्रदान करना, उसे भारत अथवा विदेश में समन भिजवाना तथा उच्‍च न्‍यायालय में अपील करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा, कानूनी प्रावधानों के अनुपालन में संपत्‍ति के प्रबंधन व निपटान के लिए प्रशासन की नियुक्‍ति का भी प्रावधान किया गया है।

● नीति का क्रियान्‍वयन व लक्ष्‍य: वर्तमान कानूनों में व्‍याप्‍त कमियों के परिहार व भारतीय न्‍यायलों के कार्यक्षेत्र से बाहर रहकर भारतीय कानूनों की प्रक्रिया से बचने वाले आर्थिक अपराधियों की प्रवृत्‍ति के निरोधात्‍मक तय करने के दृष्‍टिगत, यह विधेयक प्रस्‍तावित किया जा रहा है। इस विधेयक में किसी व्‍यक्‍ति को भगौड़ा आर्थिक अपराधी के रूप में घोष्‍ज्ञित करने के लिए इस विधेयक में एक न्‍यायालय (धन-शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 के अंतर्गत विशेष न्‍यायालय) का प्रावधान किया गया है। भगौड़ा आर्थिक अपराधी से एक ऐसा व्‍यक्‍ति अभिप्रेत है, जिसके विरूद्ध किसी सूचीबद्ध अपराध के संबंध में गिरफ्तारी का वारंट जारी किया जा चुका है और जिसने आपराधिक कार्यवाही से बचने के लिए भारत छोड़ दिया है अथवा विदेश में रह रहा है और आपराधिक अभियोजन का समाना करने के लिए भारत लौटने से इंकार कर रहा है। आर्थिक अपराधों की सूची को इस विधेयक की तालिका में अंतर्विष्‍ट किया गया है। इसके अलावा, यह सुनिश्‍चित करने के लिए कि ऐसे मामले में न्‍यायालयों पर कार्य का ज्‍यादा भार न पड़े, केवल उन्‍हीं मामलों की इस विधेयक की परिसीमा में लाया गया है, जहां ऐसे अपराधों में कुल 100 करोड़ रुपए या अधिक की राशि अन्‍तर्विष्‍ट हो।

● पृष्‍ठभूमि: आर्थिक अपराधियों के ऐसे अनेक मामले घटित हुए हैं जहां भारतीय न्‍यायालयों को न्‍याय क्षेत्र से भागने, आपराधिक मामलों के शुरूआत की प्रत्‍याशा अथवा मामले अथवा आपराधिक कार्यवाही को लंबित करने के दौरान आर्थक अपराधी भाग निकला है। भारतीय न्‍यायालयों के ऐसे अपराधियों की अनुपस्‍थिति का कारण अनेक विषय परिस्‍थितियां उत्‍पन्‍न हुई हो, जैसे प्रथमत: इससे आपराधिक मामलों में जांच रूक सी जाती है, दूसरे, इससे न्‍यायालयों का मूल्‍यवान समय बर्बाद होता है, तीसरे, इससे भारत में कानून के राज का अवमूल्‍यन होता है। इसके अलावा, आर्थिक अपराध के अधिकांश ऐसे मामलों में बैंक ऋणों की गैर-अदायगी शामिल होती है, जिससे भारत के बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय स्‍थिति बदतर हो जाती है। इस समस्‍या की गंभीरता से निपटने के लिए कानून के वर्तमान सिविल और आपराधिक प्रावधान पूर्णत: पर्याप्‍त नहीं हैं। अतएव, ऐसी कार्यवाहियों की रोकथाम सुनश्‍चित करने के लिए प्रभावी, तीव्रतम और संवैधानिक दृष्‍टि में मान्‍य प्रावधान किया जाना आवश्‍यक समझा गया है। यहां उल्‍लेखनीय है कि भ्रष्‍टाचार से संबंधित मामलों में गैर-दोषसिद्धि-आधारित संपत्‍ति के जब्‍त करने की प्रवृत्‍ति अपराध के प्रति यूनाइटेड नेशन्‍स कन्‍वेंशन (भारत द्वारा 2011 में मान्‍य) से अनुसमर्थित है। विधेयक में इसी सिद्धांत को अंगीकार किया गया है। उपरोक्‍त संदर्भ के मद्देनजर, सरकार द्वारा बजट 2017-18 में यह घोषणा की गई थी कि सरकार विधायी संशोधन लाने अथवा जब तक ऐसे अपराधी समुचित विधि न्‍यायालय मंच के समक्ष समर्पण नहीं करता, ऐसे अपराधियों की संपत्‍ति को जब्‍त करने के लिए नया कानून तक लाया जाएगा।


(●) मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय वित्‍तीय सूचना प्राधिकरण की स्‍थापना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्‍ट्रीय वित्‍तीय सूचना प्राधिकरण (एनएफआरए) की स्‍थापना और एनएफआरए के लिए अध्‍यक्ष के एक पद, पूर्णकालिक सदस्‍यों के तीन पदों व एनएफआरए के लिए सचिव का एक पद के प्रस्‍ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

इस निर्णय का उद्देश्‍य लेखापरीक्षा के कार्य, जोकि कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा लाए गए परिवर्तनों में से एक है, इसके लिए एक स्‍वतंत्र विनियामक के रूप में एनएफआरए की स्‍थापना करना है। वित्‍त संबंधी स्‍थायी समिति की विशिष्‍ट सिफारिशों (उसकी 21वीं रिपोर्ट) में यह प्रावधान करना शामिल था।

● प्रभाव: इस निर्णय से विदेशी/देश में निवेश में सुधार, आर्थिक विकास में वृद्धि, अंतर्राष्‍ट्रीय पद्धतियों के अनुरूप कारोबार के वैश्‍वीकरण को अनुसमर्थन तथा लेखापरीक्षा व्‍यवसाय के सतत विकास में सहायता मिलेगी।

● न्‍याय क्षेत्र: अधिनियम की धारा 132 के अंतर्गत सनदी लेखाकारों और उनकी फर्मों की जांच करने के लिए एनएफआरए का कार्यक्षेत्र सूचीबद्ध कंपनियों तथा वृहद गैर-सूचीबद्ध कंपनियों को कार्य क्षेत्र में लाना है, जोकि नियमों में निर्धारित अपेक्षा के अयोग्‍य है। केन्‍द्र सरकार ऐसे अन्‍य निकायों की जांच के लिए भी कह सकती है, जहां सार्वजनिक हित अंतर्विष्‍ट हो।

चाटर्ड अकांटेंट अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के अनुसार आईसीएआई की व्‍याप्‍त विनियामक भूमिका सामान्‍य रूप से उनके सदस्‍यों तथा प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों से संबंधित लेखापरीक्षा के संबंध में विशेष रूप से जारी रहेंगी और थ्रेशहोल्‍ड सीमा से नीचे सार्वजनिक गैर-सूचीबद्ध कंपनियों को नियमों में अधिसूचित किया जाएगा।

गुणवत्‍ता पुनरीक्षा मंडल (क्‍यूआरबी) की प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों, निर्धारित थ्रेडहोल्‍ड से कम सार्वजिनक गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के संबंध में गुणवत्‍ता लेखापरीक्षा भी जारी रहने के साथ-साथ उन कंपनियों की लेखापरीक्षा के संबंध में भी एनएफआरए द्वारा क्‍यूआरबी को यह कार्य सौंपा जा सकता है।

● पृष्‍ठभूमि: लेखापरीक्षा घोटालों के दृष्‍टिगत विश्‍व में विभिन्‍न कार्य क्षेत्रों में महसूस की गई जरूरत के मद्देनजर एनएफआरए की स्‍थापना की जरूरत नहीं है, जिसका उद्देश्‍य इसका विनियमन कर रहे तंत्र से इतर स्‍वतंत्र विनियामकों को स्‍थापित करना और लेखापरीक्षा मानकों को लागू करना, लेखापरीक्षा की गुणवत्‍ता व लेखापरीक्षा फर्मों की स्‍वतंत्रता को सुदृढ़ बनाना है। अतएव, कंपनियों की वित्‍तीय स्‍थिति के प्रकटीकरण में निवेशक व सार्वजनिक तंत्र का विश्‍वास बढ़ाना है।

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