खबरें विशेष : मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी/स्वीकृति



नई दिल्ली, 28 फरवरी 2018, इंडिया इनसाइड न्यूज़।

(●) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और जॉर्डन के बीच श्रम शक्ति के क्षेत्र में सहयोग पर हस्ताक्षर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और जॉर्डन के बीच श्रम शक्ति के क्षेत्र में सहयोग के बारे में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच ठेके के रोजगार प्रशासन में सर्वोत्तम प्रयासों को बढ़ावा देना, भर्ती प्रक्रिया में नवीनतम सुधार को प्रतिबिंबित करना और जॉर्डन में भारतीय मजदूरों के संरक्षण और कल्याण को बढ़ावा देना है। भारतीय श्रम शक्ति की भर्ती के लिए ऑनलाइन पोर्टल के इस्‍तेमाल में दोनों पक्षों के बीच सहयोग से और अधिक पारदर्शिता लाई जा सकेगी और भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी।

यह समझौता ज्ञापन पाँच वर्ष के लिए वैध होगा, जिसमें संयुक्त तकनीकी समिति के माध्यम से स्वचालित नवीनीकरण और एक निगरानी तंत्र का प्रावधान सम्मिलित किया गया है।


(●) केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने सीमा शुल्‍क से जुड़े मुद्दों में सहयोग और आपसी प्रशासनिक सहायता पर भारत और जॉर्डन के बीच समझौते को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने सीमा शुल्‍क से जुड़े मुद्दों में सहयोग और आपसी प्रशासनिक सहायता पर भारत और जॉर्डन के बीच समझौते को मंजूरी दे दी है।

समझौते से सीमा शुल्‍क सम्‍बन्‍धी अपराधों की रोकथाम और उनकी जांच के लिए उपयुक्‍त सूचना उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। समझौते से दोनों देशों के बीच व्‍यापार बढ़ने और व्‍यापार की जाने वाली वस्‍तुओं को तेजी से मंजूरी मिलने की संभावना है।

● पृष्‍ठभूमि:

यह समझौता दोनों देशों के सीमा शुल्‍क अधिकारियों के बीच सूचना और समझ-बूझ को साझा करने के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करेगा और सीमा शुल्‍क कानूनों को उचित तरीके से लागू करने, सीमा शुल्‍क संबंधी अपराधों की रोकथाम और उनकी जांच तथा वैध व्‍यापार को सरल बनाने में मदद करेगा। समझौते के मसौदे को दोनों सीमा शुल्‍क प्रशासनों की सहमति से अंतिम रूप दे दिया गया है। समझौते का मसौदा भारतीय सीमा शुल्‍क की चिन्‍ताओं और जरूरतों, खासतौर से सीमा शुल्‍क मूल्‍य के औचित्‍य, तटकर वर्गीकरण और दोनों देशों के बीच व्‍यापार की जानेवाली वस्‍तुओं के उद्भव के बारे में सूचनाओं के आदान प्रदान के क्षेत्र को देखेगा।


(●) केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने सेवाओं में चैम्पियन क्षेत्रों के लिए कार्य योजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने चैम्पियन क्षेत्रों के संवर्धन और उनकी सामर्थ्‍य को समझने के उद्देश्‍य से 12 निर्धारित चैम्पियन सेवा श्रेत्रों पर विशेष रूप से ध्‍यान देने के लिए वाणिज्‍य विभाग के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (आईटी और आईटीईएस), पर्यटन और आतिथ्‍य सेवाएं, चिकित्‍सा मूल्‍यांकन भ्रमण, परिवहन और लॉजिस्टिक सेवाएं, लेखा और वित्‍त सेवाएं, दृश्‍य श्रव्‍य सेवाएं, कानूनी सेवाएं, संचार सेवाएं, निर्माण और उससे संबंधित इंजीनियरिंग सेवाएं, पर्यावरण सेवाएं, वित्‍तीय सेवाएं और शिक्षा सेवाएं शामिल हैं।

मंत्रिमंडल ने इन क्षेत्रों से संबद्ध मंत्रालयों/विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि निर्धारित चैम्पियन सेवा क्षेत्रों के लिए कार्य योजनाओं को अंतिम रूप देने और उनके कार्यान्‍वयन के लिए उपलब्‍ध क्षेत्रीय मसौदा योजनाओं का इस्‍तेमाल करें। संबद्ध मंत्रालयों/विभागों को कार्य योजना को अंतिम रूप देना होगा और मंत्रिमंडल सचिव के अंतर्गत सचिवों की समिति की सम्‍पूर्ण देखरेख में कार्यान्‍वयन की निगरानी के लिए एक निगरानी तंत्र के साथ कार्यान्‍वयन क्रम विकास होगा।

चैम्पियन क्षेत्रों की क्षेत्रीय कार्य योजनाओं की पहलों को सहायता देने के लिए 5000 करोड़ रुपये का एक समर्पित कोष स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है।

● प्रभाव: इस पहल से केन्द्रित और निगरानी की गई कार्य योजनाओं के कार्यान्‍वयन के जरिए भारत के सेवा क्षेत्रों की प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता बढ़ेगी, जिससे जीडीपी दर बढ़ेगी, अधिक नौकरियां सृजित होगी और वैश्विक बाजारों के लिए निर्यात बढ़ेगा।

● रोजगार सृजन की संभावना: भारत के सेवा क्षेत्र में रोजगार की काफी संभावना है। इस प्रस्‍ताव से केन्द्रित और निगरानी की गई कार्य योजनाओं के कार्यान्‍वयन के जरिए भारत के सेवा क्षेत्रों की प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता बढ़ेगी,जिससे जीडीपी दर बढ़ेगी, अधिक नौकरियां सृजित होगी और वैश्विक बाजारों के लिए निर्यात बढ़ेगा।

● वित्‍तीय सम्‍बन्‍ध: आवश्‍यक बुनियादी ढांचे के सृजन, वित्‍तीय प्रोत्‍साहनों आदि जैसे तत्‍वों से जुड़े विभिन्‍न क्षेत्रीय कार्य योजनाओं के कुछ भाग, जिन्‍हें तैयार किया जाना है, उनका वित्‍तीय सम्‍बन्‍ध हो सकता है। इन विवरणों को संबद्ध विभागों द्वारा तैयार कार्य योजनाओं के अंतर्गत विस्‍तार से तैयार किया जाएगा और उचित मंजूरी के साथ अंतिम रूप दिया जाएगा। चैम्पियन क्षेत्रों की क्षेत्रीय कार्य योजनाओं की पहलों को सहायता देने के लिए 5000 करोड़ रुपये का एक समर्पित कोष स्‍थापित करने का प्रस्‍ताव है।

● लाभ: चूंकि सेवा क्षेत्र भारत के जीडीपी, निर्यात और रोजगार सृजन, बड़ी हुई उत्‍पादकता में महत्‍वपूर्ण योगदान देते हैं। चैम्पियन सेवा क्षेत्रों की प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता से भारत से विभिन्‍न सेवाओं का निर्यात बढ़ेगा। सन्निहित सेवाएं वस्‍तुओं का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा हैं। अत: प्रतिस्‍पर्धात्‍मक सेवा क्षेत्र निर्माण क्षेत्र की प्रतिस्‍पर्धात्‍मकता से जुड़ जाएगा।

वर्ष 2022 में भारत अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएगा। संबद्ध मंत्रालयों/विभागों द्वारा तैयार और कार्यान्‍वित कार्य योजनाओं से वर्ष 2022 में इन निर्धारित चैम्पियन क्षेत्रों में से प्रत्‍येक के लिए एक संकल्‍पना विकसित हो सकेगी और इस संकल्‍पना को हासिल करने के लिए उपयुक्‍त कदम उठाने की आवश्‍कता है।

भारत के सेवा क्षेत्र की हिस्‍सेदारी वैश्विक सेवाओं के निर्यात में 2015 में 3.3 प्रतिशत थी, जबकि 2014 में यह 3.1 प्रतिशत थी। इस पहल के आधार पर 2022 के लिए 4.2 प्रतिशत का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है।

सकल योगित मूल्‍य (जीवीए) में सेवाओं की हिस्‍सेदारी 2015-16 (निर्माण सेवाओं सहित 61 प्रतिशत) में भारत के लिए करीब 53 प्रतिशत थी। जीवीए में सेवाओं की हिस्‍सेदारी 60 प्रतिशत (निर्माण सेवाओं सहित 67 प्रतिशत) हासिल करने का लक्ष्‍य वर्ष 2022 के लिए रखा गया है।

● पृष्‍ठभूमि: सचिवों के समूह ने प्रधानमंत्री को भेजी गई अपनी सिफारिशों में 10 चैम्पियन क्षेत्र निर्धारित किए। इनमें सात निर्माण संबंधी क्षेत्र और तीन सेवा क्षेत्र हैं। चैम्पियन क्षेत्रों के संवर्धन और उनकी सामर्थ्‍य को हासिल करने के लिए यह फैसला किया गया कि ‘मेक इन इंडिया’ का प्रमुख विभाग –औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी) निर्माण में चैम्यिन क्षेत्रों की पहल में प्रमुख भूमिका निभाएगा और वाणिज्‍य विभाग सेवाओं में चैम्पियन क्षेत्रों के लिए प्रस्‍तावित पहल के साथ समन्‍वय कायम करेगा। इसके बाद वाणिज्‍य विभाग साझेदारों के साथ विस्‍तृत विचार-विमर्श के साथ अनेक सेवा क्षेत्रों के लिए आरंभिक क्षेत्रीय सुधार योजनाओं का मसौदा तैयार करने और इसके बाद कार्य योजना तैयार करने के लिए सहयोग करेगा।


(●) कैबिनेट ने आर्थिक एवं व्यापार सहयोग पर भारत और वियतनाम के बीच एमओयू को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आर्थिक एवं व्यापार सहयोग पर भारत और वियतनाम के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने को मंजूरी दे दी है।

इस एमओयू के तहत भारत एवं वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार तथा आर्थिक सहयोग और ज्यादा बढ़ जाएगा।


(●) केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और जॉर्डन के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और जॉर्डन के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

समझौता ज्ञापन में सहयोग के निम्‍नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

●सार्वभौमिक स्‍वास्‍थ्‍य कवरेज (यूएचसी);

●स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था सुशासन;
स्‍वास्‍थ्‍य में सेवा और सूचना प्रौद्योगिकी;

●स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान;

●राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य सांख्यिकी;

●स्‍वास्‍थ्‍य वित्‍त और स्‍वास्‍थ्‍य अर्थव्‍यवस्‍था;
गंभीर बीमारी पर नियंत्रण;
तम्‍बाकू नियंत्रण;

●तपेदिक का निदान, उपचार और औषधि;

●फार्मास्‍यूटिकल्‍स और चिकित्‍सा उपकरणों का नियंत्रण; और

●सहयोग का कोई अन्‍य क्षेत्र जिसे आपस में तय किया गया हो

सहयोग के विवरणों के अधिक विस्‍तार और समझौता ज्ञापन के कार्यान्‍वयन का निरीक्षण करने के लिए एक कार्य दल की स्‍थापना की जाएगी।


(●) केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और मेसीडोनिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और मेसीडोनिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर को मंजूरी दे दी है।

समझौता ज्ञापन में सहयोग के निम्‍नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:-

●स्‍वास्‍थ्‍य में क्षमता निर्माण और मानव संसाधन में अल्‍पावधि प्रशिक्षण

●डॉक्‍टरों, अधिकारियों, स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र से जुड़े अन्‍य पेशेवरों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और प्रशिक्षण

■ मानव संसाधन विकास में सहायता और स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल सुविधाओं की स्‍थापना

●सहयोग का कोई अन्‍य क्षेत्र जिसे आपस में तय किया गया हो

सहयोग के विवरणों के अधिक विस्‍तार और समझौता ज्ञापन के कार्यान्‍वयन का निरीक्षण करने के लिए एक कार्य दल की स्‍थापना की जाएगी।


(●) मंत्रिमडल ने व्‍यक्तियों की तस्‍करी (रोकथाम, सुरक्षा और पुनर्वास) विधेयक, 2018 को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने व्‍यक्तियों की तस्‍करी (रोकथाम, सुरक्षा और पुनर्वास) विधेयक, 2018 को लोकसभा में पेश करने की स्‍वीकृति दे दी है।

इस विधेयक की निम्‍नलिखित प्रमुख विशेषताएं हैं:-

1. विधेयक रोकथाम, बचाव तथा पुनर्वास की दृष्टि से तस्‍करी समस्‍या का समाधान प्रदान करता है।

2. तस्‍करी के गंभीर रूपों में जबर्दस्‍ती मजदूरी, भीख मांगना, समय से पहले यौन परिपक्‍वता के लिए किसी व्‍यक्ति को रासायनिक पदार्थ या हारमोन देना, विवाह या विवाह के छल के अंतर्गत या विवाह के बाद महिलाओं तथा बच्‍चों की तस्‍करी शामिल है।

3. व्‍यक्तियों की तस्‍करी को बढ़ावा देने और तस्‍करी में सहायता के लिए जाली प्रमाण--पत्र बनाने, छापने, जारी करने या बिना जारी किए बांटने, पंजीकरण या सरकारी आवश्‍यकताओं के परिपालन के साक्ष्‍य के रूप में स्‍टीकर और सरकारी एजेंसियों से मंजूरी और आवश्‍यक दस्‍तावेज प्राप्‍त करने के लिए जालसाजी करने वाले व्‍यक्ति के लिए सजा का प्रावधान है।

4. पीड़ितों/गवाहों तथा शिकायत करने वालों की पहचान प्रकट नहीं करके गोपनीयता रखना। पीड़ित की गोपनीयता उनके बयान वीडियो कांन्‍फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज करके बरती जाती है। (इससे सीमा पार और अन्‍तर राज्‍य अपराधों से निटपने में मदद मिलती है)

5. समयबद्ध अदालती सुनवाई और पीडि़तों को वापस भेजना-संज्ञान की तिथि से एक वर्ष की अवधि के अन्‍दर।

6. बचाये गये लोगों की त्‍वरित सुरक्षा और उनका पुनर्वास। पीडित शारीरिक, मानसिक आघात से निपटने के लिए पीडि़त 30 दिनों के अन्‍दर अंतरिम सहायता का हकदार है और अभियोगपत्र दाखिल करने की तिथि से 60 दिनों के अन्‍दर उचित राहत।

7. पीड़ित का पुनर्वास अभियुक्‍त के विरूद्ध आप‍राधिक कार्रवाई शुरू होने या मुकदमें के फैसले पर निर्भर नहीं करता।

8. पहली बार पुनर्वास कोष बनाया गया। इसका उपयोग पीड़ित के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक देखभाल के लिए होगा। इसमें उसकी शिक्षा, कौशल विकास, स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल, मनोवैज्ञानिक समर्थन, कानूनी सहायता और सुरक्षित निवास आदि शामिल हैं।

9. मुकदमों की तेजी से सुनवाई के लिए प्रत्‍येक जिले में विशेष अदालत।

10. यह विधेयक जिला, राज्‍य तथा केन्‍द्र स्‍तर पर समर्पित संस्‍थागत ढांचा बनाता है। यह तस्‍करी की रोकथाम, सुरक्षा जांच और पुनर्वास कार्य के लिए उत्‍तरदायी होगा। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्‍ट्रीय स्‍तर पर तस्‍करी विरोधी ब्‍यूरो के कार्य करेगा।

11. सजा न्‍यूनतम 10 वर्ष सश्रम कारावास से आजीवन कारावास है और एक लाख रुपये से कम का दंड नहीं है।

12. राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर संगठित गठजोड़ को तोड़ने के लिए संपत्ति की कुर्की जब्‍ती तथा अपराध से प्राप्‍त धन को जब्‍त करने का प्रावधान है।

13. यह विधेयक अपराध के पारदेशीय स्‍वभाव से व्‍यापक रूप से निपटता है। राष्‍ट्रीय तस्‍करी विरोधी ब्‍यूरो विदेशी देशों और अंतरराष्‍ट्रीय संगठनों के अधिकारियों के साथ अंतरराष्‍ट्रीय तालमेल करेगा, जांच में अंतरराष्‍ट्रीय सहायता देगा,साक्ष्‍यों और सामग्रियों, गवाहों के अंतरराज्‍य, सीमापार स्‍थानातंरण में सहायता देगा और न्‍यायिक कार्यवाहियों में अंतरराज्‍य और अंतरराष्‍ट्रीय वीडियो कांफ्रेंसिंग में सहायता देगा।

●पृष्‍ठभूमि: मानव तस्‍करी बुनियादी मानवाधिकारों का उल्‍लंघन करने वाला तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। इस अपराध से निपटने के लिए अभी तक कोई विशेष कानून नहीं है। इसको देखते हुए व्‍यक्तियों की तस्‍करी (रोकथाम, सुरक्षा तथा पुनर्वास) विधेयक, 2018 तैयार किया गया है। यह विधेयक अत्‍यंत कमजोर व्‍यक्तियों, विशेषकर महिला एवं बच्‍चों को, प्रभावित करने वाले घृणित और अदृश्‍य अपराधों से निपटने का समाधान प्रदान करता है।

नया कानून भारत की तस्‍करी से मुकाबला करने में दक्षिण एशियाई देशों का नेतृत्‍वकर्ता बनाएगा। तस्‍करी एक वैश्विक चिंता है और इससे अनेक दक्षिण एशियाई देश प्रभावित हैं। इन देशों में भारत व्‍यापक विधेयक तैयार करने वाला अग्रणी देश है। यूएनओडीसी तथा सार्क देश भारत की ओर नेतृत्‍व के लिए देख रहे हैं। यह विधेयक मंत्रालयों, विभागों, राज्‍य सरकारों, स्‍वयंसेवी संगठनों तथा इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से परामर्श करके तैयार किया गया है। इस विधेयक में महिला और बाल विकास मंत्रालय को प्राप्‍त सैंकड़ों याचिकाओं में दिए गये सुझावों को बड़ी संख्‍या में शामिल किया गया है। 60 से अधिक स्‍वयंसेवी संगठनों सहित विभिन्‍न हितधारकों के साथ क्षेत्रीय परामर्श दिल्‍ली, कोलकाता, चेन्‍नई और मुंबई में किया गया। विधेयक का मंत्रियों के समूह ने भी अध्‍ययन किया।


(●) मंत्रिमंडल ने संसद सदस्‍यों के लिए आवास और टेलीफोन सेवाएं नियम, निर्वाचन क्षेत्र भत्‍ता नियम तथा कार्यालय व्‍यय भत्‍ता नियम में संशोधनों को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल (i) ने आवास और टेलीफोन सुविधाएं (संसद सदस्‍य) नियम, 1956 (ii) संसद सदस्‍य (निर्वाचन क्षेत्र भत्‍ता) नियम, 1986 और (iii) संसद सदस्‍य (कार्यालय व्‍यय भत्‍ता) नियम, 1988 में संशोधन को स्‍वीकृति दे दी है। विवरण इस प्रकार हैं:-

(i) संसद सदस्‍यों के आवास पर फर्नीचर की आर्थिक सीमा को 75,000 हजार रुपए (60,000 रुपए टिकाऊ फर्नीचर के लिए और 15,000 रुपए गैर-टिकाऊ फर्नीचर के लिए) से बढ़ाकर दिनांक 01.04.2018 से 1,00,000 रुपए (80,000 रुपए टिकाऊ फर्नीचर के लिए और 20,000 रुपए गैर-टिकाऊ फर्नीचर के लिए) करना है, जिसमें आयकर अधिनियम 1961 की धारा 48 के स्‍पष्‍टीकरण के खण्‍ड (v) के अंतर्गत उपबंधित लागत मुद्रास्‍फीति सूचकांक के आधार पर दिनांक 01.04.2023 से प्रत्‍येक पांच वर्ष में वृद्धि की जायेगी।

(ii) संसद सदस्‍यों को लैंडलाइन कनेक्‍शन पर प्रतिवर्ष छोड़ी गई 10,000 कॉल यूनिटों के बदले अगस्‍त, 2006 से ब्रॉडबैंड इंटरनेट सुविधा उपलब्‍ध कराना, संसद सदस्‍यों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा पहले ही अगस्‍त, 2006 से प्रदान की जा रही है और इसके नियमन के लिए आवास और टेलीफोन सुविधाएं (संसद सदस्‍य नियम, 1956 में एक नये नियम को अंत:-स्‍थापित करके पूर्वव्‍यापी प्रभाव से संशोधन के माध्‍यम से उसे शामिल किया जाएगा।

(iii) हाइस्‍पीड इंटरनेट कनेक्‍शन (एफटीटीएच कनेक्‍शन) उपलब्‍ध कराने के लिए सदस्‍यों के आवासीय क्षेत्र में दिनांक 01.09.2015 से 31.12.2016 तक 1700 रुपए तथा दिनांक 01.01.2017 के बाद से 2200 रुपए की मासिक किराया योजना वाला वाईफाई जोन स्‍थापित करना। यह सुविधा वर्तमान ब्रॉडबैंड सुविधा के अतिरिक्‍त होगी। इस प्रयोजन के लिए आवास और टेलीफोन सुविधाएं (संसद सदस्‍य) नियम, 1956 में तीन नए उप-नियम शामिल किए जाएंगे।

(iv) ऊंची मुद्रास्‍फीति दर और वर्तमान आर्थिक स्‍थिति पर विचार करते हुए संसद सदस्‍यों के निर्वाचन क्षेत्र भत्‍ते को 45,000 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 75,000 रुपए प्रतिमाह करना है जिसमें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 48 के स्‍पष्‍टीकरण के खंड V के अंतर्गत उपबंधित लागत मुद्रास्‍फीति सूचकांक के आधार पर दिनांक 01.04.2023 से प्रत्‍येक पांच वर्ष में वृद्धि की जाएगी।

(v) संसद सदस्‍यों के कार्यालय व्‍यय भत्‍ते को 45,000 रुपए मासिक (15,000 रुपए लेखन सामग्री और डाक व्‍यय के लिए तथा 30,000 रुपए सचिवालय सहायता प्राप्‍त करने के लिए संसद सदस्‍य द्वारा नियोजित एक कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षित व्‍यक्‍ति के लिए) से बढ़ाकर दिनांक 01.04.2018 से 60,000 रुपए मासिक (20,000 रुपए लेखन सामग्री और डाक व्‍यय के लिए तथा 40,000 रुपए सचिवालय सहायता प्राप्‍त करने के लिए संसद सदस्‍य द्वारा नियोजित एक कम्‍प्‍यूटर प्रशिक्षित व्‍यक्‍ति के लिए) करना और इसमें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 48 के स्‍पष्‍टीकरण के खण्‍ड V के अंतर्गत उपबंधित लागत मुद्रास्‍फीति सूचकांक के आधार पर दिनांक 01.04.2023 से प्रत्‍येक पांच वर्ष में वृद्धि की जाएगी।

मंत्रिमंडल के निर्णय की सूचना संसद सदस्‍यों के वेतन और भत्‍तों संबंधी संयुक्‍त समिति को संबंधित नियमों में संशोधन करने के लिए दी जाएगी जिसे राज्‍य सभा के सभापति और लोक सभा के अध्‍यक्ष से अनुमोदित कराया जाएगा और सरकारी राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा।

मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के अतिरिक्‍त, वित्‍तीय निहितार्थ में लगभग 39,22,72,800 रुपए (उन्‍तालीस करेाड़ बाइस लाख बहत्‍तर हजार आठ सौ रुपए) आवर्ती व्‍यय और लगभग 6,64,05,400 रुपए (छह करोड़ चौसठ लाख पांच हजार चार सौ रुपए) अनावर्ती व्‍यय का होगा।

●पृष्‍ठभूमि: संविधान के अनुच्‍छेद 106 में प्रावधान है कि संसद के प्रत्‍येक सदन के सदस्‍य ऐसे वेतन और भत्‍ते प्राप्‍त करने के हकदार होंगे जिन्‍हें संसद समय-समय पर विधि द्वारा निर्धारित करेगी। परिणामस्‍वरूप, वर्ष 1954 में संसद सदस्‍य वेतन, भत्‍ता और पेंशन अधिनियम (एमएसए अधिनियम) (1954 का अधिनियम 30) अधिनियमित किया गया था। इनमें से अधिनियम की धारा 9 इस अधिनियम के अंतर्गत नियम बनाने के उद्देश्‍य से संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्‍त समिति के गठन का प्रावधान करती है। संयुक्‍त समिति को केन्‍द्र सरकार के परामर्श से उस धारा में दिए गए विषयों में से सभी अथवा किसी विषय पर नियम बनाने की शक्‍तियां प्राप्‍त हैं।


(●) मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) 12वीं योजना से आगे तीन वर्षों के लिए 2017-18 से 2019-20 तक जारी रखने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने प्रधानमंत्री के रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) को 5,500 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ 12वीं योजना से आगे तीन वर्षों के लिए 2017-18 से 2019-20 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है।

इस योजना से तीन वित्‍तीय वर्षों में 15 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

खादी तथा ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) राष्‍ट्रीय स्‍तर पर नोडल क्रियान्‍वयन एजेंसी है। राज्‍य/जिला-स्‍तर पर, केवीआईसी के राज्‍य कार्यालय, खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (केवीआईबी) तथा जिला उद्योग केन्‍द्र (डीआईसी) क्रियान्‍वयन एजेंसी होंगे। पीएमईजीपी – ईपोर्टल पर आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। निम्‍नलिखित तथ्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए लक्ष्‍य तय किए गए हैं:-

(i) राज्‍य के पिछड़ेपन की सीमा

(ii) बेरोजगारी की सीमा

(iii) पिछले वर्ष के लक्ष्‍यों को पूरा करने की सीमा

(iv) राज्‍य/केन्‍द्रशासित क्षेत्र की आबादी तथा

(v) परम्‍परागत कौशल और कच्‍चे माल की उपलब्‍धता

समावेशी विकास हासिल करने के लिए देश के सभी जिलों को 75 परियोजना/जिला का न्‍यूनतम लक्ष्‍य दिया गया है। सब्‍सिडी की उँची दर (25 प्रतिशत से 35 प्रतिशत) महिलाओं अजा/जजा, अन्‍य पिछड़े वर्ग, दिव्‍यांग, ग्रामीण क्षेत्रों में एनईआर आवेदकों के लिए लागू होगी।

आवेदन प्रवाह की पूरी प्रक्रिया तथा आवेदन प्राप्‍ति से धन प्रवाह, प्रोसेसिंग, बैंकों द्वारा मंजूरी और मियादी जमा प्राप्‍ति (टीडीआर) बनने तक मार्जिन मनी सब्‍सिडी का अंतरण ऑनलाइन कर दिया गया है। https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/prneqphome/index.jsp. पोर्टल पर सम्‍पर्क किया जा सकता है

●पृष्‍ठभूमि: पीएमईजीपी 2008-09 से एमएसएमई मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा ऋण से जुड़ा प्रमुख सब्‍सिडी कार्यक्रम है। इस योजना का उद्देश्‍य पारम्‍परिक दस्‍तकारों तथा गामीण और शहरी बेरोजगार युवाओं की सहायता करके गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्‍म उद्यम स्‍थापित करके स्‍वरोजगार के अवसर पैदा करना है। योजना के प्रारंभ से 31.01.2018 तक अनुमानित 37.98 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करते हुए 9564.02 करोड़ रुपए की मार्जिन मनी सब्‍सिडी के साथ कुल 4.55 लाख सूक्ष्‍म उद्यमों को मदद दी गई है।

योजना में निम्‍नलिखित संशोधन/सुधार किए गए हैं:-

वर्तमान और बेहतर प्रदर्शन करनेवाली पीएमईजीपी इकाइयों को उन्‍नयन के लिए 15 प्रतिशत की सब्‍सिडी के साथ एक करोड़ रुपए तक का दूसरा ऋण

पीएमईजीपी में क्‍वायर उद्यमी योजना (सीयूवाई) का विलय

समवर्ती निगरानी और मूल्‍यांकन पद्धति लागू करना

आधार और पेन कार्ड अनिवार्य

इकाइयों का भौगोलिक संकेत

होटलों/ढाबों में मांसाहारी भोजन परोसने/बेचने तथा कृषि से अलग/कृषि से जुड़ी गतिविधियों को अनुमति देने के लिए पीएमईजीपी के अंतर्गत नकारात्‍मक सूची में संशोधन

केवीआईसी/केवीआईवी/डीआईसी के लिए 30:30:40 का अनुपात निस्‍तारण

मैन्‍युफैक्‍चरिंग इकाइयों के लिए परियोजना लागत के 40 प्रतिशत की कार्यशील पूंजी की सीमा तथा सेवा/व्‍यापार क्षेत्र के लिए परियोजना लागत की 60 प्रतिशत सीमा।


(●) मंत्रिमंडल ने नेफेड द्वारा मूल्‍य समर्थन योजना के अन्‍तर्गत न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर दालों और तिलहनों की खरीद के लिए सरकारी गारंटी 9,500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 19,000 हजार करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने राष्‍ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) द्वारा न्‍यूनतम समर्थन योजना के अंतर्गत दालों और तिलहनों की खरीद के लिए तथा छोटे किसानों के कृषि व्‍यवसाय कंसोर्टियम को उसकी वर्तमान देनदारी पूरी करने और मौजूदा दावों को निपटाने के लिए 45 करेाड़ रुपए देने के लिए ऋण देने वाले बैंक को सरकारी गारंटी की सीमा सीमा 9,500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 19,000 करोड़ करने के सरकारी गांरटी के नियमन और विस्‍तार को मंजूरी दे दी है। यह सरकारी गारंटी भारत सरकार द्वारा 5 वर्षों की अवधि के लिए यानी 2021-22 तक दी गई है और इसमें एक प्रतिशत का सरकारी गारंटी शुल्‍क माफ किया गया है।

भारत सरकार द्वारा अधिसूचित न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से दालों और तिलहनों के बाजार मूल्‍य कम होने के कारण सरकारी गारंटी प्रावधान से दाल और तिलहान उपजाने वाले किसानों को तेज आवक अवधि के दौरान मजबूरन बिक्री करने से रोकने में मदद मिलेगी, अधिक निवेश और उत्‍पादन को प्रोत्‍साहित करने के उद्देश्‍य से लाभकारी मूल्य प्रदान किया जा सकेगा और कम बिचौलिया लागत के साथ उचित दर पर आपूर्ति उपलब्ध कराकर उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जा सकेगी।


(●) कैबिनेट ने रॉक फॉस्फेट और एमओपी के खनन एवं परिष्करण तथा फॉस्फोरिक एसिड/डीएपी/एनपीके उर्वरकों के लिए जॉर्डन में एक उत्पादन इकाई लगाने हेतु भारत और जॉर्डन के बीच एमओयू को स्वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में शत-प्रतिशत उठाव के लिए एक दीर्घकालिक समझौते के साथ रॉक फॉस्फेट और एमओपी के खनन एवं परिष्करण तथा फॉस्फोरिक एसिड/डीएपी/एनपीके उर्वरकों के लिए जॉर्डन में एक उत्पादन इकाई लगाने हेतु भारत और जॉर्डन के बीच एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने को स्वीकृति दे दी है।

इस एमओयू से देश की जरूरतों की पूर्ति के लिए उचित मूल्यों पर कच्चे माल, मध्यवर्ती उत्पादों और तैयार पीएंडके उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

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